Saturday, December 25, 2010

कोबरा मेरे हाथ पर लिपट गया

इस चिट्ठी में चेनेई के पास स्थित क्रॉकोडाइल फार्म की चर्चा है

Friday, December 24, 2010

हो सकता है कि लैपटॉप के नीचे चाकू हो

द मदर, आत्मचित्र - विकिपीडिया से
चलिये, मां की नगरी - यह चिट्ठी हमारी पॉन्डिचेरी यात्रा की शुरुवात है।

Friday, December 17, 2010

साइबर या कंप्यूटर कानून क्या होता है

इस चिट्ठी में, बताया गया है कि साइबर कानून क्या होता है।
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर दाहिने तरफ का पृष्ट, "'बकबक' पर मेरे पॉडकास्ट कैसे सुने" देखें।
धर्म न्यायधिकरण के सामने गैलिलिओ - चित्र क्रिस्टो बान्टी १८५७

Friday, December 10, 2010

लाईये मैं आपके हाथ में बांध देती हूं

इस चिट्ठी में, कुफरी में हुई सुन्दर लड़कियों से मुलाकात की चर्चा है।

Friday, December 03, 2010

मन में है विश्वास, हम होंगे कामयाब एक दिन

यदि जान है, तो जहान है। यदि लगन है इच्छा है, विश्वास है, तब कामयाबी दूर नहीं। यह चिट्ठी मेरी ई-पाती श्रृंखला की एक चिट्ठी है।

Friday, November 26, 2010

हम हिन्दुस्तानी तो एक दूसरे की देखा देखी करते हैं

इस चिट्ठी में, कुफरी और वहां चल रही दंगल प्रतियोगिता का वर्णन है। 

Friday, November 19, 2010

मेरी खूबसूरती का राज़ है ...

इस चिट्ठी में महिलाओं की सुन्दरता के बारे में कहे गये ऑड्री हेपबर्न के शब्द हैं। हांलाकि,  यह पुरुषों के लिये भी सच हैं।
फिल्म रोमन हॉलीडे में ऑड्री हेपबर्न

Friday, November 12, 2010

तुमसे मिल कर, न जाने क्यों और भी कुछ याद आता है

इस चिट्ठी में चायल से कुफरी जाने के रास्ते और कुफरी हॉलीडे रिज़ॉर्ट की चर्चा है।

Friday, November 05, 2010

मेरे दिल में आज क्या है

इस चिट्ठी में चायल, में चायल पैलेस प्रीमियम हेरिटेज होटेल की चर्चा है।

Friday, October 29, 2010

ऐसा कोई कंप्यूटर नहीं, जिसे हैक न किया जा सकता हो

इस चिट्ठी में, फिल्म इंडिपैंडेंटस डे (Independence day) और इसका साईबर अपराध से संबन्ध की चर्चा है।
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Friday, October 22, 2010

नग्गर में, रोरिख संग्रहालय

इस चिट्ठी में, नग्गर में स्थित,  रोरिक संग्रहालय की चर्चा है।
रोरिक परिवार सहित नग्गर में - चित्र विकिपीडिया से

Sunday, October 17, 2010

अभी तक इसका पैसा नहीं निकल पाया है

कुल्लू में राफटिंग होती है। इस चिट्ठी में उसी की चर्चा है।
मैंने काशमीर यात्रा के दौरान पहलगांव में राफ्टिंग की थी। इसी लिये कुल्लू में भी राफ्टिंग की बात सोची। इसी लिये हम लोग, मणिर्कण से वापस आते समय, कुल्लू होते हुए आये।
कुल्लू में हमें, कोई भी व्यक्ति राफटिंग करते हुए नहीं दिखायी पड़ा। ऎसा लगा कि शायद उस दिन राफटिंग नहीं हो रही है। यह सच नहीं था। राफटिंग तो हो रही थी लेकिन बहुत कम लोग राफटिंग कर रहे थे। इसलिए नहीं दिखायी पड़ रहे थे।
 
रास्ते में, हमें  डेमन ऎडवंचर का लगा बोर्ड दिखा। इसके मालिक का नाम विनीत था। उन्होंने बताया कि राफटिंग सब लोग नहीं करवा सकते है। इसके लिए सरकार से लाइसेंस लेना पड़ता है। उनके पास ३  या ७ किलो-मीटर राफ्टिंग करवाने का लाइसेंस था। इससे ज्यादा दूरी की भी राफटिंग होती है पर उसके लिए उनके पास लाइसेंस नहीं था। 

विनीत के साथ चार नेपाली लोग थे। वे  वेतन पर काम कर रहे थे। यह लोग हिमांचल प्रदेश के पर्यटन विभाग  के द्वारा प्रमाणित थे। विनीत ने इसी साल अपना व्यापार शुरू किया है। उसने बताया,
'मैंने दो रैफ्ट, ऋषीकेश से सवा तीन लाख रूपये में खरीदे हैं। लेकिन अभी तक इसका पैसा नहीं निकल पाया है।'
राफटिंग बरसात में नही होती है और ठंढक के दिनों मे भी नही होती है। क्योंकि, उन दिनों में बर्फ जम जाती है और नदी में पानी कम रहता है। यह लगभग अप्रैल के महीने से, सितम्बर के अन्त तक चलता है। बीच में, एक महीने बरसात में यह बंद हो जाता है।


