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Saturday, February 15, 2014

राज्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षणकर्ता है

इस चिट्ठी में, सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा निर्णीत किया गया मेसर्स एम.सी.मेहता विरुद्ध कमलनाथ १९९७ (१) एस.सी.सी. ३८८ (कमलनाथ केस) तथा उसमें प्रतिपादित सिद्धान्त की चर्चा है।
सुन्दर हिमाचल - प्राकृतिक संसाध का प्रयोग केवल जनहित के लिये

Saturday, February 08, 2014

नुकसान की भरपाई, प्रदूषक पर - एन्वायरो एक्शन केस

इस चिट्ठी में, सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा निर्णीत किया गया 'इंडियन कांउसिल फार एन्वायरो एक्शन बनाम भारत सरकार' ए.आई.आर. १९९६ एस.सी. १४४७ (एन्वायरो एक्शन केस) तथा उसमें प्रतिपादित सिद्धान्त की चर्चा है।

उन्नीसवी शताब्दी में रसायनिक उद्योग - चित्र विकिपीडिया से

Saturday, December 14, 2013

विश्व पर्यावरण दिवस, ५ जून को, क्यों मनाया जाता है

इस चिट्ठी में, चर्चा है कि विश्व पर्यावरण दिवस, पांच जून को, क्यों मानाया जाता है।
चित्र विकिपीडिया से

Saturday, November 30, 2013

हरित पथ ही राजपथ है - भूमिका

इस नयी श्रंखला में, न्यायालयों  एवं संसद के द्वारा पर्यावरण एवं प्रदूषण को दूर करने के लिये उठाये गये कदम और बनाये गये कानून की चर्चा है।
इसमें यह भी चर्चा है कि इसके लिये हम व्यक्तिगत स्तर पर क्या कर सकते हैं।

Saturday, April 20, 2013

यह इसकी सुन्दरता हमेशा के लिये समाप्त कर देगा

कुमाऊं-बिन्सर में ज़ीरो पॉइन्ट पर सफाई नहीं थी। इस चिट्ठी में उसी की चर्चा है।
ज़ीरो पॉइन्ट रास्ते का दृश्य

Saturday, December 01, 2012

नैनीताल झील की सफाई के अन्य तरीके

इस चिट्ठी में नैनीताल की झील की सफाई के कुछ अन्य तरीकों की चर्चा है।

Monday, February 20, 2012

जिम कॉर्बेट की कर्म स्थली - कुमाऊं

यह चिट्ठी हमारी कुमाऊँ यात्रा की भूमिका है।
जिम कॉर्बेट रुद्रप्रयाग के आदमखोर तेंदुऐ को मारने के बाद - १९२५ वित्र विकिपीडिया से

Saturday, December 03, 2011

पापा, नुकसान उनका है तुम्हारा नहीं

इस चिट्ठी में, बेटे के साथ बिताये कुछ पल, उससे मिली सीख, का वर्णन है। 

Thursday, January 13, 2011

घोड़ा डाक्टर, गायों और भैंसों की लात खाते थे

 इस चिट्ठी में, रोमुलस व्हिटाकर और किंग कोबरा के बारे में  चर्चा है।
क्रॉकोडाइल फार्म की शिक्षा अधिकारी - आकांक्षा

Saturday, December 25, 2010

कोबरा मेरे हाथ पर लिपट गया

इस चिट्ठी में चेनेई के पास स्थित क्रॉकोडाइल फार्म की चर्चा है

Thursday, December 31, 2009

पृथ्वी, हमारे पास, वंशजों की धरोहर है

इस चिट्ठी में चर्चा है कि हम पर्यावरण को बचाने में क्या सहयोग कर सकते हैं।

क्या आप कभी अपनी पत्नी का जन्मदिन और शादी की सालगिरह दोनो एक साथ भूलें है। यदि आपका जवाब हां में है तब शुभा का गुस्सा समझ सकते हैं।

