![]() |
![]() |
| २०१७ में, उन पर निकला स्टैम्प |
इस चिट्ठी में, रज्जू भैया की कुछ और यादें और उनके जीवन दर्शन की चर्चा है।
![]() |
| १९९८ में, इलाहाबाद के प्रवास के दौरान, मेरी लिखी पहली पुस्तक पढ़ते हुऐ |
इस चिट्ठी में बीबीसी के द्वारा बनायी गयी फिल्म 'आइन्स्टाइन एण्ड एडिंगटन' की समीक्षा है।
'उन्मुक्त जी, यदि यह चिट्ठी आइन्सटाइन के बारे में फिल्म की समीक्षा है तब इस शीर्षक का क्या मतलब है।'
अरे भाई, जल्दी भी क्या है, पहले समीक्षा तो पढ़े।
![]() |
| रॉबर्ट ओपेनहाइमर |
इस चिट्ठी में, परमाणु बम के जनक के नामे से जाने वाले वैज्ञानिक, रॉबर्ट ओपेनहाइमर, की सुरक्षा मंजूरी को समाप्त किये जाने वा इस आज्ञा को रद्द किये जाने की चर्चा है।
इस चिट्ठी में, जयन्त विष्णु नार्लीकर के हिन्दी एवं मातृ भाषा के बारे में विचारों की चर्चा है।
इस विषय को, फिल्म 'हिन्दी मीडियम', बेहतरीन तरीके से उठाती है। नीचे इस फिल्म का टेलर है
चार नगरोंं की मेरी दुनिया - जयंत विष्णु नार्लीकर
इस चिट्ठी में रज्जू भैया के जीवन से जुड़ी कुछ घटनाओं की चर्चा है।
![]() |
| २१ सितंबर १९९५ में गणेश जी की मूर्तियों के दूध पीने की घटना के बाद, कुछ पेपरों में छपी घटना का जिक्र |
रज्जू भैया, जैसा मैंने जाना
भूमिका।। रज्जू भैया का परिवार।। रज्जू भैया की शिक्षा और संघ की तरफ झुकाव।। रज्जू भैया - बचपन की यादें।। सन्ट्रेल इंडिया लॉन टेनिस चैम्पियनशिप और टॉप स्पिन।। आपातकाल के 'निकोलस बेकर'।। भगवान इतने कठोर कि दूध पीने लगें।। चाहता हूं, कुछ और भी दूं।।
इस चिट्ठी में, रज्जू भैया के फिल्म और गानों में रुचि के साथ आपातकाल के दौरान नाम और भेष बदलने की चर्चा है।
![]() |
| आपातकाल के समय, रज्जू भैया अपने बदले रूप और छद्म नाम गौरव के रूप में |
रज्जू भैया, जैसा मैंने जाना
भूमिका।। रज्जू भैया का परिवार।। रज्जू भैया की शिक्षा और संघ की तरफ झुकाव।। रज्जू भैया - बचपन की यादें।। सन्ट्रेल इंडिया लॉन टेनिस चैम्पियनशिप और टॉप स्पिन।। आपातकाल के 'निकोलस बेकर'।। भगवान इतने कठोर कि दूध पीने लगें।। चाहता हूं, कुछ और भी दूं।।
रज्जू भैया, जैसा मैंने जाना
भूमिका।। रज्जू भैया का परिवार।। रज्जू भैया की शिक्षा और संघ की तरफ झुकाव।। रज्जू भैया - बचपन की यादें।। सन्ट्रेल इंडिया लॉन टेनिस चैम्पियनशिप और टॉप स्पिन।। आपातकाल के 'निकोलस बेकर'।। भगवान इतने कठोर कि दूध पीने लगें।। चाहता हूं, कुछ और भी दूं।।
इस चिट्ठी में, जयन्त नार्लीकर की रिचर्ड फाइनमेन से मुलाकात की भी चर्चा है।
![]() |
| १९६२ में, वॉरसा में हुऐ सम्मेलन में, पॉल डिरैक और रिचर्ड फाइनमेन - यह चित्र 'वॉन्डरस ऑफ फिजिक्स' की इस चिट्ठी से है |
चार नगरोंं की मेरी दुनिया - जयंत विष्णु नार्लीकर
रज्जू भैया, जैसा मैंने जाना
