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Thursday, October 30, 2025

खरगोश और कछुआ - पंचतंत्र

 यह 'भारतीय न्यायालयों में FOSS नवाचार: इलाहाबाद उच्च न्यायालय से प्रेरित' श्रृंखला की आठवीं और आखरी चिट्ठी है। इसमें 'पंचतंत्र'की एक कहानी के द्वारा बताया गया है कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय FOSS को क्यों अपनाया।


भारतीय न्यायालय में FOSS का प्रयोग: इलाहाबाद उच्च न्यायालय से प्रेरित

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Monday, September 08, 2025

लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम की समस्याएं

यह 'भारतीय न्यायालयों में फौस का प्रयोग: इलाहाबाद उच्च न्यायालय से प्रेरित' श्रृंखला की छठी कड़ी है। यह इस बात पर चर्चा करता है कि लिनक्स डेस्कटॉप, किफायती, स्थिर और वायरस-मुक्त होने के बावजूद, मुख्यधारा में क्यों नहीं आ पा रहा।

भारतीय न्यायालय में FOSS का प्रयोग: इलाहाबाद उच्च न्यायालय से प्रेरित

परिचय।। भारतीय न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण।। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में FOSS की शुरुवात।।  इलाहाबाद उच्च न्यायालय में FOSS का अगला कदम।। ई-समिति ने FOSS को अपनाया।। लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम की समस्याएं।।

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Thursday, August 28, 2025

ई-समिति ने FOSS को अपनाया

यह चिट्ठी 'भारतीय न्यायालयों में FOSS का प्रयोग: इलाहाबाद उच्च न्यायालय से प्रेरित' श्रंखला की पांचवीं कड़ी है। इसमें बताया गया है कि कैसे ई-समिति ने न्यायालयों के कम्प्यूटरीकरण के प्रति अपना दृष्टिकोण बदला और FOSS को अपनाया।

भारतीय न्यायालय में FOSS का प्रयोग: इलाहाबाद उच्च न्यायालय से प्रेरित

परिचय।। भारतीय न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण।। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में FOSS की शुरुवात।।  इलाहाबाद उच्च न्यायालय में FOSS का अगला कदम।। ई-समिति ने FOSS को अपनाया।।

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Monday, August 18, 2025

इलाहाबाद उच्च न्यायालय में FOSS का अगला कदम

 यह चिट्ठी 'भारतीय न्यायालयों में FOSS का प्रयोग: इलाहाबाद उच्च न्यायालय से प्रेरित' श्रंखला की चौथी कड़ी है। इसमें चर्चा की गयी है कि किस प्रकार इलाहाबाद उच्च न्यायालय में, FOSS का और अधिक प्रयोग होना शुरू हुआ।


भारतीय न्यायालय में FOSS का प्रयोग: इलाहाबाद उच्च न्यायालय से प्रेरित

परिचय।। भारतीय न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण।। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में FOSS की शुरुवात।।  इलाहाबाद उच्च न्यायालय में FOSS का अगला कदम।। 

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Monday, August 11, 2025

इलाहाबाद उच्च न्यायालय में FOSS की शुरुवात

यह चिट्ठी 'भारतीय न्यायालयों में FOSS का प्रयोग: इलाहाबाद उच्च न्यायालय से प्रेरित' श्रंखला की तीसरी कड़ी है। इसमें चर्चा है कि इलाहाबाद उच्च् न्यायालय में, क्यों और किस तरह से FOSS का प्रयोग करना शुरू हुआ। 

भारतीय न्यायालय में FOSS का प्रयोग: इलाहाबाद उच्च न्यायालय से प्रेरित

परिचय।। भारतीय न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण।। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में FOSS की शुरुवात।। 

Wednesday, August 06, 2025

भारतीय न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण

यह 'भारतीय न्यायालयों में FOSS का प्रयोग: इलाहाबाद उच्च न्यायालय से प्रेरित' श्रंखला की दूसरी कड़ी है। इसमें चर्चा है कि भारतीय न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण और इसमें अभिलेखों का, किस प्रकार से डिजिटलीकरण किया जा रहा है।

भारतीय न्यायालय में FOSS का प्रयोग: इलाहाबाद उच्च न्यायालय से प्रेरित

परिचय।। भारतीय न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण।। 

Sunday, July 27, 2025

भारतीय न्यायालयों में FOSS का प्रयोग

इलाहाबाद उच्च न्यायालय से प्रेरित 

भारतीय न्यायालयों ने, इलाहाबाद उच्च न्यायालय से प्रेरित होकर, मुक्त/ओपेन स्रोत सॉफ़्टवेयर (FOSS) को, मानक सॉफ़्टवेयर के रूप में अपनाया है। यह साल मुक्त सॉफ़्टवेयर फ़ाउंडेशन (FSF) की स्थापना के ४०वां साल है। इस साल, इस यात्रा का वर्णन करना प्रासंगिक होगा। इसे विभिन्न चिट्ठियो में लिखा जाएगा। यह इस यात्रा की पहली चिट्ठी है और इस यात्रा का परिचय है। 

FOSS के उदाहरण 

भारतीय न्यायालय में FOSS का प्रयोग: इलाहाबाद उच्च न्यायालय से प्रेरित

परिचय।।

Tuesday, November 29, 2016

क्या अन्तरजाल की गोपनीयता भंग होगी



इस चिट्ठी में - अभाज्य अंक (prime number), अन्तरजाल पर गोपनीयता, इन दोनो के बीच संबन्ध, और प्रोफेसर मार्कस डू सौतॉय (Marcus du Sautoy) के एक विडियो, जहां वे इसे समझा रहे हैं - पर चर्चा है।

