इस चिट्ठी में, विटलबाख डायमंड के बारे में चर्चा है।
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इस चिट्ठी में, दरियाये नूर (Ocean of light) और नूर उल ऎन (the light of eye) नामक हीरों की चर्चा है।
ईरान की महारानी के मुकट में जड़ा नूर उल ऐन
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इंगलैन्ड के राजमुकुट में जड़ा, कोहिनूर हीरा - चित्र फोटोबकेट से
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इस चिट्ठी में गोलकोण्डा किले के इतिहास की चर्चा हैं।
गोकोण्डा का किला
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इस चिट्ठी में लेखक रस्किन बॉन्ड के बारे में चर्चा है। यह मेरी मथुरा यात्रा की भूनिका है।
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रस्किन बॉन्ड पुस्तकों की दुकान पर - चित्र फोटोबकेट से चित्र
ऍपीमेनेडीज़ या लाएरस् विरोधाभास का एक रूप यह भी सिद्ध करता है कि ईश्वर का आस्तित्व नहीं है। आज कुछ चर्चा उसी के बारे में।
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यह कार्टून मेरा बनाया नहीं है। मैंने इसे यहां से लिया है। Cartoon by Nicholson from "The Australian" newspaper: www.nicholsoncartoons.com.au
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इस चिट्ठी में, एयोस्टोलोस डॉक्सिएडिस द्वारा लिखित उपन्यास, 'अंकल पेट्रोस एण्ड गोल्डबाकस् कंजेक्चर' की चर्चा है।
वेदांग ज्योतिष, लगभग १३५० ई.पू. के आसपास लिखा गया था। इसमें कहा गया है कि, यथा शिखा मयूराणां नागानां मण्यो यथा। तथा वेदाङ्गशास्त्राणां गणितं मूर्धनि स्थितम्।। जिस तरह से, मोरों के सिर पर कलगी और सापों के सिर में मणियां, उसी तरह वेदांग, शास्त्र और विज्ञान में सिरमौर गणित।। 'अंकल पेट्रोस एंड गोल्डबैक्स कंजेक्चर' किताब गणित के रोमांस के बारे में है। नीचे दिया गया लिंक, अंग्रेजी में, पुस्तक की समीक्षा है।
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इस चिट्ठी में, गर्डल से संबन्धित तीसरी पुस्तक, 'गर्डल, ऍशर, बाख: एन ईटनल गोल्डेन ब्रेड' की चर्चा है। इसके लेखक हैं - डगलस आर हॉफेस्टैडर।
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कंप्यूटर सॉफ्टवेयर, गणित के तर्क शास्त्र पर चलता है। कंप्यूटर वायरस, इसकी कमियों का फायदा उठाते हैं। इसलिये साइबर अपराध की श्रृंखला में, साइबर अपराधों के बारे में बात करने से पहले, कुछ बातें गणित के प्रसिद्ध २३ सवालों, और तर्क शास्त्र के क्षेत्र से, स्वयं को संदर्भित करने वाले विरोधाभास के बारे में।
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'बुलबुल मारने पर दोष लगता है' श्रृंखला, 'To Kill A Mockingbird' उपन्यास के बारे में थी। इस श्रृंखला में चर्चा थी कि यह उपन्यास क्यों लिखा गया , इसकी क्या कहानी थी, इसकी क्या शिक्षा है। इस चिट्ठी में चर्चा है कि इसका श्रृंखला के नाम का चयन कैसे हुआ।
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मेरी बिमारी के समय मेरे बेटे और बिटिया रानी ने कुछ पुस्तकें पढ़ने के लिये भिजवायीं थीं। इनमें से एक पुस्तक 'हू द हेल इज़ ओ ॑-हारा' (Who the Hell is O'Hara) है। इस पुस्तक में, दुनिया के ५० बेहतरीन लिखे उपन्यासों के बारे में लिखा है कि वे किस प्रकार से लिखे गये हैं। यह पुस्तक पढ़ने योग्य है।
इस पुस्तक में एक लेख 'टू किल अ मॉकिंगबर्ड' उपन्यास के बारे में था। इस उपन्यास को मैंने अपने बचपन में पढ़ा था तभी इस पर बनी फिल्म भी देखी थी। इसी को पढ़ते समय मुझे इस श्रृंखला को लिखने का विचार आया और इसकी रूप रेख बनायी। फिर सवाल उठा कि इस श्रृंखला का क्या नाम रखा जाय।
इस उपन्यास में एक वाक्य है।
'It is sin to kill a mockingbird'
मुझे लगा कि इस श्रृंखला का यही नाम होना चाहिये। अब सवाल उठा कि इसका उचित हिन्दी अनुवाद क्या होगा।
मॉकिंगबर्ड एक छोटी सी चिड़िया होती है। यह मुधर आवाज़ के लिये जानी जाती है। यह केवल अमेरिका में पायी जाती है। इसलिये इसका हिन्दीं में कोई नाम नहीं है। शास्त्री जी ने अनुवाद नहीं सुझाया पर कहा,
'Mockingbird is a harmless bird, but since it tends to sing after midnight, many are irritated and kill it. I have not seen a Hindi equivalent. Any saying that says we should not kill the innocent due to our personal annoyance will do. I have not come across any Hindi saying for that.'