भूमिका।। रज्जू भैया का परिवार।। रज्जू भैया की शिक्षा और संघ की तरफ झुकाव।। रज्जू भैया - बचपन की यादें।। सन्ट्रेल इंडिया लॉन टेनिस चैम्पियनशिप और टॉप स्पिन।। आपातकाल के 'निकोलस बेकर'।। भगवान इतने कठोर कि दूध पीने लगें।। चाहता हूं, कुछ और भी दूं।।
जयन्त नार्लीकर ने, अपना शोद्ध फ़्रेड हॉयल के साथ किया। इस चिट्ठी में कुछ बातें उनके बारे में।
![]() |
| फ़्रेड हॉयल का यह चित्र The Guardian के लेख 'Fred Hoyle: the scientist whose rudeness cost him a Nobel prize' के सौजन्य से है। |
चार नगरोंं की मेरी दुनिया - जयंत विष्णु नार्लीकर
इस चिट्ठी में, रज्जू भैया के अध्यन के दिनों के साथ, उनके संघ की तरफ झुकाव की चर्चा है।
| सेंट जोसेफ नैनीताल - चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से |
रज्जू भैया, जैसा मैंने जाना
भूमिका।। रज्जू भैया का परिवार।। रज्जू भैया की शिक्षा और संघ की तरफ झुकाव।। रज्जू भैया - बचपन की यादें।। सन्ट्रेल इंडिया लॉन टेनिस चैम्पियनशिप और टॉप स्पिन।। आपातकाल के 'निकोलस बेकर'।। भगवान इतने कठोर कि दूध पीने लगें।। चाहता हूं, कुछ और भी दूं।।
इस चिट्ठी में, जयंत विष्णु नार्लीकर की आत्मकथा 'चार नगरोंं की मेरी दुनिया' से, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के कुछ किस्सों की चर्चा है।
| कैम्ब्रिज विश्वविदयाल का फिट्ज़विलियम कॉलेज का खेल का मैदान, जहां जयन्त नार्लीकर ने पढ़ाई की - चित्र विकिफीडिया से |
चार नगरोंं की मेरी दुनिया - जयंत विष्णु नार्लीकर
कुंवर बलबीर सिंह, रज्जू भैया के पिता जी
रज्जू भैया, जैसा मैंने जाना
भूमिका।। रज्जू भैया का परिवार।। रज्जू भैया की शिक्षा और संघ की तरफ झुकाव।। रज्जू भैया - बचपन की यादें।। सन्ट्रेल इंडिया लॉन टेनिस चैम्पियनशिप और टॉप स्पिन।। आपातकाल के 'निकोलस बेकर'।। भगवान इतने कठोर कि दूध पीने लगें।। चाहता हूं, कुछ और भी दूं।।
जयंत विष्णु नार्लीकर इलाहाबाद तारामंडल में बोलते हुऐ - चित्र प्रमोद पांडे के सौजन्य से
चार नगरोंं की मेरी दुनिया - जयंत विष्णु नार्लीकर
भूमिका।। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के किस्से।। फ़्रेड हॉयल - नार्लीकर के प्रेरणा स्रोत।। अरे काहे की पोलिश भाषा।। मूर्खता भरी, सनसनीखेज टिप्पणी - ठीक।। हर दिन, हर समय शुभ है।।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के चौथे सरसंघ चालक, रज्जू भैया का जन्म २९ जनवरी १९२२ में हुआ था। आज उनकी जन्म शताब्दी है। इसी अवसर पर, उनके ऊपर, यह श्रंखला शुरू कर रहा हूं। आने वाले समय में, उनकी यादों को साझा करूंगा।
| मेरे पिता के ७०वें जन्मदिन पर, मिठाई खिलाते रज्जू भैया |
रज्जू भैया, जैसा मैंने जाना
भूमिका।। रज्जू भैया का परिवार।। रज्जू भैया की शिक्षा और संघ की तरफ झुकाव।। रज्जू भैया - बचपन की यादें।। सन्ट्रेल इंडिया लॉन टेनिस चैम्पियनशिप और टॉप स्पिन।। आपातकाल के 'निकोलस बेकर'।। भगवान इतने कठोर कि दूध पीने लगें।। चाहता हूं, कुछ और भी दूं।।