Thursday, February 28, 2008

बेथलेहम का तारा क्या था

यह कहा जाता है कि प्रभु ईसा के जन्म के समय आकाश में एक तारा निकला जिसने लोगों को ईसा मसीह के जन्म की सूचना दी और वहां पहुंचने की राह दिखायी। इसे देख के पूरब से तीन बुद्घिमान राजा (Magi) भी उनको भेंट देने, उनका आदर करने पहुंचे। इसे बेथलेहम का तारा (Star of Bethlehem), या जीज़स तारा (Jesus Star), या क्रिस्मस तारा (Christmas Star) भी कहा जाता है। यह एक दैविक घटना की तरह बतायी जाती है। इस तरह की दैविक घटनायें सारे धर्मो में है।

तीन बुद्घिमान राजा, प्रभू ईसा का सम्मान करते हुऐ।

इसी तारे के सम्बंध में शास्त्री ने एक चिट्ठी वह तारा क्या था नाम से लिखी। अतुल जी ने इस पर अपने विचार रखे,
'कृष्ण, क्राइस्ट, बुद्ध, महावीर आदि पथप्रदर्शकों के जन्म से विशेष घटनाएँ जुड़ी हैं। इन्हें संयोग भी कहा जा सकता है या चमत्कार भी कहा जा सकता है। इतने बरसों पहले हुई घटनाएँ आज शायद समझ के परे हो सकतीं हैं।'
संजय गुलाठी जी भी कुछ इसी तरह का विचार रखते हैं वे कहते हैं कि
'मगर खगोलीय घटनाएं दैव या दैविक संदेशों से बाहर नहीं।'
ज्ञान जी भी को भी कुछ इसी तरह का लगता है। वे कहते हैं,
'बहुत सम्भव है कि महान विभूति का आगमन खौगोलिक संयोग से जुड़ा होता हो। यह कथा हमें चमत्कृत तो करती ही है।'

मेरे विचार में, यह कोई दैविक घटना न होकर वैज्ञानिक तथ्य है जो उस समय पता न होने के कारण दैविक घटना के रूप में बतायी जाती है। यह भी हो सकता है कि वह तथ्य उस समय न होकर उसके आगे पीछे हुआ हो और उस व्यक्ति के महत्व दर्शाने के लिये उसे वहां जोड़ दिया गया हो।

हम महाभारत में अर्जुन के द्वारा जयद्रथ वध की कहानी को देखें। मेरे विचार से तो उस समय पूर्ण सूर्य ग्रहण लगा होगा। किसी के द्वारा सूर्य को ढ़क लेना समभ्व नहीं है। ज्ञान जी इस घटना के दो कारण बताते हैं।

क्या जयद्रथ के वध के समय इसी तरह से कुछ हुआ

यह दैविक घटना न होकर कोई विज्ञान से जुड़ी कोई बात रही होगी

मेरे विचार में, प्रभू ईसा के समय निकला तारा भी कोई दैविक घटना न होकर कोई विज्ञान से जुड़ी कोई बात रही होगी।

क्या था वह तारा था? क्या वह कोई उल्का meteoroid था, या छुद्र ग्रह (asteroid, minor planet, plantoid), या फिर पुच्छल तारा या धूमकेतु (comet), या कुछ ग्रहों का योग (combination of planets), या फिर कोई नोवा (nova), या कोई सुपरनोवा (supernova)?

संजय जी कहते हैं,
'वह कोई बड़ी उल्का हो सकती है, जो वायूमण्डल में प्रवेश कर गई थी।'
क्या संजय जी का अनुमान संभव है। इस पर चर्चा करने से पहले कुछ बातें उल्का और छुद्र ग्रहों की। यह कैसे बने, कैसे बनते हैं, कहां से आते हैं। यह अगली बार।

बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां
भूमिका।। प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में क्यों हुआ?।। क्रिस्मस को बड़ा दिन क्यों कहा जाता है।। बेथलेहम का तारा क्या था

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इस चिट्ठी के चित्र विकीपीडिया से है और ग्नू स्वतंत्र अनुमति पत्र की शर्तों के अन्तर्गत प्रकाशित किये गये हैं।

इस पोस्ट पर चर्चा है कि बेथलेहम का तारा क्या था। यह हिन्दी (देवनागरी लिपि) में है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

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सांकेतिक शब्द
Astronomy, Astronomy, bible, Bible, Star of Bethlehem, बेथलेहम का तारा
culture, Family, fiction, life, Life, Religion, जीवन शैली, धर्म, धर्म- अध्यात्म, विज्ञान, समाज, ज्ञान विज्ञान,

Sunday, February 24, 2008

सिगमंड फ्रायड संग्रहालय

वियाना दुनिया के संगीत की राजधानी है। यहां बड़े-बड़े संगीतकार हुए हैं, बीथोवियन, (Beethoven) मोजार्ट (Mozart)। वियाना में लोग इनके संग्रहालय या म्यूज़िक कॉंसर्ट देखने जाते हैं पर मैं यदि वियाना में कहीं जाना चाहता था तो उस जगह, जहां सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud) ने अपना जीवन व्यतीत किया।

सिगमंड फ्रायड का वियाना में घर जहां पर अब संग्रहालय है

मैं बर्लिन से तैयार होकर निकला था और कुछ नाश्ता हवाई जहाज में ही कर लिया था। हम लोग वियाना हवाई अड्डे से ही फ्रायड संग्रहालय देखने चले गये। वहां पर काम करती महिला हमें देख कर मुस्कराने लगी। मैंने पूछा, 'क्या आप लोग सिंगमड फ्रायड के संग्रहालय में सिस्टरों को देख कर मुस्करा रही हैं?' उसने हांमी भरी, पर मुस्कराने का कारण यह भी बताया कि हम तीन में से दो भारतीय हैं।

संग्रहालय के इंचार्ज ने बताया कि लगभग १०० लोग रोज देखनें आते हैं और इस संग्रहालय को बनाने में उसकी बेटी ने मदद की। फ्रायड १९३८ तक वियाना में रहे। वे यहूदी थे और जब १९३८ में वियाना जर्मनी का हिस्सा बन गया तो वे सपरिवार लंदन चले गये जहां १९३९ में उनकी मृत्यु हो गयी।

