Friday, December 18, 2009

सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं

सैमुएल लाइबोविट्ज़, २०वीं शताब्दी के दूसरे चतुर्थांश में अमेरिका के सबसे प्रसिद्ध वकील थे। 'बुलबुल मारने पर दोष लगता है' श्रृंखला की इस चिट्ठी में, चर्चा है कि उन्हें पहला मुकदमा कैसे मिला और उसमें क्या हुआ।
इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें।
यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। सुनने के लिये, दाहिने तरफ का विज़िट, 'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने' देखें।

सैमुएल की पृष्ठभूमि ऐसी नहीं थी कि उन्हें मुकदमे मिल सकें। एक बार कॉर्नेल  विश्वविद्यालय में, जब कानून के डीन ने, उनसे,  इस बारे में बात की तब  सैमुएल का कहना था

'मैं पहले प्रसिद्व वकील बनूंगा। तब, बड़ी-बड़ी कम्पनियां मेरे पास मुकदमा कराने आयेंगी और मैं पैसे कमा सकूंगा।' 
 सैमुएल लाइबोविट्ज़ का यह चित्र लाइफ पत्रिका के सौजन्य से।

  लेकिन जब सैमुएल वकील बन गये तब सबसे मुश्किल, उन्हें अपना पहला मुकदमा मिलने में हुई।

न्यायालय में  जब आरोपी वकील नहीं कर पाते  है तब  न्यायालय उनके लिए वकील नियुक्त करता है।  सैमुएल को भी अपना पहला मुकदमा इसी तरह मिला। 

इस मुकदमें के आरोपी के ऊपर आरोप था कि उसने  शराबखाने  का ताला खोलकर, पैसे और शराब की चोरी की। उसी दिन सुबह, उसे शराब के नशे में धुत्त, पकड़ लिया गया। उसकी जेब में वह चाभी भी मिली जिससे उसने ताले को खोला था। पुलिस के सामने उसने अपना गुनाह कबूल करा लिया। अमेरिका में पुलिस के सामने दिया बयान न्यायालय में देखा जा सकता है हालांकि भारत में नहीं।

सैमुएल ने अपने मित्रों, सहयोगियों  से इस संबन्ध में सलाह ली। उनका कहना था कि,

  • आरोपी को अपना दोष मान लेना चाहिए। क्योंकि सारे सबूत आरोपी के खिलाफ हैं। 
  • दोष मान लेने पर सजा कम हो जायगी। 
लेकिन सैमुएल को लगा कि यदि उसने अपने मुवक्किल से आरोप स्वीकार करवा दिया तब वह न तो प्रसिद्घ हो सकेगा, न ही पैसा कमा सकेगा। वह इस मुकदमे के उस पक्ष को देखने लगा,  जिसकी तरफ कोई सोच भी नहीं सकता था। 

कई  रात, बिस्तर में लेटे-लेटे, सोचते-सोचते, उसे एक युक्ति समझ में आयी।  यदि वह चल गयी तो जीत उसकी, नहीं तो आरोपी को सजा तो होनी ही थी। मुकदमा शुरू होने पर,  अभियोजन के अधिवक्ता एवं न्यायाधीश को आश्चर्य हुआ, जब आरोपी ने आरोप स्वीकार नहीं किया।

अभियोजन का पक्ष समाप्त हो जाने के बाद, आरोपी ने गवाही दी कि उसने, पुलिस अत्याचार के कारण, आरोप स्वीकार कर लिया था। 

अभियोजन का कथन था कि आरोपी ने चाभी से ताला खोलकर चोरी की है।  सैमुएल ने न्यायालय के समक्ष बहस की,
'क्या सरकारी वकील ने यह स्वयं देखा है कि आरोपी के जेब से मिली चाभी से शराबघर का ताला खुल सकता था या नहीं। यदि नहीं तो, न्यायालय एवं जूरी चल कर देखें कि क्या इस चाभी से उस ताले को खोला जा सकता है। यदि ताला नहीं खुलता है तो उसके मुवक्किल पर चोरी का आरोप नहीं बनता है।'

यह सच था कि सरकारी वकील स्वयं इस बात की जांच नहीं की थी कि उस चाभी से ताला खोला जा सकता था अथवा नहीं। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता को लगा कि यदि, 
  • इस समय न्यायधीश, जूरी के सदस्य जा कर देखते हैं तो न्यायालय और जूरी का समय बरबाद होगा।  इस तरह के अनगिनत मुकदमे लम्बित थे, उनका भी फैसला होना था।
  • ताला न खुला, तो सरकारी वकील की भद्द उड़ जायेगी। 
यह सोचकर सरकारी वकील ने कहा कि उसे बहस नहीं करनी है। सैमुएल ने भी अपनी बहस समाप्त कर दी। यह बताने की जरूरत नहीं है कि जूरी को  आरोपी को छोड़ने में कुछ भी समय  नहीं लगा। हालांकि न्यायालय से बाहर निकलने के बाद जब सैमुएल ने उस चाभी से ताला खोलने का प्रयत्न किया तो उसने न्यायालय के सारे ताले खुल गये। 

इस मुकदमे के बारे में अगले दिन अखबार में कुछ नहीं निकाला पर जेल में अन्य कैदियों, अधिवक्ताओं के बीच, यह बातचीत चलने लगी कि यह वकील कुछ ख़ास है। यहीं से, सैमुएल का सितारा, चमकना शुरू हो गया।

