इस चिट्ठी में, 'लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी' प्रार्थना पर उठे विवाद पर चर्चा है।
यहां इस प्रार्थना को सुनें। यह कितनी मधुर और मन को शान्त करने वाली है। यह प्रार्थना सिद्धार्थ नगर उत्तर प्रदेश के स्कूल में गायी जा रही है।
इस चिट्ठी में, 'लब पे आती है दुआ बनके तमन्ना मेरी' प्रार्थना पर उठे विवाद पर चर्चा है।
यहां इस प्रार्थना को सुनें। यह कितनी मधुर और मन को शान्त करने वाली है। यह प्रार्थना सिद्धार्थ नगर उत्तर प्रदेश के स्कूल में गायी जा रही है।
इस चिट्ठी में तनिष्क विज्ञापन पर उठे विवाद पर चर्चा है।
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| फिल्म रोमन हॉलीडे में ऑड्री हेपबर्न |
'अरे उन्मुक्त जी कौन सा वायदा, किसने किया, कब किया?'अरे, वही वायदा, जो आपने, हिन्दी चिट्ठाजगत ने - अपने आप से किया था। आज सितम्बर माह का तीसरा शनिवार है। इस दिन प्रत्येक साल, सॉफ्टवेयर मुक्ति दिवस (Software Freedom Day) बनाया जाता है। याद नहीं, आपने वायदा नहीं किया था कि आज के दिन से, कम से कम, आप एक ओपेन सोर्स सॉफ्टवेयर का प्रयोग करना शुरू करेंगे। अरे इस दिवस के बारे में, मैंने पिछले सालों में, 'आइम् लविंग इट' और 'मुक्त सॉफ्टवेयर दिवस' शीर्षक से बताया था। लगता है कि आप भूल गये।
'उन्मुक्त जी, जब बाज़ार में सारे प्रोग्राम दस रुपये की सीडी में मिल जाते हैं तो फिर ओपेन सोर्स के टंटे करने का क्या फायदा?'
'अंकल, क्या आप मुझे इसका पप दे सकते हैं।'मेरा जवाब होता जरूर पर पहले तुम्हारी मां को उसके सेवा करने की जिम्मेवारी लेनी होगी। बहुत कम मांएं यह काम अपने हाथ में लेने के तैयार होती।

'मैं कोई पुराना चिट्ठाबाज़ तो नही हूँ मगर अल्प समय मे आपके मानवीय गुणों ने मुझे प्रभावित किया है, मगर मुझे यह असुविधाजनक अंदेशा भी रहा है की आपका कोई प्रायोजित मकसद भी है। मुझे यह भी डर था की आप देर सवेर अपने ब्लॉग पर डार्विन को घसीटेंगे जरूर और सच मानिए मेरा संशय सच साबित हो गया। डार्विन ... की पुस्तक डिसेंट ऑफ़ मैन ने सचमुच मनुष्य के पृथक सृजन की बाइबिल -विचारधारा पर अन्तिम कील ठोक दी थी तब से बौद्धिकों मे डार्विन के विकास जनित मानव अस्तित्व की ही मान्यता है। इस मुद्दे पर मैं आपसे दो दो हाथ करने को तैयार हूँ। आप कृपया यह बताये कि डार्विन के किस तथ्य को बाइबिल वादियों ने ग़लत ठहराया है? एक एक कर कृपया बताएं ताकि इत्मीनान से उत्तर दिया जा सके। हिन्दी के चिट्ठाकार बंधू भी शायद गुमराह होने से बच सकें।'
'शायद इस चिट्ठी की बातें न तो प्रमाणिक हैं न ही ठीक।यह श्रंखला इसी विषय के बारे में है।
डार्विन एक महानतम वैज्ञानिकों में से एक हैं। वे स्वयं पादरी बनना चाहते थे इसलिये उन्होने Origin of Species प्रकाशित करने में देर की। उनका जीवन संघर्षमय रहा। यदि आप Irving Stone की The Origin पुस्तक पढ़ें तो उनके बारे में सारे तथ्य सही परिपेक्ष में सामने आयेंगे।
इस बारे में, अमेरिका में ... मुकदमा चला। पहला तो १९२० के दशक में था। इसमें फैसला Origin of Species के विरुद्ध रहा। यह अमेरिका के कानूनी इतिहास के शर्मनाक फैसलों में गिना जाता है। इसके बाद [के] ... फैसले ... Origin of Species के पक्ष में हुऐ हैं।
...