फ्रायड पढ़ाई के सारे विषयों में या तो बहुत अच्छे थे या उत्कर्ष - इससे कम नहीं


यहां पर फ्रायड के शिक्षा संबंधी सर्टिफिकेट भी देखे जा सकते हैं जो बताते हैं कि वे यह सारे विषयों में या तो बहुत अच्छे (very good) थे या उत्कर्ष (excellent) थे, इससे कम नहीं। संग्रहालय से कुछ यादगार सामाग्री (Souvenir) भी खरीद सकते हैं। मैंने उनकी एक फोटो खरीदी। मैंने उनके मरीजों का Waiting room वा उनका Consulting chamber देखा।

मरीजों के लिये वेटिंग रूम

फ्रायड आजकल प्रासंगिक नहीं माने जाते हैं पर जिस समय उन्होंने सेक्स के बारे में अपने सिद्घान्तो को प्रतिपादित किया उस समय उस विषय पर बात नहीं करना एक हिम्मत की बात थी। उन्होंने सामाजिक बंधनो से ऊपर उठकर इस विषय पर बात की। उनके पूरे संघर्ष को, जीवनी के रूप में, इर्विंग स्टोन (Irving Stone) ने बहुत अच्छी तरह से पैशन आफ माइंड (Passion of Mind) नामक पुस्तक में लिखा है। यह पुस्तक पढ़ने योग्य है। मैं कोशिश करूंगा कि इस पुस्तक की समीक्षा करूं।

अगली बार, वियाना के उस कॉन्वेंट बारे में जहां मैं ठहरा था

वियाना यात्रा
मैं पहुंच रहा हूं।। फिल्म - सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक सत्य कथा पर आधारित है।। टमटम पर, राजसी ठाट-बाट के साथ, वियाना।। सिगमंड फ्रायड संग्रहालय।।



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यह पोस्ट 'वियाना में सिगमंड फ्रायड संग्रहालय' घूमने के बारे में है। यह हिन्दी (देवनागरी लिपि) में है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

yah post 'vienna mein Sigmund Freud Museum' ke bare mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post is about 'Sigmund Freud Museum' in Vienna. It is in Hindi (Devnaagaree script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.


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Sigmund Freud Museum, सिगमंड फ्रायड संग्रहालय
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Thursday, February 21, 2008

समकक्ष कंप्यूटर के बीच फाइल शेयरिंग

आज चर्चा का विषय है: 'समकक्ष कंप्यूटर के बीच फाइल शेयरिंग'। इसे आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
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सुन सकते हैं। ऑडियो फाइल पर चटका लगायें फिर या तो डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले। इसके पहली की कड़ियां 'की-वर्ड और मॅटा टैग विवाद' को सुनने के लिये यहां चटका लगायें।

वेब तकनीक के विकसित हो जाने के बाद, अन्तरजाल पर एक फाइल दूसरी जगह बहुत आसानी से कॉपी की जा सकती है। कॉपी करने के बाद मूल और प्रतिलिपि में कोई अन्तर पता नहीं चल पाता है। इसे समकक्ष कंप्यूटर के बीच फाइल शेयरिंग (पीर टू पीर फाइल शेयरिंग Peer to peer file sharing) कहा जाता है।

किसी भी फाइल को कॉपी करने के पहले यह जानना जरूरी है कि वह फाइल अन्तरजाल पर कहां है। अर्थात फाइलों की कोई सूची होनी चाहिये। इस समय सूची बनाने के तीन मुख्य तरीके हैं।
  • केन्द्रीयकृत सूची तरीका (Centralised indexing system): इसमें एक मुख्य सर्वर होता है जिसमें सारे फाइलों की सूची उपलब्ध होती हैं।
  • सुपर नोड तरीका (Super node system) इसमें कुछ चयनित कम्प्यूटर, में सारे कम्प्यूटर के फाइलों की सूची होती है।
  • अकेन्द्रीयकृत सूची तरीका (Decentralised indexing system): इसमें हर कम्प्यूटर अपनी हार्ड डिस्क पर अपनी फाइलों की सूची बना कर रखता है।


आर्ची कॉमिक्स किसने नहीं पढ़ी। खुद पढ़िये कि आर्ची को फाइल शेयरिंग से क्या हो गया। बड़ा करने के लिये चित्र पर चटका लगायें।

इन तीनो तरीकों ने अलग अलग सॉफ्टवेयर - नैपस्टर (Napster), फास्टट्रैक (Fast Track), और न्यूटला (Qnutella) - को जन्म दिया। इनमें सबसे पहला था - नैपस्टर सॉफ्टवेयर। इस सॉफ्टवेयर को शॉ फैनिंग नामक टीन-ऐजर ने बनाया था। यह सबसे पहले वाले तरीके को इस्तेमाल करता है। इस सॉफ्टवेयर ने संगीत की दुनिया में भूचाल ला दिया। इसके बारे में चर्चा करेंगे अगली बार।


अंतरजाल की मायानगरी में
टिम बरनर्स् ली।। इंटरनेट क्या होता है।। वेब क्या होता है।। लिकिंग, क्या यह गलत है।। चित्र जोड़ना - यह ठीक नहीं।। फ्रेमिंग भी ठीक नहीं।। बैंडविड्थ की चोरी - क्या यह गैर कानूनी है।। बैंडविड्थ की चोरी - कब गैरकानूनी है।। डोमेन नाम विवाद क्या होता है।। समान डोमेन नाम विवाद नीति, साइबर और टाइपो स्कवैटिंग।। की वर्ड और मॅटा टैग विवाद।। समकक्ष कंप्यूटर के बीच फाइल शेयरिंग

इस पोस्ट पर समकक्ष कंप्यूटर के बीच फाइल शेयरिंग के बारे में चर्चा है। यह हिन्दी (देवनागरी लिपि) में है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

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Peer to peer file sharing' ke bare men charcha hai. yah hindee {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post talks about what is 'Peer to peer file sharing'. It is in Hindi (Devnaagaree script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.