Monday, May 09, 2011

अन्तरजाल, एकांतता का अन्त है

यह चिट्ठी साइबर अपराध श्रृंखला का निष्कर्ष है।
इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते हैं। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर दाहिने तरफ का पृष्ट, "'बकबक' पर पॉडकास्ट कैसे सुने" देखें।
चित्र विकिपीडिया से

Friday, April 22, 2011

साइबर अपराध, जिनका लक्षय कंप्यूटर नहीं होता है

इस चिट्ठी में उन साइबर अपराधों की चर्चा है, जो कंप्यूटर का प्रयोग करके किये जाते हैं पर उनका लक्षय कंप्यूटर या सर्वर नहीं होता है।

इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते हैं। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर दाहिने तरफ का पृष्ट, "'बकबक' पर पॉडकास्ट कैसे सुने" देखें।

Friday, March 04, 2011

कंप्यूटर या सर्वर को लक्षय कर किये गये साईबर अपराध

इस बार चर्चा का विषय है - साइबर अपराधों का वर्गीकरण और कंप्यूटर या सर्वर को लक्षय कर, होने वाले साइबर अपराध।
इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते हैं। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर दाहिने तरफ का पृष्ट, "'बकबक' पर पॉडकास्ट कैसे सुने" देखें।
The-Legions Pictures, Images and Photos

Wednesday, January 05, 2011

भारत में साइबर कानून

सूचना प्रौद्योगिकी के कारण कानून के हर क्षेत्र में मुश्किले आयीं। इस बार चर्चा का विषय है कि उनको दूर करने के लिये, अपने देश में किस प्रकार के और किस क्षेत्र में कानून बनाये गये।
इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते हैं। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो ऊपर दाहिने तरफ का पृष्ट, "'बकबक' पर पॉडकास्ट कैसे सुने" देखें।
हमारी संसद जहां यह कानून बनाये गये चित्र विकिपीडिया से

Friday, June 11, 2010

नाई की दाढ़ी को कौन बनाता है

यह चित्र आईसीएम २०१० की वेबसाइट के सौजन्य से
कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, गणित के तर्क शास्त्र पर चलता है। कंप्यूटर वायरस, इसकी कमियों का फायदा उठाते हैं। इसलिये साइबर अपराध की श्रृंखला में, साइबर अपराधों के बारे में बात करने से पहले, कुछ बातें  गणित के प्रसिद्ध २३ सवालों, और तर्क शास्त्र के क्षेत्र से, स्वयं को संदर्भित करने वाले विरोधाभास के बारे में। 
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने'
देखें।


Friday, May 14, 2010

हमने भगवान शिव को याद किया और आप मिल गये

मनाली के एक साइबर कैफे में, हिन्दी को लेकर एक रोचक हादसा हो गया था। इसी की चर्चा इस चिट्ठी में है।
 
शब्दों के हिन्दी में बदलते ही उनके चेहरे प्रसन्नता से भर गये

Wednesday, April 28, 2010

तू डाल डाल, मैं पात पात

यह चिट्ठी, साइबर अपराधों पर नयी श्रृंखला की भूमिका है।
इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने'
देखें।
फिल्म 'इंडिपेंडेन्स डे' से

Saturday, September 19, 2009

जो वायदा किया, वो निभाना पड़ेगा

इस चिट्ठी में सॉफ्टवेयर फ्रीडम डे और लोकप्रिय  ओपेन सोर्स सॉफ्टवेयर  के बारे में चर्चा है।
'अरे उन्मुक्त जी कौन सा वायदा,  किसने किया,  कब किया?'
अरे, वही वायदा, जो आपने, हिन्दी चिट्ठाजगत ने - अपने आप से किया था। आज सितम्बर माह का तीसरा शनिवार है। इस दिन प्रत्येक साल, सॉफ्टवेयर मुक्ति दिवस (Software Freedom Day) बनाया जाता है। याद नहीं, आपने वायदा नहीं किया था कि आज के दिन से, कम से कम, आप एक ओपेन सोर्स सॉफ्टवेयर का प्रयोग करना शुरू करेंगे। अरे इस दिवस के बारे में, मैंने पिछले सालों में,  'आइम् लविंग इट' और 'मुक्त सॉफ्टवेयर दिवस' शीर्षक से बताया था। लगता है कि आप भूल गये। 

चलिये, कोई बात नहीं। मैं पुनः कुछ मुक्त सॉफ्टवेयरों के बारे चर्चा करता हूं जिन्हें आप बहुत आसानी से  विंडोज़ पर इस्तेमाल कर सकते हैं। यह लिनेक्स पर भी चलते हैं। पहले आप इन्हें विंडोज़ पर प्रयोग कीजिये फिर जब मन आये तब लिनेक्स शुरू कर दीजियेगा। ठीक, अब वायदा पक्का, थम्ब प्रॉमिस (thumb promise),  याद रखेंगे न।


