Saturday, July 01, 2017

सच तो शेर, झूट तो पेशेवर लड़ाका - क्या बोले

इस चिट्ठी में, रोम में, कॉलोसिअम यात्रा का वर्णन है।


इस साल हम यूरोप घूमने गये। यूरोप जायें और रोम न जायें, यह तो हो नहीं सकता। रोम में शायद सबसे बड़ा आकर्षण, कॉलोसिअम है।

कॉलोसिअम का निर्माण ७२ ईसवीं में शुरू हुआ और ८० ईसवीं में समाप्त हुआ। इसमें ६०,००० से ८०,००० हज़ार तक लोग आ सकते थे। इसमें सार्वजनिक उत्सव, पेशेवार लड़ाकों की स्पर्धा, जानवरों का शिकार, सार्वजनिक फांसियां दी जाती थीं।  


इसाई, रोम राज्य के भगवानों को नहीं मानते थे। उन्हें, कॉलोसिअम के अन्दर, निहत्थे शेरों के बीच छोड़ दिया जाता था। यह क्रूूरता की हद थी। ये एशियाटिक शेर हुआ करते थे। वे उस समय यूरोप तक फैले थे पर अब केवल गीर जंगलों में ही पाये जाते हैं। 

कहा जाता कि इस तरह की विलासिता से ही, रोम साम्राज्य का पतन शुरू हुआ।

चित्रकार जों लिओ जिओम का चित्र 'शहीद ईसाइयों की आखरी प्रार्थना'
कॉलोसिअम के बाहर, मेरी मुलाकात ३० साल के यूवक से हुई। उसने गले में तिरंगा झन्डा डाल रखा था। वह वहां लोगों को हिन्दी में गाइड दिलवाने का काम करता था। हमने आपस में बात की। उसने झिझकते हुऐ कहा कि वह पाकिस्तानी है और करांची से आया है। मैंने कहा,

'तुम पाकिस्तानी हो, तो गले में तिरंगा क्यों डाले हो। पाकिस्तान का झन्डा क्यों नहीं डालते।'
उसने कहा, 
'पाकिस्तान से बहुत कम, लगभग नहीं के बराबर लोग घूमने आते हैं, लेकिन भारतवर्ष से लगभग रोज दो या तीन ग्रुप घूमने आते हैं इसलिये तिरंगा गले में डाल रखा है।'
वह कुछ असहज लग रहा था। मैंने कहा,
'इससे क्या होता है कि तुम पाकिस्तानी हो। हमारा खून एक है, हमारी सभ्यता एक है, हम सब एक हैं - बस कुछ लोग अपने फायदे के लिये हमें लड़वा रहे हैं।' 
इस पर वह सहज हो गया। हमारे पास पौन घन्टे का समय था वह सारे समय हमारे साथ रहा। उसने हमें कॉलोसिअम घुमाया, उसके इतिहास के बारे में बताया। मैंने भी कॉलोसिअम के बारे में उसे एक कहानी सुनायी।
 
एक रोमन राजा के पास बुद्धिमान गुलाम था। वह अपनी बुद्धिमता के कारण सबका चहेता था। राजा उससे जलता था इसलिये उसे मरवाना चाहता था लेकिन  बिना कारण सजा नहीं दे पा रहा था। राजा को युक्ति सूझी। उसने कॉलोसिअम में सभा बुलवाई और गुलाम से कहा,
'तुम कोई वक्तव्य दो।  लेकिन ध्यान रहे यदि वह सच होगा तो तुम्हें निहत्थे, शेर से लड़ना होगा यदि वह झूट होगा तब तुम्हें निहत्थे, पेशेवर लड़ाके से लड़ना होगा। यदि तुम जीत गये तब तुम्हें आज़ाद कर दिया जायगा।'
गुलाम को तो लड़ना आता ही नहीं था और वह भी निहत्थे - उसे तो दोनो ही दशा में मारे जाना था।
 

लेकिन गुलाम बुद्धिमान था। उसने एक ऐसा वक्तवय दिया कि राजा भ्रमित हो गया। उसकी समझ में नहीं आया कि गुलाम को शेर से लड़वाया जाय, कि पेशेवर लड़ाके से। अन्ततः राजा को गुलाम छोड़ना पड़ा। गुलाम ने क्या व्क्तव्य दिया होगा।

यूवक मुस्कराया और कहा कह नहीं सकता पर अब मैं यह कहानी सबको सुनाउंगा , शायद कोई जवाब बता दे। आपको क्या लगता है कि गुलाम ने क्या कहा होगा। 
 
उस यूवक को, मैंने पैसे देने चाहे तो लेने से मना कर दिया और बोला,
'आप नेक इन्सान हैं, आपसे पैसे नहीं लूंगा।'
धन्यवाद मेरे पाकिस्तानी मित्र, फिर मिलेंगे। क्या अच्छा हो, हम सब इस भावना को समझ सकें। यदि समझ सके, तब हम दोनो देश आगे बढ़ सकेंगे।


इस चिट्ठी के दोनो चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से हैं

About this post in Hindi-Roman and English

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This post in Hindi (Devanagari script) is about our trip to Colosseum in Rome. You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
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17 comments:

  1. फिर दिल दो #हिन्दी_ब्लॉगिंग को..

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  2. ये वाली चिठ्ठी पढ़ना तो बहुत जरूरी हो गया है

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  3. आप झूठ बोल रहे हैं, ऐसा ही कुछ कहा होगा.

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    1. राजा ने गुलाम से कहा कि तुम्हारा वक्तव्य "आप झूठ बोल रहे हैं" झूट है। यह कह कर राजा ने उसे पेशेवार लड़ाके से लड़वा दिया :-(

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  4. अगली कड़ी का इंतजार है - जिसमें उत्तर होगा :)

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  5. हिन्दी में कोई भी यात्रा लेख लिखे, वो पढने मे अच्छा ही लगता है। अब मैं सिर्फ़ यात्रा लेख ही पढता हूँ।

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  6. मेरे पिताजो ने आपके पिताजी को कर्ज़ दिया था !!!!
    उसने ये कहा होगा !

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    1. राजा ने कहा कि यह झूट है। तुम्हारे पिता ने कभी मेरे पिता को कर्ज़ नहीं दिया था। यह कह कर राजा ने उसे पेशेवार लड़ाके से लड़वा दिया :-(

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  7. अंतरराष्ट्रीय हिन्दी ब्लॉग दिवस पर आपका योगदान सराहनीय है. हम आपका अभिनन्दन करते हैं. हिन्दी ब्लॉग जगत आबाद रहे. अनंत शुभकामनायें. नियमित लिखें. साधुवाद.. आज पोस्ट लिख टैग करे ब्लॉग को आबाद करने के लिए
    #हिन्दी_ब्लॉगिंग

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  8. लो यह तो ऐन्टी क्लाइमैक्स है। हिन्दी ब्लाग दिवस पर अभिनन्दन।

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  9. शोषण का इतिहास हर जगह का है।

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  10. आज मुझे निहत्थे पेशेवर लडाके से लडना होगा

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  11. subuhi9:52 pm

    " Your second wife is more beautiful than your first wife who is the queen of kingdom " Slave said in the court while queen was sitting next to king.

    Those days Roman queen too had rights equal to Roman king . :-)

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  12. प्रेरक प्रस्तुति
    आपको जन्मदिन की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं!

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  13. कविता जी, आपकी टिप्पणी के लिये धन्यवाद पर मेरा जन्मदिन आज नहीं है।

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आपके विचारों का स्वागत है।