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Monday, February 18, 2008

क्रिस्मस को बड़ा दिन क्यों कहा जाता है

प्रभू ईसा के जन्म दिन, २५ दिसंबर को मनाया जाता है। इसे क्रिस्मस कहा जाता है। भारत में यह, बड़ा दिन के नाम से जाना जाता है। ऐसा क्यों है। आईये इसी संदर्भ पर कुछ चर्चा करें।

मॉस्को के चर्च में, बड़े दिन पर आतिशबाजी यह चित्र बीबीसी के वेबसाइट के इस पन्ने से है और उन्हीं के सौजन्य से है।

यदि आप प्रभू ईसा के जन्म से जुड़ी कथाओं पर नजर डालेंगे तो वे अलग अलग साल, अलग अलग दिन की तरफ इंगित करती हैं। शायद, उनका जन्म सितंबर के महीने में हुआ था। फिर भी, इसे २५ दिसंबर का दिन मान लिया गया है। लोग, इसके अलग अलग कारण देते हैं:
  • इस दिन पहले से रोमन उत्सव मनाया जाता था जिसमें उपहार दिये जाते थे।
  • जब ईसाई सभ्यता पनपने लगी, तब यह दिन मकर संक्रान्ति के रूप में मनाया जाता था।
शायद, यह दोनो कारण सही नहीं हैं और कोई तीसरा कारण है।

आज चर्चा का यह विषय नहीं है कि इसे २५ दिसंबर को क्यों मान लिया गया है, आज बात है कि इसे बड़ा दिन क्यों कहा जाता है? यहां यह भी गौर करने की बात है कि २५ दिसंबर को केवल भारत में ही बड़े दिन के नाम से जाना जाता है। बाकी जगह इसे क्रिस्मस के नाम से ही पुकारा जाता है।

सूर्य साल एक में बार उत्तरी गोलार्ध से दक्षिणी गोलार्ध और वापस उत्तरी गोलार्ध आता है। सूर्य जब दक्षिणी गोलार्ध से, उत्तरी गोलार्ध के लिये वापस चलता है तो उसे सूर्य का उत्तरायर्ण होना कहा जाता है। हमारा जन्म सूर्य के कारण हुआ। सूर्य न होता तो जीवन ही नहीं होता। इसलिये सूर्य का महत्व हर सभ्यता में है। उत्तरी गोलार्ध में रहने वालों के लिये सूर्य का उत्तरायर्ण होना महत्वपूर्ण है। सूर्य के उत्तरायर्ण होते ही, उत्तरी गोलार्ध में दिन बड़े होने शुरू हो जाते हैं। हिन्दुवों में इस दिन का खास महत्व है। पितामह भीष्म ने मरने का वह दिन चुना जब सूर्य को उत्तरायर्ण होना था। यह दिन भी बदल रहा है।

पृथ्वी अपनी धुरी पर लगभग २५,७०० साल में चक्कर लगाती है। इस कारण विषुव भी खिसक रहा है। इसे विषुव अयन कहा जाता है। इसके बारे में, मैंने विस्तार से अपनी 'ज्योतिष, अंक विद्या, और टोने टुटके' की इस चिट्ठी में किया है। ऐसे यह पूरी श्रंखला संकलित कर यहां पर है। इसी कारण सूर्य के उत्तरायर्ण का दिन भी खिसक रहा है। आजकल सूर्य के उत्तरायर्ण २२ दिसंबर को होता है। सूर्य का उत्तरायर्ण होना तीन दिन पहले, यानि कि २५ दिसंबर को, लगभग २१० साल पहले होता था।

जीतने के लिये, अपनी संस्कृति, सभ्यता, और धर्म कायम करो


किसी देश को जीतने के लिये सबसे अच्छा तरीका है कि वहां की संस्कृति, सभ्यता, धर्म पर अपनी संस्कृति, सभ्यता, और धर्म कायम करो। २१० साल पहले, अंग्रेजों ने भारत में अपनी पकड़ मजबूत कर ली थी। यह वह समय था जब ईसाई धर्म फैलाने की जरूरत थी। अंग्रेज, यह करना भी चाहते थे। उस समय २५ दिसंबर वह दिन था, जबसे दिन बड़े होने लगते थे। हिन्दुवों में इसके महत्व को भी नहीं नकारा जा सकता था। शायद इसी लिये इसे बड़ा दिन कहा जाने लगा ताकि हिन्दू इसे आसानी से स्वीकार कर लें। यह केवल मेरा अनुमान है, यह गलत भी हो सकता है। यहां यह भी बताना उचित होगा कि शास्त्री जी इसका दूसरा कारण देते हैं।

१८८१ में सॅन्टा क्लॉस का चित्र यह विकीपीडिया से है और ग्नू स्वतंत्र अनुमति पत्र की शर्तों के अन्तर्गत प्रकाशित किया गया है।

मेरे विचार से, इसे बड़ा दिन कहने का जो भी कारण सही हो, वह कारण महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रभू ईसा महापुरुष थे। यह खुशी का दिन है। हम सब को इसे मनाना चाहिये। कुछ ऐसी बात यहां भी कही जा रही है।

मैंने यह श्रंखला प्रभू ईसा के जन्म के समय निकले तारे के बारे में चर्चा के कारण शुरू की थी अगली बार हम लोग उसी तारे के बारे में बात करेंगे।

बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां
भूमिका।। प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में क्यों हुआ?।। क्रिस्मस को बड़ा दिन क्यों कहा जाता है।।

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इस पोस्ट पर चर्चा है कि भारतवर्ष में, क्रिस्मस को बड़ा दिन क्यों कहा जाता है। यह हिन्दी (देवनागरी लिपि) में है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

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Saturday, February 16, 2008

टमटम पर, राजसी ठाट-बाट के साथ, वियाना

वियाना हवाई अड्डे पर, सिस्टर सिग्रेड और सिस्टर कारमेन, मुझे लेने आयी थीं। मैं इन लोगों से कभी नहीं मिला था पर उनके कपड़ों के कारण पहचान गया। यह लोग, एक बड़ी सी स्टेशन वैगन लेकर आयीं थी जिसमें बैठने की तीन rows थी।

सिस्टर कारमेन जर्मनी से हैं। वे बहुत अच्छा कार चलाती हैं। उन्हें वियाना शहर के बारे में अच्छा पता है।

सिस्टर सिग्रेड महाराष्ट्र से हैं। उनकी हिन्दी अच्छी है। इस समय वे, सिस्टर जनरल की सलाहकार हैं। सिस्टर सिग्रेड को जर्मन भाषा तो आती है पर वियाना के बारे में ज्यादा पता नहीं था। वियाना में मेरा ख्याल, सिस्टर सिग्रेड ने रखा। मैं सारी सिस्टरस् और खास तौर से उनका आभारी हूं।

सिस्टर सिग्रेड की आवाज मधुर है वे गाना भी अच्छा गातीं हैं। एक दिन जब हम लोग घूमने निकले तब कार में, उन्होंने मां मरियम की स्तुति में एक भजन सुनाया। उन्होने बताया कि वे हमेशा बाहर जाते समय यह भजन गाती हैं। इस भजन में, मां मरियम से प्रार्थना है कि हमें अपनी शरण में ले लो। मैंने कार में ही इस गाने को रिकॉर्ड कर लिया था। आप भी इसे सुन सकते हैं।


come with us mary ...