सैमुएल ने अपना पहला मुकदमा, रात में ही, बिस्तर पर सोचते सोचते जीत लिया था। उसने यह आदत,  जीवन भर डाली। वह मुकदमा के शुरू होने से पहले ही सारे पक्षों के बारे में सोच लेता था। यही एक अच्छे वकील की निशानी है। वकील का वास्तविक जीवन, अर्ल स्टैनली गार्डनर के कल्पित वकील, पैरी मेसन की तरह नहीं, जो मुकदमें के दौरान ही सोचा करता था। हर सफल वकील मुकदमा शुरू होने के पहले ही, उसके सारे पहलुओं के बारे में सोच लेते हैं।

इस मुकदमें से, सैमुएल ने एक दूसरी बात यह सीखी, कि जूरी, पुलिस-अत्याचार के बारे में आसानी से विश्वास कर लेते हैं। इस बात ने भी, उसे अन्य मुकदमों सफलता दिलवायी। 

क्या चश्मदीद गवाह,  न चाहते हुऐ भी,  आरोपी की गलत शिनाख्त कर देते हैं। इस बारे में, सैमुएल के क्या विचार हैं, यह अगली बार। 

बुलबुल मारने पर दोष लगता है

भूमिका।। वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी - कोर्टरूम।। सफल वकील, मुकदमा शुरू होने के पहले, सारे पहलू सोच लेते हैं।।





अन्य संबन्धित चिट्ठियां 
पुस्तक समीक्षा से संबन्धित लेख चिट्ठे पर चिट्ठियां
वकीलों से संबन्धित चिट्ठियां


About this post in Hindi-Roman and English
pichhlee shatabdee mein, america ke  prasidh vakeel samuel leibowitz tthe. unhen  pahalaa mukdamaa kaise mila aur usme kya hua - iseee ke baare mein charchaa hai. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post describes how Samuel Leibowitz, the most famous American  lawyer of the 20th century, got his first case and what happened to it. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द
Samuel Leibowitz, biography, कानून, Law, Good advocate ponders over all aspects of a case beforehand,
book, book, books, Books, books, book review, book review, book review, Hindi, kitaab, pustak, Review, Reviews, science fiction, किताबखाना, किताबखाना, किताबनामा, किताबमाला, किताब कोना, किताबी कोना, किताबी दुनिया, किताबें, किताबें, पुस्तक, पुस्तक चर्चा, पुस्तक चर्चा, पुस्तकमाला, पुस्तक समीक्षा, समीक्षा,
Hindi,
Hindi Podcast, हिन्दी पॉडकास्ट,

11 comments:

  1. बहुत रोचक और ज्ञान वर्धक पुस्तक है। वकीलों के लिए तो यह एक तरह से मार्गदर्शिका है। कोई बीस बरस पहले पढ़ने को मिली थी तब से मेरे पास है। इसे अनेक बार पढ़ा है और अपने काम के लिए प्रेरणा मिली है। वकील को मुकदमा करने के पहले ही सब कुछ सोच रखना चाहिए। हाँ कभी कुछ भी न हो तो श्रम पूरा करना चाहिए। श्रम करने से राहें निकलती हैं।

    ReplyDelete
  2. वकीलों के लिए बड़े काम की टिप्स !

    ReplyDelete
  3. उन्मुक्त जी बहुत दिलचस्प और ज्ञानवर्धक पोस्ट। इसे पढ़ते हुए सोच ही रहा था कि पंडितजी के बहुत काम की होगी। पर देखा तो महाराज बीस साल से ज्ञान-घोटा लगा रहे हैं:)

    ReplyDelete
  4. रोचक, दिलचस्प और फिल्मी कहानियों की तरह मजेदार है।
    बहुत अच्छी लगी यह पोस्ट

    प्रणाम स्वीकार करें

    ReplyDelete
  5. रोचक वृतांत.

    ReplyDelete
  6. मैंने इसको पहले पढ़ा और फिर इसको सुना भी. बड़ा ही रोचक लगा. एकदम कहानी जैसा. मजा आ गया. मेरा भी मन करता है कि मैं भी इसी तरह से रिकॉर्ड करूँ. मजा आ गया -- सत सत प्रणाम

    ReplyDelete
  7. नीरज जी, पॉडकास्ट करना बहुत आसान है। आप भी क्यों नहीं शुरू करते। पॉडकास्ट करने के बारे में बहुत से सवालों का जवाब यहां दिया हुआ है।

    मैं अपने पॉडकास्ट ई-स्निपस् पर रखता हूं क्योंकि यह आपको ogg मानक में फाइल रखने की अनुमति देता है। ऐसे फाइल रखने के लिये Internet Archieve ज्यादा अच्छी जगह है।

    ReplyDelete
  8. रोचक और ज्ञानवर्धक !

    ReplyDelete
  9. Excellent! I would love to be lateral thinker like Samuel. I need not be an advocate to use that thinking process!

    ReplyDelete
  10. Me loyar ban rha hu and me internet se best loyar tips sarch kar raha tha and ye story samne ai so read so maja agya mere andar ek junun sa hai loyar banna so abhi geruzbet kar rha hu es year secend year me but ek best loyar banne ke liye kya kya hona. चाहिए ये sab ki teyari kar raha so es post se kafi kuch sikhne ko mila so thanks for men

    ReplyDelete
  11. इस जीवन की वास्तविक कहानी से समझ आया कि सयंम तर्क एवं उस पक्ष में किया गया विचार सफल गतिविधियों को उत्पन्न करता है तथा प्रयोग में लाया गया कार्य पूर्ण होने पर आत्मविस्वास की सि
    द्धि होती है

    ReplyDelete

आपके विचारों का स्वागत है।