Saturday, June 26, 2010

यह माईक की सबसे बडी भूल थी

इस चिट्ठी में, मनाली में इस्रायली खाना, और वहां पर गोवा में क्रिकेट की कोचिंग करते ऑस्ट्रेलिया दम्पत्ति से मुलाकात की चर्चा है।

हम लोग जब कस्बे से, मनाली के लिये चले थे तब एक मित्र ने कहा था,
'मनाली में ड्रैगन गेस्ट हाउस हैं। वहां ईस्रायली खाना मिलता है। उसे जरूर खा कर आना।'
मनु के मन्दिर से वापस आते समय, हम लोग डैग्रन गेस्ट हाउस को ढूढ़ने लगे। उसे ढूढ़ंते समय, हमारी मुलाकात एक विदेशी दम्पत्ति से हुई। हमने उन्हीं से इसका पता पूछा। वे लोग वहीं ठहरे थे। उन्होंने हमें रास्ता बताया और कहा,
'हम लोग वहीं ठहरे है। क्या आप भी वहीं ठहरने जा रहे है?
हमने बताया कि हम लोग वहां पर इस्रायली खाना खाने के लिए जा रहे है। कुछ देर इनसे बात हुई। इनका नाम माईक और पैटी था। मैंने माईक और पैटी से कहा कि वे भी हमारे साथ क्यों नहीं खाना खाते हैं। कुछ देर, सोचने के बाद, वे हमारे साथ खाना खाने आ गये।

माइक और पैटी अस्ट्रेलिया के हैं। वे बहुत सालों से, गोवा में रह रहे हैं। माइक वहां क्रिकेट की कोचिंग करते हैं। माईक न्यू-साउथ वेल्स की तरफ से खेला करते थे। वे १९८२ में, इंग्लैण्ड में काउंट्री क्रिकेट खेल रहे थे तभी हिन्दुस्तान आ गये। जब माइक बता रहा था तब पैटी ने कहा, 

'यह माईक के जीवन की सबसे बडी भूल थी। क्योंकि तभी उसके पास वह अस्ट्रेलिया की तरफ से खेलने के लिए तार आया था। लेकिन, किसी को नहीं मालूम था कि माईक कहां पर हैं। इसलिए न उससे बात हो पायी, न ही वह आस्ट्रेलिया के लिए  खेल पाया।'
माइक मुख्यत: लेग स्पिनर हैं। उसने कहा,
'पिछली बार आइपीएल में, मेरे द्वारा कोच किया गया एक लडके का चयन बंगलोर की तरफ से खेलने के लिए हो गया था। लेकिन प्रैक्टिस करते समय उसके अंगूठे में चोट लग गयी थी। जिसके कारण वह आइपीएल में नहीं खेल सका।'
शायद दुर्भाग्य अभी तक उसका साथ नहीं छोड़ रहा है। भगवान करे कि उसका कोच किया हुआ लड़का, भारत की तरफ से खेले। 

हम लोगों ने उन्हें बताया कि हम लोग शाकाहारी भोजन करेगे। इस पर उन्होंने  शाकाहारी व्यंजन शुशुका, ग्रिल्ड वेजीटेबल हम्मस (Grilled Vegetable Hummus),  पीटा ब्रेड के साथ खाने की सलाह दी। हम लोगों ने उन्हीं के सुझाव पर,इसे खाने के लिए ऑर्डर किया।

  • शुशुका, चना और अंडे के साथ बना हुआ एक व्यंजन है।
  • ग्रिल्ड वेज़ीटेबिल हम्मस,  चने  लहसुन के साथ पीसकर बनाया गया व्यंजन है। मुझे यह पसंद आया।
  • पीटा ब्रेड,  तंदूरी रोटी की तरह,  पर उससे पतली थी।
मनाली में शराब आसानी से मिलती है। अधिकतर रेस्तरां रेस्तरां बार भी है। मैं शराब नहीं पीता हूं। लेकिन मैंने माइक और पैटी से पूछा कि क्या वह वाइन या अन्य किस्म की शराब लेना पसन्द करेगें। इस पर माइक ने कहा,
'मैं खिलाड़ी हूं। शराब का सेवन नहीं करता। हम लोग इसे न लेगे।'
खाना खाने के बाद माइक ने पैसा देने की बात की। मैने कहा,
'हमने आपको आमंत्रित किया है। इसलिए पैसा हम ही देगें।'
काफी देर तक बहस के बाद,  उन्होनें  हमें पैसा देने दिया।

