Tuesday, November 03, 2026

वह सवाल जिसने खामोशी तोड़ी

न्यायामूर्ति एच.आर. खन्ना

इस चिट्ठी और आने वाली कुछ आगे की चिट्ठियों, हम 'हेबियस कॉर्पस' केस में, मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम के अनुभवों के बारे में बात करेंगे।

यह चिट्ठी, उस पहले सवाल के बारे में है, जिसने इस मामले में छाई खामोशी को तोड़ा था। यह सवाल न्यायामूर्ति एच.आर. खन्ना ने पूछा था।

हैबियस कॉर्पस केस के पच्चास साल: आपातकाल, सर्वोच्च न्याययालय और संविधान

मैं इस केस में भागीदार कैसे हिस्सा बना।। न्यायालय के सामने क्या सवाल थे।। बहस के पहले - बेंच में बदलाव।। वेश्या कुंवारी - पिछले प्रभाव से।। वह सवाल जिसने खामोशी तोड़ी।।

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Sunday, October 18, 2026

वेश्या कुंवारी - पिछले प्रभाव से

यह 'हैबियस कॉर्पस केस के पच्चास साल: आपातकाल, सर्वोच्च न्याययालय और संविधान'श्रंखला की चौथी चिट्ठी है।  इस चिट्ठी में, सुप्रीम कोर्ट में, बहस शुरू होने से पहले सीके दफ्तरी के घर हुई बैठक की चर्चा है।


 

हैबियस कॉर्पस केस के पच्चास साल: आपातकाल, सर्वोच्च न्याययालय और संविधान

मैं इस केस में भागीदार कैसे हिस्सा बना।। न्यायालय के सामने क्या सवाल थे।। बहस के पहले - बेंच में बदलाव।। वेश्या कुंवारी - पिछले प्रभाव से।। ।। 

Thursday, October 01, 2026

बहस के पहले

बेंच में बदलाव

जस्टिस ऐएन रे 
यह 'हैबियस कॉर्पस केस के पच्चास साल: आपातकाल, सर्वोच्च न्याययालय और संविधान'श्रंखला की तीसरी चिट्ठी है। इसमें चर्चा है किसर्वोच्च न्यायालय में बेंच कैसे बदली गयी। 

हैबियस कॉर्पस केस के पच्चास साल:

आपातकाल, सर्वोच्च न्याययालय और संविधान

मैं इस केस में भागीदार कैसे हिस्सा बना।। न्यायालय के सामने क्या सवाल थे।। बहस के पहले - बेंच में बदलाव।। ।। ।। 

Sunday, August 30, 2026

न्यायालय के सामने क्या सवाल थे

 

यह 'हैबियस कॉर्पस केस के पच्चास साल: आपातकाल, सर्वोच्च न्याययालय और संविधान'श्रंखला की दूसरी चिट्ठी है। इसमें चर्चा है कि न्यायालय के सामने क्या सवाल थे।


हैबियस कॉर्पस केस के पच्चास साल:

आपातकाल, सर्वोच्च न्याययालय और संविधान

मैं इस केस में भागीदार कैसे हिस्सा बना।। न्यायालय के सामने क्या सवाल थे।।

Friday, August 21, 2026

हैबियस कॉर्पस केस के पच्चास साल:

मैं, उस समय

आपातकाल, सर्वोच्च न्याययालय और संविधान

मैं इस केस में भागीदार कैसे बना 

सारांश: यह एक नयी श्रंखलाा, 'हैबियस कॉर्पस केस के पच्चास साल: आपातकाल, सर्वोच्च न्याययालय और संविधान' नाम से है। 

यह ऐडीएम जबलपुर बनाम शिव कांत शुक्ल, AIR १९७६ SC १२०७: (१९७६) २ SCC ५२१, यानी प्रसिद्ध हैबियस कॉर्पस केस के बारे में है।

इस फैसले ने आज़ादी के दरवाज़े खोलने के बजाय बंद कर दिए थे। यह फैसला २८ अप्रैल १९७६ को सुनाया गया था। पचास साल बीत चुके हैं। यह समझना दिलचस्प है कि उस वक़्त मुद्दा क्या था, माहौल कैसा था, और बाद में, इस केस का क्या असर हुआ। 

हैबियस कॉर्पस केस के पच्चास साल:

आपातकाल, सर्वोच्च न्याययालय और संविधान

मैं इस केस में भागीदार कैसे हिस्सा बना।। 

Friday, August 07, 2026

आर य़ू अ नॉरमल जज - प्रकाशित हो गयी

यह चिट्ठी 'आर य़ू अ नॉरमल जज? – ऑन लॉ एण्ड अदर थिंगस' के बारे में है।

Thursday, April 30, 2026

इतनी भी क्या जल्दी थी

 मेरे एक मित्र ने, नीचे का विडियो मुझे भेजा। इसने मुझे दो दशक पहले की एक घटना याद दिला दी। इस चिट्ठी में, उसी घटना का  जिक्र है।


यह विडियो मेरा नहीं है। इसमें ZeeAiArt लिखा है लगता है यह उन्हीं का द्वारा बनाया गया लगता है। इसमें उर्दू के प्रसिद्ध व्यंग्यकार और हास्य लेखक मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी के द्वारा कुछ कहा गया है। यह उन दोनों के सौजन्य से है।

Thursday, January 22, 2026

मौज-मस्ती जरूरी है

सारांश: यह 'कानून के विद्यार्थियों को सलाह' श्रृंखला की आखिरी चिट्ठी है। इसमें उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण सलाह है।

बांये से: अनिल त्रिवेदी, नीरज कुमार और मैं - विश्वविद्यालय के दिनों की स्थायी दोस्ती - इलाहाबाद रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म १९७०

कानून के विद्यार्थियों को सलाह

भूमिका और सबसे मुख्य बात।। अपनी भाषा सुधारें।।  अच्छे संचार का मूलमंत्र - संक्षिप्त और मुद्दे पर बात करना।। संचार के लिये, विषय की स्पष्टता महत्वपूर्ण है।। फाइनमेन तकनीक क्या है।। पढ़ें, पढ़ें, और पढ़ते चलें।। इंटर्नशिप, संवाद, और नेटवर्किंग।। तकनीक, एआई, और आसिमोफ की कहानी से सबक।। मौज-मस्ती जरूरी है।। 

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