विज्ञान और धर्म दो अलग अलग क्षेत्र की बातें हैं। मेरे विचार से दोनो को जोड़ना ठीक नहीं।
मैं agnostic [अज्ञेयवादी] हूं यदि मेरे विचारों से दुख पहुंचा तो क्षमा प्रार्थी हूं।'
'लेकिन उन्मुक्त जी, आप भेड़ाघाट-धुआंधार चित्र ...?'हां, हां उसी चित्र के बारे में बता रहा हूं। इतने उतावले क्यों हो रहे हैं।
'अमेरिका के एक गाँव में एक भारतीय...'अरे, इतना छोटा परिचय जो अपने बारे में कुछ न बताये। क्या आपको नहीं लगता कि वे बेहद शर्मीले हैं? मुझे तो वे शर्मीले व्यक्तित्व के लगते हैं।
'यहां पर लिखने और पढने से मेरे विचार भी बदले हैं और आम जीवन में होने वाली घटनाओं का विश्लेषण करने का तरीका भी । उदाहरण के तौर पर मेरी लिखी ४=५ वाली ईमेल और उसका इतना गंभीर मतलब! शायद मैं ऐसा कभी ना सोच पाता।'

'उन्मुक्त जी, यदि आपने अपनी बकबक बन्द नहीं की तो मैं यहां से चला जाउंगा और कसम आपकी, मैं यहां फिर कभी नहीं आउंगा। आप भी न, बस, बिना सवाल सुने बहकने लगते हैं। मैं यह जानना चाहता हूं कि आप भेड़ाघाट-धुआंधार चित्र की बात कर रहे हैं पर पहला चित्र हाथी का क्यों लगा रखा है? क्या आपको सवाल समझ में आया या फिर से बताऊं।'
'उन्मुक्त जी, उन्होंने हाथी का चित्र क्यों लगया है क्या वे हाथी की तरह भारी-भरकम हैं?'
कुछ दिन पहले मैंगलोर के एक पब (public house) में कुछ युवतियों के द्वारा शराब पीने पर, उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। मैं इस पर भी शर्मिन्दा हूं।'Means are more important than the end: it is only with the right means that the desired end will follow.'
साधन अंत से ज्यादा महत्वपूर्ण है। यदि साधन ठीक होगें तो ही वांछित अंत मिल सकता है।
'But it is fundamental in our law that the means that are adopted... should be lawful means. A good end does not justify bad means.' RVS IRC Exparte Rossminster Ltd. 1979 ( 3) AllELR 385.
हमारी न्याय प्रणाली में यह महत्वपूर्ण है कि जो भी साधन प्रयोग में लाये जाएँ वे कानूनी हो। एक अच्छे अंत को पाने के लिए, खराब साधन को ठीक नहीं कहा जा सकता है।
'उन्मुक्त जी, आपका पक्ष तो समझ में आया पर आपकी इस चिट्ठी का शीर्षक समझ में नहीं आया। इसका इस चिट्ठी से क्या मतलब?'कुछ चिट्ठाकारों (अधिकतर महिलाओं) ने, इस प्रकरण पर चिट्ठियां लिखते या टिप्पणी करते समय, इस तरह का आभास दिया कि इस घटना पर बहुत से हिन्दी चिट्ठाकार (अधिकतर पुरुष) चुप हैं, वे इस पर बोलने से घबराते हैं, इसकी मौन स्वीकृति देते हैं। यह बात सच नहीं है। हममें से कई यह भिन्न कारणों से ऐसा करते हैं। जब मैंने इस विषय पर लिखने की बात सोची तो लगा कि वे शब्द जो इन चिट्टाकारों के आभास को व्यक्त कर सकें, वही इस चिट्ठी का सही शीर्षक होगा।