मॉकिंगबर्ड निर्दोष चिड़िया होती है। यह आधी रात के बाद गाती है इसलिये लोग खिजाते हैं और मारते हैं। मुझे इसके बारे में हिन्दी में कहावत नजर नहीं आयी। लेकिन कोई भी कहावत जो यह कहती हो कि निर्दोष को मारना गलत है ठीक होगी।
सोन चिरैया या Indian bustard एक बड़ी चिड़िया है और अपनी सुंदरता के लिये जानी जाती है अपनी मधुर आवाज़ या गाने के लिये नहीं। यह लुप्त हो रही है यदि हमने इसे रोका नहीं तो यह हमेशा के लिये गायब हो जायगी।
मुझे सुनने में यह शीर्षक अच्छा लगा। लेकिन इस उपन्यास में मॉकिंगबर्ड गाने वाली छोटी चिड़िया है और निर्दोषता का प्रतीक है। मैं किसी छोटी गाने वाली चिड़िया का ही नाम रखना चाहता था। मेरे परिवार वालों ने कोयल, मैना, शमा नाम सुझाया पर मुझे में बुलबुल नाम ठीक लगा।
बुलबुल एक छोटी गाने वाली चिड़िया है जो निर्दोष है और अपने देश में जानी जाती है। इसकी प्यारी आवाज यहां सुन सकते हैं। यह मेरे घर में बहुत आती है। अब सवाल उठा कि शीर्षक क्या होना चाहिये।
अन्त में मुझे अरविन्द जी का शीर्षक ही पसन्द आया। बस सोन चिरैया की जगह बुलबुल कर दिया और 'को' शब्द गायब कर दिया - मिल गया इस श्रंखला का शीर्षक, 'बुलबुल मारने पर दोष लगता है'।
अभी कुछ कम समझ में आ रहा है और समय की भी कमी लगती है। देखिये कब कोई नयी श्रृंखला शुरू कर पाता हूं।
इस श्रृंखला की पिछली कड़ियां नीचे चटका लगा कर पढ़ें। यदि उस कड़ी को सुनना चाहें तब उस कड़ी के आगे लगे ► चिन्ह पर चटका लगायें। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट, 'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने' देखें।
‘टु किल अ मॉकिंग बर्ड’ उपन्यास में, जीवन के दर्शन को कुछ सरल भाषा में बताया गया है। इस चिट्ठी में उसी की चर्चा है।
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‘टु किल अ मॉकिंग बर्ड’ में ऎटिक्स स्कॉउट को समझाते हैं कि,
'Scout, if you can learn a simple trick, you'll get on better with all kinds of folks. You never really understand a person until you consider things from his point of view.....Until you climb into his skin and walk about in it.' जब तक आप दूसरे की नजर से नहीं देखोगे तब तक उसे समझ नही सकते।
एक जगह जब एटिक्स, स्कॉउट से पूछते हैं कि क्या वह चाहेगी कि उसकी बुआ वहां उन के साथ रहें तब स्कॉउट जवाब देती है,
'I said I would like it very much—a lie, but one must lie under certain circumstances when one can't do anything about them' मैंने कहा कि मैं अवश्य चाहूंगी कि बुआ हमारे साथ रहें। यह बात एकदम झूट थी लेकिन किसी को उन परिस्थतियों में झूट बोलना चाहिए जब वह उसके बारे में कुछ न कर सके।
जब अश्वेत व्यक्ति के मुकदमे में वकील हो जाने के बाद सब लोग एटिक्स और उसके बच्चों से बात करना बंद कर देतें हैं। तब ऎटिक्स अपने बच्चों को समझाते हैं,
