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Tuesday, February 19, 2019

हर कुंभ मेला १२ साल बाद नहीं होता

इस चिट्ठी में बताया गया है कि क्यों हर कुंभ (अब महाकुंभ) मेला १२ साल बाद नहीं होता है।
अर्ध-कुंभ (अब कुंभ) इलाहाबाद २०१९ - चित्र सुश्री अमृता चैट्रजी के सौजन्य से

Sunday, February 10, 2019

अमिताभ बच्चन - कुंभ और भ्रम

इस चिट्ठी में चर्चा है कि कुंभ मेले का नाम कुंभ मेला क्यों है; क्या इलाहाबाद मे होने वाले मेले को कुुंभ मेला कहना चाहिय या फिर वृषभ-कुंभ मेला; और अमिताभ बच्चन के द्वारा बताये जा रहे कुंभ के वैज्ञानिक महत्व से क्या भ्रम हो रहा है।

Wednesday, January 23, 2019

मकर संक्रांति पर सूरज उत्तरायण नहींं होता

मकर संक्रांति पर बधाई संदेश - सूर्य उत्तरायण हो गया है। इसी बात की सोशल मीडिया पर भी चर्चा है। यह सही नहीं है? इस चिट्ठी में, इसी  को समझाया गया है।

Friday, June 01, 2012

प्रकृति का नज़ारा - सूरज होगा कलंकित

इस चिट्ठी में शुक्र का पारगमन (Transit of Venus) (ट्रांज़िट ऑफ वीनस्) की चर्चा है।
२००४ में शुक्र का पारगमन

इसे आप सुन भी सकते हैं। सुनने के लिये, नीचे प्लेयर में सुनने वाले चिन्ह ► पर चटका लगायें।

Monday, January 24, 2011

क्या टैटूईन ग्रह की तरह हमारे भी दो सूरज होंगे

इस चिट्ठी में, स्टार वारस् फिल्म श्रृंखला,  औरायन तारा समूह के दूसरे सबसे चमकीले तारे बीटलजूस (या बॅटेलजऍस) के सूपरनोवा बनने की चर्चा है।
टैटूईन ग्रह में सर्यास्त का दृश्य

Sunday, June 28, 2009

सृष्टि के कर्ता-धर्ता को भी नहीं मालुम इसकी शुरुवात का रहस्य

हिन्दू मज़हब की एक धारणा के अनुसार, किसी को नहीं मालुम कि सृष्टि की रचना कैसे हुई - शायद यह उसके कर्ता-धर्ता को भी नहीं मालुम है। इस चिट्ठी में, इसी की चर्चा है।
इसे आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
सुन सकते हैं। ऑडियो फाइल पर चटका लगायें। यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम लिखा है वहां चटका लगायें। इन्हें डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले।


हिन्दू मज़हब की एक और कथा के अनुसार यह नहीं पता कि यह सब कैसे शुरू हुआ। शायद यह इसके बनाने वाले को भी नहीं पता है। ऋग्वेद के १०वें अध्याय का १२९वां श्लोक यही बताता है। नीचे इस श्लोक एवं इसका अनुवाद का उद्धरण स्वामी दयानन्द सरस्वती के द्वारा किया गया और दयानन्द संस्थान १५९७, हरध्यान सिंह मार्ग नयी दिल्ली-५ के द्वारा प्रकाशित पुस्तक से लिया गया है।


निहारिक सीएल ००२४+१७ गुच्छे (galaxy cluster CL0024+17) के चारो तरफ डार्क मैटर (dark matter) की रिंग - चित्र नासा के इस वेबपेज से


नास॑दासी॒न्नो सदा॑सीत्त॒दानीं॒ नासी॒द्रजो॒ नो व्यो॑मा प॒रो यत्।
किमाव॑रीव॒: कुह॒ कस्य॒ शर्म॒न्नम्भ॒: किमा॑सी॒द्गह॑नं गभी॒रम्।।१।।
पदार्थ:- (तदानीम्) उस समय सृष्टि रचना से पूर्व (न, असत्+आसीत्) न अभाव था (नोसद् आसीत्) ना ही भाव था (न रज:) न परमाणु (न व्योमो) ना आकाश (यत् पर:) जो सबसे सूक्ष्म है (किम् + आ + वरीय: ) आवरण क्या था ( कुह) कहां (कस्य शर्मन् ) कैसा घर था (किम् ) क्या (गहनम्) गम्भीर कठिनता से जानने योग्य गहरा (अम्भ:) जल था ।।१।।


न मृत्युरा॑सीद॒मृतं॒ न तर्हि॒ न रात्र्या॒ अह्नं॑ आसीत्प्रके॒त:।
आनो॑दवा॒तं स्व॒धया॒ तदेकं॒ तस्मा॑द्धा॒न्यन्न प॒र: किं च॒नास॑।।२।।
पदार्थ: - (तहिं) तब (न मृत्यु: आसीत्) न मौत थी (न अमृतम्) न अमरत्व था अर्थात् जीवन था न मृत्यु (रात्र्या + अह्न:) रात का दिन का (प्रकेत:) चिन्ह (न + आसीत्) नहीं था, सूर्य चन्द्र वा काल विभाग का कोई चिन्ह (आसीत् + अवातम्) बिना वायु अर्थात् बिना प्राण (स्वधया) अपनी शक्ति से तथा अपनों से धारणा की गई सूक्ष्म प्रकृति के साथ (तत्+एकम्) वह एक (आसीत्) था (तस्मात्+अन्यत्) उसके अतिरिक्त और कुछ (पर:) सूक्ष्म (किन्चन न आस) कुछ नहीं था।।२।।

भावर्थ:- प्रथम मन्त्र के प्रश्नों के उत्तर हैं सूक्ष्म प्रकृति सहित एक ईश्वर था, गीता में ईश्वर की दो प्रकृतियाँ बताई हैं भूम्यादि जड़ पदार्थ और जीव अत: ईश्वर,जीव, प्रृति तीन तत्व थे।।२।।


जब सृष्टि का उपादान कारण अव्यक्त रूप में था तो उसे सत् नहीं कहा जा सकता था क्योंकि वह [अलक्ष्मम् प्रमेयम्] था असत इसलिए नहीं कहा जा सकता कि अभाव से भाव नहीं होता। आकाश वह है जिसमें गमनागमन हो, जब गति का व्यवहार ही नहीं था तो क्या कुछ था? क्या वह आच्छादित था तो उसका आच्छादन क्या था? यहां कौन था? क्या कुछ गहन गम्भीर रूप में था? अर्थात् कुछ था अवश्य पर हमारे लिये वह अज्ञेय है अवर्णनीय है।


तम॑ आसी॒त्तम॑सा गूळहमग्रे॑ऽप्रके॒तं सलि॒लं सर्व॑मा इ॒दम्।
तु॒च्छयेना॒म्वपि॑हितं॒ यदासी॒त्तप॑स॒स्तन्म॑हि॒नाजाय॒तैकम्।।