मुझे पिछले साल काम के सिलसिले में बाहर रहना पड़ा - कुछ समय दिल्ली और कुछ समय भोपाल। न उसके जन्मदिन की याद रही, न ही शादी की सालगिरह की - यह दोनो आस-पास ही पड़ते हैं। जब याद आया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। लगा कि जब वापस कस्बे में पहुंचूंगा, तो खैर नहीं। सोचा, मनाने के लिये, भोपाल से कुछ ले चलूं।
'उन्मुक्त जी, हम तो समझे कि आप पर्यावरण के बारे में कुछ बता रहें हैं यहां तो कुछ और ही है - पत्नी को मनाया जा रहा है।'
भोपाल में सबसे अच्छा बजार नयी मार्केट है। वहां, मध्य प्रदेश सरकार निगम की दुकान मृगनयनी है। वहां पर, अच्छा समान वाजिब दामों में मिल जाता है। बस उसके लिये, कुछ लेने के लिये, वहीं पहुंच गया।
'लगता है कि उन्मुक्त जी, बढ़िया सा शीर्षक देकर, हम सब को झांसा दे रहे हैं। समझ गये, कुछ नहीं, बस टीआरपी का चक्कर है।'
मैंने मृगनयनी से, एक सूती चन्देरी की साड़ी, शादी की सालगिरह और सूती सलवार-कुर्ते का सेट उसके जन्मदिन के लिये लिया। सलवार-कुर्ते के सेट में तीन कपड़े थे। एक रंगीन सादा कपड़ा और दो  वैजिटेबल रंग (vegetable dye) से चित्रकारी किये हुए कपड़े थे। 

वहां पर एक प्यारी सी, युवती विक्रेता थी। मैंने उससे पूछा कि इसमें कौन सा कपड़ा क्या है। उसने एक को, दुपट्टा बताया फिर मुस्करा कर बोली,
'वैसे सादा रंगीन कपड़ा सलवार है। लेकिन आजकल फैशन के अनुसार आप जिसे चाहें सलवार बना ले, जिसे कुर्ता।'

यानि कि सादे रंगीन कपड़े को कुर्ता और चित्रकारी करे हुऐ कपड़े को सलवार। मैं कुछ उलझन में पड़ गया। इस पर उसने कहा,
'आप बिलकुल मत खबराइये आपकी पत्नी को सब मालूम होगा। वह सब समझ जाएगी।'
यह जानने के लिये कि क्या वह युवती सच कह रही थी या नहीं - मैंने अन्तरजाल में ढ़ूंढा। मुझे यहां से, फैशन पत्रिका का यह चित्र मिला। इसे देख कर तो लगता है कि सादे कपड़े का कुर्ता ज्यादा सुन्दर लगता है। हांलाकि शुभा के अनुसार यह इसलिये है कि मॉडल-युवती सुन्दर है।
'उंह हूं उन्मुक्त जी, इस चिट्ठी में पर्यावरण का जिक्र तो दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है।'
वह युवती विक्रेता, जब इन कपड़ों को पैक करने लगी, तब मैं आश्चर्य से डूब गया। उसने समान को समाचार पत्रों के बने पैकेटों में पैक किया। उठाने के लिये, ऊपर सुतली लगी हुई थी। वह युवती समझदार थी समझ गयी कि मैं उन पैकेटों को देख कर आश्चर्य चकित हो रहा हूं। उसने बताया,
'अंकल, यह सब पर्यावरण को बचाने के लिये किया जा रहा है। हम प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करते हैं। इसलिये इस तरह के पैकेट प्रयोग करते हैं। इसके अलावा, इसके कई फायदे हैं।
  • हमने रद्दी समाचार पत्रों का फिर से प्रयोग कर लिया; और
  • यह पैकेट लघु उद्योग के द्वारा बनाये जा रहे हैं। इस कारण बहुत से लोगों को काम मिल रहा है।'
यह छोटा सा, पर सराहनीय कदम है। यह छोटे-छोटे कदम ही हमारी पृथ्वी मां को बचा सकेंगे। यह हमारी जिम्मेवारी है कि यह काम सुचारु रूप से हो। क्योंकि किसी ने सच कहा है कि,
‘We have not inherited this planet from our parents.
But have merely borrowed it from our children’
यह पृथ्वी हमें अपने पूर्वजों से नहीं मिली है
यह हमारे पास वशंजों की धरोहर है