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सबसे पहले मॉज़िला के तीन बेहतरीन मुक्त प्रोग्राम के बारे में बात करते हैं।  यह तीनो मॉज़िला पब्लिक लाइसेन्स, जो कि एक ओपेन सोर्स लाइसेन्स है, के अन्दर प्रकाशित हैं। 
  • फायरफॉक्स: यह अन्तरजाल पर सबसे बेहतरीन वेब ब्रॉउज़र है। मैं सारे काम इसी पर करता हूं। अपने चिट्ठे, पॉडकास्ट इसी पर करता हूं। आपकी चिट्ठियां भी इसी पर पढ़ता हूं। इसमें पहले हिन्दी के साथ कुछ मुश्किल थी पर अब नहीं।
  • थंडरबर्ड: यह ई-मेल भेजने और प्राप्त करने के सॉफ्टवेर है। मैं आपकी ईमेल इसी पर प्राप्त करता हूं और इसी से आपको ईमेल लिखता हूं।  इसमें चिट्ठों की आरएसएस फीड भी स्थापित की जा सकती है। मैंने पहले इसी पर फीड स्थापित कर चिट्‌ठों को पढ़ता था।
  • सनबर्ड: यह ई-मैनेजर है। यह आपको प्रिय जनों का जन्मदिन, शादी की सालगिरह की याद दिलाता है। मैंने अपने मित्रों, सहयोगियों का जन्मदिन, शादी की सालगिरह इसी पर नोट कर रखी है। उन्हें हमेशा आश्चर्य होता है कि मैं कैसे उन सब का जन्मदिम और शादी की सालगिरह याद रखता हूं। बस, इसका यही राज है। इसे आप अलग से या फिर थंडरबर्ड या फायरफॉक्स के साथ स्थापित कर चला सकते हैं। मैंने इसे  थंडरबर्ड के साथ स्थापित कर रखा है।

मैं कार्यलाय से संबन्धित सारे कार्य ओपेनऑफिस डाट कॉम के आफिस स्वीट में करता हूं।मुझे इसमें या एमएस वर्ड में कोई अन्तर नहीं लगता यह उतना ही अच्छा है। बस इसका फायदा यह है कि यह मुफ्त है। इसमें कई प्रोग्राम हैं
  • राइटर: इसका प्रयोग मैं लिखने के लिये करता हूं। मैं अपनी सारी चिट्ठियां, समय की सुविधा के अनुसार ऑफलाइन पर लिख लेता हूं। इसके बाद धीरे धीरे कड़ियों पर उन्हें अपने चिट्ठों पर डालता हूं। इसमें एक बेहतरीन सुविधा है कि यह न केवल आपकी फाइलों को पीडीएफ मानक में बदल सकता है पर यह पीडीऐफ फाइलों को संशोधित भी कर सकता है। मेरा काम लिखने से संबन्धित है। यह सारे मैं इसी पर करता हूं। मैंने कुछ पुस्तकें अंग्रेजी में लिखी हैं। सौभाग्य से इनके कई संस्करण भी निकलें हैं। यह सारे मैंने इसी पर किये हैं। मुझे इसमें कभी भी कोई मुश्किल नहीं हुई। यह डिफॉल्ट में मुक्त मानक में फाइलों को सुरक्षित करता है। लेकिन आप चाहें तो किसी भी अन्य मानक या  एमएस वर्ड के डिफॉल्ट मानक डॉक पर भी फाइलें सुरक्षित कर सकते हैं। आप अपने एमएस वर्ड पर काम करने वाले मित्र को उसी के मनचाहे मानक पर फाइलें भेज सकते हैं या फिर उनसे सन-माइक्रोसिस्टम का यह मुफ्त प्लग-इन डाउनलोड कर अपने एमएस वर्ड के प्रोग्राम में स्थापित करने के लिये कह सकते हैं ताकि यह मुक्त मानक की फाइलों को पढ़ सकें।
  • इम्प्रेस: मुझे  अकसर सम्मेलन में या फिर विद्यार्थियों के बीच बोलने का मौका मिलता है। मैं प्रस्तुतिकरण (presentation) के लिये इसी का प्रयोग करता हूं। मेरे सुनने वालों ने कभी नहीं कहा कि मेरा प्रस्तुतिकरण किसी प्रकार भी पावर पॉइंट पर बने प्रस्तुतिकरण से कम अच्छा है। मैं सुविधा के लिये अपने प्रस्तुतिकरण की एक फाइल पीपीटी मानक और पीडीएफ मानक पर भी बना कर ले जाता हूं। यह सुविधा भी इसमें है। 
  • इसके अतिरक्त कार्यालय के अन्य तरह के काम करने के लिये चार अन्य प्रोग्राम, मैथ, कैल, ड्रॉ, और बेस भी हैं। जिन पर बाकी सारी तरह की फाडलें बना सकते हैं। मुझे उनका प्रयोग करने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसलिये मैं उनके बारे में नहीं लिख पा रहा हूं। आप  लिख सकतें हों तो क्या बात है। 