सिस्टर सिग्रेड और सिस्टर कारमेल

सिस्टर सीग्रेड, मुझे भाषाओं की खास जानकार लगीं

मुझे भारत जाते समय हवाई अड्डे छोड़ने भी आयीं। उस समय सिस्टर सिग्रेड ने हिन्दी में एक भजन सुनाया। वे भारत की लगभग सब भाषा में भजन गा लेती हैं और जर्मन में तो गाती ही हैं। मुझे, वे भाषा की खास जानकार लगीं।


सिस्टर सिंथिया और सिस्टर सीग्रिड, टमटम पर। साथ में है महिला चालक लियाना। यह चित्र हीरोस् स्कवैर (Heroes' Square) पर खींचा गया था। टमटम के पीछे, घुड़सवारी करते हुऐ, ऑस्ट्रिया के आर्कड्यूक चार्लस् Archduke Charles of Austria की मूर्ति है। वे राजा के पुत्र और १८वीं शताब्दी में आस्ट्रिया सेना में फील्ड मार्शल थे। चित्र ठीक तरह से देखने के लिये उस पर चटका लगायें।

बर्लिन में यदि कुछ जगहों पर रिक्शा के द्वारा घूमा जा सकता है तो वियाना में घोड़ागाड़ी पर। वियाना में घोड़ागाड़ी, पुरूष वा महिला दोनों ही चलाते हैं। जिस घोड़ागाड़ी का मैंने चित्र लिया था उसकी चालक महिला थी। उसका नाम नाम लियाना है। उसने मुझे बताया कि इस घोड़ागाड़ी को फिआकर कहते हैं। मैंने उसे बताया कि भारत में इसे टमटम कहते हैं। चलते समय लियाना ने मुस्करा कर कहा 'टमटम'। मैंने भी मुस्करा कर जवाब दिया - फिआकर। इन घोड़ागाड़ियों के इतिहास के बारे में कुछ जानकारी यहां से प्राप्त की जा सकती है।

इन्हें विक्टोरिया भी कहा जाता है क्योंकि महारानी विक्टोरिया की यह प्रिय सवारी थी और उसी समय इसका चलन बढ़ा। इसलिये एक लोकप्रिय फिल्म, जो घोड़ा गाड़ी के इर्द-गिर्द घूमती है, का नाम विक्टोरिया नम्बर २०३ रखा गया। इसमें मुख्य भूमिका अशोक कुमार और प्रान ने निभायी थी।

मैं वियाना हवाई अड्डे से सीधा सिगमंड फ्रायड संग्रहालय घूमने चला गया था अगली बार, उसी के बारे में।

वियाना यात्रा
मैं पहुंच रहा हूं।। फिल्म - सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक सत्य कथा पर आधारित है।। टमटम पर, राजसी ठाट-बाट के साथ, वियाना।।



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यह पोस्ट 'टमटम पर, राजसी ठाट-बाट के साथ, वियाना' घूमने के बारे में है। यह हिन्दी (देवनागरी लिपि) में है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

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This post is about seeing Vienna on horse drawn carriage known as fiaker. It is in Hindi (Devnaagaree script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.


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Wednesday, February 13, 2008

वेलेंटाइन दिवस, ओपेन सोर्स के साथ मनायें

कल वेलेंटाइन दिवस है। इसके लिये आज से ही तैयारी करें और इसे ओपेन सोर्स सॉफ्टवेयर के साथ मनायें।
'लगता है कि बुढ़ापे के साथ उन्मुक्त जी भी सटिया गये हैं। वेलेंटाइन डे बुढ्ढे लोगों के लिये नहीं है। यह दिन जवान दिलों के लिये है। यह तो, महिला या पुरुष मित्र के साथ बिताया जाता है। ओपेन सोर्स के साथ बिताने क्या मतलब - हुंः!'
अरे भाई मैं भी तो वही बात कर रहा हूं जो आप कह रहें हैं - दोनो में कोई अन्तर नहीं है। '
आप भी वही बात कर रहे हैं, अच्छा मज़ाक कर लेते हैं।'

मैं तो केवल इतना कहना चाहता हूं कि आप क्यों न, अपने प्रिय जन के पास, एक प्यारी सी कविता या गाना ऑडेसिटी पर रिकॉर्ड कर के भेजें या पॉडकास्ट करें।

अच्छा आप गा नहीं सकते हैं, कोई बात नहीं। क्यों नहीं ओपेन ऑफिस डाट ऑर्ग में उसके लिये प्यारी सी कविता लिखें। यह एम.एस. वर्ड के वर्ड प्रोसेसर से किसी तरह से कम नहीं है। यह doc फॉरमेट के कागज़ातों को न केवल खोल सकता है पर इसमें उन्हें सुरक्षित कर सकता है।

क्या कहा उसने एम.एस. वर्ड खरीद लिया है (भगवान ही आपका मालिक है - इसे व्यक्तिगत रूप से कोई नहीं खरीदता, केवल ... ही खरीदते हैं, सब ... का प्रयोग करते हैं)। बहुत अच्छी बात है हमेशा कानूनी काम करना चाहिये। उसके एम.एस. वर्ड में सन माइक्रोसिस्टम के द्वारा निकाला प्लग-इन डाल दीजिये ताकि वह ओपेन फॉरमैट के कागज़ातों को पढ़ सके। क्योंकि आने वाले समय पर यह सबसे महत्वपूर्ण फॉरमैट होगा।

आप कविता नहीं लिख सकते हैं तो उसके अगले प्रस्तुतिकरण को ओपेन ऑफिस डाट ऑर्ग के इम्प्रेस प्रोग्राम पर बना कर दें या इसी पर पिछली पिकनिक पर खींचे गये चित्रों का प्रस्तुतिकरण बना कर उसे दिखायें। इम्प्रेस प्रोग्राम किसी भी तरह से पॉवर पॉंइट से कम नहीं है। इसकी खास बात यह है कि यह प्रस्तुतिकरण को ppt फॉरमैट में भी सुरक्षित कर सकता है और इस फॉरमैट की फाइलों को दिखा सकता है।