मैने जब राफ्टिंग की तब मेरे साथ टैक्सी चालक पवन भी थे। हमने तीन किलो-मीटर राफटिंग की। उसके  बाद यह लोग गाड़ी से हमें पुन: वापस वहीं  पर ले आये जहां से हमने रैफ्टिंग शुरू की थी। रैफ्ट को भी गाड़ी में रखकर लाया गया। 


हम लोग पूरी तरह से भीग गये थे। लेकिन इसके लिए हम तैयार थे। हम अपने साथ अतिरिक्त कपड़ा ले गये थे। वहां पर कपड़े बदलने के लिए कमरा था। वहां पर हमने कपड़े बदले। हम लोग को ठंड लग रही थी। इसलिए बगल में गर्म चाय भी पी। 


हिमाचल का प्रसिद्घ व्यंजन सीटू है। कहते है कि पूर्व प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी को भी यह व्यंजन बहुत पसंद है। वे जब भी हिमाचल प्रदेश जाते हैं तो इसे अवश्य खाते हैं। यह चावल से बनाया जाता है और इसे चटनी और घी के साथ खाया जाता है । मैंने भी इसे खाया पर मुझे  स्वाद नहीं लगा क्योंकि मैंने इसे बिना चटनी के खाया था।

प्रोफेसर निकोलस रोरिक  दार्शिनक, लेखक, तथा पेंटर थे।
वे जीवन के अन्तिम समय हिमाचल में रहे। अगली बार, रोरिक मेमोरियल ट्रस्ट घूमने चलेंगे।  

देव भूमि, हिमाचल की यात्रा
वह सफेद चमकीला कुर्ता और चूड़ीदार पहने थी।। यह तो धोखा देने की बात हुई।। पाडंवों ने अज्ञातवास पिंजौर में बिताया।। अखबारों में लेख निकले, उसके बाद सरकार जागी।। जहां हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बंटवारे की बात हुई हो, वहां मीटिंग नहीं करेंगे।। बात करनी होगी और चित्र खिंचवाना होगा - अजीब शर्त है।। हनुमान जी ने दी मजाक बनाने की सजा।। छोटे बांध बनाना, बड़े बांध बनाने से ज्यादा अच्छा है।। लगता है कि विंडोज़ पर काम करना सीख ही लूं।। गाड़ी से आंटा लेते आना, रोटी बनानी है।। बच्चों का दिमाग, कितनी ऊर्जा, कितनी सोचने की शक्ति।। यह माईक की सबसे बडी भूल थी।। भारत में आधारभूत संरचना है ही नहीं।। सुनते तो हो नहीं, जो करना हो सो करो।। रानी मुकर्जी हों साथ, जगह तो सुन्दर ही लगेगी।। उसकी यह अदा भा गयी।। यह बौद्व मंदिर है न कि हिन्दू मंदिर।। रास्ता तो एक ही है, भाग कर जायेंगे कैसे।। वह कुछ असमंजस में पड़ गयी।। हमने भगवान शिव को याद किया और आप मिल गये।। अपनी टूर दी फ्रांस - हिमाचल की साइकिल रेस।। और वह शर्मा गयी।। पता नहीं हलुवा घी में,  या घी हलुवे में तैर रहा था।। अभी तक इसका पैसा नहीं निकल पाया है।। आप, क्यों नहीं, इसके बाल खींच कर देखते।।
हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi
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About this post in Hindi-Roman and English is chitthi mein, kullu mein rafting kee charcha hai.  yeh {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post talks about rafting in Kullu. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
Himachal Pradesh, Kullu, rafting, 
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Sunday, October 10, 2010

आज, मुझसे शादी करोगी

इस चिट्ठी में डगलस ऐडम्स् की पुस्तक 'द हिचहाइकरस् गाइड टू द गैलैक्सी' की चर्चा के साथ आज की तारीख का सम्बन्ध बताया गया है।

Friday, October 08, 2010

पता नहीं हलुवा घी में, या घी हलुवे में तैर रहा था

इस चिट्ठी में, मणिकर्ण में स्थित राम मन्दिर और गुरुद्वारा की चर्चा है।

मणिकर्ण में राम मन्दिर है। इसकी कथा कुछ इस प्रकार है।

सोलहवी शताब्दी में कुल्लू प्रदेश पर राजा जगत सिंह का राज्य था। एक बार किसी ने राजा जगत सिंह के पास झूठी शिकायत कर दी कि टिपरी गांव (मणिकर्ण से २५ कि.मी.) के एक ब्राहम्ण के पास अनमोल मोती हैं, यह तो राजा के पास होने चाहिए।