पदार्थ:- (अग्ने) सृष्टि के व्यक्त रूप में आने से पहले (तमसा गूढ़म्) अन्धकार से ढका हुआ (तम: आसीत्) अन्धकार था (अप्रकेतम्) लक्षण में न आने वाले (सर्वम् +आ+इदम्) यह सब व्यापक हुआ (सलिलम्) गतिशील पदार्थ था (तुच्छ्येन) सूक्ष्म से (आ भु+अपिहितम्) सब ओर ढका हुआ था (तत्) वह (तपस:, महिना) तप ज्ञान के महत्व से (एकम् + अजायत) एक प्रकट हुआ।।३।।


काम॒स्तदग्रे॒ सम॑वर्त॒ताधि॒ मनसो॒ रेत॑: प्रथ॒मं यदासी॑त्।
स॒तो बन्धुमस॑ति॒ निर॑विन्दन्हृ॒दि प्र॒तीष्या॑ क॒वयो॑ मनी॒ष।।४।।


पदार्थ :- (अग्ने) प्रथम (काम:) संकल्प (सम+अवर्तन) वर्तमान हुआ जो (मनस:, अधि) मन में (प्रथमम् रेत:) प्रथम वीर्य (तत्+आसीत्) वह था (कवय:, मनीषा) क्रान्तिदर्शी विद्वानों ने (हृदि) हृदय में (प्रतीष्य) विचार कर (असति) अभाव में (सती बंधुम) भाव को बांधने वाले सत् को (निरविन्दन्) जाना।।४।।


भवार्थ:- फिर ईश्वर का संकल्प सृष्टि रचना का हुआ और अन्यक्त जगत् व्यक्त रूप में आ गया।।४।।


ति॒रश्र्चनो॒ वित॑तो र॒श्मिरे॑षाम॒ध: स्वि॑दा॒सी३ दु॒परि॑ स्विदासी३त्।
रे॒तो॒धा आ॑सन्महि॒मान॑ आसन्त्स्व॒धा अ॒वस्ता॒त्प्रय॑ति: प॒रस्ता॑त्।।५।।


पदार्थ:- (एषाम् रश्मि:) इन पदार्थों की किरणें (तिरश्चीन: वितत:) तिरछी फैली (अध: स्वित्+आसीत्) कदाचित् नीचे (उपरिस्वित्) कभी ऊपर (असीत्) थी (रेतोधा: आसन् महिमान: आसन्) वीर्य धारण करने वाला ईश्वर था और उसकी महिमायें थी (स्वधा अवस्तात्) प्रकृति छोटी थी (प्रयति: परस्तात्) रचना का पयत्न बड़ा था।।५।।


भावार्थ:- अब ये पदार्थ प्रकट रूप में आने लगे तब भी प्रकृति सीमित थी और बम्हा का रचना गुण महान था।।५।।


को अ॒द्घा वे॑द॒ क इ॒ह प्र वो॑च॒त्कुत॒ आजा॑ता कुत॑ इ॒यं विसृ॑ष्टि:।
अ॒र्वाग्दे॒वा अ॒स्य वि॒सर्ज॑ने॒नाथा॒ को वे॑द॒ यत॑ आब॒भूव॑।।६।।


पदार्थ :- (क: अद्घा वेद) ठीक-ठीक कौन जानता है (इहक: प्रवोचत्) इस विषय में कौन कह सकता है (कुत: आजाता:) कहां से उत्पन्न हुए (कुत: इयं विसृष्टि:) कहाँ से यह विशेष रूप वाली सृष्टि हुई (अस्य विसर्जनेन) इस सृष्टि रचना की तुलना में (देवा: अर्वाक्) विद्वान बाद के हैं (अथ) और (कोवेद) कौन जानता है (यत: आबभूव) जहां से संसार प्रकट हुआ।।६।।


भावार्थ:- सृष्टि रचना प्रत्यक्ष का विषय नहीं है, अनुमान और शब्द प्रमाण ही इसमें प्रधान है यह कितना उदार विचार वेद ने दिया है।।६।।


इ॒यं विसृ॑ष्टि॒र्यत॑ आब॒भूव॒ यदि॑ वा द॒धे यदि वा॒ न।
यो अ॒स्याध्य॑क्ष: पर॒मे व्यो॑म॒न्त्सो अ॒ङ्ग वे॑द॒ यदि॑ वा॒ न वेद॑।।७।।


पदार्थ :- (इयम् विसृष्टि:) यह विशेष रचना (यत: आवभूव) जहां से प्रकट हुई (यद् वा दधे) वा जो इसे धारण करता है (यदि वा न) अथवा नहीं धारण करता है (योऽस्माध्यक्ष:) जो इस सृष्टि का स्वामी है (हे अङ्ग) हे मित्र जिज्ञासु (स:) वह (वेद) जानता है (यदि वा न वेद) क्या नहीं जानता हैं? अर्थात (अपश्यत्) जानता है ।।७।।



भवार्थ:- सृष्टि का मर्म जानने की अपेक्षा ब्रह्मा को जानो "तस्मिन् ह विज्ञाने सर्वमिदं विज्ञान भवति" उपनिषद् कहता है उसके जान लेने पर सबका ज्ञान हो जायेगा। इस सूक्त में दर्शन के मौलिक विचार भगवान् ने मनुष्य को दिये हैं, उनका विकास मनुष्य नाना रूप में करता रहा है। दर्शन का मूल रूप तो सृष्टि और उसकी रचना का विचार ही है ।।७।।

चित्रकार की कल्पना से बाईनरी तारा समूह एच डी ११३७६६ (binary-star system HD 113766) जहां पृथ्वी की तरह ग्रह बनने की आशंका है - चित्र नासा के इस इस वेबपेज से

कई साल पहले दूरदर्शन में, जवाहर लाल नेहरू की पुस्तक 'डिस्कवरी ऑफ इंडिया' (Discovery of India) पर आधारित एक सीरियल आया था। इसके शीर्षक का गीत, इस श्लोक का अनुवाद था। मेरे विचार से यह गीत, इस श्लोक के भाव को जितनी बेहतर तरीके से, जितनी आसान रूप में बताता है वैसी किसी और ने इसकी व्याख्या नहीं की है। गीत के शब्द इस प्रकार हैं:
सृष्टि से पहले,
सत नहीं था,
असत भी नही,
अंतरिक्ष भी नहीं,
आकाश भी नहीं था।
छिपा था क्या, कहां ,
किसने ढ़का था
उस पल तो अगम,
असल जल भी कहां था।
सृष्टि का कौन है कर्ता
कर्ता है वह अकर्ता
ऊचें आकाश में रहता
सदा अदृश्य बना रहता
वही सचमुच में जानता
क्या नहीं है जानता ,
है किसी को नहीं पता, नहीं पता
नहीं है पता, नहीं है पता।
(इस गीत को आप मेरे उपर बताये मेरे पॉडकास्ट में सुन सकते हैं।)
शायद यही सच है।

साइंस ब्लॉगरस् एसोसियेशन में भी सृष्टि व जीवन की उत्पत्ति के बारे वैदिक विज्ञान के मत की चर्चा की जा रही है। वह चर्चा हिन्दू मज़हब के बारे में, मेरे द्वारा की गयी चर्चा से कुछ अलग है। मैं न तो संस्कृत का और न ही हिन्दू धर्म का ज्ञाता हूं। मैं नहीं जानता कि मेरे द्वारा अथवा साइंस ब्लॉगरस् पर की जा रही चर्चा ठीक है। मैं इतना अवश्य जानता हूं कि शब्दों के कई अर्थ होते हैं। अक्सर लोग उसके अलग, अलग अर्थ अपनी सुविधानुसार लगा लेते हैं।