यह हमारी जिम्मेवारी है कि हम वशंजों की धरोहर, उन्हें ठीक प्रकार से उन्हें वापस दे सकें।  क्या आप जानना चाहते हैं कि आप इसमें किस तरह से सहयोग कर सकते हैं। बहुत कुछ – देखिये आप क्या कर सकते हैं:
  1. आप समान ऐसे पैकेटों में खरीदिये जो फिर से प्रयोग हो सकें और उन्हें बार बार प्रयोग करें।
  2. शॉपिंग पर अपना बैग ले जायें।
  3. पेपर को बेकार न करें। दोनों तरफ प्रयोग करें। 
  4. हो सके तो, लिफाफों को फाड़ कर, अन्दर की तरफ सादी जगह को, लिखने के लिये प्रयोग करें।
  5. सारे बेकार कागजों को पुनर्चक्रण (recycling) के लिये इकट्ठा करें।
  6. प्लास्टिक के पैकेटों का कम प्रयोग करें। सब्जी, फल या मांस को सुरक्षित रखने के लिये प्लास्टिक की जरूरत नहीं।
  7. उन उत्पादनों को लें, जो हर बार पुनः फिर से भरने वाले पैकटों में मिलते हों। यदि आपकी प्रिय वस्तु  ऐसे पैकेटों में न आती हो तो कम्पनी को इस तरह के पैकेटों में बेचने के लिये लिखें।
  8. खाने की वस्तुओं को हवा-बन्द बर्तनों में रखें। उन्हें चिपकती हुई प्लास्टिक में रखने की जरूरत नहीं।
  9. पेट्रोल बचायें, प्रदूषण कम करें।
  10. अपने सहयोगियों और पड़ोसियों के साथ कार पूल कर प्रयोग करने का प्रयत्न करें।
  11. बिना बात बिजली का प्रयोग न करें - बत्ती की जरूरत न हो तो बन्द कर दें।
  12. पेड़ों, जंगलों के कटने को रोके। इनके कटने के खिलाफ लोगों को जागरूक करें।
  13. पुनरावर्तित (recycled) वस्तुओं का प्रयोग करें।
  14. ऐसे बिजली के उपकरण प्रयोग करें जो कम बिजली खर्च करते हों। इस समय इस तरह के नये तकनीक पर बने बल्ब आ रहें हैं। उनका प्रयोग करें।
  15. पर्यावरण-मित्रवत उत्पादकों (environment friendly products) का प्रयोग करें।
आप इन पन्द्रह बिन्दुओं में से, कितने बिन्दुओं का पालन करते हैं। मैं इसमें सब तो नहीं, पर अधिकतर का पालन करता हूं। मेरे साइकिल  चलाने के बारे में तो आप जानते ही हैं और शायद कोपेनहेगन व्हील (Copenhagen Wheel)  बहुत कुछ बदल दे।

इसी के साथ, इस साल को अलविदा। नया साल आपके लिये शुभ हो, मंगलमय हो। नये साल में आप ऊपर-लिखित १५ बिन्दुओं में से, अधिक से अधिक बिन्दुओं का प्रयोग करें - आखिरकार हमें पृथ्वी मां को, अपने बच्चों के लिये बचा कर रखना है। हिन्दी चिट्ठाजगत भी नये साल में, नयी ऊंचाईयों पर पहुंचे - ऐसी कामना, ऐसा विश्वास।

हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi
सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।:
Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. his will take you to the page where file is. Click where ‘Download’ and there after name of the file is written.)
यह ऑडियो फइलें ogg फॉरमैट में है। इन फाइलों को आप सारे ऑपरेटिंग सिस्टम में, फायरफॉक्स ३.५ या उसके आगे के संस्करण में सुन सकते हैं। इस फॉरमैट की फाईलों को आप -
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में – सुन सकते हैं।
बताये गये चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर लें। इन्हें सारे ऑपरेटिंग सिस्टम में फायरफॉक्स में भी सुना जा सकता है। इसे डिफॉल्ट करने के तरीके या फायरफॉक्स में सुनने के लिये मैंने यहां विस्तार से बताया है। 





मेरे अन्य चिट्ठों पर, पर्यावरण से संबन्धित चिट्ठियां



About this post in Hindi-Roman and English
is chitthi mein charchaa hai ki hum paryavaran ko bachaane mein kaise sahyog kar sakte hain. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post talks about, what we can do save environment. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.







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Saturday, October 03, 2009

भारत में समुद्र तट सार्वजनिक होते हैं न कि निजी

समुद्र तट सार्वजनिक होते हैं। इस चिट्ठी में  इस चिट्ठी में त्रिवेन्दम के समुद्र तट के साथ, इसी की चर्चा है।

Wednesday, September 23, 2009

आट्टूकल पोंगाला - क्या कोई आचित्य है

त्रिवेन्द्रम के आट्टूकल भगवती मंदिर में पोंगाला चढ़ाया जाता है। इस चिट्ठी में उसी की चर्चा है।
 
यह चित्र इस मंदिर की वेबसाइट से लिया गया है जहां से आप अंग्रेजी में इसके इतिहास के बारे में पढ़ सकते हैं।

हम लोग कुमाराकॉम से लगभग सवा ग्यारह बजे त्रिवेन्द्रम के लिए निकले थे। वहाँ से त्रिवेन्द्रम पहुंचने के लिए लगभग चार घण्टें लगते है। लेकिन उस दिन त्रिवेन्द्रम के आट्टूकल भगवती मन्दिर में, पोंगाला (चावल की खीर), वहीं बना कर चढ़ायी जाती है। यह कार्य केवल महिलाएं ही करती हैं। वहां महिलाओं का मेला था।

त्रिवेन्द्रम पहुंचते-पहुंचते यह त्योहार समाप्त हो रहा था और सब महिलाएं वापस जा रहीं थी।  लौटकर जाने वाली हर कार, प्रत्येक बस, में केवल महिलाएँ थीं। वे केरल की पारंपरिक साड़ी जो   सफेद या हल्के पीले रंग की होती है, पहने थी। इनमें सुनहरा बार्डर था। वे लाल कथई रंग का ब्लाउज पहने हुई थीं। हम लोग इनके ट्रैफिक जैम में फंस गये।  हम त्रिवेन्द्रम में अपने होटेल में  शाम को साढ़े पाँच बजे ही पहुंचे पाये।

हम लोगों ने अगले दिन अखबार में पढ़ा कि लाखों महिलाओं ने इस त्योहार में आट्टूकल भगवती मंदिर में पोंगाला चढ़ाया। इन महिलाओं में २००८ मिस वर्ल्ड की रनर्स् अप पार्वती ओमनकुट्टन भी थीं।

पोंगाला बनाती हुई, पार्वती ओमनकुट्टन का यह चित्र 'द हिन्दू' अखबार के इस वेब पेज से है

मुझे एक बात अजीब लगी। मुझे ऐसा आभास हुआ कि उस दिन बहुत मात्रा में खीर बर्बाद हो जाती है। इसकी पुष्टि वहां पर लोगों ने की। यदि यह सच है तो जिस देश के करोड़ों लोगों को खीर खाना तो दूर, देखना न नसीब हो - वहां इस तरह के उत्सव या त्योहार का क्या कोई औचित्य है।
 

 यह चित्र सुब्रमनयम जी की इस चिट्ठी से है। वहीं पर इस इस त्योहार के बारे में हिन्दी में सूचना है। यह चित्र, उपर मेरी कही बात की तरफ भी इशारा करता है। 