'Because I couldn't Scout, every lawyer gets at least one case in his lifetime that affects him personally. This one's mine, I guess. You might hear some ugly talk about it at school, but do one thing for me: no matter what anybody says to you, you just hold your head high and keep those fists down.' मै इस मुकदमें को लेने से नही मना कर सकता था। प्रत्येक वकील के जीवन में कम से कम एक मुकदमा आता है जो उसे व्यक्तिगत तौर पर असर करता है। यह मेरे लिए वैसा ही मुकदमा है। हो सकता है कि इसके बारे में, तुम कुछ भद्दी बातें स्कूल में सुनो पर ख्याल रखना कोई भी कुछ कहे अपना सर उठा कर चलना।
ऎटिक्स अश्वेत लड़की के पिता से जिरह के दौरान दस्तखत करने को कहता है सबको आश्चर्य होता है पर स्काउट को मालूम था कि उसके पिता ऎसा क्यों कर रहे थे। यह वकील के जीवन का कटु सत्य भी है।
'Atticus seemed to know what he was doing ... but it seemed to me that he'd gone frog-sticking without a light. Never, never on cross- examination ask a witness a question you don't know the answer to, was a tenet I had absorbed with may baby food.' ऎटिक्स को मालूम था कि वह, क्या कर रहा था --- गवाह से जिरह करते समय कभी ऎसा सवाल न पूछो जिसका जवाब तुम्हें न मालूम हो।
श्वेत लड़की के दाहिनी तरफ चोट थी। इससे पता चला कि उसे किसी बायें हत्थे व्यक्ति ने मारा है। उस लड़की के पिता ने बायें हाथ से दस्तखत किये। जिससे पता चल गया कि उसका पिता बांया हत्था था जब कि अश्वेत का बांया हाथ खराब था। दाहिने हाथ से मुंह के दाहिने तरफ मार पाना बहुत मुश्किल है। ऎटिक्स दिखाना चाहता था कि श्वेत लड़की के पिता ने ही उसे मारा था।
बचपन के दिन भी क्या दिन थे। 'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' फिल्म के एक दृश्य में जेम और स्कॉउट
एक अन्य जगह एटिक्स, स्कॉउट से कहते हैं,
'Most people are... nice ....when you finally see them.' जब हम लोगों का समझा पाते है तो पता चलता है कि अधिकतर लोग अच्छे होतें है।
इस उपन्यास में यह दर्शाया गया है कि निर्दोषता समाप्ति पर क्या होता है। मॉकिंगबर्ड छोटी गाने वाली चिड़िया होती है वे किसी का नुकसान नहीं करती। इस उपन्यास में, मॉकिंगबर्ड ही निर्दोषता के प्रतीक के रूप में बताया गया हैं।
स्काउट और उसका बड़ा भाई, बड़े दिन पर एयर राइफल चाहते थे और यह उन्हें मिलती है। लेकिन ऎटिक्स उनसे कहते हैं,
'I'd rather you shoot at tin cans in the back garden but I know you'll go after birds. Shoot all blue jays you want, if you can hit them, but remember it's sin to kill a mocking bird'. मुझे अच्छा लगेगा यदि तुम लोग बगीचे में टिन के डिब्बों पर निशाना लगाओ। पर तुम लोग चिड़ियों के पीछे जाओगे। तुम्हे जितनी ब्लूजे को मारना हो मारो, यदि तुम उन्हें मार सको। लेकिन याद रखना मॉकिंगबर्ड को मारने से पाप लगता है।
जब वे अपनी पड़ोसन से मॉकिंगबर्ड न मारने का कारण पूछतें है तब वह बताती है,
'Your father is right. Mockingbird don't do one thing but make music for us ... That's why it's a sin to kill a mockingbird'. तुम्हारे पिता ठीक कहते हैं। मॉकिंगबर्ड कोई नुकसान नहीं पहुंचाती लेकिन हमें संगीत सुनाती हैं। इसीलिये इन्हें मारने से पाप लगता है।