इस श्रृंखला की अगली कड़ी में हम लोग रोहतांग पांइट चलेंगे। वहां अन्य लोगों के साथ, जापानी महिलाओं से बात करेंगे कि वे क्या हमारे देश के बारे में क्या सोचती हैं और हो सका तब लौटते समय पैरा-ग्लाइडिंग का आनन्द लेगें।

देव भूमि, हिमाचल की यात्रा
वह सफेद चमकीला कुर्ता और चूड़ीदार पहने थी।। यह तो धोखा देने की बात हुई।। पाडंवों ने अज्ञातवास पिंजौर में बिताया।। अखबारों में लेख निकले, उसके बाद सरकार जागी।। जहां हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के बंटवारे की बात हुई हो, वहां मीटिंग नहीं करेंगे।। बात करनी होगी और चित्र खिंचवाना होगा - अजीब शर्त है।। हनुमान जी ने दी मजाक बनाने की सजा।। छोटे बांध बनाना, बड़े बांध बनाने से ज्यादा अच्छा है।। लगता है कि विंडोज़ पर काम करना सीख ही लूं।। गाड़ी से आंटा लेते आना, रोटी बनानी है।। बच्चों का दिमाग, कितनी ऊर्जा, कितनी सोचने की शक्ति।। यह माईक की सबसे बडी भूल थी।।  हमने भगवान शिव को याद किया और आप मिल गये।। आप, क्यों नहीं, इसके बाल खींच कर देखते।।

हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi
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This post talks about Israilee food in Manali and our meeting with Australian cricket coach in Goa. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
।Dragon guest house, Israeli cuisine, Jewish cuisine,
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Thursday, June 17, 2010

बच्चों का दिमाग, कितनी ऊर्जा, कितनी सोचने की शक्ति

मनाली में, सबसे पहले, हम मंदिरों को देखने के लिए, पुरानी मनाली गये। इस चिट्ठी में हिडिम्बा और मनु मन्दिर की चर्चा है।

हिडिम्बा मन्दिर
मनाली में हिडिम्बा का मंदिर है।  कहा जाता है कि यहीं पर भीम की मुलाकात हिडिम्बा से हुई थी। हिडिम्बा को काली का अवतार का अवतार कहा गया है। इसी कारण इस मंदिर के अन्दर दुर्गा की मूर्ति भी है। इस मंदिर में, हिडिम्बा के पैर के ही निशान हैं जो कि एक गुफा के अन्दर हैं।

इसके चारो तरफ मंदिर बना हुआ है। इस  हिस्से को राजा बहादुर सिंह ने १५५३ बनवाया था। हिडिम्बा के मंदिर में, बाहर की तरफ बहुत सारी सींगें लगी थीं। मैंने इसका कारण पूछा तब बताया गया कि यहां पर जानवरों की बलि दी जाती है और उसके बाद उनकी सींग यहीं पर टांग दी जाती है।
मनु मन्दिर

कहा जाता है कि मनाली में, महर्षि मनु ने तपस्या की थी। इसी लिये, इस जगह को पहले मनुआलय कहा गया। बाद में, यह मनाली हो गया। जिस जगह मनु ने तपस्या की थी वहीं पर उनका मन्दिर बना दिया गया। हिडिम्बा के मन्दिर देखने के बाद, हम लोग मनु के मन्दिर को भी देखने गये।