राजा जब अगली बार मणिकर्ण आये तब ब्राहम्ण को बुलवा कर आदेश दिया कि राजकीय खजाने में जमा मोती  कर दो। लेकिन ब्राहाम्ण के पास मोती नहीं थे। वह जमा कैसे करता। 
 

राजा गांव में मोती लेने पहुँचा। ब्राहाम्ण ने डर के मारे अपने आपको परिवार सहित घर में बंद कर आत्मदाह कर लिया।

ब्राहम्ण हत्या के कारण राजा बीमार हो गया और किसी उपचार से ठीक नहीं हो सका। एक महात्मा ने, राजा को सलाह दी अयोध्या से भगवान रामचन्द्र जी की  मूर्ति मंगवा कर मणिकर्ण के मन्दिर में स्थापित कर राज पाठ भगवान रघुनाथ जी को अर्पण कर दें। तब बीमारी दूर हो सकती है। राजा ने ऎसा ही किया। उसके बाद राज्य  का काम भगवान रघुनाथ जी के दास के रूप में किया। उनके जीवन के अन्तिम २६ वर्ष यहीं बीते। 

 
कुल्लू के दशहरा मेला विश्व प्रसिद्व है। राजा जगतसिंह के समय से ही, इसका आरम्भ मणिकर्ण से होना शुरू हुआ था। तभी से , यह प्रथा आज भी चल रही है।

हम भगवान राम  के इस मंदिर को देखने गये। यहां लंगर चलता रहता है। हम लोगों ने दोपहर का खाना वहीं पर खाया। खाने में मोटा चावल, राजमां और कढ़ी थी। कढ़ी स्वाद में  मीठी  थी।  हम  लोगों ने भोजन किया।  इसके लिए पैसा नहीं देना पड़ता था पर जब मैं बाहर निकलने लगा तो देखा कि वहां पर एक पेटी रखी हुई है और उसमें लिखा हुआ था कि आप जो चाहे दान दे सकतें है। मुझे लगा कि हम लोगों ने खाना खाया है। इसलिए  कि कुछ न कुछ अवश्य  दान देना चाहिये मैंने सौ रूपये  पेटी में डाले।
 

हम लोगों को खाना खिलाते समय, एक बहुत सुन्दर नवयुवक रीबॉक का ट्रैक सूट पहने हुए खाना खिला रहा था । वह बाहर  मिला। मैंने उससे कहा,
'खाना बहुत अच्छा बना था क्या तुम खाना बनाने वाले को हमारी ओर से धन्यवाद दे सकते हो।'
उसने अपना नाम  चमन लाल बताया और कहा,
'आज खाना बनाने वाला नहीं आया था। इसलिए  आज का खाना मैंने बनाया है।'
यह भी कितने आश्चर्य की बात है कि  भगवान राम के मंदिर में, रीबॉक के ट्रैक सूट के साथ, खाना बनाने वाले बवर्ची के हाथों, हमने प्रसाद के रूप में भोजन खाया।

यहां पर एक गुरूद्वारा भी है। हम लोग गुरूद्वारे में भी गये। वहां पर भजन, कीर्तिन हो रहा था और प्रसाद में हलुवा मिल रहा था। मैंने इसे ग्रहण किया। पता नहीं लगता था कि हलुवा घी में,  या घी हलुवे में तैर रहा था। लेकिन हलुवे में अच्छी बात यह थी कि वह गर्म था और कम मीठा था। हलुवा खाने के बाद हाथ में लगे घी को  अपने बदन में लगा लिया।



देव भूमि, हिमाचल की यात्रा
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Saturday, October 02, 2010

और वह शर्मा गयी

इस चिट्ठी में तीर्थ मणिकर्ण के नामकरण और वहां के गर्म चश्में की कथा की चर्चा है।
मनाली से हम लोग सुबह नाशता कर मणिकर्ण के लिये निकले। काफी देर तक व्यास नदी के किनारे चलते रहे और उसके बाद बायें मुड़कर मणिकर्ण के लिए मुड़े तब हम लोगों के साथ रास्ते भर पार्वती नदी रही। यदि हम पुल से बायें न मुड़ते और सीधे चलते रहते तब कुछ ही दूर इन दोनों नदियों का संगम है। बायें मुड़ कर चलने पर कुछ देर बाद हमें मनाला हाई रोड इलेक्टिक प्रोजेक्ट  का  बिजली घर दिखाई पड़ा।
मनाला गांव में पानी इक्ट्ठा होता है। वहीं से पाइप के द्वारा एक सुरंग के जरिए  पहाड़ को पार करते हुए  नीचे जाता है। ताकि बिजली पैदा की जा सके। इससे लगभग ८६ मेगावाट बिजली तैयार की जाती है। वहां पर हमें कुछ विदेशी, इस प्रोजेक्ट के अन्दर जाने की इच्छुक लगे। हमारे साथ वहां के स्थानीय व्यक्ति जसवंत भी थे। मैंने उनसे पूछा, 
'क्या यह लोग प्रोजेक्ट देखने जा रहे हैं?'
जसवन्त ने बताया,
'नहीं, यह लोग नदी पार कर मनाला गांव में जायेंगे। वहां भांग पैदा होती है। वहां के लोग भांग का व्यापार करते है। यहां पर रहने वाले, ज्यादातर विदेशी  भांग खाते हैं। यह विदेशी भी भांग लेने मनाला गांव जा रहे है। मनाला में पहले केवल भांग का व्यापार के अलावा कुछ नहीं होता था। लेकिन सड़क बन जाने के बाद कुछ लोग पढ़ने लगें है।'
मणिकर्ण में एक गर्म पानी का फौव्वारा है। इसकी कथा कुछ इस प्रकार है।
 