मेरे विचार से यह कहना गलत है कि सृजनवाद हिन्दू मज़हब में नहीं है। यह यहां भी है। सच में, सृजनवाद हर मज़हब में है। शायद, यह इसलिए कि पुराने समय में प्राणियों की उत्पत्ति समझाने के लिए सृजनवाद सबसे आसान तरीका था। सृजनवाद के अनुसार मनुष्यों की उत्पत्ति किसी विकासवाद से नहीं, पर किसी अदृश्य शक्ति के द्वारा सृजन किये जाने पर हुई है। हांलाकि अलग अलग मज़हबों में इस अदृश्य शक्ति का नाम, रूप अलग है।


सर्पिल निहारिका एनजीसी १५१२ (Spiral galaxy NGC 1512) में तारे बनते देखे जा सकते हैं - चित्र नासा की इस वेबपेज से


सृजनवाद केवल प्राणियों की उत्पत्ति तक ही नहीं सीमित हैं पर सृजनवादी यह भी कहते हैं कि यह सौर मंडल , यह ब्रह्माण्ड एक अदृश्य शक्ति के द्वारा सृजित है न कि उस प्रकार जैसे विज्ञान में बताया जाता है। इनके द्वारा इस तरह की डीवीडी भी बाज़ार में बेची जाती है।


अगली बार चर्चा करेंगे, १८ जून १८५८ में डार्विन को मिले पत्र की, किसका था वह किस लिये लिखा गया था। क्यों उसने डार्विन के विचार बदल दिये। कछ चर्चा करेंगे डार्विन के व्यक्तित्व की, वह क्यों ने केवल महानतम वैज्ञानिक थे पर उससे बेहतर इन्सान थे।


इस चिट्ठी के सारे चित्र नासा वेबसाइट से हैं। वे जिस वेबपज से हैं उनका लिंक वहीं दिया है। आप यदि उन चित्रों के बारे में जानना चाहें तो नासा के उस वेब पेज पर चटका लगा कर उसका बड़ा चित्र एवं वर्णन पढ़ सकते हैं। आप भी, नासा के चित्र प्रयोग कर सकते हैं। इस की शर्तें यहां लिखी है।

डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े
भूमिका।। डार्विन की समुद्र यात्रा।। डार्विन का विश्वास, बाईबिल से, क्यों डगमगाया।। सेब, गेहूं खाने की सजा।। भगवान, हमारे सपने हैं।। ब्रह्मा के दो भाग: आधे से पुरूष और आधे से स्त्री।। सृष्टि के कर्ता-धर्ता को भी नहीं मालुम इसकी शुरुवात का रहस्य।।


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hindu majahb kee ek dharana ke anusaar yeh kisee ko naheen malum kee srishti kaise banee. yeh iske rachayitaa ko bhee naheen malum. is chitthi mein isee kee charchaa hai. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

There is one saying in Hinduism that no one knows how it all began; even its creator does not know it. This post talks about the same. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.



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Sunday, June 14, 2009

भगवान, हमारे सपने हैं

हिन्दू मज़हब की शुरूआत एकदम अलग है। यह इन सबसे पुराना भी है। हिन्दुओं की सभ्यता में सृष्टि और प्राणि जगत के जन्म की कई धारणायें हैं। इसकी एक धारणा इसके अनन्त होने का वर्णन करती है। इसी की चर्चा इस कड़ी में हैं।

इसे आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,
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हिन्दू मज़हब की एक धारणा के अनुसार, हम सब प्रलय और पुन: जीवन के चक्र में चल रहे हैं। कार्ल सेगन ने खगोल शास्त्र में शोध किया है। उन्होंने विज्ञान को लोकप्रिय बनाने में कार्य किया है। दो दशक पहले दूरदर्शन में, कार्ल  द्वारा बनाया गया 'कॉस्मॉस्' नामक सीरियल आया था। इसमें ब्रह्मांड विज्ञान और सभ्यता के विकास की कहानी को बताया गया था।  बाद में, इसी सीरियल पर, इसी नाम से उनकी पुस्तक भी प्रकाशित हुई थी। इसमें, कार्ल  कहते ( पेज २८५) हैं,

'The Hindu religion is the only one of the world's great faith dedicated to the idea that the Cosmos itself undergoes and immense, indeed an infinite number of deaths and rebirths. It is the only religion in which the time scales correspond, no doubt by accident, to those of modern  scientific cosmology. Its cycles run from our ordinary day and night to a day and night of Brahma, 8.64 billion years long, longer than the age of the Earth or the Sun and about half the time since the Big Bang. And there are much longer time scales still.


There is the deep and appealing notion that the universe is but the dream of the god who, after a hundred Brahama years, dissolves himself into a dreamless sleep. The universe dissolves with him – until, after another Brahma century, he stirs, recomposes himself and begins again to dream the great cosmic dream. Meanwhile, elsewhere, there are an infinite number of other universes, each with its own god dreaming the cosmic dream. These great ideas are tempered by another, perhaps still greater. It is said that men may not be the dreams of the gods, but rather that the gods are the dreams of men.'
हिन्दू मज़हब, संसार के प्रसिद्ध मज़हबों में से एक है। केवल इसी में मान्यता है कि सृष्टि रचना और प्रलय के अनन्त चक्र में चलती है। इसमें दिया गया सृष्टि रचना का  समय, आधुनिक विज्ञान के सबसे करीब है … यह चक्र खरबों साल का है ...
इसमें मान्यता है कि सृष्टि, ईश्वर के सपने हैं, जो एक ब्रह्मा शताब्दी में समाप्त होती  हैं और अगली ब्रह्मा शताब्दी में  पुनः इसकी रचना होती है … पर शायद मानव ईश्वर के सपने न होकर, ईश्वर ही मानव के सपने हैं।