रास्ते में लोग, ताश खेल रहे थे। उन्होने बताया,
'सीज़न के समय पर्यटको के कारण, दम मारने की फुरसत नहीं रहती लेकिन जब सीज़न न हो, तब समय ही समय रहता है। इस समय हम लोग ताश खेलकर अपना मनोरंजन करते हैं।'
वे लोग टिल्ली नामक खेल खेल रहे थे । जब उन्होने विस्तार से इस खेल के बारे में  बताया तब मुझे लगा कि यह रमी की तरह का ही खेल है। एक बार जीतने पर ५ प्वाइंट मिलते  हैं। २१ प्वाइंट जीत जाने पर जितने पैसे की शर्त हो वह जीत लेता है। वे लोग ५०/-रूपये शर्त के साथ खेल रहे थे।

मनु के मंदिर में, बहुत सारे बच्चे थे। वे कुछ अजीब सा खेल खेल रहे थे। मैंने पूछा कि यह कौन सा खेल है उन्होंने बताया कि वे घोड़ा-घोड़ा खेल रहें है। इसमें दीवाल के सहारे, झुक एक लड़का खड़ा हो जाता था। उसके बाद उसके पीछे से एक लड़का दौड़ता हुआ आता था और उसकी पीठ पर चढ़ जाता था। उसके बाद घोड़े बने लड़के को, दूसरे को गिराना होता है। यदि पीठ पर चढ़ा लड़का, गिर जाता था तब वह घोडा बनता था। इनमें से एक लड़का बड़ा था। मैंने उससे कहा कि तुम तो बहुत बड़े हो। उसने बताया,
'इसीलिए मै अकेले हूं और बाकी तीन लड़के एक साथ खेल रहे हैं।'
मैंने न यह खेल कभी अपने बचपन में खेला, न इसके पहले कभी सुना था। मनाली मैदान नहीं हैं। इसीलिये बच्चों ने यह खेल निकाल लिया। बच्चों के दिमाग में कितनी ऊर्जा और सोचने की शक्ति होती है। वे मनोरंजन के लिए कैसे तरह, तरह के खेल निकाल लेते हैं।

इस श्रृंखला की अगली चिट्ठी में, मनाली में इस्रायली खाना और वहां पर गोवा में क्रिकेट की कोचिंग करते ऑस्ट्रेलिया दम्पत्ति से मुलाकात की चर्चा होगी।

देव भूमि, हिमाचल की यात्रा
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Friday, June 11, 2010

नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है

यह चित्र आईसीएम २०१० की वेबसाइट के सौजन्य से
कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, गणित के तर्क शास्त्र पर चलता है। कंप्यूटर वायरस, इसकी कमियों का फायदा उठाते हैं। इसलिये साइबर अपराध की श्रृंखला में, साइबर अपराधों के बारे में बात करने से पहले, कुछ बातें  गणित के प्रसिद्ध २३ सवालों, और तर्क शास्त्र के क्षेत्र से, स्वयं को संदर्भित करने वाले विरोधाभास के बारे में। 
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Tuesday, June 01, 2010

गाड़ी से आंटा लेते आना, रोटी बनानी है

स्टर्लिंग रिज़ॉर्ट कुछ अलग तरह के रुकने की जगहें हैं।
इस चिट्ठी में मनाली में स्टर्लिंग रिज़ॉर्ट की चर्चा है।

हम लोगों का आरक्षण स्टर्लिंग रिज़ॉर्ट में था। इनके बहुत से रिज़ॉर्ट भारत वर्ष में हैं। यह अच्छे होटल हैं पर कुछ अलग तरह के हैं। इनके कमरों में ही छोटा सा किचन होता है जिसमें आप खाना भी बना सकते हैं।

मनाली के स्टर्लिंग रिज़ॉर्ट में दो ब्लॉक थे। एक ब्लॉक में किचन था पर दूसरे में नहीं। किचन में, हर तरह के बर्तन थे। हम लोग किचन वाले ब्लॉक में थे। मैं नहीं जानता की यह विचार कहां से लिया गया। मुझे यह व्यवहारिक नहीं लगता था क्योंकि मेरे विचार में लोग अक्सर घूमने के लिए जाते है और खाना बनाने में व्यस्त नहीं रहना चाहते है पर मैं गलत था। शुरू में, उलझन भी लगी पर धीरे धीरे मज़ा आने लगा।