मल्टीमीडिया और चित्रों के लिये ओपेन सोर्स में बेहतरीन प्रोग्राम हैं।
  • वीएलसी मीडिया प्लेयर और एमप्लेयर: आप इन दोनो प्रोग्राम में ऑडियो और वीडियो के प्रत्येक प्रकार के मानकों की फाइलों को सुन सकते हैं। मैं इसी पर सुनता या देखता हूं।
  • ऑडेसिटी: इस प्रोग्राम में, ऑडियो फाइलों को सुना, संपादित, और रिकॉर्ड किया जा सकता है। मैं अपनी बकबक (मेरे पॉडकास्ट), इसी पर रिकॉर्ड करता हूं। इसमें एमपी-३ पइलों के लिये प्लग-इन डालना होता है। यह करने में कोई मुश्किल नहीं होती है। आप  एमपी-३ मानक में भी रिकॉर्ड कर सकते हैं। किसी भी मानकों की फाइलों को दूसरे मानक में बदल सकते हैं। मैं अपने पॉडकास्ट ऑग मानक पर रिकॉर्ड करता हूं। पॉडभारती में मेरे दो पॉडकास्ट 'स्कॉट की अन्तिम यात्रा' और 'पापा क्या आप उलझन में हैं' को पुनः यहां और यहां प्रकाशित किया है। वे एमपी-३ मानक में हैं। मेरे विचार से यह उन्होंने, इसी प्रोग्राम का प्रयोग कर किया है।
  • गिम्प: इस प्रोग्राम का प्रयोग चित्रों को संपादित करने के लिये कया जाता है। इसमें आप चित्रों सम्पादित और उनका पिक्सल कम कर सकते हैं। चिट्ठों पर चित्र डालते समय उन्हें अक्सर सम्पादित करना पड़ता है। क्योंकि यदि चित्र के किसी भाग का महत्व उस चिट्ठी के लिये नहीं है तो उसे रखने की कोई जरूरत नहीं। चिट्ठों पर चित्रों  को हमेशा पिक्सल कम करके डालना चाहिये। इससे चिट्ठा और वह चिट्ठी दोनो जल्दी लोड होती हैं।  यह  काम मैं इसी पर करता हूं। 
यदि आप और मुक्त सॉफ्टवेयर के प्रोग्रामों के बारे में जानना चाहें तो आप मेरी बिटिया को लिखी चिट्ठी 'ओपेन सोर्स की पाती - बिटिया के नाम' पर या फिर 'वेलेंटाइन दिवस, ओपेन सोर्स के साथ मनायें' चिट्ठी पर पढ़ सकते हैं।
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'उन्मुक्त जी, जब बाज़ार में सारे प्रोग्राम दस रुपये की सीडी में मिल जाते हैं तो फिर   ओपेन सोर्स के टंटे करने का क्या फायदा?'
सवाल तो वाज़िफ है। मैं जवाब देने की कोशिश करता हूं।
  • मैं लिनेक्स और ओपेन सोर्स प्रोग्राम का प्रयोग इसलिये करता हूं क्योंकि मैं चाहता हूं सब इनका प्रयोग करें। यह धुर सत्य है, आप जैसी  दुनिया चाहो, वैसा स्वयं बनो। 
  • महात्मा गांधी ने एक बार कहा, 'साधन, अन्त से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।' यह बात यहां भी लागू होती। इसके लिये मैं उलझन में नहीं रहता
  • न केवल बच्चे, पर हम सब व्यवहार से सीखते हैं न कि उपदेश से। इस पर काम करने से 'एक घन्टा, एक मिनट लगता है' :-)
  • इनका प्रयोग करने के कारणों में, सबसे मुख्य बात यह है कि इनका प्रयोग करने में कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं होता और यह मुफ्त हैं। इसका प्रयोग आप अपनी अन्तरात्मा को बिना गिरवी रखे कर कर सकते हैं।
  • आपने पंचतंत्र की  कछुवा और खरगोश की कहानी तो सुनी होगी। इसमें, आजकल  बदलाव हो हो गया है। यह बदलाव ओपेन सोर्स के करीब है। आपको नहीं मालुम तो यहां पढ़ लीजिये।
  • यही वह जगह जहां पेंग्युन भी उड़ सकती हैं
  • आपको तो मालुम ही है कि ओपेन सोर्स सॉफ्टवेयर का सबसे जाना माना प्रोग्राम लिनेक्स है और इसे प्रयोग करने वाले पुरुष तो खास होते हैं। वे न केवल जोशीले और उत्साही होते हैं पर उन्हें महिलायें भी अधिक पसन्द करती हैं। पुरुष पाठक समय न गवायें,  तुरन्त खुद ही यहां पढ़ें। 
  • क्या कहा, आप पुरुष नहीं, महिला हैं।  कोई बात नहीं। अब वह सुबकने वाली, पुरुषों का साया ढ़ूढ़ने वाली महिला कहां रह गयी है। महिला तो आज की दुर्गा है उसका सशक्तिकरण हो चुका है। वे पुरुषों से किसी क्षेत्र में कम नहीं, फिर देर किस बात की - शुरू करिये प्रयोग करना ओपेन सोर्स के प्रोग्राम।

मैं जानता हूं कि आप यहां ओपेन सोर्स का भाषण सुनने नहीं आये हैं। आप तो आये हैं ताजमहल के प्यारे से गाने को सुनने के लिये जो इस चिट्ठी का शीर्षक है। लीजिये वह भी सुन लीजिये। लेकिन इस गाने कुछ को इस तरह से समझियेगा,
जो वायदा किया, वो निभाना पड़ेगा।
रोके तुम्हारा डर चाहे,
तुमको मुक्त सॉफ्टवेयर प्रयोग करना पड़ेगा
हो वायदा किया है तुमने,  
मुक्त सॉफ्टवेयर प्रयोग करने का।
वह वायदा तो तुम्हें निभाना पड़ेगा, निभाना पड़ेगा।



जब आप में से अधिकांश यह चिट्ठी पढ़ रहे होंगे तो मैं अपने कस्बे से दूर, कुछ दिनो तक हिमाचाल, हरियाणा, और पंजाब के दौरे पर रहूंगा। मेरा अपने आप से वायदा है कि मैं लैपटॉप न ले जाउं और इस काल्पनिक दुनिया से दूर रहूं। देखता हूं कि इसमें सफल रहता हूं कि नहीं। 

 मेरी 'केरल यात्रा' एवं 'डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े'  श्रंखलायें समाप्त हो रही हैं।  बहुत जल्द, मैं आपको नयी श्रंखलाओं  पर ले चलूंगा। इनमें से एक ऐसे उपन्यास और उससे जुड़ी कहानियों के बारे में है जो न केवल २०वीं शताब्दी के उत्कृष्ट अमेरिकन साहित्य में गिना जाना जाता है पर,  मेरी बिटिया के अनुसार, जिसे अमेरिका के कॉलेज जाने वाले प्रत्येक विद्यार्थी ने कम से कम एक बार पढ़ा है। दूसरा हो सकता है कि मैं आपको कुल्लू मनाली की यात्रा पर ले चलूं। 
 






मुक्त सॉफ्टवेयर से संबन्धित अन्य चिट्ठियां




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is post per software freedom day or lokpriya open source program ke baare mein charchaa hai. kumarkom mein pkshishaala hai. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.