कुछ समय पहले, लोगों ने एक दिन यह कहना शुरू किया कि गणेश जी की मूर्ति दूध पी रही है। यह वास्तव में पृष्ट तनाव (surface tension) के कारण हो रहा था। कई लोग विज्ञान की बारीकी नहीं समझ पाते थे। उन्हें, मैं यह कह कर समझाता था कि जिस देश के करोड़ों बच्चों को एक बूंद दूध न मिले, वहां के भगवान इतना दूध क्यों और कैसे पी सकते हैं।  कुछ ने समझा, पर बहुतों ने नहीं। 

बहुत से  उत्सवों और त्योहारों के दौरान, नदी या समुद्र में विसर्जन किया जाता है। मेरे विचार से उत्सवों और त्योहारों में इस तरह की परम्परा का कोई औचित्य नहीं है। यह प्रदूषण फैलाता है। हमें बदलना चाहिये।

त्रिवेन्दम में, हमें  के.टी.डी.सी. के होटल समुद्र में ठहरना था। वहाँ वहां पर उदय समुद्र होटल भी है। मैंने अपने एक मित्र से बात की थी कि हम कहां रुके। उसका  कहना था, 
‘समुद्र, के.टी.डी.सी. का चार स्टार  होटल है।  यहां से समुद्र का दृश्य बहुत सुन्दर दिखायी पड़ता है।  उदय समुद्र, तीन स्टार का होटल है। तुम्हे,  समुद्र में ही रूकना चाहिए।‘
प्रवीण का कहना था,
'यह सच है कि उदय समुद्र तीन स्टार होटल है। लेकिन, इस समय वह पाँच स्टार होटल की सुविधाऐं दे रहा है और हमें उदय समुद्र में ही रूकना चाहिए था क्योंकि वहाँ की सर्विस ज्यादा अच्छी है।‘
समुद्र होटल पहुंचते ही हम लोगों को प्राइवेट और सरकारी होटल का अन्तर समझ में आ गया।

समुद्र होटल से दृश्य बहुत सुन्दर था पर वहाँ की सर्विस  अच्छी नहीं थी। इसके पहले दो जगह हम लोग ताज ग्रुप के होटल में रुके थे। वहाँ पर  युवक और युवतियाँ थी। वे  जब भी हमसे  मिलते थे, हमेशा गुड-मॉर्निंग, गुड-आफटर-नून, या  गुड-इवनिंग कहते थे, हमेशा मुस्कुराते रहते थे। होटल समुद्र पर सारा काम सरकारी था।  वहां के लोगों में मुस्कुराहट नहीं थी। उनका चेहरा उदासी से भरा हुआ था।  उनमें   कोई जोश भी नहीं लगता था। हम,  जिस कमरे में ठहरे हुए थे वह कमरा भी ताज के होटल के  कमरों से कुछ छोटा था। इसके बाथरूम का फलश और सिंक टूटा था।  पानी भी  अच्छी तरीके से नहीं आ रहा था। यहां पर उस तरीके से भी सुविधाऐं नहीं थी जैसा कि ताज के होटलों में  थी।  हमें  लगा कि आगे से सरकारी होटल की जगह, प्राइवेट होटल में रूकना ज्यादा अच्छा है।

समुद्र तट सार्वजनिक होते हैं। अगली बार, त्रिवेन्दम के समुद्र तट के साथ, इसी विषय पर बात करेंगे।


कोचीन-कुमाराकॉम-त्रिवेन्दम यात्रा
 क्या कहा, महिलायें वोट नहीं दे सकती थीं।। मैडम, दरवाजा जोर से नहीं बंद किया जाता।। हिन्दी चिट्ठकारों का तो खास ख्याल रखना होता है।। आप जितनी सुन्दर हैं उतनी ही सुन्दर आपके पैरों में लगी मेंहदी।। साइकलें, ठहरने वाले मेहमानो के लिये हैं।। पुरुष बच्चों को देखे - महिलाएं मौज मस्ती करें।। भारतीय महिलाएं, साड़ी पहनकर छोटे-छोटे कदम लेती हैं।। पति, बिल्लियों की देख-भाल कर रहे हैं।। कुमाराकॉम पक्षीशाला में।। क्या खांयेगे - बीफ बिरयानी, बीफ आमलेट या बीफ कटलेट।। आखिरकार, हमें प्राइवेट और सरकारी होटल में अन्तर समझ में आया।।


हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi

सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।:
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  • सृजनवाद धार्मिक मत है, विज्ञान नहीं है:
  • विकासवाद को पढ़ाने से मना करने वाले कानून - गैरकानूनी हैं:  
यह ऑडियो फइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप -
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  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में – सुन सकते हैं।
बताये गये चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर लें।














यात्रा विवरण पर लेख चिट्ठे पर अन्य चिट्ठियां



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trivandum mein attukal devi ke mandir mein pongal charhayaa jaataa hhai. is chitthi mein usee kee charchaa hai. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.


Pongal is offered in temple of Attukal devi in Trivandum. This post talks about the same. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
pongala, Attukal Bhagwati temple,
kerala, केरल, Travel, Travel, travel and places, Travel journal, Travel literature, travel, travelogue, सैर सपाटा, सैर-सपाटा, यात्रा वृत्तांत, यात्रा-विवरण, यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण,
Hindi, हिन्दी,
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Saturday, August 25, 2007

न्यायपालिका और पर्यावरण

मैं १९७५ में जून में श्रीनगर गया था मुझे याद नहीं पड़ता कि डल झील पर इतनी हाउसबोट थीं या नहीं। डल लेक भी बहुत साफ थी। इस बार गन्दी लगी। लोगों से पूछने पर पता चला कि यह सारी हाउसबोट अवैध है। बहुत कुछ गन्दगी इन्हीं के कारण है। वहां के लोगों का कहना है,
'२५ साल पहले डल लेक की परिधि ३२ किलोमीटर थी। अब घटकर १६ हो गयी है। लोग इसे मिट्टी से पाटकर कब्जा करते जा रहे हैं। इसमें बदमाशी में राज्य सरकार भी भागीदार है। दो साल पहले जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय में लोकहित याचिका दाखिल की गयी जिसे कारण यह रोका जा सका और डल लेक में कुछ सफाई शुरू की गयी।'

गोवा में भी हमने देखा कि न्यायपालिका के कारण वहां का समुद्री-तट बचा। दिल्ली में भी यदि प्रदूषण कम हुआ तो वह न्यायपालिका के कठोर कदमों के कारण। इलाहाबाद में प्रसिद्घ कम्पनी बाग है। जिसके बारे में ममता जी बता रही हैं यह समाप्त हो रहा था। इसे भी एक लोकहित याचिका के द्वारा ही बचाया जा सका।

यह पूथ्वी मां हमें अपने पूर्वजों से नही मिली है इसे तो हमने अपने बच्चों से गिरवी ली है। यह हमारे ऊपर है कि हम
इसे कैसे उन्हें वापस देते हैं। यह बात शायद केवल न्यायपालिका ही समझ पा रही है बाकी लोग तो शायद ...

लोग अक्सर न्यायपालिका के न्यायिक क्रिया-कलापों (Judicial activism) की आलोचना करते हैं पर भूल जाते हैं कि बहुत जगह पर्यावरण बचा हुआ है तो वह न्यायपालिका के कारण ही। नेता ऎसे निर्णय नहीं लेते, जिससे उनके वोट बैंक में कमी आये।
कश्मीर यात्रा
जन्नत कहीं है तो वह यहीं है, यहीं है, यहीं है।। बम्बई का फैशन और कश्मीर का मौसम – दोनो का कोई ठिकाना नहीं है।। मिथुन चक्रवर्ती ने अपने चौकीदार को क्यों निकाल दिया।। आप स्विटज़रलैण्ड में हैं।। हम तुम एक कमरे में बन्द हों।। Everything you desire – Five Point Someone।। गुलमर्ग में तारगाड़ी।। हेलगा कैटरीना और लीनुक्स।। डल झील पर जीवन।। न्यायपालिका और पर्यावरण।। अलविदा कश्मीर।।