यहीं से इस उपन्यास का नाम लिया गया है।
इसी के साथ यह श्रंखला समाप्त होती है। बहुत जल्द, किसी नयी नयी श्रृंखला के साथ मुलाकात होगी। तब तक के लिये आप हिमाचल यात्रा का आनन्द लें।
स्कॉटस्बॉरो बॉयज़ ट्रायल में, ९ अश्वेत लोगों पर, श्वेत लड़कियों के साथ बलात्कार करने का मुकदमा ऍलाबामा राज्य में चला था। इस मुकदमे ने हार्पर ली पर असर डाला। उनके द्वारा लिखा उपन्यास, 'टु किल अ मॉकिंग बर्ड' इसी पर आधारित है। आज चर्चा करेंगे - इस उपन्यास की कहानी के बारे में और इसके एवं ली के वास्तविक जीवन में समन्वय को भी देखेंगे।
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ली, पुस्तक पर बनी फिल्म प्रॉड्यूसर के साथ - चित्र सौजन्य विकिपीडिया
हार्पर ली का जन्म २८ अप्रैल, १९२६ को ऍलाबामा राज्य में हुआ था। ऍलाबामा राज्य अमेरिका के दक्षिण में है उस समय दक्षिण और उत्तर अमेरिका में, अश्वेतों के बर्ताव में काफी अन्तर था। दक्षिण में नागरिक अधिकारों का उतना महत्व नहीं था। स्कॉटस्बॉरो बायॉज़ के मुकदमे के समय, ली छ: साल की थी। इस मुकदमे ने, उस के जीवन में बहुत कुछ असर डाला। 'टू किल अ मॉकिंगबर्ड' इसी अनुभवों के आधार पर लिखा उपन्यास है। यह कहानी १९३० के दशक की है। यह कहानी है एक बहन स्काउट, उसके भाई जेम और उनके मित्र डिल की।
स्काउट के पिता एटिक्स फिंच एक वकील हैं। बू रैडली उनके रहस्यमय पड़ोसी हैं। इसमें एक अश्वेत व्यक्ति पर एक श्वेत लड़की से बलात्कार का प्रयत्न करने के लिए मुकदमा चलता है। एटिक्स को बचाव पक्ष का अधिवक्ता नियुक्त किया जाता है। इस मुकदमे में यह सिद्ध हो जाता है कि अश्वेत व्यक्ति निर्दोष है और श्वेत लड़की को चोटें,उसके पिता ने ही पहुंचायी थी। फिर भी, अश्वेत व्यक्ति को सजा हो जाती है। इस मुकदमे के बाद श्वेत लड़की का पिता स्काउट और जेम को मारने का प्रयत्न करता है। उस समय बू रैडली जो कि अविवेकी के रूप में जाना जाता है उनकी जान बचाता है।
'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' फिल्म में एटिक्स की भूमिका में ग्रेगरी पेक और स्कॉट की भूमिका में मैरी बैधम
बहुत से लोगों का कहना है कि 'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' हर्पर ली की जीवनी है पर वे इस बात को तो नकारती है पर यह भी स्वीकारती हैं कि उन्होंने जीवन में जो भी देखा, उसी को इस कहानी में उतारा है।
लोगों का कहना भी गलत नहीं है क्योंकि वास्तविक जीवन में भी ली का बड़ा भाई और मित्र था। उसके पिता भी वकील थे और शादी के पहले उनकी माँ का नाम फिंच था जो कि उपन्यास में इनका सर-नाम है। उपन्यास से में ली का मित्र डिल है और वास्तविक जीवन में उनके मित्र का नाम ट्रूमैन कापाटे था।
उसका पहले नाम ट्रूमैन स्ट्रेकफस परसॉनस् (Truman Streckfus Persons) था। ट्रूमैन, जब चार साल का था तभी उनके माता-पिता में तलाक हो गया। उसकी मां हमेशा अच्छा जीवन जीने की सोचा करती थी। लेकिन तलाक से वह टूट गयी। उसने ट्रूमैन को उनकी आंटी के पास, मॉनरोविले में भेज दिया। वह ली को पड़ोसी था। वहीं उसका लालन पालन हुआ। 'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' में भी डिल दूसरी जगह से आता है।