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 software freedom day,
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Wednesday, April 01, 2009

अन्तरजाल पर कानून में टकराव

अन्तरजाल में देशों की सीमायें नहीं हैं। इस कारण देशों के कानून में टकराव हो रहा है। श्रंखला - 'अंतरजाल की मायानगरी में' की इस कड़ी में, इसी की चर्चा है। इसे आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
सुन सकते हैं। ऑडियो फाइल पर चटका लगायें। यह आपको इन फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें। इन्हेंं डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले।

मैंने 'अन्तरजाल की माया नगरी' श्रंखला में अन्तरजाल पर उठ रहे मुद्दों के बारे में चर्चा की थी। यह श्रंखला बहुत पहले समाप्त हो गयी थी। उसके बाद मुझे लगा कि इसके भविष्य के बारे में कुछ लिखना चाहिये। इसलिये मैने दो चिट्ठियां वेब २.० और सॅमेंटिक वेब पर लिखीं।


देशों के कानून अलग अलग हैं। इस कारण अन्तरजाल पर उठ रहे मुद्दों के हल में भी टकराव हो रहा है। मेरे विचार से, इस पर भी कुछ चर्चा, इस श्रंखला में होनी चाहिये इसी लिये यह चिट्ठी प्रकाशित कर रहा हूं।


कानून किसी भी जगह और समय के प्रतिबिम्ब होते हैं। यह उस जगह और समय की नैतिकता के प्रतीक हैं। हांलाकि कानून कितना कारगर है यह बात वहां के कानून के पालन पर निर्भर करती है। 

देशों में, मोटे तौर पर कानून एक जैसे होते हैं पर कुछ मूलभूत अन्तर के कारण, कानून में भी अन्तर होता है। वेब ने, देशों की सीमाओं को समाप्त कर दिया है। इसलिये जहां कानून में अन्तर है वहां टकराव की स्थिति पैदा हो गयी है। अभी तक इस समस्या का हल, न तो संतोषजनक रूप से निकला है, और न ही कोई रास्ता समझ में आ रहा है। आइये इसके कुछ उदाहरण देखें।


अश्लीलता देशों की नैतिकता पर निर्भर है। देशों में अश्लीलता के अलग अलग मापदन्ड हैं। बहुत से देशों में जिसे अश्लील नहीं कहा जाता उसे दूसरे देशों में अश्लील कहा जाता है। किस भी देश में स्थित वेबसाइट की सामग्री को दुनिया के किसी और देश में देखा जा सकता है। यदि उस सर्वर की वेबसाइट कुछ ऐसा साहित्य है जो कि उस देश के कानून के मुताबिक अश्लील न हो पर दूसरे देश के कानून के मुताबिक अश्लील हो तो क्या दूसरे देश में उस साहित्य को सर्वर पर डालने वाले को जेल भिजवाया जा सकता है।


यही बात मानहानि (defamation) के कानून में लागू होती है। जो समाग्री एक देश में कानूनी है पर दूसरे देश में गैरकानूनी है। सवाल यह उठता है कि उस सामग्री को किसी दूसरे देश में, जिसके कानून के अन्दर वह गैर कानूनी है, कैसे रोका जाय।


द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद, जर्मनी और फ्रांस में नाज़ी साहित्य या उनके चिन्ह या उनकी बड़ाई करने वाले साहित्य के बेचने पर मनाही है।

नाज़ी पार्टी के शासन के समय जर्मनी का राष्ट्रीय चिन्ह

याहू एक प्रसिद्ध वेबसाइट है।
Image representing Yahoo! as depicted in Crunc...चित्र क्रंच बेस के सौजन्य से
हर देश में इसकी सहायक (subsidiary) कंपनी भी पंजीकृत है।  याहू वेबसाइट बहुत सारी सेवायें भी देती है जसमें निलामी भी है। यह नाज़ी चिन्हों की निलामी भी करती है। यह बात अमेरिका में तो गैरकानूनी नहीं, पर फ्रांस और जर्मनी में है।

याहू फ्रांस, याहू की सहायक कम्पनी है जो कि फ्रांस देश में पंजीकृत है। यह वहां के कानून से बाध्य है। यह नाज़ी चिन्ह या नाज़ियों की बड़ाई करने वाला साहित्य नहीं बेच सकती है। लेकिन सवाल यह है कि याहू वेबसाइट जो अमेरिका के सर्वर पर स्थित है और अमेरिका में पंजीकृत है जिसके कानून में यह सेवा गैरकानूनी नहीं है को क्या फ्रांस के न्यायालय या सरकार ऐसा करने से मना कर सकती है कि वह ऐसा कार्य न करे क्योंकि यह वेबसाइट फ्रांस में भी देखी जा सकती है, जहां यह गैरकानूनी है। 

 
नाज़ी पार्टी का बैज़

फ्रांस के नागरिक स्वतंत्रता (civil liberty) की दो संस्थाओं ने फ्रांस में याहू पर मुकदमा ठोका। फ्रांसीसी न्यायलय ने निषधाज्ञा जारी कर याहू को इस तरह की पुस्तकें तथा चिन्ह बेचने से मना किया और आज्ञा न मानने पर हर्ज़ाना लगाया। याहू ने इस फैसले के खिलाफ अपील तो नहीं प्रस्तुत की पर अमेरिकन न्यायलय में इस बात का मुकदमा चलाया कि
  • वे, यह कार्य वे अमेरिका में कर रहे हैं;
  • जहां के कानून के अन्दर यह गैर कानूनी नहीं है; 
  • इसलिये इस फैसले शून्य घोषित किया जाय।