पहाड़ में समान भेजने का तरीका
ब्रहम्माण्ड पुराण  के अनुसार एक बार शिव जी पार्वती जी के साथ मणिकर्ण आये। यहां की  सुन्दरता के कारण, यहीं रूक ११,००० वर्षों तक तपस्या में लीन रहे।

एक बार जलक्रीडा करते हुए पार्वती जी के कान के आभूषण की एक मणि जल में गिर कर पताल लोक में चली गई। खोई हुई मणि को ढूंढने के लिए भगवान शंकर ने अपने गणों को आदेश दिया। लेकिन मणि न मिली। 

शेषनाग पातालाधिपति तथा माणियों के स्वामी हैं। उन्हें, पार्वती जी के आभूषण  के बारे में पता चला। इस पर उन्होंने जोर से फुंकारा।  जिससे इस स्थान पर पृथ्वी में गर्म जल का फौव्वारा  प्रकट हो गयी।  इस फौव्वारे  से, पार्वती जी की मणि निकल आयी। 

कहा जाता है कि सन् १९०५ से पहले गर्म जल चश्मे से ११  से १४ फुट ऊंचा फुहारा बड़े वेग से निकलता तथा जिसमें से कभी-कभी मणियाँ (रंग बिरंगे पत्थर) निकलती थी। इसी से इस स्थान का नाम मणिकर्ण पड़ा। 
यहां पार्वती जी तपस्या करने के  कारण, पुराणों में इस स्थान को 'अर्द्घ नारी क्षेत्र' भी कहा गया है। भगवान शंकर को यह स्थान इतना प्रिय  है कि काशी में भी उनके स्थान का नाम 'मणिकर्णिका घाट' है।

महाभारत काल में देवराज इन्द्र द्वारा अर्जुन को दिए गए पाशुपतास्त्र चलाने के लिए अर्जुन की परीक्षा लेने के लिए भगवान शंकर जी ने किरात (भील) रूप धारण करके इस स्थान पर अर्जुन से युद्व करके अर्जुन को वरदान दिया था। 
मणिकर्ण के गर्म जल के विभिन्न चश्मों का तापमान ६४ सी से ८८ सेलसियस है।  चश्मों में गन्धक नहीं है। कहा जाता है यहाँ के कुण्डों में स्नान करने से गठिया इत्यादि रोग दूर हो जाते है।

हम लोग जब इस गर्म पानी के चश्में को देखने गये, उस समय एक प्यारी सी नवयुवती वहां पर गठरी लेकर आयी थी। उसने बताया,
'मैं गठरी में आलू लाई हूं। आलू के पराठे बनाने के लिये इसे उबाल रही हूं। बाद में, अचार के साथ खायेंगे।'
मैंने पूछा
'क्या हम लोग भी उसके साथ यह खाना खा सकते हैं'
वह शर्मा गयी और कोई जवाब नहीं दिया।                                                        
 

मणिकर्ण में, एक राम मन्दिर भी है। हम लोगो ने खाना वहीं खाया। बस इसी कारण आलू के पराठे न खा सके। इसकी कथा अगली बार। 
देव भूमि, हिमाचल की यात्रा
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Friday, September 24, 2010

भाषायें लुप्त हो जाती हैं - गणित के सिद्घान्त नहीं

इस चिट्ठी में, एयोस्टोलोस डॉक्सिएडिस द्वारा लिखित उपन्यास, 'अंकल पेट्रोस एण्ड गोल्डबाकस् कंजेक्चर' की चर्चा है।
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Friday, September 17, 2010

अपनी टूर दी फ्रांस - हिमाचल की साइकिल रेस

इस चिट्ठी में हिमाचल में हर साल आयोजित साइकिल रेस की चर्चा है।
हिमाचल में मणिकर्ण तीर्थ है। इसकी ऊंचाई समुद्र तल से २६५० मीटर (५,५०० फुट) है। सर्दियों में बर्फ भी गिरती है। यह स्थान अपेक्षाकृत ठंडा है। गर्मियों में मौसम सुहावना होता है। हम लोग मनाली से इसे भी देखने गये।

 
साईकिल रेस में मुश्किलें

हमें रास्ते में, खास तरह की साइकिल चलाते हुए लाल शर्ट और लाल नेकर और हेलमेट पहने हुए कई युवक दिखाई पड़े। मुझे लगा कि ये लोग किसी रेस में भाग ले रहे हैं। उसके बाद एक पिकअप भी दिखायी पड़ी। जिसमे उसी तरह के कपड़े पहने हुए लोग बैठे थे। हमने पिकअप को हाथ देकर रोका और इस बारे में बात की। 