'उन्मुक्त जी, यहां सब कहने की स्वतंत्रता है फिर लोग क्यों अपनी बात नहीं कहते हैं?'बहुत से चिट्ठाकार, कुछ व्यक्तिगत विवशता के कारण, ऐसे विषय पर लिखना वा टिप्पणी करना नहीं पसन्द करते हैं। कई विवाद में नहीं पड़ना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि इस पर विवाद बेकार में तूल पकड़ेगा, बढ़ेगा। चुप रहने पर जल्द ही समाप्त हो जायगा और चिट्ठाकार पुनः उन विषयों पर लिखने लगेंगे जिसकी हिन्दी चिट्ठाजगत को आवश्यकता है। लेकिन इस घटना पर, लिखने और टिप्पणी, न करने का यह अर्थ बिलकुल न लगाया जाय कि सब मैंगलोर पर महिलाओं के साथ हुऐ बर्ताव को उचित मानते हैं या फिर महिलाओं के द्वारा शुरू किये गुलाबी.. भेजने के विरोद्ध में लिखी गयी बातों से सहमत हैं।
'उन्मुक्त जी, फिर आपने इस विषय पर क्यों लिख दिया? आप भी तो विवादों नहीं पड़ना चाहते।'मुझे कुछ चिट्ठाकारों की टिप्णियों, चिट्ठियों पर आश्चर्य हुआ; दुख लगा कि इतने सुलझे लोगों कि सोच इस तरह से हो सकती है। इस प्रकरण पर बहुत कुछ व्यक्तिगत आक्षेप होने लगे, अपशब्द भी हो गये। इसलिये यह चिट्ठी लिखी कि यदि कोई हिन्दी चिट्ठाकार इस विषय पर मौन हैं तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वे मैंगलोर काण्ड से या महिलाओं के द्वारा गुलाबी.. भेजने की बात पर व्यक्तिगत आक्षेप वा अपशब्द कहने वाले विचारों से सहमत हैं। बहुत से पुरुष इसको एकदम गलत मानते हैं। मैं नहीं बता सकता कि मेरे अतिरिक्त इस तरह के विचार रखने वाला और कौन अन्य चिट्ठाकार हैं पर मैं इस तरह के विचार रखने वालों में से एक हूं।
'उन्मुक्त जी, आप को इन गुलाबी तरीकों से असहमति प्रकट करने वाले तरीकों पर व्यक्तिगत आपत्ति है क्या गुलाबी रंग से परहेज है या फिर गुलाबी तरीकों को पसन्द नहीं करते?'
| is post per manglore ke pub mein huee ghtna ke dvara apnee snskrit kee charchaa hai. yeh hindi (devnagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen. This post talks about our culture in connection of the incident in the Mangalore pub. It is in Hindi (Devnaagaree script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script. |
'धार्मिक नहीं, इसे साम्प्रदायिक उन्माद कहना चाहिए। धर्म और सम्प्रदाय में तो फ़र्क है।'मुझे भाषा का बहुत अच्छा ज्ञान नहीं है शायद आलोक जी का शब्द चयन सही है।
कुछ लोग अपने देश भारतवर्ष को धर्म निर्पेक्ष कहते हैं तो कुछ पंथ निर्पेक्ष। मैं इस विवाद में नही पड़ना चाहता कि क्या सही शब्द है पर मै इतना जानता हूं कि हमारा संविधान सब धर्मो का आदर करता है। पर फिर भी इतने सालो बाद हमें धार्मिक उन्माद या धार्मिक पागलपन के अलावा क्या मिला। यदी मैं हुसैन होता तो सरस्वती का वह चित्र न बनाता जिस पर इतना बवाल हुआ। पर यदी चित्र बन गया था तब उस पर इतना बवाल बेकार था लोग अक्सर लीक से हट कर इसलिये काम करते हैं कि वे चर्चा में आ जायें या चर्चा में बने रहें। बवाल करके हुसैन को उससे ज्यादा महत्व दे दिया जितना उन्हे मिलना चाहिये था। इसी तरह से डैनिश व्यंगकार को पैगम्बर का कार्टून नहीं बनाना चाहिये था पर यदी बन गया तो उस पर यह पागलपन बेकार है तथा किसी सरकार के मिनिस्टर के व्दारा उस व्यंगकार के सर पर इनाम रखना; उस मिनिस्टर का सरकार में बने रहना: इस पर न तो मेरे पास उस मिनिस्टर के लिये, न ही उस सरकार के लिये कोई शब्द है।