Sunday, June 17, 2012

नैनीताल झील की गहरायी नहीं पता चलती

इस चिट्ठी में, नैनीताल की झील में सैर की चर्चा है।


नैनीताल की सबसे सुन्दर जगह, उसकी झील है। हम लोग झील में,नौका विहार के लिए भी गये।

नौका चलाने वाले व्यक्ति का नाम शंकर सिंह बिष्ट था। उससे बात करने पर बहुत सी जानकारी मिली।

नौका विहार के लिए इस समय एक निर्धारत रेट देना पड़ता है। यह निर्धारण हाई कोर्ट में एक लोकहित याचिका के द्वारा किया गया है। इसमें झील का पूरा चक्कर लगाने के लिए १५०/-रूपया देना पड़ता है और १०/-रूपया जैकेट के लिए।

हालांकि जहां तक मुझे याद पड़ता है कि आज तक इस झील में कभी भी नौका पलटने या डूबने का कोई समाचार नहीं मिला है। फिर भी सभी लोग जैकेट पहने हुए थे। यह शायद उन्हें आश्वस्त करता है कि वह डूब नहीं सकेगें।


हमारे नाविक - शंकर सिंह बिष्ट
शंकर सिंह ने बताया कि यह नाव उसकी नहीं है पर वह इसे किराये पर चलाता है और उस १५०/-रूपया में से ८५/-रूपया उसका है और १५/-रूपया सरकार को टैक्स दिया जाता है। बाकी ६०/-रूपया जिसमें कि १०/-रूपया जैकेट के है वह नौका के मालिक को मिल जाता है।

मैंने शंकर सिंह  से झील की गहरायी पूछी तो उसने कहा,

'झील बहुत गहरी है और कुछ जगह पर इसकी गहरायी पता ही नहीं चलती है। ठंडी सड़क पर हनुमानजी का मंदिर है। इस झील के पानी का स्रोत वहीं है आज तक इसकी तह नही मिल पायी है  क्योंकि यहीं से, पानी जमीन से निकल कर आ रहा है।'
अगली बार हम झील की सफाई के बारे में चर्चा करेंगें।

फिल्म 'कटी पतंग' में, राजेश खन्ना और आशा पारिख के साथ,नैनीताल झील का मज़ा लें।  

जिम कॉर्बेट की कर्म स्थली - कुमाऊं
जिम कॉर्बेट।। कॉर्बेट पार्क से नैनीताल का रास्ता - ज्यादा सुन्दर।। ऊपर का रास्ता - केवल अंग्रेजों के लिये।। इस अदा पर प्यार उमड़ आया।। उंचाई फिट में, और लम्बाई मीटर में नापी जाती है।। चिड़िया घर चलाने का अच्छा तरीका।। नैनीताल में सैकलीज़ और मचान रेस्त्रां जायें।। क्रिकेट का दीवानापन - खेलों को पनपने नहीं दे रहा है।। गेंद जरा सी इधर-उधर - पहाड़ी के नीचे गयी।। नैनीताल झील की गहरायी नहीं पता चलती।।

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प्रकृति का नज़ारा - सूरज होगा कलंकित

होप डायमन्ड



 
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Kumaon,
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10 comments:

  1. तभी तो आँखों की तुलना झील से की जाती है, गहराई बताने के लिये...

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  2. एक बार घूमा हूँ। देखने में जितनी खूबसूरत है वास्तव में उतनी है नहीं। प्रदूषण ने इस झील को भी गंदा कर दिया है। मॉल रोड के बड़े-बड़े होटल और झील किनारे के अनगिनत आवासों का मल जल, यहीं मिल जाता होगा ऐसा लगा। मैने यहाँ किसी को उन्मुक्त भाव से तैरते नहीं देखा। मुझे तैरने की इच्छा हुई लेकिन नाविक ने ही मना कर दिया। झील में छपाक से कूद कर देर तक तैरने का सुख न मिले तो फिर वह झील किस काम का!

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  3. खूबसूरत सैर के लिए शुक्रिया..

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  4. यादें हैं इस झील की मेरे पास भी ......यह ख़राब ढंग से प्रबंधित है .
    यहाँ मनोरंजन मात्स्यिकी -ऐन्गलिंग इंट्रोड्यूस की जा सकती है ..
    अभी हाल में यह झील बाहर किसी स्थान से जल रिसाव के कारण चर्चा में थी
    वीडियो का तो कहना ही क्या :)

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  5. नैनीताल और उसकी झील की खूबसरती से अवगत करानें के लिए धन्यवाद ।

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  6. thanks. bahut dinon se naee post nahi aayi sir ...

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    1. मुन्ना और परी भारत आयें हैं - समय उन्हीं के साथ गुजर रहा है। उनके जाने के बाद फिर से लेखन की तरफ वापस लौटूंगा।

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  7. आपके इस लेख से नैनीताल की यादें तजा हो गयीं ...
    आभार आपका !

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  8. इस झील पर बहुत नौका विहार किया है. मल्लाहों से पतवार लेकर नव भी बहुत चलाई है. तब तो यह गन्दी न थी. हाँ सैलानियों द्वारा फेंके गए भुट्टों के अवशेष अवश्य बुरे लगते थे.
    घुघूतीबासूती

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  9. अच्छा लगा यह लेख पढ़ कर और बाद में अपना पसंदीदा गीत ...जिस गली में तेरा घर न हो .....बहुत बढ़िया।

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आपके विचारों का स्वागत है।