पिकअप में बैठे लोगों से पता चला कि वे लोग इण्डो बार्डर फ़ोर्स के है और रेस का अभ्यास कर रहे हैं। यह रेस में  शिमला से मनाली तक की है। इसमें कई दिन लगते है। हिमाचल प्रदेश की सरकार इस रेस को हर साल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए करवाती है। यह अन्तराष्ट्रीय रेस है। इसमें देश विदेश से लोग आते हैं। पिछले साल इसे  किसी नेपाली ने जीता था। वे लोग उसी का अभ्यास कर रहे थे। मुझे लगा कि यह रेस कुछ टूर दी फ्रांस में होने वाली रेस है।


मैंने इस साइकिल रेस के बारे में कुछ और पता किया तो पता चला कि यह पांचवी साइकिल रेस है।  इस बार यह हरक्यूलिक्स माउन्टेन रैली के नाम से जानी जा रही है। यह दस दिन में पूरी होगी। यह २७ सितम्बर २००९ को शिमला के पीटल हाल होटल से शुरू होगी। साईकिल चालक विभिन्न जगहों से होते हुए मनाली पहुंचेगें। ६ अक्टूबर को पुरस्कार दिया जायेगा। 
साईकिल रेस में कैम्प का दृश्य

इस रैली में करीब ३५ लाख रुपया खर्च होगा और विजयी चालक को आठ लाख रुपया इनाम मिलेगा। इस रैली में कुल ४० चालक भाग ले रहे है जो आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड ,अमेरिका, इंग्लैंड और भारत से आयें हैं। सबसे अधिक १९ सदस्य इसमें नौसेना के है।  इसकी कुल दूरी ६५२ किमी यानी लगभग ६५ किमी प्रतिदिन इन लोगों को अपनी साइकिल चलाना होगा।

दुनिया की प्रसिद्ध साइकिल रेसों में, टूर दी फ्रांस (Tour de France), जाइरो द'इटैलिआ (Giro d'Italia), टूर ऑफ एरेट्रिआ (Tour the Eritrea) हैं।

  • टूर दी फ्रांस दुनिया की सबसे पुरानी और सबसे प्रसिद्ध साइकिल रेस है। यह १९०३ में शुरू हुई। यह २१ दिन चलने वाली लगभग ३६०० किलोमीटर लम्बी रेस है।
  • जाइरो द'इटैलिआ या जाइरो  टूर दी फ्रांस से प्रेरित है। यह १९०९ में शुरू हुई। यह २१ दिन चलने वाली लगभग २४५० किलोमीटर लम्बी रेस है
  • एरेट्रिआ उत्तरी पूर्वी हिस्से में समुद्र से लगा, सोमालिया और इथिओपिया से घिरा देश है।  टूर ऑफ एरेट्रिआ सबसे पहली बार १९४६ में हुई। बीच में, उनके देश की परेशानी की वजह से यह बन्द हो गयी लेकिन २००१ से यह पुनः शुरू हो गयी। यह १० दिन चलने वाली, लगभग ११२० किलोमीटर लम्बी रेस है।
क्या हिमाचल की साइकिल रेस भी इनकी तरह प्रसिद्ध हो पायेगी? हम आशा तो कर ही सकते हैं। 

वर्ष २०१० में, यह रेस २२ अक्टूबर को शुरू हो रही है। इसके बारे में विस्तार से यहां पढ़ सकते हैं और यदि आप भाग लेने में इच्छुक हों तो रजिस्टर करवा सकते हैं।
 
इस साईकिल रेस के पहली प्रतियोगिता के कुछ चित्र नीचे देखें।


इस श्रृंखला की अगली कड़ी में हम लोग मणिकर्ण तीर्थ रास्ते का आनन्द लेंगे और जानेगे कि इसका नाम मणिकर्ण क्यों पड़ा।

इस चिट्ठी के दाहिने तरफ के चित्र मेरे द्वारा खींचे नहीं है वे यहां से हैं। जहां इस रेस के अन्य सुन्दर चित्र देख सकते हैं।