क्या कहा प्रस्तुतिकरण बनाने में ज्यादा समय लगेगा और आप जल्दी में हैं। छोड़िये इसको - जिम्प पर उसके चित्र को संपादित करें। वह सबसे स्मार्ट और सुन्दर तो है ही (इस बात का खास ख्याल रखियेगा कि चित्र में उसका वजन दस किलो कम और कमर छः इंच पतली लगनी चाहिये)। यह चित्र बना कर उसे उपहार में दें।

अच्छा आप उसी के साथ रहना चाहते हैं और अलग से कुछ नहीं करना चाहते हैं। कोई बात नहीं, क्यों नहीं उसके साथ एमप्लेयर या फिर वी.एल.सी. मीडिया प्लेयर पर कोई बढ़िया सा गाना सुने या इसी पर कोई फिल्म देखें।

उसके कंप्यूटर पर कुछ करना चाहते हैं तो क्यों नहीं सनबर्ड ई-मैनेजर में उसके प्रिय जनों का जन्मदिन और शादी की सलागिरह डाल दें। ख्याल रहे उसमें आपका जन्मदिन अवश्य रहे ताकि वह उसे कभी न भूलने पाये। हां, आपके क्लास या ऑफिस में जो स्मार्टी है और देवानन्द लगता है उसका जन्मदिन तो आपको याद नहीं है। जाहिर है कि उसे आप कैसे डाल सकते हैं।

क्या कहा वह आपके पास नहीं है, बहुत दूर है। क्यों नही उसे थंडरबर्ड में एक प्यारी सी ई-मेल लिख भेजें।

ई-मेल तो हमेशा भेजते रहते हैं। इस दिन कुछ नया करना चाहते हैं। कोई मुश्किल नहीं - फायरफॉक्स पर अपना चिट्टा खोलिये और उसके लिये एक प्यारी सी चिट्ठी लिख डालिये।

मेरे लिये तो वह सबसे सुन्दर, सबसे प्यारी है

'उन्मुक्त जी, क्या लिखें?'
हूंहूंहूं ... यह तो मुश्किल सवाल है ... सोचता हूं। मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि क्या लिखना चाहिये। मेरे लिये तो वह सबसे सुन्दर, सबसे प्यारी है। हांलाकि कुछ नाटी है, कुछ मोटी है पर मैं कौन सा देवानन्द या फिर ग्रेगरी पेक हूं। मैं आपको यह क्यों बताऊं कि मैं मुकरी जैसा लगता हूं।

वेलेंटाइन दिवस पर महत्वपूर्ण सूचनायें
पहली सूचना: यह सारे प्रोग्राम विंडोज़ पर बहुत बढ़िया तरीके से चलते हैं और आपको इन्हें विंडोज़ में चलाने में कोई मुश्किल नहीं होगी।

दूसरी सूचना: आपको तो मालुम ही है न कि, 'लिनेक्स (ओपेन सोर्स) प्रेमी पुरुष ज्यादा कामुक और भावुक' होते हैं और महिलायें उन्हें पसन्द करती हैं। फिर भी, एहतियात बरतने में कोई हर्ज़ नहीं :-)


तीसरी सूचना: पुरुष अक्सर वैसा बर्ताव करते हैं जैसा कि नीचे दिखाये विडियो में मना किया गया है पर महिलायें बिलकुल चिन्ता न करें - ओपेन सोर्स प्रेमी तो ऐसा कर ही नहीं सकते।

यह लोग 'प्रकृति की गोद में तीन दिन' रहें या वहां 'उर्मिला की कहानी' पढ़ें पर बात 'ओपेन सोर्स सौफ्टवेर' या फिर 'लिनेक्स की कहानी' की ही करते हैं। ईसप की कहानियों में कुछ बदलाव कर उसे 'खरगोश, कछुवा और औपेन सोर्स' कर देते हैं। यह पागलपन तो यहां तक रहता है कि 'ओपेन सोर्स की पाती - बिटिया के नाम' लिख देते हैं। जब वह पूछती है कि 'पापा, क्या आप उलझन में हैं' तो यह बताने के बजाय उसे 'बिटिया रानी, जैसी दुनिया चाहो, वैसा स्वयं बनो' की सीख देने लग जाते हैं।

यदि इससे छुट्ठी मिली तो 'पहेलियां और मार्टिन गार्डनर' की बात कर पहेलियों की बेहतरीन पुस्तकों की चर्चा करने लगते हैं। उसी के साथ '२ की पॉवर के अंक, पहेलियां, और कमप्यूटर विज्ञान' में कमप्यूटर विज्ञान के मूलभूत सिद्धांतो को बताने लग जाते हैं। यह कहते तो हैं कि 'Oh Be A Fine Girl Kiss Me' पर इसका मतलब तो यह होता है कि 'ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके' में कोई अन्तर नहीं, इनमें कोई तर्क नहीं है और यह तीनो केवल आपको ...।

इन लोगों को 'रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन' के अतिरिक्त कोई और वैज्ञानिक समझ में नहीं आता है। यदि आता है तो वे आपसे पूछते हैं कि, 'क्या आपके पास सोचने का समय नहीं है?' और उसी के साथ फाइनमेन के पत्रों की चर्चा करने बैठ जाते हैं।

जब कुछ नहीं मिलता है तो 'पेटेंट', 'पेटेंट और कंप्यूटर प्रोग्राम', और 'पेटेंट और पौधों की किस्में एवं जैविक भिन्नता' जैसे नीरस विषयों की व्याख्या करने लगते हैं। इन लोगों में देश-प्रेम भी है पर सारे विचारों को समन्वय कर बताते हैं कि 'वन्दे मातरम्' गाने का इतिहास क्या है और इसका गाना क्यों, अनिवार्य नहीं किया जा सकता है।

यह इतना भी नहीं जानते कि सही क्या है -'वीस्टा या विस्टा'? हांलाकि यह 'सर कटा देंगे पर झुकायेंगे नहीं'। इनके लिये 'Impossible is Nothing'.