इसमे मुझे कुछ कमियां लगीं। आजकल तो मामूली होटल में भी बिजली की केतली, चाय, चीनी, दूध पैकेट रखे रहते है। सारे होटलों में, स्वयं चाय बनाने की बात रहती है लेकिन यहां पर बर्तनो में न तो बिजली की केटली थी, न चाय, दूध चीनी के पैकेट थे। वहां पर बिजली का एक हीटर था। चाय हीटर में गर्म करके बनानी होती थी। इसमें ज्यादा बर्तन गन्दे होते हैं फिर उन्हें धोना भी पड़ता है। जितने कम बर्तनों का प्रयोग हो, उतना ही अच्छा होता है।

स्टर्लिंग का इसी तरह का रिज़ॉर्ट ऊटी में भी है। हम लोग वहां दस साल पहले ठहरे थे। लेकिन ऊटी में सबसे अच्छी बात यह थी कि वहां पर रिज़ॉर्ट के अंदर ही एक छोटी से दुकान थी जिसके यहां आप सब चीजें खरीद सकते थे। यहां पर सामान खरीदने के लिए होटल के बाहर जाना पड़ता था। लेकिन रोड़ पार करते ही, एक दुकान थी जहां पर सारी चीजें मिल जाती थीं।

मैंने स्वागत कक्ष पर रखी शिकायत पुस्तक में इस बात को लिखा कि वे इन कमरों में बिजली की केटली, टी बैग, मिल्क वगैरह की सुविधा दें। इसका पैसा वे चाहें तो अलग से ले लें। हो सकता है कि जब आप वहां कभी जायें, तो यह सुविधा मिले। तब मुझे धन्यवाद देना न भूलियेगा।


बिजली की केटली न होने कारण शुरू में उलझन लगी। लेकिन मुझे कभी, कभी पीठ में दर्द होता है इसलिये हम बिजली की केटली भी साथ रखते हैं ताकि जरूरत पड़ने पर पानी गरम कर, गर्म पानी की बोतल से पीठ सेकी जा सके। हम इस बार भी बिजली की केटली साथ ले गये थे। इसलिये चाय बनाने में उलझन नहीं हुई।
सफाई करने की भी जिम्मेवारी मेरी थी।

हम लोग सुबह जाकर डबल रोटी, ब्रेड, अंडे, प्याज, रिफाइन तेल का छोटा पैकेट दूध, १०० ग्राम चीनी और कुरकुरे खरीद लाये। मैं अपने लिए आमलेट बनाता था। टोस्ट को हम रिफाइन आयल में फ्राई करते थे। अमूल दूध का एक पैकेट भी खरीद लिया था। मेरी पत्नी आमलेट की जगह उबला अंडा पसन्द करती थी। नाश्ता बनाने की जिम्मेदारी मेरी रहती थी। इस काम में आनन्द आने लगा।

हम लोग रात का खाना नहीं बनाते थे। लगता है बहुत से लोग रात का खाना बनाते है क्योंकि पहले दिन हम लोग रात का खाना खाने जा रहे थे। ऊपर से एक महिला की आवाज सुनायी पड़ी। वह अपने पति से कह रही थी।

'गाड़ी में आटा रखा है, लेते आना, रोटी बनानी है'।
मैने स्वागत कक्ष में पूछा कि कितने लोग स्वयं अपना खाना भी बनाते हैं। स्वागत कक्ष पर युवक ने बताया,
'उसमें सुबह की चाय सब अपने आप बनाते हैं। ५० प्रतिशत लोग नाश्ता भी स्वयं बनाते है। २० प्रतिशत लोग नाश्ते के साथ रात का खाना भी स्वयं बनाते है। क्योंकि घर का बना हुआ खाना उबला हुआ, बिना मसाले का होता है जो कि होटल के खाने से कहीं बेहतर है। रोज़ रोज़  बाहर का खाना खाते खाते आदमी ऊब जाता है। दोपहर का खाना लोग बाहर खाते हैं।'