परीक्षण न्यायालय ने इस फैसले को शून्य घोषित कर दिया। फ्रांस की संस्थाओं ने इसके विरुद्ध अपील प्रस्तुत की जो २-१ से स्वीकार कर ली गयी पर बाद में यह फैसला पुननिरीक्षण के लिये पूरी अपीली न्यायालय के समक्ष पेश हुआ। ११ न्यायधीशों ने मुकदमे सुना और तय किया (433 F.3d 1199) कि,
'An eight-judge majority ... holds ... that the district court properly exercised specific personal jurisdiction over defendants ... A three-judge plurality of the panel concludes, as explained in Part III of this opinion, that the suit is unripe for decision ... When the votes of the three judges who conclude that the suit is unripe are combined with the votes of the three dissenting judges who conclude that there is no personal jurisdiction ... there are six votes to dismiss Yahoo!’s suit.


We therefore REVERSE and REMAND to the district court with instructions to dismiss without prejudice.'


इस फैसले में मुख्यतः अमेरीकी अपीली न्यायालय ने बहुमत द्वारा इस बात पर फैसला देने से इंकार कर दिया कि क्या अमेरीकी न्यायालय, फ्रांसीसी न्यायालय का फैसला रद्ध किया जा सकता है। तीन न्यायधीशों के मुताबिक यह सवाल अभी उठा नहीं है और यह मुकदमा परिपक्व नहीं हुआ है। क्योंकि फ्रांसीसी न्यायालय का फैसला अभी तक अमेरिका में लागू करने के लिये नहीं आया है। तीन न्यायधीशों के मुताबिक न्यायालय को विपक्ष पर निर्णय देने के लिये व्यक्तिगत अधिकार नहीं पाप्त है। इस लिये न्यायालय ने इस मुकदमे को परीक्षण न्यायालय के पास इसे यह कहते हुऐ खारिज करने के लिये भेज दिया कि यह याहू के अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं रखेगा।


कानून में यह स्पष्ट नहीं है कि इस परस्थिति में क्या किया जाय – शायद इसका हल भविष्य में ही छिपा है। शायद, 
  • सारे देशों को एक कानून पर सहमति बनानी होगी, या
  • फ्रांसीसी न्यायालय को याहू को निषेधाज्ञा न देकर, फ्रांस में स्थित, इंटरनेट की सेवायें देने वाली कंपनियों को यह आज्ञा देनी चाहिये थी, या
  • कोई अन्य रास्ता (जो मुझे समझ में नहीं आता) वह ढ़ूढा जाय।
देखिये भविष्य इस विषय में किस तरफ करवट लेता है।


अंतरजाल की मायानगरी में
टिम बरनर्स् ली।। इंटरनेट क्या होता है।। वेब क्या होता है।। वेब २.०।। सॅमेंटिक वेब क्या है और विकिपीडिया का महत्व।। लिकिंग, क्या यह गलत है।। चित्र जोड़ना - यह ठीक नहीं।। फ्रेमिंग भी ठीक नहीं।। बैंडविड्थ की चोरी - क्या यह गैर कानूनी है।। बैंडविड्थ की चोरी - कब गैरकानूनी है।। डोमेन नाम विवाद क्या होता है।। समान डोमेन नाम विवाद नीति, साइबर और टाइपो स्कवैटिंग।। की वर्ड और मॅटा टैग विवाद।। गोलमाल है भाई गोलमाल।। अन्तरजाल पर कानून में टकराव।। समकक्ष कंप्यूटर के बीच फाइल शेयरिंग।। शॉ फैनिंग, नैपस्टर सॉफ्टवेयर, और उस पर चला मुकदमा।। कज़ा केस।। ग्रॉकस्टर केस।। ग्रॉकस्टर केस में अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय का फैसला।।

इस चिट्ठी के दोनो चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से हैं।

हिन्दी में नवीनतम पुस्तक समीक्षा पॉडकास्ट
Latest book review podcast in Hindi
(सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।: Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. Click where 'Download' and there after name of the file is written.)
यह ऑडियो फइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप -
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में - सुन सकते हैं।
बताये गये चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले।













About this post in Hindi-Roman and English is post per anterjaal mein deshon ke kanoon mein takraav kee charchaa hai. yeh hindi (devnagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

The web is boundary less. This post talks about conflict of laws of the nation because of this. It is in Hindi (Devnaagaree script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक चिन्ह



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Wednesday, March 18, 2009

'वामन की वापसी' कहानी का मुक्त मानक से सम्बंध

मुक्त मानक और 'वामन की वापसी' श्रंखला की इस कड़ी में बताया गया है कि 'वामन की वापसी' विज्ञान कहानी के संदर्भ में किस प्रकार मुक्त मानक महत्वपूर्ण हैं और इन दोनो में क्या रिश्ता है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।
इसे आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
सुन सकते हैं। ऑडियो फाइल पर चटका लगायें फिर या तो डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले। डाउनलोड करने के लिये पेज पर पहुंच कर जहां Download फिर फाईल का नाम लिखा है, वहां चटका लगायें।


भौतिक जीवन में सूचना लिपि में रहती है यदि लिपि को पढ़ा जा सकता है तो सूचना भी समझी जा सकती है यदि आप लिपि को नहीं पढ़ सकते तो वह सूचना हमेशा के लिए खो जायेगी । जैसा कि खगोलशास्त्री जयंत विष्णु नार्लीकर (Jayant Vishnu Narlikar) के द्वारा लिखी विज्ञान कहानी 'वामन की वापसी' में प्लेट पर लिखी सूचना के साथ हो रहा था। जब तक वह पढ़ी नहीं गयी, तब तक लोगों के समझ में नहीं आया कि,
  • क्यों वह सभ्यता क्यों नष्ट हो गयी? और
  • किस लिये वामन, लोगों को उसे अपने तरह के रोबॉट बनाने की विधि सिखाने की बात कह रहा था?