यह लोग कभी कभी 'चार बराबर पांच, पांच बराबर चार, चार…' करने लग जाते हैं और इसका जवाब 'आईने, आईने, यह तो बता - दुनिया मे सबसे सुन्दर कौन' में देने लग जाते हैं। यह ‘यहां सेक्स पर बात करना वर्जित है' बताते हुऐ ' यौन शिक्षा जरूरी है' का भी नारा देते हैं। इन्हें नहीं मालुम की 'मां को दिल की बात कैसे बतायें' लेकिन बाद में 'मां को दिल की बात कैसे बतायी' भी समझाते हैं।

महिलाओं का वे आदर करते हैं उनके मुताबिक वे तो हैं 'आज की दुर्गा - महिला सशक्तिकरण' पर उनका खास जोर रहता है। मां की याद इन्हें रहती है चाहे वह बचपन की हों या फिर अन्तिम समय की

यह अपनी भावनाओं को उससे नहीं बताते जिसे इसका 'इन्तजार है'। इनके लिये तो 'प्यार को प्यार ही रहने दो, कोई नाम न दो' ही यथार्थ है। इनके न केवल 'बैठने की प्रिय जगह' अजीब होती हैं पर हरकतें भी। यह हरकतें न केवल 'अपने टौमी, अरे वही हमारा प्यारा डौगी' के लिये होती हैं पर सबके लिये।

ऐसे लोग अपनी मातृ भाषा से प्रेम करते हैं। 'अंतरजाल पर हिन्दी कैसे बढ़े' के लिये अलग, अलग तरह तरीके अपनाते हैं। हांलाकि कभी, कभी 'डकैती, चोरी या जोश या केवल नादानी' की बात कर, अपने प्रिय-जनो को दुखी कर देते हैं। यह बात दीगर है कि यह एहसास होते ही, माफी मांग लेते हैं चाहे बात 'पत्रकार बनाम चिट्ठाकार' की ही क्यों न हो। यह लोग सबको अपने जैसा ही समझते हैं पर जल्द ही समझ जाते हैं कि 'हमें आसान लगने वाली बात, अक्सर किसी और को मुश्किल लगती है'।

यह लोग फ्री या बीयर के बारे में कुछ इस तरह से बात करते हैं, 'Free as in free speech, not as in free beer.'

इनकी सबसे बड़ी मुश्किल है कि जब कोई इनसे इनके बारे में बात करना चाहता है तो यह कन्नी काट जाते हैं चाहे दूसरे को इसके लिये आपको 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' ही क्यों न करनी पड़े।

'उन्मुक्त जी, बन्द करिये अपनी बकबक - विडियो कहां है।'
लीजिये आप ही देख लीजिये कि वेलेंटाइन डे पर क्या नहीं करना चाहिये।



'
उन्मुक्त जी, क्या यह विडियो "खिड़की प्रेमी ठंडे और कठोर होते हैं?" वालों के लिये है?'
मुझे क्या मालुम कि यह विडियो किसके लिये। आप स्वयं इस विडियो बनाने वाली सुन्दर लड़की लीसा नोवा से ही क्यों नहीं पूछ लेते। मुझे क्यों तंग कर रहे हैं :-)

हां मुझे इंतज़ार रहेगा कि आप कैसे वैलेंटाइन दिवस मना रहे हैं या आपने इसे कैसे मनाया।

इस महीने मैं हिन्दी चिट्टाकारी में दो साल पूरा कर रहा हूं - मैंने सोचा वेलेंटाइन दिवस के जरिये आपको कुछ अपनी चिट्ठियों के बारे में बता दूं। इसी लिये इतना बोर किया :-)

इस चिट्ठी में प्रकाशित चित्र पर मेरा कॉपीराइट नहीं है। मैंने इसे यहां से लिया है और इन्हीं के सौजन्य से है। आप, इस चिट्ठे से बिना मुस्कराये वापस नहीं आ सकते।
The photograph published here is not mine. I have taken it from here and it is courtsey them. This website is funny and you can do nothing but smile.
Hi, I am using it for non profit purpose. Please do let me know if you have any objection. In that event, I will remove it.


हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi
(सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें: Click on the symbol ► after the heading.)
  • अंतरजाल की माया नगरी की नवीनतम कड़ी: की-वर्ड और मॅटा टैग विवाद (Key wrod and Meta tag dispute) (Uniform Domain Name Dispute Resolution Policy Cyber Typo squatting)
  • पुस्तक समीक्षा: माइक्रोब हंटरस् - जीवाणुवों के शिकारी (Microbe Hunters by Paul de Kruif)
यह ऑडियो फइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप -
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में - सुन सकते हैं।
बताये गये चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले।

इस चिट्ठी में विंडोज़ पर चलने वाले ओपेन सोर्स प्रोग्राम और मेरे द्वारा लिखे गये कुछ चिट्ठियों की चर्चा है। यह हिन्दी (देवनागरी लिपि) में है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

is post men windows par chlane vale open source programme aur mere dvaraa likhee kuchh post kee charcha hai. yah {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post talks about some popular open source programmes that run on Windows and some posts of mine. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.


Monday, February 11, 2008

की वर्ड और मॅटा टैग विवाद क्या होता है

आज चर्चा का विषय है: 'की-वर्ड और मॅटा टैग विवाद'। इसे आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये चिन्ह पर चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
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  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
सुन सकते हैं। ऑडियो फाइल पर चटका लगायें फिर या तो डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले। डाउनलोड करने के लिये पेज पर पहुंच कर जहां Download फिर अंग्रेजी में फाइल का नाम लिखा है, वहां चटका लगायें।
इसके पहली की कड़ियां 'समान डोमेन नाम विवाद नीति, साइबर और टाइपो स्कवैटिंग' को सुनने के लिये चिन्ह पर चटका लगायें।

की-वर्ड (Key word) विवाद
कोई भी सूचना प्राप्त करने के लिये सर्च इंजिन पर शब्द लिखकर उसे ढूढ़ा जाता है। किसी शब्द पर ढूढ़ने पर, लाखों से ज्यादा वेब-पन्नों की सूचना मिलती है। सारे पन्नों को देख पाना नामुमकिन है। लोग अक्सर पहले के ही कुछ पन्नों की ही लिंक देखते हैं। इसलिये महत्वपूर्ण यह है कि पहले पन्ने पर किस-किस वेब-पन्नों की सूचना है। सर्च इंजिन अक्सर कुछ खास शब्दों को अलग-अलग कम्पनियों को बेच देते है ताकि उन शब्दों पर ढूढ़ने पर उस कम्पनी की वेबसाइट सबसे ऊपर आ जाये। यदि वह शब्द किसी और का ट्रेड मार्क हो तो क्या सर्च इंजिन किसी दूसरे को वह शब्द बेच सकते हैं। इस बारे में कानून स्पष्ट नहीं है। आने वाले समय पर यह शायद स्पष्ट हो सके।