ट्रूमैन की मां न्यूयार्क चली गयी जहां उसने दूसरी शादी कर ली। बाद में ट्रूमैन के सौतेले पिता ने उसे गोद ले लिया जिससे उसका नाम बदलकर ट्रूमैन कापाते हो गया।
'टु किल अ मॉकिंग बर्ड' जीवन के दर्शन को कुछ सरल वाक्यों में बताती है। अगली बार मिलेंगे तब इसी के बारे में बात करेंगें।
इस चिट्ठी में उस मुकदमें की चर्चा है जिसने हार्पर ली को 'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' लिखने के लिये प्रेरित किया। इस चिट्ठी को, सुनने के लिये यहां चटका लगायें।
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रूबी बेटस् और विक्टोरिया प्राइसका चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से
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यह सच है कि चश्मदीद गवाह, न चाहते हुए भी, गलत बयान दे देते हैं या गलत व्यक्ति की शिनाख़्त कर देते हैं। लेकिन यह कहना गलत होगा कि वे उस समय झूठ बोल रहे होते हैं। क्योंकि, उनके मुताबिक वही सच है। लेकिन ऐसा क्यों होता है?
सैमुएल, अक्सर चश्मदीद गवाह के द्वारा आरोपी की शिनाख़्त किये जाने पर सवाल उठाया करते थे। उन्हें लगता था कि चश्मदीद गवाह गलत शिनाख़्त कर रहा है। एक बार, वे वकीलों के बीच इस विषय पर बोल रहे थे। वकीलों ने उनके इस कथन पर प्रश्न लगाया। सैमुएल ने उस वक्त कुछ नहीं कहा पर कुछ समय बाद उन्होंने लोगों से पूछा,
'आप लोगों में से, कौन से लोग कैमल सिगरेट पीते हैं।'
कैमल सिगरेट, अमेरिका की लोकप्रिय सिगरेट में से एक है। यह उसी तरह की सिग्रेट है जैसे कि पहले पनामा हुआ करती थी या आजकल विलस् फिल्टर होती है। बहुत से लोगों ने हाथ उठाया। सैमुएल ने उनमें उन पांच लोगों को चुना जो पिछले २० सालों से दो पैकेट कैमल सिगरेट पी रहे थे। सैमुएल ने फिर पूछा,
'आपने ७०० पैकेट प्रतिवर्ष और आज तक २४,००० पैकेट अर्थात कैमल पैकेट को आपने करीब ५ लाख बार देखा है।'
उन्होंने हामी भरी। सैमुएल ने, उन पांचों को एक कागज़ दिया फिर कहा,
'आप लोग अलग-अलग लिख कर दें कि कैमल सिगरेट के पैकेट के ऊपर आदमी का चित्र कहा है ऊंट के आगे है, पीछे है, या ऊपर है।'
कागज वापस मिलने के बाद, उसने उसे खोल कर, जोर से पढ़ा। दो ने लिख कर दिया कि आदमी का चित्र ऊंठ के आगे है दो ने कहा कि उसके ऊपर है एक ने कहा कि कोई भी आदमी का चित्र नहीं है।
सैमुएल ने लोगों से पैकेट निकाल कर देखने को कहा। पैकेट के ऊपर कोई भी आदमी का चित्र नहीं था। यानि की चार लोगों के जवाब गलत थे। सैमुएल ने बताया,
'यह इसलिये हुआ कि मैंने आपको यह सुझाव दिया था कि पैकेट पर आदमी का चित्र है। चश्मदीद गवाहों को इस तरह का सुझाव दिया जाता है। इसीलिये आपसे यह गलती हुई और चश्मदीद गवाह भी अक्सर गलत शिनाख़्त कर देते हैं।'
यही कारण है कि न्यायालय में पृच्छा (examination in chief) के समय, सूचक प्रश्न (leading question) पूछना मना है हालांकि प्रति पृच्छा (cross examination) के समय इस तरह के सवाल पूछे जा सकते हैं।