रचना और प्रलय का चक्र, ब्रह्मा शताब्दी से जुड़ा है। यह हमारी शताब्दी के बराबर नहीं है पर उससे कहीं बड़ी है। यह कितना बड़ी है यह भी पुराने समय से, गणित की एक पहली के रूप में बताया जाता है। इस पहेली के जिक्र मैंने '२ की पॉवर के अंक, पहेलियां, और कम्पयूटर विज्ञान' श्रंखला की इस कड़ी में भी किया है। इसे मैंने अपने बचपन में गुणाकर मुले की पुस्तक ‘गणित की पहेलियाँ’ नाम से लिखी है। इसमें एक अध्याय ‘अंकगणित की पहेलियाँ’ नाम से है। इसमें इस पहेली का वर्णन कुछ इस तरह से है:
'कथा बहुत  प्राचीन है। उस समय काशी  में  एक  विशाल  मन्दिर था। कहा जाता है  कि ब्रम्हा ने जब इस संसार  की  रचना की,  उसने  इस मंदिर  में हीरे की बनी हुई  तीन छड़ें रखी  और फिर इनमें से एक में छेद  वाली  सोने की ६४ तश्तरियां  रखीं  सबसे बड़ी नीचे और सबसे  छोटी सबसे उपर। फिर ब्रम्हा ने वहां पर  एक  पुजारी को नियुक्त किया। उसका काम था कि वह एक छड  की तश्तरियां दूसरी छड़  में बदलता जाए।  इस काम के लिए  वह तीसरी छड़  का  सहारा ले सकता  था परन्तु  एक  नियम  का पालन जरूरी  था। पुजारी  एक समय केवल  एक  ही  तश्तरी उठा सकता था और छोटी तश्तरी के  उपर  बड़ी  तश्तरी वह  रख नहीं  सकता  था। इस  विधि  से जब सभी  ६४ तश्तरियां एक छड़  से  दूसरी छड़  में पहुंच जाएंगी, सृष्टि का अन्त हो जाएगा।
आप कहेंगे,
"तब तो कथा की  सृष्टि का अन्त हो जाना चाहिए था। ६४ तश्तरियों को एक छड़ से दूसरी छड़  में  स्थांतरित करने में समय ही कितना  लगता है।"
नहीं, यह 'ब्रम्ह-कार्य' इतनी शीघ्र समाप्त नहीं हो सकता। मान लीजिए  कि एक तश्तरी के बदलने में एक  सेकेंड का समय  लगता  है। इसके माने यह हुआ कि एक घंटे में आप ३६०० तश्तरियां बदल लेंगे। इसी प्रकार एक दिन  में आप  लगभग १००,००० तश्तरियों और १० दिन  में लगभग १,०००,००० तश्तरियां बदल लेंगे।
आप  कहेंगे,
"इतने परिवर्तनों में  तो ६४ तश्तरियां निश्चित रूप  से एक छड़  से दूसरी छड़ में पहुंच जाएंगी।" 
लेकिन  आपका अनुमान गलत है । उपरोक्त 'ब्रम्ह-नियम'  के अनुसार ६४ तश्‍तरियों  को बदलने में  पुजारी  महाशय  को  कम  से  कम ५,००,००,००,००,००० (पांच खरब) वर्ष लगेंगे।
इस बात पर शायद यकायक  आप विश्वास न करें । परन्तु गणित के हिसाब  से कुल परिवर्तनों की संख्या   २६४-१, अर्थात १८,४४६,७४४,०७३,७०९,५५१,६१५ होती   है,'
यह संख्या इतनी बड़ी है कि मैं नहीं जानता कि इसे शब्दों में क्या कहा जाय। क्या आप को मालुम है?


कार्ल सेगन की तरह, फ्रिटजॉफ कापरा ने भी विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए अपना योगदान दिया है। इन्होंने  वियना विश्वविद्यालय से भौतिक शास्त्र में शोध किया है। कापरा के अनुसार भी  हिन्दुवों की कई मान्यतायें आधुनिक विज्ञान के सबसे करीब है।  वे अपनी पुस्तक 'द टॉओ ऑफ फिज़क्सि' (पेज २५६-२५९) में कहते हैं,
The Eastern mystics have a dynamic view of the universe similar to that of modern physics, and consequently it is not surprising that they, too, have used the image of the dance to convey their intuition of nature.
...
The metaphor of the cosmic dance has found its most profound and beautiful expression in Hinduism in the image of the dancing god Shiva. Among his many incarnations, Shiva, one of the oldest and most popular Indian gods, appears as the King of Dancers. According to Hindu belief, all life is part of a great rhythmic process of creation and destruction, of death and rebirth, and Shiva's dance symbolizes this eternal life-death rhythm which goes on in endless cycles.
...
क्या शिव का यह नृत्य 'रचना और प्रलय', 'जीवन और मृत्यु' दर्शाता है? क्या यही, आधुनिक भौतिक शास्त्रियों के मूल-कणों का नृत्य है? 

For the modern physicists, then, Shiva's dance is the dance of subatomic matter. As in Hindu mythology, it is a continual dance of creation and destruction involving the whole cosmos; the basis of all existence and of all natural phenomena. Hundreds of years ago, Indian artists created visual images of dancing Shivas in a beautiful series of bronzes. In our time, physicists have used the most advanced technology to portray the patterns of the cosmic dance. The bubble-chamber photographs of interacting particles, which bear testimony to the continual rhythm of creation and destruction in the universe, are visual images of the dance of Shiva equalling those of the Indian artists in beauty and profound significance. The metaphor of the cosmic dance thus unifies ancient mythology, religious art and modern physics.
पूर्वी सन्तों की सृष्टि की कल्पना, आधुनिक भौतिक शास्त्रियों के अनुसार है। आश्चर्य नहीं कि इसलिये प्रकृति को समझाने के लिये नृत्य का सहारा लिया। 

हिन्दू मज़हब में इसे शिव के नृत्य द्वारा सबसे बेहतरीन तरीके से समझाया गया है। यह नृत्य   रचना-प्रलय जीवन-मृत्यु का प्रतीक है।

आधुनिक भौतिक शास्त्रियों के लिये शिव का नृत्य मूल कणों का नृत्य है ...


तो क्या हिन्दू मज़हब में सृजनवाद नहीं है? यदि है तो वह कहां है? इसके बारे में अगली बार।


यदि आप कॉसमॉस सीरियल की वह कड़ी देखना चाहते हैं जिसका कुछ हिस्सा मैंने इस चिट्ठी में उद्धरित किया है तो आप नीचे देख सकते हैं।

कार्ल सेगन और शिव का नृत्य करता चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से है।


डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े
भूमिका।। डार्विन की समुद्र यात्रा।। डार्विन का विश्वास, बाईबिल से, क्यों डगमगाया।। सेब, गेहूं खाने की सजा।। भगवान, हमारे सपने हैं।।


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In Hindu religion, there are many stories about creation of universe and life. One of the stories says that we are in cycles of creation and destruction. This post talks about the same.  It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.


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Monday, October 06, 2008

निष्कर्ष: बेथलेहम के उपर चमकने वाला तारा क्या था

बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां श्रंखला की इस अन्तिम कड़ी में चर्चा है कि क्या ईसा मसीह के जन्म के समय बेथलेहम के उपर चमकने वाला तारा अधिनव तारा (supernova) था। यह हिन्दी देवनागरी लिपि में है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।


आर्थर सी कलार्क (Arthur C Clark) की लिखी विज्ञान कहानी द स्टार (The Star) के मुताबिक बेथलेहम के उपर चमकने वाला तारा अधिनव तारा (supernova) था।
'उन्मुक्त जी, क्या यह सच है? क्या बेथलेहम के उपर चमकने वाला तारा वास्तव में अधिनव तारा था?' 
मेरी जानकारी में इस तरह के अधिनव तारे के बारे में कोई सबूत नहीं मिलते हैं।
'तो फिर वह तारा क्या था?'
मेरे विचार से यदि उस समय वास्तव में कोई तारा निकला होगा तो वह,
  • अधिनव तारा ही होगा, जिसके बारे में अभी तक हमें कोई तथ्य नहीं मिले, या फिर
  • उस समय तो नहीं पर उसके आगे पीछे कोई पुच्छल तारा या ग्रह एक साथ मिल गये थे जिसे लोगों ने ईसा मसीह के महत्व बताने के लिये उनके जन्म से जोड़ दिया, या फिर
  • यह केवल कोरी कल्पना है। बस ईसा मसीह के जन्म को महत्वपूर्ण बनाने के लिये कही जाने लगी है।
इसी के साथ यह श्रंखला भी समाप्त होती है।


