Sunday, July 01, 2018

द साइंटिस्ट ऐज़ रिबेल


यह चिट्ठी फ्रीमन डाइसन के द्वारा लिखी पुस्तक 'द साइंटिस्ट ऐज़ रिबेल' की समीक्षा है। 


फ्रीमन डाइसन एक जाने माने सैद्धांतिक भौतिकशास्त्री हैं और इंस्टिट्यूट ऑफ एडवान्स स्टडीस्, प्रिंक्स्टन में अवकाश प्राप्त प्रोफेसर हैं। उन्होंने बहुत सी पुस्तकें लिखीं हैं जिसमें मैंने निम्न पढ़ीं हैं।
  • Disturbing The Universe;
  • Infinite in All Directions (Gifford Lectures Given at Aberdeen, Scotland April--November 1985);
  • The Sun, The Genome, and The Internet: Tools of Scientific Revolutions (New York Public Library Lectures in Humanities);
  • Origins of Life;
  • From Eros to Gaia.
इस गर्मी मैंने उनकी एक और पुस्तक 'द साइंटिस्ट ऐज़ रिबेल' पढ़ी। यह पुस्तक उनके द्वारा लिखी पुस्तक समीक्षाओं एवं उनके लेखों का संग्रह है।

रिचर्ड फाइनमेन के पत्रो को उनकी पुत्री ने प्रकाशित किया है। यह पुस्तक अलग अलग नाम से प्रकाशित हुई है। इस पुस्तक में इसकी भी समीक्षा है। 


मैंने भी फाइनमेन के पत्रों की पुस्तक की समीक्षा इसी चिट्ठे पर कड़ियों में, फिर उसे संकलित कर यहां प्रकाशित की है़। इन दोनो समीक्षाओं को देखें तो पता चलता है कि मैंने पुस्तक में छपे पत्रों का जिक्र किया वहीं डाइसन ने केवल एक पत्र का जिक्र किया पर उसमें फाइनमेन के बारें किस्सों, उनके रेखा-चित्र, जिस पर उन्हें नोबल पुरुस्कार मिला है, की चर्चा की है। यानि उनकी समीक्षा फानमेन के बारे में पूरी जानकारी देती है। यही बात उनके सारे लेखों में है।
फ्रीमन डाइसन - चित्र विकिपीडिया से

डाइसन के लेखों में यह खासियत है कि वे जिस पुस्तक की समीक्षा कर रहें हैं यह जो अन्य लेख लिखे है वे उस विषय के बारे में, संक्षेप में, पूरी जानकारी देते हैं।  हर लेख के बाद उपसंहार भी है, जिसमें उस लेख को लिखे जाने के बाद की जानकारी है। यह उनके लेखों को बेहतर बनाता है।

इनमें अधिकतर लेख विज्ञान संबन्धी विषयों के बारे में हैं पर वे सरल भाषा में लिखे गये हैं और सबकी समझ में आ सकते हैं। कुछ विषय विज्ञान से हट कर भी लिखें गये हैं। इनमें एक लेख 'पैसिफिस्ट' नाम से है। यह उनकी पुस्तक 'वैपनस् एण्ड होप' से लिया गया है। इसमें वे अपनी राय देते हैं कि क्यों गांधी का सत्याग्रह अंग्रेजों के खिलाफ सफल रहा पर शान्तिवादी आंदोलन अन्य जगह सफल नहीं हो पाया।

इस पुस्तक में, एक समीक्षा, Georges Charpak एवं Henri Broch की पुस्तक 'Debunked! ESP, Telekinesis and other Pseudosciences' की है। यह मुझे Martin Gardener की 'Science: Good, Bad, and Bogus' पुस्तक की याद दिलाती है, जिसकी चर्चा मैंने यहां की है। इस लेख में उनके विचार अपसामान्य घटनाओं के बारे में हैं जिनसे मैं सहमत नहीं हूं। हालांकि वे लेख में, अपने पूर्वाग्रह की भी चर्चा करते हैं। शायद उनके विचार उसी कारण हों।


रौबर्ट ओपेनहाइमर एटम बॉम्ब और एडवर्ड टेलर को हाईड्रोजन बॉम्ब का जनक कहा जाता है। इस पुस्तक में दो लेख उनके बारे में है, जिसमें बहुत सी बातों का जिक्र है, जो कि मुझे कहीं अन्य जगह नहीं मिली थीं। यह लेख इन दोनो के व्यक्तित्व के बारे में नयी जानकारी देता है। इस तरह की जानकारी हर लेखों में है जो इस पुस्तक को पढ़ने योग्य बनाते हैं।

मेरे विचार से यह पुस्तक बेहतरीन है। आप अवश्य पढ़ें - कम से कम अपने मुन्ने या मुन्नी को जरूर पढ़ने के लिये भेंट में दें।



About this post in Hindi-Roman and English

is post mein, Freeman Dyson kee likhee pustak 'The Scientist As Rebel' kee sameeksh hai. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post of Hindi (Devanagari script) is review of the book  'The Scientist As Rebel' by Freeman Dyson.  You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द  
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Freeman Dyson, The Scientist as Rebel

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