देव भूमि, हिमाचल की यात्रा
वह सफेद चमकीला कुर्ता और चूड़ीदार पहने थी।। यह तो धोखा देने की बात हुई।। पाडंवों ने अज्ञातवास पिंजौर में बिताया।। अखबारों में लेख निकले, उसके बाद सरकार जागी।। जहां हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बंटवारे की बात हुई हो, वहां मीटिंग नहीं करेंगे।। बात करनी होगी और चित्र खिंचवाना होगा - अजीब शर्त है।। हनुमान जी ने दी मजाक बनाने की सजा।। छोटे बांध बनाना, बड़े बांध बनाने से ज्यादा अच्छा है।। लगता है कि विंडोज़ पर काम करना सीख ही लूं।। गाड़ी से आंटा लेते आना, रोटी बनानी है।। बच्चों का दिमाग, कितनी ऊर्जा, कितनी सोचने की शक्ति।। यह माईक की सबसे बडी भूल थी।। भारत में आधारभूत संरचना है ही नहीं।। सुनते तो हो नहीं, जो करना हो सो करो।। रानी मुकर्जी हों साथ, जगह तो सुन्दर ही लगेगी।। उसकी यह अदा भा गयी।। यह बौद्व मंदिर है न कि हिन्दू मंदिर।। रास्ता तो एक ही है, भाग कर जायेंगे कैसे।। वह कुछ असमंजस में पड़ गयी।। हमने भगवान शिव को याद किया और आप मिल गये।। अपनी टूर दी फ्रांस - हिमाचल की साइकिल रेस।। आप, क्यों नहीं, इसके बाल खींच कर देखते।।
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About this post in Hindi-Roman and English is chitthi mein, himachal kee anterrashtreey cycle race kee charchaa hai. yeh {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen. 

This post is about international cycle race in Himachal.  It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
Himachal Pradesh, Manali,cycle race, Himachal cycle race,
Travel, Travel, travel and places, Travel journal, Travel literature, travel, travelogue, सैर सपाटा, सैर-सपाटा, यात्रा वृत्तांत, यात्रा-विवरण, यात्रा विवरण, यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण, मस्ती, जी भर कर जियो,  मौज मस्ती,
Hindi, हिन्दी,

Thursday, September 09, 2010

वह कुछ असमंजस में पड़ गयी

इस चिट्ठी में, मनाली  के  जॉन्सन होटल में स्मोकड ट्राउट और शाकाहरी पास्ता खाने की चर्चा है।

मेरे एक मित्र अक्सर मनाली आते है यह उनकी पसंद की जगह है। उन्होंने मुझसे मनाली  के  जॉन्सन होटल में स्मोकड ट्राउट और शाकाहरी पास्ता खाने के लिए कहा था। हम लोग एक दिन दोपहर के खाने वहां गये। उनके मेनू में स्मोकड ट्राउट  डिश नहीं थी। मैंने वेटर से कहा, 
'हम बहुत दूर से मनाली में आयें हैं। हम आपके रेस्त्रां में केवल इसीलिए आयें हैं। क्योंकि मेरे मित्र ने यहां पर स्मोकड ट्राउट खाने की सलाह दी थी। लेकिन यह व्यंजन आपके मेनू में नहीं है।'
उसने कहा,
'यह सच है कि यह डिश मेनू में नहीं है। हम इसके लिए अलग से आर्डर लेते हैं।  यह तैयार नही है। इसको तैयार करने में करीब सवा घण्टा लगेगा। आप इसकी जगह पर बेक्ड फ़िश ले ले।'
मैंने कहा, 
'मैं तो यहां पर स्मोक्ड फिश खाने आया हूं। मै बेक्ड डिश न लूँगा। समय की चिन्ता न करे हम इन्तेजार करेंगें।'
जब तक हम लोगों का खाना आये तब तक मेरी पत्नी ने अपने लिये गर्म काफ़ी के लिए और मैंने अपने लिए ग्रास हॉपर नाम की मॉक्टेल आर्डर की।

ग्रास हॉपर मॉक्टेल, पाइनेपिल जूस और आइसक्रीम मिलाकर बनाईं जाती है।  मुझे अपनी साउथ अफ्रीका यात्रा की याद आयी। वहां पर जब मैंने माकटेल के बारे में पूछा था तब उन्होंने इसके बारे में अभिज्ञन्नता जतायी थी और मुझे उन्हे इसे बताने का तरीका बताना पड़ा था।

यह एक बहुत ही अच्छा रेस्त्रां है जिसमे बहुत सारे विदेशी लोग भी थे। इसमें बार भी है। उसमें जितने भी लोग थे हम लोगों को छोड़कर सब बीयर या वाइन ले रहे थे। यह महँगा रेस्त्रां है। थोड़ी देर बाद, वहां पर एक प्यारा सा कॉकर स्पेनियल कुत्ता आ गया। वह मेरे पास बैठ गया। मैंने उसे प्यार किया। थोड़ी देर बाद उसका केयर टेकर, उसे ले गयी। अधिकतर लोगों को खाने की जगह पर कुत्ते पसंद नहीं आते।
जॉन्सन होटेल में जिस कुत्ते से मेरी मुलाकात हुई थी अपनी केयर टेकर के साथ

जब वेटर मेरे लिए स्मोक्ड फिश ला रहा था तब बगल की टेबुल पर एक प्यारा सा नवविवाहित जोड़ा बैठा था। युवती ने वेटर से उस डिश के बारे में पूछा। वेटर के बताने पर कि यह स्मोक्ड फिश है तब उस युवती ने कहा, वह भी यही डिश खाना चाहती थी। क्योंकि उसे भी इसे खाने के लिए सलाह दी गयी थी। लेकिन  समय की कमी होने के कारण उसने अपने लिए बेक्ड फिश का आर्डर दिया। 