'अरे उन्मुक्त जी, आप यह श्रंखला कैसे समाप्त कर सकते हैं। आपने इस श्रंखला की भूमिका लिखते समय दूसरे और तीसरे चित्र के लिये क्रैब निहारिका (Crab Nebula) नेब्युला और अमेज़िंग स्टोरीस् (Amazing stories) पत्रिका के पहले अंक को चुना था और कहा था कि आपने दूसरे और तीसरे चित्र का प्रयोग जान-बूझ कर किया है। इसका कारण भी आपको इस श्रंखला के अन्त होते, होते समझ में आयेगा। मुझे तो नहीं समझ में आया।'
Crab nebula movieImage by dgoodin via Flickr


मेरे विचार से यदि उस समय कोई तारा नहीं निकला था। यह केवल ईसा मसीह के जन्मदिन को महत्वपूर्ण बनाने के लिये, लोगों ने यह बात गढ़ थी। लेकिन यदि यह सत्य है तो वह अवश्य ही अधिनव तारा होगा। इसलिये मैंने क्रैब निहारिका (Crab Nebula) नेब्युला का प्रयोग किया था क्योंकि यह अधिनव तारे के कारण ही बनी है।


 चित्र विकिपीडिया के सौजन्य से

विज्ञान कहानियों को मिलने वाले पुरुस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण पुरुस्कार ह्यूगो पुरूस्कार है। इसमें फिल्मों के ऑस्कर पुरूस्कार की तरह, कई श्रेणियां हैं। इसमें से एक श्रेणी है छोटी कहानियों के लिये भी है। द स्टार कहानी को १९५३ में  छोटी कहानियों के लिये ह्यूगो पुरूस्कार मिला था। यह पुरुस्कार अमेजिंग स्टोरीस के संस्थापक  ह्यूगो जेर्स्बैक के नाम पर   दिया जाता है। इसलिये मैंने इस पत्रिका के पहले अंक का चित्र छापा था।

इसी के साथ मैं इस श्रंखला से विदा लेता हूं और जल्द ही दूसरी नयी श्रंखला के साथ हाज़िर होउंगा - विदा।

बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां
भूमिका।। प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में क्यों हुआ?।। क्रिस्मस को बड़ा दिन क्यों कहा जाता है।। क्या ईसा मसीह सिल्क रूट से भारत आये थे।। बेथलेहम का तारा क्या था।। बेथलेहम का तारा उल्कापिंड या ग्रहिका नहीं हो सकता।। पिंडों के पृथ्वी से टक्कर के कारण बने प्रसिद्ध गड्ढ़े।। विज्ञान कहानियां क्या होती हैं और उनका मूलभूत सिद्धान्त।। विज्ञान कहानियों पर पुरुस्कार।। उल्का, छुद्र ग्रह, पृथ्वी पर आधारित विज्ञान कहानियां और फिल्में।। धूमकेतु या पुच्छल तारा क्या होते हैं।। हैली धूमकेतु।। पुच्छल तारों पर लिखी विज्ञान कहानियां।। बेथलेहम का तारा - ग्रह पास आ गये थे।। ग्रहण पर आधारित कहानियां।। जब रात हुई।। तारे, उनका वर्गीकरण, और वे क्यों चमकते हैं।। तारों का अन्त कैसे होता है।। वह तारा।। निष्कर्ष: बेथलेहम के उपर चमकने वाला तारा क्या था

हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi
(सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।: Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. Click where 'Download' and there after name of the file is written.)

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  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
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  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में - सुन सकते हैं।
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This post discusses whether star of Bethelehm was supernova. It is in Hindi (Devnaagaree script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.



सांकेतिक शब्द
star, तारे,

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Saturday, September 13, 2008

वह तारा

बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां श्रंखला की इस कड़ी में आर्थर सी कलार्क (Arthur C. Clarke) की लिखी विज्ञान कहानी द स्टार (The Star) नामक कहानी की समीक्षा है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

इसे आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप,

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सुन सकते हैं। ऑडियो फाइल पर चटका लगायें फिर या तो डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले। डाउनलोड करने के लिये पेज पर पहुंच कर जहां Download फिर अंग्रेजी में फाइल का नाम लिखा है, वहां चटका लगायें।

आर्थर सी कलार्क - चुत्र विकिपीडिया से
'द स्टार' एक बेहतरीन कहानी है और १९५६ में इसे विज्ञान की छोटी कहानियों के लिये ह्यूगो पुरूस्कार भी मिला है। इसे आर्थर सी कलार्क ने लिखा है।

यह कहानी है डा. शैंडलर (Dr. chandler) के मनः स्थिति की। वे एक खगोलशास्त्री हैं और पादरी भी। वे फीनिक्स नेब्यूला में स्थित अधिनव तारे (supernova) के बारे में जानकारी लेने गये थे। लौटते समय, वे दुविधा में हैं, उनका विश्वास डगमगा रहा है, क्या विचार चल रहें हैं उनके मन में - द स्टार (The star) उसी की कहानी है। यह कहानी है । वहां, जो उन्होंने देखा, क्या वह सच, सच रिकॉर्ड करें अथवा नहीं। क्या देखा था उन्होंने ऐसा वहां?


इस कहानी को अंग्रेजी में आप यहां पढ़ वा यहां सुन सकते हैं - यह बताने के लिये टिंकू जी को धन्यवाद।


डा. शैंडलर जब वहां पहुंचे तो पता चला कि अधिनव तारे का अपना सौर मंडल था। उसका ग्रह पृथ्वी जैसा था। उसमें हमारी जैसी सभ्यता पनपती थी, वहां के रहने वाले लोग अच्छे थे। लेकिन, अधिनव तारे के कारण, वे सब, उनकी सभ्यता नष्ट हो गयी। इन लोगों को मालुम था कि वे सब मर जायेगें बचेगें नहीं उन्होंने अपने बारे में सब कुछ एक तिजोरी में रख दिया था ताकि यदि कभी कोई आये तो उसे उनके बारे में उनकी सभ्यता के बारे में पता चल सके। उनका जीवन, उनकी सभ्यता यूं ही गर्त में न खो जाये।


लेकिन खगोलशास्त्री पादरी का विश्वास क्यों डगमगाने लगा?