कंयूटर संसार में, सूचना मानक में रहती है । यदि मानक मालिकाना है तो यह हो सकता है कि उसके बनाने वाले उसे बनाना छोड़ दें और उसे बनाने का तरीका किसी और को न मालूम हो। इस दशा में वह सूचना हमेशा के लिए हाथ से निकल जायेगी।

यही कारण है कि सूचना को मुक्त मानक पर रखना ही बहुत अच्छा है यदि हम सूचना को मुक्त मानक पर रखते है तो यह सूचना कभी भी समाप्त नही हो सकती क्योंकि सबको मालूम है कि मुक्त मानक को किस प्रकार से कंम्पयूटर प्रोग्राम में पढ़ा जाये। इसीलिए आडियो फाइलों को mp3 मानक जो कि मालिकाना मानक है में रखना ठीक नहीं। इसके लिए ogg मानक कहीं बेहतर है। क्योंकि यह मुक्त मानक है।

महात्मा गाँधी ने एक बार कहा था,
'You must be change that you want to see in the world.'
जो बदलाव तुम दुनिया में चाहते हो स्वयं वैसा बनो।

मैं चाहता हूं कि दुनिया में मुक्त मानक, मुक्त सॉप्टवेयर पर काम हो। इसलिये स्वयं इसी पर काम करता हूं


मैं चाहता हूं कि दुनिया वाले मुक्त मानक का प्रयोग करें इसीलिए मै स्वयं पहले इनका प्रयोग करता हूं। मैं अपनी आडियो फाइलें ogg, टेक्सट फाइलें doc की जगह odt, प्रस्तुतिकरण ppt की जगह odp मानक में रखता हूं क्योंकि यह मुक्त मानक हैं। यह आपको तय करना है कि आप अपनी फाइलें किस मानक में रखें। यही कारण है कि मुक्त सॉफ्टवेयर पर काम करता हूं।

इसी के साथ यह श्रंखला समाप्त होती है। मैं होली पर केरल गया था। बहुत जल्दी उस यात्रा के संस्मरण लिखूंगा। इसके साथ, शीघ्र ही, किसी अन्य श्रंखला पर भी चलेंगे। तब तक के लिये तो झेलिये - साउथ अफ्रीका यात्रा के संस्मरण :-)

क्या आप किसी खास श्रंखला की यात्रा पर चलना चाहते हैं - बताईयेगा।


मुक्त मानक और वामन की वापसी
भूमिका।। मुक्त मानक क्यों महत्वपूर्ण हैं?।। मुक्त मानक क्या होते हैं?।। मुक्त मानक क्यों उचित साधन हैं।। जयंत विष्णु नार्लीकर की विज्ञान कहानी -वामन की वापसी।। 'वामन की वापसी' कहानी का मुक्त मानक से सम्बंध





संबन्धित वेब पेज





About this post in Hindi-Roman and English is post per Jayan Vishnu Narlikar ke dvaara likhee 'vaman ki vaapsi' vigyaan khaani aur open format ke beech sambandhon kee charchaa. yeh hindi (devnagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post talks about relevance of open format in light of the science fiction 'The Return of Vaman' written by Jayan Vishnu Narlikar. It is in Hindi (Devnaagaree script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
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Saturday, January 31, 2009

मुक्त मानक क्यों उचित साधन हैं

'मुक्त मानक और वामन की वापसी' श्रंखला की इस कड़ी में बताया गया है कि मुक्त मानक क्यों उचित साधन हैं? इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

इसे आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,

  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
सुन सकते हैं। ऑडियो फाइल पर चटका लगायें फिर या तो डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले। डाउनलोड करने के लिये पेज पर पहुंच कर जहां Download फिर फाईल का नाम लिखा है, वहां चटका लगायें।


मुक्त मानक महत्वपूर्ण हैं। मैं इस बात को, इसी चिट्ठे में, इसी श्रंखला की चिट्ठी 'मुक्त मानक क्यों महत्वपूर्ण हैं?' में लिख चुका हुं। इसे मैं ई-पाती श्रंखला की चिट्ठी 'पापा, क्या आप उलझन में हैं' पर भी प्रकाशित कर चुका हूं।  इन दोनो चिट्टियों का पॉडकास्ट आप  मेरी बकबक पर यहां और यहां सुन सकते हैं।  'पापा, क्या आप उलझन में हैं' चिट्ठी का पॉडकास्ट आप मेरी बकबक के अतिरिक्त पॉडभारती के ८वें अंक में भी सुन सकते हैं।


मैंने इसी विषय पर एक और चिट्ठी अपने छुटपुट चिट्ठे की चिट्ठी 'मुक्त मानक का प्रयोग करना क्यों बेहतर है'? चिट्ठी पर किया है। यह चिट्ठियां न केवल मुक्त मानक के महत्व पर इसके फायदे को भी बताती हैं। 

मुक्त मानक का प्रयोग करना हमेशा फायदेमन्द ही होता है; इसमें कोई नुकसान नहीं है - यही कारण है कि ये उचित साधन हैं।

मुक्त मानक  न केवल एकाधिकार समाप्त करते हैं पर एक स्वस्थ प्रतिद्वन्तता  प्रेरित करते हैं। सूचना प्रधोगिकी में सबसे ज्यादा उन्नति मुक्त मानक के द्वारा है चाहे वह अंतरजाल हो, या  वेब सूचना स्थानान्तरित करने का तरीका। यह सब मुक्त मानक,  न की किसी मालिकाना मानक, पर आधारित हैं। इसके कम से कम निम्न फायदें हैं:

  • इनका प्रयोग करने से किसी भी प्रकार का लाइसेंस अथवा पेटेंट का भय नहीं होता हैं।
  • सारे मुक्त मानक के लिए कोई न कोई ओपेन सोर्स  सॉफ्टवेयर उपलब्ध हैं।जिसका प्रयोग मुफ्त में बिना कॉपीराइट उल्लघंन के किया जा सकता है।
  • मुक्त मानक में रखी गई फाइलें कभी भी खो नहीं सकती हैं। वह हमेशा लोगों के लिए  उपलब्ध रहेगी।
  • मुक्त मानक किसी भी सॉफ्टवेयर में लागू किया जा सकता है। इस कारण भी व्यक्ति अपनी सूचना या फाइलों का वास्तव में स्वामी रहता है।
यही कारण है कि वे एक उचित साधन हैं।

इस श्रंखला में हम जब अगली बार मिलेंगे तब प्रसिद्व  खगोलशास्त्री जयंत विष्णु नार्लीकर  की विज्ञान कहानी 'वामन की वापसी' (The Return of Vaman) की चर्चा करेंगे। यह विज्ञान कहानी मुक्त मानक के महत्व बताती है।


मुक्त मानक और वामन की वापसी
भूमिका।। मुक्त मानक क्यों महत्वपूर्ण हैं?।। मुक्त मानक क्या होते हैं?।। मुक्त मानक क्यों उचित साधन हैं।। जयंत विष्णु नार्लीकर  की विज्ञान कहानी -वामन की वापसी।। 


is post per bataaya gya hai ki mukta maanak kyon uchit sadhan hote hain. yeh hindi (devnagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post explains why ar 'Open formats' good means? It is in Hindi (Devnaagaree script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.


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Thursday, January 08, 2009

मुक्त मानक क्या होते हैं?

'मुक्त मानक और वामन की वापसी' श्रंखला की इस कड़ी में बताया गया है कि मुक्त मानक क्या होते हैं? इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

इसे आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
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मानक, कम्पयूटर दुनिया में, सूचना रखने का तरीका होता है ताकि कोई भी कम्पयूटर प्रोग्राम,

  • उस सूचना को समझ सके। 
  • उसे आपकी स्क्रीन पर दिखा सके और
  • यदि जरूरत पड़े तो उसमें संशोधन किया जा सके।

कम्पूयटर में अलग-अलग तरह की सूचनाएं अलग-अलग मानक में रखी  जाती हैं। जैसे कि टेक्सट (text),  वीडियो, आडियो, चित्र के लिए अलग अलग मानक है। किसी एक तरह की सूचना को भी रखने के भी कई मानक होते हैं। जैसे आडियो फाइल को mp3 में या ogg मानक  में रखा जा सकता है।  इसके अतिरिक्त भी कई अन्य मानक भी हैं।

मानक अक्सर मालिकाना होते हैं।

  • यह मानक किस तरह से काम करते हैं यह बात गुप्त रखी जाय, तब मानक ट्रेड सीक्रेट की तरह सुरक्षित होता है। एम एस वर्ड अपनी टैक्सट फाइलों को doc मानक में रखता है। यह गुप्त है और ट्रेड सीक्रेट की तरह सुरक्षित है।
  • मानक प्रकाशित होकर भी मालिकाना हो सकता है। इस दशा में वे पेटेंट की तरह सुरक्षित किये जाते  हैं। चित्र भी, कई  तरह के (मानक) में रखे जाते हैं जिसमें एक मानक gif है। यह मानक पेटेंट की तरह सुरक्षित हुआ करता था। यही कारण है कि यह मानक बहुत ज्यादा लोकप्रिय नहीं हो सका।

मुक्त मानक, मालिकाना मानक के विपरीत होते हैं। किसी मानक को  मुक्त होने के लिए कम से कम  निम्न शर्तों को पूरा किया जाना चाहिए। मुक्त मानक को,

  • पूरी  तरह से लिखा और प्रकाशित होना चाहिए। ताकि कोई भी व्यक्ति चाहे तो उसे अपने कम्पयूटर प्रोग्राम में लागू कर सके।
  • सबको हर समय के लिए बिना किसी शर्त, रॉयल्टी या फीस के उपलब्ध होना चाहिए।
  • किसी तटस्थ संस्था के द्वारा लागू किया जाना चाहिए जहाँ पर निर्णय सर्वसम्मत्ति से या बहुमत से हो। ताकि अधिक से अधिक लोगों की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

ओपेन डॉक्यूमेन्ट फॉरमैट, एक एक्स.एम.एल. आधारित डॉक्यूमेन्ट फइल फॉरमैट जैसे odt, odp, का  लोगो 

मुक्त मानकों के लिए निम्न उदाहरण है:
  • टेक्सट फाइलों के लिए ASCII, Odt, पर doc मुक्त मानक नहीं हैं।
  • चित्रों के लिए Jpeg 2000, png पर bmp नहीं।
  • आडियो और विडियो फाइलों के लिए ogg, theora पर  mp3 नहीं।
  • प्रस्तुतिकरण के लिए odp पर ppt नहीं,
  • वेब पेज लिखने के लिए html/xhtml, यूनिकोड  (Unicode), लेटेक्स (Latex).

इस श्रंखला की अगली कड़ी में चर्चा करेंगे कि मुक्त मानक क्यों उचित साधन हैं?

मुक्त मानक और वामन की वापसी
भूमिका।। मुक्त मानक क्यों महत्वपूर्ण हैं?।। मुक्त मानक क्या होते हैं?।। मुक्त मान क्यों उचित साधन हैं।। 


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