यानि कि, हम ५० प्रतिशत लोग जैसे थे जो सुबह का नाश्ता स्वयं बनाते थे। यह भी, छुट्टियों का आनन्द लेने का अलग तरह से तरीका है। जो कि शायद समान्य तरह के होटल में रहकर पूरा नहीं हो सकता है। यह भी सच है कि रोज़  बाहर का खाना भी नहीं खाया जा सकता है।

स्टर्लिंग रिज़ॉर्ट में, प्रत्येक शाम को कुछ न कुछ गतिविधि होती रहती थी - कभी बुझौवल, तो कभी ज्ञान विज्ञान, प्रतियोगिता कभी कविताओं की तो कभी गानों की शाम। एक व्यक्ति हम लोगों को रोज उसमें भाग लेने के लिये फोन करता था। लेकिन हम इतने थके रहते थे कि वहां नहीं जा पाते थे।

एक रात को खाना खा कर लौट रहे थे, एक हॉल से गाने की आवाज आ रही थी। उस दिन शाम को वही गतिविधि थी। हम लोग वहां रुके अच्छा लगा। ईश्वर ने बहुत कुछ मुझे दिया पर संगीत, नृत्य चित्रकारी, कविता जैसी बेहतरीन विधाओं को से दूर रखा। ऐसी जगह जा कर लगता है कि मैंने क्यों नहीं बचपन में इनमें रुचि ली। यदि लेता तो शायद आज बात अलग होती है।


स्टर्निंग रिज़ॉर्ट  में मुझे एक बात अजीब लगी। एक दिन जब रात्रि में खाना खाकर वापस आये तो हमारे कमरे में सिगरेट की बदबू आ रही थी। हमारी समझ में नहीं आया कि यह कैसे हो गया क्योंकि, हमारे कमरे में कोई नहीं आया था। बाद में इसका कारण, हमारी समझ में आया।

रिज़ॉर्ट की लॉबी में स्मोकिंग करना मना था। लेकिन कमरों में स्मोकिंग करना मना नहीं था। यानी कि आप अपने कमरे में सिगरेट पी सकते थे। हर कमरे के बाथरूम में एक्ज़ॉस्ट फैन लगा हुआ था। एक तल के कमरों में एक्ज़ॉस्ट, एक पाइप में हवा फेंकते थे और वह होटल के बाहर निकलती थी। लगता है कि बगल के कमरे से किसी ने सिगरेट पीते समय अपना एक्ज़ॉस्ट चल रखा था। हम  कमरे में नही थे। इसलिए हमारे कमरे का एक्ज़ॉस्ट नही चल रहा था। इस कारण पाइप से सिगरेट का धुंआ हमारे कमरे में आ गया। अगली बार जब हम कमरे से बाहर गये तो एक्ज़ॉस्ट चला कर गये ताकि किसी अन्य कमरे से सिगरेट का धुआं हमारे कमरे में न आ सके और ऐसा ही रहा। फिर हमारे कमरे में सिग्रेट का धुआं नहीं आया।


मेरे विचार से  कमरों  में भी सिगरेट पीने की मनाही होनी चाहिये। मैं जर्मनी और साउथ अफ्रीका में होटल में ठहरा था। वहां न केवल लॉबी में पर कमरों में भी सिगरेट पीना मना था। हलांकि कुछ खास कमरे थे। केवल उनमें ही सिगरेट पी जा सकती थी। यहां भी ऐसा ही होना चाहिए। मैंने इसके बारे में भी स्वागत कक्ष में कहा भी। लेकिन मुझे नहीं लगता कि अपने देश मे कमरों में सिगरेट पीने में, कभी मनाही हो सकेगी।

देव भूमि, हिमाचल की यात्रा

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About this post in Hindi-Roman and English sterling resort alag tarah ke hotel hain. is chitthi mein manali ke sterling resort kee charchaa hai. yeh {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

Sterling resorts are different kind of hotels. This post talks about Sterling Resort in Manali. This post idescribes the same. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

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