अभिनव तारे अन्त समय में बहुत तेज चमकने लगते हैं और वे सबसे अलग दिखते हैं। इस अभिनव तारे की रोशनी उस समय पृथ्वी पर पहुंची जब ईसा का जन्म हुआ था। यह वही तारा है जो बेथलेहम पर चमका था। इसी ने तीन राजाओं को रास्ता दिखाया था। इस कहानी की अन्तिम पंक्तियां कुछ इस प्रकार से हैं जो उसकी दुविधा का वर्णन करती हैं।
'There can be no reasonable doubt: the ancient mystery is solved at last. Yet―O God, there were so many stars you could have used.
What was the need to give these people to the fire, that the symbol of their passing might shine above Bethlehem?'
इसमें कोई शक नहीं कि पुराना रहस्य का हल मिल गया। हे ईश्वर इतने सारे थे जिनमें से किसी एक को तुम ले सकते थे।
क्या जरूरत थी इतने अच्छे लोगो को तुमने इसलिये आग में झोंक दिया कि उनकी मृत्यु बेथलेहम के उपर चमक सके।

टीवी श्रृंखला का दृश्य - विकिपीडिया से
इस कहानी पर द न्यू ट्वीलाइट ज़ोन (The New Twilight zone) टीवी श्रृंखला पर एक कड़ी बनी है। इस कहानी का अन्त दुखद है पर इस इस टीवी श्रृंखला की कड़ी में अन्त सुखद है। उस ग्रह के लोग खुशी मनाते है कि उनकी मृत्यु किसी नयी सभ्यता को रोशनी दिखायेगी।

इस श्रंखला अगली और अन्तिम कड़ी में चर्चा करेंगे कि क्या वह तारा वास्तव में अधिनव तारा था यदि नहीं, तो फिर क्या था?


बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां
भूमिका।। प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में क्यों हुआ?।। क्रिस्मस को बड़ा दिन क्यों कहा जाता है।। क्या ईसा मसीह सिल्क रूट से भारत आये थे।। बेथलेहम का तारा क्या था।। बेथलेहम का तारा उल्कापिंड या ग्रहिका नहीं हो सकता।। पिंडों के पृथ्वी से टक्कर के कारण बने प्रसिद्ध गड्ढ़े।। विज्ञान कहानियां क्या होती हैं और उनका मूलभूत सिद्धान्त।। विज्ञान कहानियों पर पुरुस्कार।। उल्का, छुद्र ग्रह, पृथ्वी पर आधारित विज्ञान कहानियां और फिल्में।। धूमकेतु या पुच्छल तारा क्या होते हैं।। हैली धूमकेतु।। पुच्छल तारों पर लिखी विज्ञान कहानियां।। बेथलेहम का तारा - ग्रह पास आ गये थे।। ग्रहण पर आधारित कहानियां।। जब रात हुई।। तारे, उनका वर्गीकरण, और वे क्यों चमकते हैं।। तारों का अन्त कैसे होता है।। वह तारा।।



is post mein Arthur C. Clarke kee likhee kahaanee 'The Star' kee smeeksha hai. yeh hindi (devnagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.
This post reviews the science fiction story 'The Star ' written by Arthur C. Clarke. It is in Hindi (Devnaagaree script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.



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Saturday, August 30, 2008

तारों का अन्त कैसे होता है

बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां श्रंखला की पिछली चिट्ठी में चर्चा हुई थी कि तारों में, हाइड्रोजन के हील्यिम में बदल रही है। इस प्रक्रिया में कुछ पदार्थ ऊर्जा में बदल रहा है, जो गर्मी और प्रकाश दे रहा है। इस बार चर्चा का विषय है कि जब यह समाप्त होगा, तब क्या होगा?

तारों में, ऊर्जा का उत्पादन कई चरणों में हो रहा है। पहले चरण में ऊर्जा-उत्पादन होने पर जो कुछ बचता है, वह दूसरे चरण में होने वाले ऊर्जा-उत्पादन में काम आ जाता है। इस प्रकार यह चक्र चलता रहता है। अन्त में, एक समय ऎसा भी आता है जब तारे का सारा ईंधन समाप्त हो जाता है और तारे अन्त में श्वेत वामन तारे (White dwarf), न्यूट्रॉन तारे (Neutron star) अथवा ब्लैक होल (Black hole) के रूप में बदल जाते हैं। पर इसके पहले एक प्रक्रिया और होती है वह है कुछ समय के लिये तारों का बढ़ना और उनका तेजी से चमकना।

 न्यूट्रॉन तारा

कहा जाता है कि दीपक की लौ समाप्त होने के पहले एक बार जोर दिखाती है। कुछ यही बात तारों के साथ भी हो रही है। जब हाइड्रोजन समाप्त होने लगती है तो तारे ठण्डे होने लगते हैं और सिकुड़ने लगते हैं। सिकुड़ने के कारण पुनः ऊर्जा पैदा होती है और वे पुनः गर्म होते हैं, ज्यादा तेज चमकते हैं, और विस्तार करते हैं। यह विस्तार उस तारे की संहति (Mass) के अनुसार होता है। इसके कारण वे, अधिनव तारा (Super nova) (सुपरनोवा), या नोवा (Nova), या लाल दैत्याकार तारे (red giant) बनते हैं। ज्यादा संहति वाले सुपर नोवा (supernova) और कम संहति वाले तारे लाल दैत्याकार तारे बनते हैं।

 लाल दैत्याकार तारा

हमारा सूर्य बड़े तारों में नहीं है। इसका अन्त एक लाल दैत्याकार तारे के साथ होगा। उसके बाद सफेद बौना (White dwarf ) और फिर अंधकार। लाल दैत्याकार तारा बनते समय इसकी परिधि बढ़ जायेगी और मंगल ग्रह भी इसकी चपेट में आ जायेगा। हम सब तो जरूर ही मिट जायेंगे, लेकिन घबराने की कोई बात नहीं इसमें लगभग ५.५ अरब साल लगेंगे।


सबसे भारी तारे सुपर नोवा में तब्दील होंते हैं। वे सबसे ज्यादा चमकीले भी होते हैं। वे इतने चमकीले होते हैं कि दिन में भी दिखायी पड़ते हैं। इनकी परिधि इतनी होती है कि वे अपने सौर मंडल को, यदि उनके पास हो तो, समाप्त कर देंगे। इनके अन्दर का हिस्सा बाद में न्यूट्रान स्टार या ब्लैक होल में बदल जाता है।



क्रैब नेब्यूला

सबसे प्रसिद्घ सुपरनोवा, १०५४ ईसवी में देखा गया था। इसके बारे में चीन और अरब के खगोलशास्त्रियों ने लिखा है। यह दिन में भी, २३ दिन तक दिखायी पड़ा और ६५५ रातों में यानि लगभग दो साल तक दिखायी पड़ा। इसके बाहर का हिस्सा क्रैब नेब्यूला (Crab Nebula) के नाम से जाना जाता है। यह वृष (Taraus) राशि के अन्दर है। इसके अन्दर का हिस्सा एक न्यूट्रॉन स्टार (pulsating star) है। यह एक सेकेण्ड में ३० चक्कर लगा रहा है। यह हमारी आकाशगंगा में है और हम से ६,३०० प्रकाश वर्ष दूर है। एक प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो प्रकाश एक साल में तय करता है।


अगली बार चर्चा करेंगे उस विज्ञान कहानी की, उस तारे की, जो सुपरनोवा के संदर्भ में लिखी गयी। यह एक प्रसिद्ध कहानी है जिस पर पुरस्कार भी मिल चुके हैं और उसका कुछ संबन्ध इस श्रंखला से भी है।