इस श्रृंखला की अगली कड़ी में बात करेंगे स्कॉटस्बॉरो बायॉज़ (Scottsboro boys trial) मुकदमे की। यह मुकदमा, अमेरिका में, २०वीं शताब्दी के संविधान एवं नागरिक अधिकारों के क्षेत्र में, सबसे जाना माना मुकदमा है। इसमें सैमुएल वकील थे। यह वही मुकदमा है जिसने हारपर ली को 'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' लिखने के लिये प्रेरित किया। क्या हुआ था इसमें? क्यों यह मुकदमा इतना प्रसिद्ध है? यह सब अगली बार।
सैमुएल लाइबोविट्ज़, २०वीं शताब्दी के दूसरे चतुर्थांश में अमेरिका के सबसे प्रसिद्ध वकील थे। 'बुलबुल मारने पर दोष लगता है' श्रृंखला की इस चिट्ठी में, उनके जीवन पर लिखी पुस्तक 'कोर्टरूम' के बारे में चर्चा है।
'डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े' श्रृंखला की कड़ी 'यदि विकासवाद जीतता है तो ईसाइयत बाहर हो जायेगी' में, मैंने वकील क्लेरेन्स डैरो (Clarence Darrow) की चर्चा की थी। उनका जन्म १८ अप्रैल, १८५७ को हुआ था। उन्न्नीसवी शताब्दी के अंत होते होते वे अमेरिका के सबसे जाने माने वकील के रूप में स्थापित हो गये थे। उनका सितारा उदय हो चुका था। उसी समय एक अन्य वकील, सैमुएल लेबो (Samuel Lebeau) का जन्म १४ अगस्त १८९३ में रोमानिया में हुआ।
१८९७ में सैमुएल के पिता अमेरिका आ गये। वहां लोगों की सलाह पर सैमुएल के पिता ने अपने नाम का अमेरिकीकरण कर लिया—लेबो की जगह वे लाइबोविट्ज़ (Leibowitz) हो गये।
सैमुएल को विद्यार्थी जीवन में, वक्तृत्व (elocution) और वाद विवाद प्रतियोगिताएं (debate) बेहद पसन्द थे। इसमें, वे हमेशा आगे रहते थे। पिता के सुझाव पर सैमुएल ने वकील बनने की ठानी और कानून की शिक्षा कॉर्नेल विश्वविद्यालय से पूरी की।
बीसवीं शताब्दी के पहले चतुर्थांश के अन्त होते होते सैमुएल ने अपना नाम अमेरिका के जाने माने फौजदारी के वकील के रूप में स्थापित कर लिया। दूसरे चतुर्थांश में वे अमेरिका में फौजदारी के सबसे प्रसिद्व वकील हो गये। १९४१ में उन्होंने न्यायाधीश बनना स्वीकार कर लिया। न्यायधीश के रूप में वे जल्दी गुस्सा हो जाते थे। इसलिये वे बाद में कुछ विवादास्पद हो गये थे। उनकी मृत्यु ११ फरवरी, १९७८ में हो गयी।
सैमुएल लाइबोविट्ज़ एवं उनकी पत्नी अपने पौत्र के साथ खेलते हुऐ - चित्र लाइफ पत्रिका के इस सौजन्य से।
१९५० में, क्वेंटिन रिनॉल्डस् (Quentin Reynolds) ने सैमुएल की जीवनी, कोर्टरूम (Courtroom) नामक पुस्तक में लिखी है। यह वकीलों के द्वारा लिखी गयी आत्मकथा या उनकी बारे में लिखी जीवनियों में सबसे अच्छी लिखी पुस्तक है। यह पुस्तक न केवल हर वकील को, पर प्रत्येक व्यक्ति के पढ़ने योग्य है। बहुत से लोग, वकीलों के बारे में अच्छे विचार नहीं रखते हैं। यह पुस्तक उनके नजरिये को बदलेगी।
अगली बार बात करेंगे सैमुएल को पहला मुकदमा कैसे मिला और उसमें क्या हुआ।
इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इन फाइलों को आप सारे ऑपरेटिंग सिस्टम में, फायरफॉक्स ३.५ या उसके आगे के संस्करण में सुन सकते हैं। इन फॉरमैट की फाइलों को आप,
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बुलबुल मारने पर दोष लगता है
भूमिका।। वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी - कोर्टरूम।।