मैंने उस युवती से कुछ स्मोक्ड फिश लेने और उससे कुछ उसकी बेक्ड फिश मुझे देने की पेशकश की। लेकिन वह कुछ अजमंजस में पड़ गयी। अपने देश में किसी युवती को, एक अजनबी के साथ, इस तरह का व्यवहार करने में हिचक महसूस होती है। उसे समझ में नहीं आया कि क्या करे। उसने अपने पति की ओर देखा पर वह चुप्पी साध गया। उस युवती ने मुझसे कहा कि रहने दीजिये। मैंने भी जोर नहीं दिया।

वेटर ने बताया, स्मोक्ड ट्राउट ओवन में बनायी जाती है धुंये से पकायी जाती है और इसीलिए इसे स्मोक्ड ट्राउट कहा जाता है। यह सच है कि मुझे मछली अच्छी लगती है। लेकिन शायद, यह ऎसी नहीं थी जिसके बिना मैं रह नही सकता था। फिर भी यह अपने में अलग तरह का अनुभव था। 

मैं मनाली में अपना लैपटॉप नहीं ले गया था। इसलिये साइबर कैफे जाना चाहता था। जॉन्सन होटल में वेटर ने, साइबर कैफे का पता बता दिया था। मैं अपनी पत्नी को रेस्ट्रॉं में छोड़ कर, साइबर कैफ़े में चला गया। जहां मेरी मुलाकात शिव भक्तों से हुई जो हिन्दी में टाईप करने के लिये परेशान थे। इसकी चर्चा मैंने अपनी चिट्ठी 'हमने भगवान शिव को याद किया और आप मिल गये' की है। 


हिमाचल में मणिकर्ण तीर्थ है। वहां जाते समय, रास्ते में, साइकिल रेस का अभ्यास करते समय कुछ लोगों से मुलाकात हुई। अगली बार इस साइकिल रेस के बारे में चर्चा करेंगे।  

देव भूमि, हिमाचल की यात्रा
वह सफेद चमकीला कुर्ता और चूड़ीदार पहने थी।। यह तो धोखा देने की बात हुई।। पाडंवों ने अज्ञातवास पिंजौर में बिताया।। अखबारों में लेख निकले, उसके बाद सरकार जागी।। जहां हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बंटवारे की बात हुई हो, वहां मीटिंग नहीं करेंगे।। बात करनी होगी और चित्र खिंचवाना होगा - अजीब शर्त है।। हनुमान जी ने दी मजाक बनाने की सजा।। छोटे बांध बनाना, बड़े बांध बनाने से ज्यादा अच्छा है।। लगता है कि विंडोज़ पर काम करना सीख ही लूं।। गाड़ी से आंटा लेते आना, रोटी बनानी है।। बच्चों का दिमाग, कितनी ऊर्जा, कितनी सोचने की शक्ति।। यह माईक की सबसे बडी भूल थी।। भारत में आधारभूत संरचना है ही नहीं।। सुनते तो हो नहीं, जो करना हो सो करो।। रानी मुकर्जी हों साथ, जगह तो सुन्दर ही लगेगी।। उसकी यह अदा भा गयी।। यह बौद्व मंदिर है न कि हिन्दू मंदिर।। रास्ता तो एक ही है, भाग कर जायेंगे कैसे।। वह कुछ असमंजस में पड़ गयी।। हमने भगवान शिव को याद किया और आप मिल गये।। क्या हिमाचल की साइकिल रेस टूर दी फ्रांस की तरह प्रसिद्ध हो पायेगी।। आप, क्यों नहीं, इसके बाल खींच कर देखते।।

हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi
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About this post in Hindi-Roman and English is chitthi mein, manali mein ke jonson hotel mein smoked trout or vegetable pasta khane kee charchaa hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.
This post is about our lunch of smoked trout and vegetable pasta at Jonson hotel in Manali. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
Travel, Travel, travel and places, Travel journal, Travel literature, travel, travelogue, सैर सपाटा, सैर-सपाटा, यात्रा वृत्तांत, यात्रा-विवरण, यात्रा विवरण, यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण, मस्ती, जी भर कर जियो,  मौज मस्ती,
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Friday, September 03, 2010

क्या कंप्यूटर व्यक्तियों की जगह ले सकते हैं

इस चिट्ठी में, रॉजर पेनरोज़ के द्वारा लिखी 'द एमपररस् न्यू माइण्ड: कंसर्निग कंप्यूटरस्‌, माइण्डस् एण्ड द लॉज़ ऑफ फिज़िक्स' पुस्तक की समीक्षा है। 
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, 'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने' देखें।