इस चिट्ठी के चित्र विकीपीडिया के सौजन्य और उसी की शर्तों के अन्दर

बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां
भूमिका।। प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में क्यों हुआ?।। क्रिस्मस को बड़ा दिन क्यों कहा जाता है।। क्या ईसा मसीह सिल्क रूट से भारत आये थे।। बेथलेहम का तारा क्या था।। बेथलेहम का तारा उल्कापिंड या ग्रहिका नहीं हो सकता।। पिंडों के पृथ्वी से टक्कर के कारण बने प्रसिद्ध गड्ढ़े।। विज्ञान कहानियां क्या होती हैं और उनका मूलभूत सिद्धान्त।। विज्ञान कहानियों पर पुरुस्कार।। उल्का, छुद्र ग्रह, पृथ्वी पर आधारित विज्ञान कहानियां और फिल्में।। धूमकेतु या पुच्छल तारा क्या होते हैं।। हैली धूमकेतु।। पुच्छल तारों पर लिखी विज्ञान कहानियां।। बेथलेहम का तारा - ग्रह पास आ गये थे।। ग्रहण पर आधारित कहानियां।। जब रात हुई।।  तारे, उनका वर्गीकरण, और वे क्यों चमकते हैं।। तारों का अन्त कैसे होता है।।

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बताये गये चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर लें।




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Tuesday, August 12, 2008

तारे, उनका वर्गीकरण, और वे क्यों चमकते हैं

'बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां' श्रंखला कि इस चिट्ठी में 'तारे, उनका वर्गीकरण और वे क्यों चमकते हैं' के बारे में चर्चा है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

आकाश में रात्रि में चमकते तारे वास्तव में सूर्य हैं। सभी तारे एक रंग के नहीं होते? दूर से नंगी आँखों से देखने पर वे भले ही चमकदार प्रतीत हों, परन्तु टेलिस्कोप द्वारा देखने पर उनके रंग भिन्न-भिन्न दिखाई देते हैं। इसका कारण है तारों का भिन्न-भिन्न तापमान - रंग , सतह के तापमान पर निर्भर करता है। जैसे कि बिजली के बल्ब का प्रकाश पीला होता है, जबकि बिजली का हीटर गर्म होने पर लाल हो जाता है। ठीक इसी प्रकार अधिक गर्म तारे नीले रंग के दिखाई देते हैं, जबकि उनकी अपेक्षा ठंडे तारे लाल प्रतीत होते हैं। हमारा सूर्य न तो बहुत अधिक गर्म है, न ही बहुत ठंडा, इसलिए वह पीला दिखायी देता है।




कृतिका तारा समूह (pleiades), जिसे देहात में कचबचिया भी कहा जाता है। यह तारे सप्त ऋषियों की पत्नियां भी कहे जाते हैं


उन्नीसवीं शताब्दी के अन्त मैं हार्वड वेधशाला ने तारों का वर्गीकरण (stellar classification) इनसे निकली रोशनी का विश्लेषण (जो कि मोटे तौर पर उनके तापमान पर निर्भर करता है) कर इनका वर्गीकरण किया। इस वर्गीकरण को A से शुरू होकर M तक के अक्षरों तक के एल्फाबेट (मुझे इसकी हिन्दी नहीं मिली, क्या कोई बतायेगा) दिखाया गया। बाद मे कुछ वर्ग छोड दिये गये, कुछ दूसरे जोड़ दिये गये और एक नया वर्ग O भी जोड़ा गया। इन सब के बाद वर्ग A, B, F,G, K, M, औरO बचे। अब इनको याद कैसे रखा जाय। इसलिये एक वाक्य बनाया गया। उसके हर शब्द का पहला एल्फाबेट एक वर्ग को चिन्हित करता है। यह वाक्य है,
'Oh Be A Fine Girl Kiss Me'
इसके बाद तीन नये वर्ग जोड़े गये जिन्हे R, N, और S इन एल्फाबेट को याद करने के लिये नया वाक्य बनाया गया
'Right Now Sweetheart'
मैंने इस वर्गीकरण के बारे में यहां विस्तार से लिखा है।

हमसे सबसे पास तारा - हमारा सूरज

पृथ्वी पर उर्जा के स्रोत समाप्त हो रहे हैं पर सूरज और तारे कहां से इतनी उर्जा ला रहे हैं। वे अरबों साल से रोशनी और गर्मी दे रहे हैं और अरबों साल तक देते रहेंगे। कहां से वे ला रहे हैं इतनी उर्जा।

यह मुश्किल विषय है पर आसान तरीके से यह कहा जा सकता है कि सूरज और तारों पर प्रति संकेण्ड लाखों हाइड्रोजन बम्ब फूट रहे हैं। इसी कारण वे इतनी उर्जा प्रदान कर रहे हैं। मोटे तौर पर हाइड्रोजन हील्यिम में बदल रही है। इस प्रक्रिया में कुछ पदार्थ उर्जा में बदल रहा है। जिसके कारण रोशनी और गर्मी मिल रही है। यह सब अलबर्ट आइंस्टाइन (Albert Einstein) के प्रसिद्घ सिद्घान्त E=mc2 के कारण हो रहा है। इस समीकरण में E वह ऊर्जा है जो m संहति के उत्पन्न हो रही है और c प्रकाश का वेग है।

यह चित्र १ जुलाई १९४६ टाईम पत्रिका के कवर से है

कभी न कभी तो सारी हाइड्रोजन हील्यिम में बदल जायगी, उर्जा का स्रोत समाप्त हो जायगा - तब क्या होगा? इसकी चर्चा अगली बार।

इस चिट्ठी के पहले दोनो चित्र विकीपीडिया के सौजन्य से हैं और उसी की शर्तों के अन्दर हैं।

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tare kyon chamkte hain, unka vergeekarn kis prkaar kiya gayaa hai - is post per, isse baat kee charchaa hai. yeh hindi (devnagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

Why do the stars shine, how are they classified - is explained in this post. It is in Hindi (Devnaagaree script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.



