Sunday, April 06, 2008

विज्ञान कहानियां क्या होती हैं और उनका मूलभूत सिद्धान्त: बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां

विज्ञान कहानियां को परिभाषित करना सरल नहीं है। यह तो कल्पनाओं की उड़ान है जिसमें विज्ञान या तकनीक का पुट होता है। यह अक्सर,
  • अन्तरग्रहिक, दूसरे सौर मंडल, या निहारिकायें की यात्राओं के बारे में होती हैं; या
  • समय यात्राओं के साथ भविष्य का वर्णन करती हैं; या
  • वैज्ञानिक दृष्टि से भूत काल में क्या हुआ होगा इसके बारे में होती हैं; या
  • किसी कल्पनिक घटना को वैज्ञानिक परिपेक्ष में रखती हैं; या
  • किसी वास्तविक घटना को काल्पनिक परिवेष के साथ वैज्ञानिक परिपेक्ष में ढ़ालती हैं।
मेरे विचार से एसिमोव के द्वारा लिखी गयी फॉउंडेशन श्रंखला, आज तक लिखी गयी विज्ञान कहानियों में, सबसे बेहतरीन है। यदि आप ने इसे नहीं पढ़ा है तो अवश्य पढ़ें।

फॉउंडेशन श्रंखला की दूसरी पुस्तक

यदि आप विज्ञान कहानियों के बारे में विस्तार में जानना चाहें तो अरविन्द मिश्र जी की चिट्ठियों 'आईये जानें क्या है विज्ञान कथा!', 'सामाजिक कहानी ऑर विज्ञान कथा में फ़र्क!', 'विज्ञान कथा ऑर मिथक मे फर्क!', और 'आईये जाने क्या है विज्ञान कथा -समापन किश्त!' पर नजर डालें।

विज्ञान कहानियों का मूलभूत सिद्धान्त
विज्ञान कहानियों का मूलभूत सिद्धान्त, आर्थर सी कलार्क ने अपने एक लेख 'Hazards of Prophecy: The Failure of Imagination' में बताया है। यह लेख उनकी पुस्तक 'Profiles of the Future: An Inquiry into the Limits of the Possible' में प्रकाशित है। इस लेख में उन्होंने विज्ञान के भविष्य के बारे में चार निम्न नियम प्रतिपादित किये हैं। यह नियम हैं,
  1. When a distinguished but elderly scientist states that something is possible, he is almost certainly right. When he states that something is impossible, he is very probably wrong. जब कोई प्रतिष्ठित वैज्ञानिक कहे कि कुछ संभव है तो वह निश्चित तौर पर सही होते हैं पर जब वे कहते हैं कि यह असंभव है तो सम्भावना यह है कि वे गलत हैं।
  2. The only way of discovering the limits of the possible is to venture a little way past them into the impossible. क्या संभव है जानने के लिये, केवल रास्ता है कि संभव से हटकर असंभव की तरफ देखें।
  3. Any sufficiently advanced technology is indistinguishable from magic. किसी भी पर्याप्त विकसित तकनीक और जादू में फर्क कर पाना नामुमकिन है।
  4. For every expert, there is an equal and opposite expert. प्रत्येक विशेषज्ञ के लिये, एक विपरीत विशेषज्ञ है।
उन्होंने पहला नियम इस लेख में प्रतिपादित किया। यह इस पुस्तक के पहले संस्करण (१९६२) में था। उन्होने दूसरा वा तीसरा, नियम इस पुस्तक के संशोधित संस्करण (१९७२) में लिखा। उस समय उनका कहना था कि,
'As three laws were good enough for Newton, I have modestly decided to stop there.' न्यूटन के लिये तीन नियम काफी थे, इसलिये मैं भी यहां पर रूक जाता हूं।
लेकिन इस पुस्तक १९९९ के संस्करण में, उन्होंने चौथा नियम जोड़ा।

न्यूटन के तीसरे नियम की तरह, इसका भी तीसरा नियम सबसे ज्यादा उद्धरित एवं प्रसिद्ध है। यह नियम नें विज्ञान कहानियों में सबसे ज्यादा योगदान दिया है। विज्ञान कहानियां इसी से प्रेरित रही हैं और यही इनका मूलभूत सिद्घान्त है।

कलार्क के द्वारा लिखी गयी विज्ञान कहानियों में मेरा सबसे प्रिय उपन्यास है - द सिटी एण्ड द स्टारस्। इसमें उन्होंने अपने तीसरे नियम का बेहतरीन प्रयोग किया है।