Friday, August 27, 2010

रास्ता तो एक ही है, भाग कर जायेंगे कैसे

इस चिट्ठी में मनाली में एक रोचक व्यक्ति राजेन्द्र कुमार से मुलाकात।

हम जब मनाली में, वन विहार से बाहर निकल कर, रोड़ पर जा रहे थे तब एक मारूति कार रुकी। उसे चला रहे व्यक्ति ने पूछा, 
'क्या आपको गाड़ी चाहिए।'
मैनें पूछा कि आप मुझे गाड़ी किराये पर देंगे तो क्या ड्राइवर भी साथ में रहेगा या मुझे चलाने के लिए देंगे उसने कहा,
'यदि आप चाहेंगे तो ड्राइवर भी दिया जायेगा और केवल गाड़ी लेना चाहेंगे तो गाड़ी अकेले भी दी जा सकती है।'
मैंने कहा कि यदि मैं गाड़ी लेकर भाग गया तब। उसने कहा,
'आप देखने से बहुत सभ्य लगते हैं। आप नहीं भागेंगे।'
फिर मुस्करा कर बोला
'यहां से बाहर जाने का एक ही रास्ता है आप जायेंगे कहां?'
मुझे वह व्यक्ति थोड़ा सा रोचक लगा।  मैंने कहा कि आइये चाय पर बात करते है।  हम लोग चाय पीने बगल के एक रेस्त्रां में गये।
राजेन्द्र कुमार के साथ चाय का आनन्द
इस व्यक्ति ने अपना नाम राजेन्द्र कुमार बताया और कहा, 
'मेरी पत्नी अस्पताल में नर्स है। हमारा डेढ़ साल का एक बच्चा है। मैं एलआईसी का एजेंट हूं और टैक्सी से लोगों को जगहें घुमाने का भी काम करता हूं।'
हम लोगों ने काफी देर बात की मैने उससे पूछा कि आप सड़क पर चलते हुए पूछ रहे थे। क्या आप किसी होटल से नहीं जुड़े हैं या क्या कोई ऎसी जगह नहीं है जहां पर आपकी टैक्सी का रजिस्ट्रेशन होता हो ताकि लोग आपको बुला सकें।
 

राजेन्द्र जी ने बताया,
'ऐसा होता है। लेकिन कभी कभी ऐसे भी लोग मिल जाते है। इसलिए मैंने आपसे पूछा।'
मैंने उसको सुझाव दिया कि आप क्यों नहीं सारी सूचना अन्तरजाल पर डालते  और अपने बारे में लिखते हैं। इसमें किराये को भी लिखे। मैंने उसे अपनी साउथ अफ्रीका की यात्रा के बारे में बताया कि कैसे अंतरजाल पर हमने क्रुगर पार्क घूमने का इंतज़ाम किया था। उसने कहा,
'विचार तो अच्छा है। मैं स्वयं बहुत दिनों से कंप्यूटर लेने की बात सोच रहा हूं।'
इसी के साथ हम लोगों ने विदा ली। वह दूसरा ग्राहक ढूंढने के लिए चल दिया और हम लोग अपने होटल आ गये।

अगली बार मनाली के जॉन्सन होटल में स्मोकड ट्राउट और शाकाहरी पास्ता खाने चलेंगे।

देव भूमि, हिमाचल की यात्रा
वह सफेद चमकीला कुर्ता और चूड़ीदार पहने थी।। यह तो धोखा देने की बात हुई।। पाडंवों ने अज्ञातवास पिंजौर में बिताया।। अखबारों में लेख निकले, उसके बाद सरकार जागी।। जहां हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बंटवारे की बात हुई हो, वहां मीटिंग नहीं करेंगे।। बात करनी होगी और चित्र खिंचवाना होगा - अजीब शर्त है।। हनुमान जी ने दी मजाक बनाने की सजा।। छोटे बांध बनाना, बड़े बांध बनाने से ज्यादा अच्छा है।। लगता है कि विंडोज़ पर काम करना सीख ही लूं।। गाड़ी से आंटा लेते आना, रोटी बनानी है।। बच्चों का दिमाग, कितनी ऊर्जा, कितनी सोचने की शक्ति।। यह माईक की सबसे बडी भूल थी।। भारत में आधारभूत संरचना है ही नहीं।। सुनते तो हो नहीं, जो करना हो सो करो।। रानी मुकर्जी हों साथ, जगह तो सुन्दर ही लगेगी।। उसकी यह अदा भा गयी।। यह बौद्व मंदिर है न कि हिन्दू मंदिर।। रास्ता तो एक ही है, भाग कर जायेंगे कैसे।। हमने भगवान शिव को याद किया और आप मिल गये।। आप, क्यों नहीं, इसके बाल खींच कर देखते।।
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यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, 
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About this post in Hindi-Roman and English is chitthi mein, manali mein ek rochak vyakti Rajendra Kumar se mulakat kee charchaa hai. yeh {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.
This post is about my meeting with an interesting person Rajendra Kumar tin Manali.  It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.
सांकेतिक शब्द
Travel, Travel, travel and places, Travel journal, Travel literature, travel, travelogue, सैर सपाटा, सैर-सपाटा, यात्रा वृत्तांत, यात्रा-विवरण, यात्रा विवरण, यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण, मस्ती, जी भर कर जियो,  मौज मस्ती,
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