मॅटा टैग (Meta tag) विवाद
टैग किसी व्यक्ति या वस्तु के बारे में सूचना देते हैं। उदाहरणार्थ, सम्मेलनों में या कुछ सेवाओं (डाक्टर या सेना) में लोग, नाम का टैग लगाते हैं। दूकानों में वस्तुओं पर उनके मूल्य का टैग लगा होता है। अलग-अलग वेब साइट पर अलग तरह की सूचना होती है। मॅटा टैग, वेब साइट में सूचना के बारे में, सूचना देते हैं। सवाल यह भी उठता है कि क्या आप किसी और के ट्रेड नाम का प्रयोग अपने वेब साइट में मॅटा टैग की तरह कर सकते हैं। इसके बारे में भी कानून स्पष्ट नहीं है। आने वाला समय इसे स्पष्ट करेगा।

अगली बार चर्चा का विषय रहेगा - समकक्ष कंप्यूटर के बीच फाइल शेयरिंग

अंतरजाल की मायानगरी में
टिम बरनर्स् ली।। इंटरनेट क्या होता है।। वेब क्या होता है।। लिकिंग, क्या यह गलत है।। चित्र जोड़ना - यह ठीक नहीं।। फ्रेमिंग भी ठीक नहीं।। बैंडविड्थ की चोरी - क्या यह गैर कानूनी है।। बैंडविड्थ की चोरी - कब गैरकानूनी है।। डोमेन नाम विवाद क्या होता है।। समान डोमेन नाम विवाद नीति, साइबर और टाइपो स्कवैटिंग।। की वर्ड और मॅटा टैग विवाद।। समकक्ष कंप्यूटर के बीच फाइल शेयरिंग

इस पोस्ट पर की-वर्ड और मॅटा टैग विवाद के बारे में चर्चा है। यह हिन्दी (देवनागरी लिपि) में है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

is post pr 'key word aur meta tag vivaad' ke bare men charcha hai. yah hindee {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post talks about what is 'Key-word and Meta tag dispute'. It is in Hindi (Devnaagaree script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.



सांकेतिक चिन्ह
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Saturday, February 09, 2008

प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में क्यों हुआ?

मां मरियम और जोसेफ नाज़रेथ में रहते थे पर प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में हुआ। ऐसा क्यों हुआ, यही इस बार चर्चा का विषय है।

प्रभू ईसा को देख, चकित होते हुऐ चरवाहे

हमारे बचपन में, घर में विज्ञान की चर्चा होती थी पर पूजा-पाठ या रिलिज़न (religion) सम्बन्धित चर्चा नहीं। यह आज भी सच है। मैं कभी भी किसी मिशनरी या फिर अंग्रेजी स्कूल में नहीं पढ़ा। मुझे बाईबिल के बारे में कुछ नहीं मालुम था। कम से कम यह तो बिलकुल नहीं कि, प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में हुआ था।

मैंने कुछ समय पहले सांख्यिकी के ऊपर चर्चा की थी और 'आंकड़े गलत बताते हैं' चिट्टी पर उस विषय की बेहतरीन पुस्तकों की भी चर्चा की थी। इसमें एक पुस्तक है Facts from Figures by M.J. Moroney. इसका पहला अध्याय है Statistics undesirable.

योजना बनाने वाले, अक्सर किसी खास व्यक्ति के लिये हजारों लोगों को तकलीफ में डाल देते हैं - आज भी सच है:-)

यह अध्याय, सांख्यिकी के पुराने समय होने वाले प्रयोगों की चर्चा करती है। उसका दूसरा पैराग्राफ, कुछ इस प्रकार है,
'We are reminded of the ancient statisticians every Christmas when we read that Caesar Augustus decreed that the whole world should be enrolled, each man returning to his own city for registration, Had it not been for the statisticians Christ would have been born in the modest comfort of a cottage in Nazareth instead of in a stable at Bethlehem. The story is a symbol of the blindness of the planners of all ages to the comforts of the individual. They just didn't think of the overcrowding there would be in a little place like Bethlehem.'
हर साल बड़ा दिन, हमें उस प्राचीन काल के सांख्यकीविद् की याद दिलाता है। सीजर ऑगस्टस {२३.९.६३ ईसा-पूर्व (BC) – १९.८.१४ ईसा-बाद (AD)} ने आज्ञा निकाली थी कि सारे दुनिया के लोगों की जनगणना होगी और अपना पंजीकरण कराने सब लोगों को वापस अपने शहर आना होगा। यदि वह सांख्यकीविद् न होता, तो प्रभू ईसा, नाजरेथ में अपने आरामदेह घर में पैदा होते न कि बेथलहम के अस्तबल में। यह कहानी योजना बनाने वालों की कमियों को दर्शाती है जो अक्सर किसी खास व्यक्ति के लिये हजारों लोगों को तकलीफ में डाल देते हैं। योजना बनाने वालों ने इतना
भी नहीं सोचा कि बेथलहम जैसी छोटी जगह में इतनी भीड़ हो जायेगी।

सीजर ऑगस्टस {२३.९.६३ ईसा-पूर्व (BC) – १९.८.१४ ईसा-बाद (AD)} जिसने जनगणना की आज्ञा निकाली थी

मां मरियम और जोसेफ नाजरेथ में रहते थे। जोसेफ वेथलेहम के रहने वाले थे। आगस्टस की आज्ञा के कारण उन्हें वेथलहम आना पड़ा। वहां भीड़ के कारण उन्हें किसी भी सराय में जगह नहीं मिली। इसलिये उन्हे अस्तबल में ही रूकना पड़ा। वहीं प्रभू ईसा का जन्म हुआ।

यह पुस्तक प्रभू ईसा के जन्मस्थल को अस्तबल बताती है। जहां तक मुझे मालुम है कि उस जगह भेड़, बकरी रहते थे। क्या भेड़शाला या फिर गौशाला कहना ठीक होगा?