कलार्क के तीसरे नियम को, आधुनिक युग के विज्ञान कहानियों के लेखकों ने अलग अलग तरह से लिखा है।

विज्ञान कहानियां सम्मान की श्रेणी में कैसे पहुंची, यह इस श्रंखला की अगली कड़ी पर।


बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां
भूमिका।। प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में क्यों हुआ?।। क्रिस्मस को बड़ा दिन क्यों कहा जाता है।। बेथलेहम का तारा क्या था।। बेथलेहम का तारा उल्कापिंड या ग्रहिका नहीं हो सकता।। पिंडों के पृथ्वी से टक्कर के कारण बने प्रसिद्ध गड्ढ़े।। विज्ञान कहानियां क्या होती हैं और उनका मूलभूत सिद्धान्त।।

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यह ऑडियो फइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप -
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
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  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में - सुन सकते हैं।
बताये गये चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले।

इस चिट्ठी में कलार्क का चित्र विकीपीडिया से है और ग्नू स्वतंत्र अनुमति पत्र की शर्तों के अन्तर्गत प्रकाशित किये गये हैं।


इस चिट्ठी पर 'विज्ञान कहानियां क्या होती हैं और उनका मूलभूत सिद्धान्त (कलार्क का तीसरा नियम) क्या है' के बारे में है यह हिन्दी (देवनागरी लिपि) में है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

is post per 'vigyaan khaaniyan kfyaa hotee hain aur unka moolbhoot sidhaant (Clarke kaa teesra niyam) kya hai' ke baare mein charchaa hai. yeh hindi (devnaaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post explains what is science fiction and talks about its fundamental principle namely the third law of Clark. It is Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.


सांकेतिक शब्द
Arthur C Clarke, Foundation Series, Future, Science Fiction, The City and the Stars, विज्ञान कहानियां,
Astronomy, Astronomy, bible, Bible, Star of Bethlehem, बेथलेहम का तारा
culture, Family, fiction, life, Life, Religion, जीवन शैली, धर्म, धर्म- अध्यात्म, विज्ञान, समाज, ज्ञान विज्ञान,

5 comments:

  1. आज तो मानो चिर प्रतीक्षित मन की मुराद ही पूरी हो गयी .......विज्ञान कथाओं पर आपकी इस श्रृंखला से मैं तो अभिभूत हूँ -आज हिन्दी साहित्यकारों ने इस उर्वर विधा को जिस तरह उपेक्षित कर रखा है बहुत दुख होता है .बहुत सम्भव है कि उनमे से अधिकांश इसके बारे मे जानते नहों -आपके इस पहल/प्रयास से विज्ञान कथाओं को हिन्दी मनीषा सहज ही स्वीकार करे मेरी यह हार्दिक अभिलाषा है .
    आगे भी कडियों का इंतज़ार रहेगा .....मुझे आपके अध्ययन से काफी लाभ मिल रहा है ....पश्चिम मे तो यह पहले से ही एक समादृत साहित्यिक विधा है ,आप यह बताने ही जा रहे हैं .मगर विज्ञान कथा हिन्दी साहित्य मे अछूत की हैसियत से बाहर आए और सम्मान की अधिकारिणी बने बस यही स्वप्न है ......

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  2. सिरिल गुप्ता10:26 pm

    इस लेख के लिये धन्यवाद!

    विज्ञान कथाओं में मेरी रुची अत्याधिक है. फाउंडेशन के तीनों भाग पढ़ें हैं :) सचमुच बहुत जबर्दस्त थे. बचपन में भोपाल की ब्रिटिश लाइब्रेरी में ढूंढ़-ढूंढ़कर क्लार्क के उपन्यास पढ़ना याद दिला दिया आपने.

    एक बार फिर धन्यवाद.

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  3. सिरिल जी, एसिमोव ने पच्चास के दशक में फाऊंडेशन श्रंखला के तीन उपन्यास लिखे। इसके बाद अस्सी के दशक में तीन उपन्यास और लिखे। यह भी पढ़ने योग्य हैं।

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  4. Vigyan katha pe aapki post sargarbhit aur ruchikar hai. Halanki main khud bhi is vishay par thoda bahut likhta raha hoon, par aapki post se kaafi kuchh seekhne ko mila hai. is post ke liye aabhar.

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  5. unmukt ji,
    Aapke blog ko aaj pahli baar dekha. Bahut khushi hui ki aap vigyan kathaon par itna accha kaam kar rahe hain.

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आपके विचारों का स्वागत है।