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Thursday, August 07, 2008

आप सही हैं ... मैं बदलाव कर रहा हूं

मुझे कुछ दिन पहले बैंगलोर जाने का मौका मिला। हवाई जहाज पर मेरे आगे एक अधेड़ उम्र के सज्जन और एक युवती जो कि उनकी लड़की की उम्र की होगी बैठी थी। मैं नहीं कह सकता कि वह उनकी पुत्री थी या फिर भतीजी या फिर ऑफिस में काम करने वाली सहयोगी या उनकी सक्रेटरी। वे रास्ते भर बात करते रहे। उनके बात करने के तरीके से लगा कि वह युवती उनकी पुत्री नहीं है। अक्सर वे जोर जोर से बाते करते थे पुरुष युवती को कुछ समझा रहा था। मुझे उनकी बात नहीं सुननी चाहिये थी पर जब काम न हो तो बात कान में घुस ही जाती है।



पुरुष, युवती को तन्मयता से ज्योतिष के बारे में समझा रहा था। वह बता रहा था कि ज्योतिष में किस घर में क्या हो, तो क्या होता है। कुछ देर बाद उसने अपना मोबाईल फोन निकाल लिया। वह कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति था क्यों कि हवाई जहाज पर मोबाइल चलाना मना है। वे दोनो उस पर ज्योतिष से संबन्धी खबरें/ सूचना देख रहे थे।

ज्योतिष का कोई आधार नहीं है। आप किस समय पैदा हुऐ हैं, या उस समय ग्रहों की क्या स्थिति है - उस कारण आपका भविष्य नहीं तय हो सकता है। यदि आपको १९८० के दशक में दूरदर्शन की याद हो तो आप हर रविवार को आने वाले टीवी सीरियल Cosmos को नहीं भूले होंगे। यह कार्ल सेगन ने ही बनाया थी। इसके बाद इसी नाम से यह पुस्तक के रूप में भी प्रकाशित हुई। निःसन्देह बीसवीं शताब्दी में विज्ञान को लोकप्रिय बनाने में कार्ल सेगन (Carl Sagan) एक थे - आप अन्य ऐसे लोगों में आइज़ेक एसीमोव (Issac Asimov), आर्थर सी क्लार्क (Arthur C. Clark), मार्टिन गार्डनर (Martin Gardner) को रख सकते हैं। ज्योतिष के बारे में मेरे विचार कुछ कार्ल सेगन जैसे हैं। वे कहते हैं,


मैंने अपने विचारों को विस्तार से इसी चिट्ठे में 'ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके' नामक श्रंखला कड़ियों में लिखा है। इसकी पहली चिट्ठी यहां और अन्तिम चिट्ठी यहां है। इसके बाद इनको समायोजित कर एक जगह अपने लेख चिट्ठे पर ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके नाम से रखा है। इसमें मैंने यह बताने का प्रयत्न किया है कि ज्योतिष एक तरह का अंधविश्वास या फिर टोना टुटका है।


ज्योतिष पर विश्वास करना, उसके बारे में बात करना हमारे रगो में इतना घुल मिल गया है। यदि आप देखें कि हिन्दी में कौन से शब्दों पर सबसे ज्यादा खोज हो रही है तो आप पायेंगे कि वे ज्योतिष (Astrology), हस्तविद्या (Palmistry), अंक विद्या (Numerology) से संबन्धित शब्द हैं या सेक्स से संबन्धित। शायद सबसे ज्यादा देखी गयी चिट्ठियां, इन्ही शब्दों का प्रयोग कर देखी गयी हैं।


मेरे लेख चिट्ठे में कोई नयी चिट्ठी नहीं रहती। जो चिट्ठियां मैं इस चिट्ठे (उन्मुक्त) में कड़ियों में लिखता हूं, उसे बाद में समायोजित कर लेख चिट्ठे पर रखता हूं। लेख चिट्ठे पर सबसे ज्यादा, १३३ बार, लोग १० जुलाई २००८ को आये। यह लोग सर्च करके ही आये थे। इसमें १०७ लोगों ने 'ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके' चिट्ठी को देखा और ९४ लोग ज्योतिष या हस्तविद्या संबन्धित शब्दों को सर्च कर आये थे। इस चिट्ठी को अभी तक ७१६४ बार पढ़ा गया है। सच तो यह है कि इस चिट्ठे पर यदि कोई नयी चिट्ठी भी पोस्ट होती है तब भी इतने लोग नयी चिट्ठी को पढ़ने नहीं आते हैं।

'ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके' चिट्ठी पढ़ने के बाद कुछ पाठक अपना भविष्य जानने के लिये मुझसे सवाल पूछते हैं, कुछ मुझसे ज्योतिष सीखना चाहते हैं तो कुछ यह भी कहते हैं,
'आप जैसे ही [उन्मुक्त की तरह] लोगों की वजह से क्या हमारा विज्ञान पीछे नहीं हो गया है।'
मेरे विचार में
'शुरू के ज्योतिषाचार्य एक उत्तम खगोलशात्री थे, वैज्ञानिक थे। वे तब तक वैज्ञानिक थे जब तक वे तारों की गति, स्थिति के बारे में ज्ञानार्जन करते थे। इससे, हमारे जीवन में कोई असर नहीं होता - यह अन्धविश्वास है, इसमें कोई सत्यता नहीं है। हां, जब कोई आपके बारे में बात करता है, या आपके कष्ट निवारण की बात करता है तो आपको अच्छा लगता है।
हमारा विज्ञान किसकी वजह से पीछे हुआ है यह समझने की बात है, बहस की जरूरत तो नहीं होनी चाहिये। मेरे जैसे विचार रखने वाले बहुत कम लोग हैं ज्यादातर लोग तो ज्योतिष को सच मानते हैं। यदि सच न भी माने तो भी अधिकतर लोग उसके अनुसार कार्य करते हैं।'


यह सब न केवल मुझे निराश करता है पर दुखी भी करता है। हां, मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर रोज लगभग ४ या ५ लोग बूरबाकी शब्द पर सर्च कर 'शून्य, जीरो और बूरबाकी' की चिट्ठी पढ़ने आते हैं यह न केवल मुझे हैरत में डालता है पर आशा कि किरण भी दिखायी देती की लोग हिन्दी में भी बूरबाकी के बारे में जानना चाहते हैं।


'उन्मुक्त जी, शीर्षक देख कर लगता तो लगता है कि आप अपने विचार बदल रहे हैं।'


मैं आजकल एक पुस्तक Jean-Claude Carrière की लिखी पुस्तक 'Please Mr. Einstein' पढ़ रहा हूं। इसमें भविष्य से एक युवती आ कर आईंस्टाइन का साक्षात्कार लेती है। यह एक काल्पनिक कहानी है पर किस्से और आईंस्टाइन जो बातें उसे बताते हैं, वे सच हैं। वे सब आईंस्टाइन से कहीं न कहीं जुड़ी हैं।


आईंस्टाइन उसे बताते हैं कि वे कोशिश करते हैं कि सारे पत्रों का जवाब दे सकें। उनके पास अक्सर ऐसे भी पत्र आते थे जिसमें लिखा होता था कि उनके द्वारा निकाले गये विज्ञान के सिद्धान्त गलत हैं उनका ऐसे पत्रों का जवाब होता था,
'I always say that they're right and thank them for their help. I tell them, thanks to them, I am going to revise my ideas on such and such subject. They usually leave me in peace after two or three exchanges. If I enter into the lease debate they'd reply, and our corresondence would never end.'
आप सही हैं ... मैं बदलाव कर रहा हूं ...

मुझे भी, बड़े व्यक्तियों से सीखना चाहिये।

इस चिट्ठी के पहले दो चित्र विकिपीडिया से हैं और उसी की शर्तों में हैं।

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(सुनने के लिये चिन्ह शीर्षक के बाद लगे चिन्ह ► पर चटका लगायें यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम अंग्रेजी में लिखा है वहां चटका लगायें।: Click on the symbol ► after the heading. This will take you to the page where file is. Click where 'Download' and there after name of the file is written.)
यह ऑडियो फइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप -
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  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में - सुन सकते हैं।
बताये गये चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले।

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Zemanta Pixie