मां मरियम का मायका, बेथलेहम में नहीं था वहां तो उनका ससुराल था। कैसा संयोग, यदि भगवान कृष्ण ने जेल में जन्म लेना ठीक समझा तो प्रभू ईसा ने अस्तबल में।

यह जनगणना ६ ईसा-बाद (AD) में हुयी थी। यानी जो साल प्रभू ईसा का जन्म माना जाता है उसके छ: साल बाद। प्रभू ईसा के जन्म के समय निकले तारे के कारण, कुछ लोग कहते हैं कि प्रभू ईसा का जन्म ३ या फिर ७ ईसा-पूर्व (BC) में हुआ था यानि उनके जन्म के कई साल पहले। हम आने वाली चिट्ठियों में इसकी भी चर्चा करेंगे।

प्रभू ईसा का जन्म किस साल हुआ किस दिन हुआ – इसके बारे में कोई निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। यह उतना ही प्रमाणिक है जितना कि भगवान राम का जन्म दिन। जहां तक मैं समझता हूं भगवान राम, कृष्ण, ईसा नाम के महापुरूष हुए हैं अन्यथा उनके किस्से इतना प्रचलित न होते पर उनके जन्म के बारे में ठीक समय तय कर पाना मुश्किल है।

कुछ समय पहले, हिन्दी चिट्ठाजगत में प्रभू ईसा के जन्म दिन, २५ दिसंबर को, बड़ा दिन कहने पर कुछ इतराज़ किया गया था। अगली बार इसी पर चर्चा करेंगे कि इसे बड़ा दिन क्यों कहा गया?

बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां
भूमिका।। प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में क्यों हुआ?।।

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बताये गये चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले।

इस चिट्ठी के चित्र विकिपीडिया से हैं और ग्नू स्वतंत्र अनुमति पत्र की शर्तों के अन्दर प्रकाशित हैं।


इस चिट्ठी में चर्चा का विषय है कि प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में क्यों हुआ? यह हिन्दी (देवनागरी लिपि) में है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

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This post explains why was Jesus Christ was born in Bethlehm? It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.


सांकेतिक शब्द

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Wednesday, February 06, 2008

फिल्म - सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक सत्य कथा पर आधारित है

वियाना में मुझे एक कॉन्वेन्ट में ठहरना था। इसी कारण, बर्लिन से वियाना जाते समय, मुझे ९६० के दशक में देखी फिल्म, सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक (Sound of Music) की याद आयी। यह फिल्म १९६० के दशक में बनी थी। मैंने इसे तभी देखा था। यह आज तक की बनी संगीत-मय फिल्मों में, सबसे प्रसिद्ध है। इसे पांच ऐकेडमी पुरुस्कार मिलें हैं। यह मारिया नामक लड़की की सत्य कथा पर आधारित है।

मारिया का पूरा नाम मारिया फॉन ट्रैप (शादी के पहले कुक्षेरा) {Maria von Trapp (nee Kutschera)} था। वह वियाना में रहने वाली एक अनाथ लड़की थी। वियाना से वह सॉल्सबर्ग (Salsburg) के एक कॉन्वेंट में नन बनने के गयी। वहां से उसे, विधुर नेवल कमांडर के घर, सात बच्चों की देखभाल करने के लिये, भेजा गया। जहां दोनो में प्रेम हो गया और उन्होने शादी कर ली। वे द्वितीय विश्व युद्ध के समय ऑस्ट्रिया से भाग कर अमेरिका चले गये। मारिया ने बाद में अपनी जीवनी 'द स्टोरी ऑफ ट्रैप फैमली सिंगरस् (The Story of the Trapp Family Singer's) नाम से लिखी।

सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक, फिल्म मारिया की पुस्तक 'द स्टोरी ऑफ ट्रैप फैमली सिंगरस्' पर आधारित है। फिल्म की मूलभूत कहानी तो पुस्तक से ली गयी है पर फिल्मी मसाले के लिये, उसमें बदलाव किया गया है। वास्तव में, मारिया द्वितीय विश्व युद्ध के पहले ही कमांडर के घर बच्चों को देखने गयी थी और उसकी शादी भी पहले हो गयी थी पर यह फिल्म में यह सब द्वितीय विश्व युद्ध के समय का दिखाया गया है। हांलाकि वे द्वितीय विश्व युद्ध के समय ही वहां से भागे थे।

नन की भूमिका में जूलिया एंड्रयूस्

फिल्म में मारिया की भूमिका, जूलिया एंड्रयूस् कलाकारा ने निभाया है। इस फिल्म का गाना 'डो रे मी ... डो अ डीयर, अ फीमेल डियर, रे अ ड्रॉप ऑफ गोल्डन सन ' बहुत लोकप्रिय गीत हुआ करता था।



यह कथा सॉल्सबर्ग की है और फिल्म की शूटिंग भी सॉल्सबर्ग में हुई है। यह एक बेहतरीन फिल्म है। यदि आपने नहीं देखी है तो अवश्य देखें।

फिल्म से, सॉल्सबर्ग का एक दृश्य

सॉल्सबर्ग, वियाना से दूर है। वहां एक दिन में जाकर वापस नहीं आया जा सकता था इसलिये वहां नहीं गया। जिस जगह पर इस फिल्म की शूटिंग हुई है वहां पर कन्वेन्शन सेन्टर बन गया है और अन्तर-राष्ट्रीय सम्मेलन होते हैं। क्या मालुम कभी वहां सम्मेलन में जाने का मौका मिल जाय तब ही इस फिल्म की यादों को पूरा कर लूंगा।

इसी फिल्म पर आधरित हिन्दी की फिल्म परिचय है। इसमें भारतीय परवेश के अनुसार, बदलाव किये गये हैं। इस फिल्म की मुख्य भूमिका में अशोक कुमार प्राण (गलती सुधार: आभार ई-मेल श्री पीयूष मेहता - सूरत ३९५००१) जीतेन्द्र और जया भादुड़ी हैं। परिचय फिल्म का गाना 'सारे के सारे, गामा के संग' सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक गीत 'डो रे मी ... डो अ डीयर' पर आधारित है। इसे भी आप सुन सकते हैं।



मुझे वियाना में एक कॉन्वेंट में ठहरना था। वहां पर सिस्टर सीग्रेड ने मेरा ख्याल रखा। अगली बार, उन्हीं के बारे में।

वियाना यात्रा
मैं पहुंच रहा हूं।। फिल्म - सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक सत्य कथा पर आधारित है।।



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बताये गये चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले।










यह पोस्ट 'सॉउन्ड ऑफ म्यूज़िक' नामक फिल्म और 'द स्टोरी ऑफ ट्रैप फैमली सिंगरस्' नामक पुस्तक की समीक्षा है। यह हिन्दी (देवनागरी लिपि) में है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

yah post 'Sound of Music' naamak film aur 'The Story of the Trapp Family Singer's' pustak kee smeekshaa hai. yah hindee {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post is review of the picture 'Sound of Music' and book 'The Story of the Trapp Family Singer's'. It is in Hindi (Devnaagaree script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.


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