Tuesday, November 21, 2006

ज्योतिष या अन्धविश्वास: ... टोने टुटके

ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके
पहली पोस्ट: भूमिका
दूसरी पोस्ट: तारे और ग्रह
तीसरी पोस्ट: प्राचीन भारत में खगोल शास्त्र
चौथी पोस्ट: यूरोप में खगोल शास्त्र
पांचवीं पोस्ट: Hair Musical हेर संगीत नाटक
छटी पोस्ट: पृथ्वी की गतियां
सातवीं पोस्ट: राशियां Signs of Zodiac
आठवीं पोस्ट: विषुव अयन (precession of equinoxes): हेयर संगीत नाटक के शीर्ष गीत का अर्थ
यह पोस्ट: ज्योतिष या अन्धविश्वास
अगली पोस्ट: अंक विद्या - डेमियन

सूरज और चन्द्रमा हमारे लिये में महत्वपूर्ण हैं। यदि सूरज नहीं होता तो हमारा जीवन ही नहीं शुरू होता। सूरज दिन में, और चन्द्रमा रात में रोशनी दिखाता है। सूरज और चन्द्रमा, समुद्र को भी प्रभावित करते हैं। ज्वार और भाटा इसी कारण होता है। समुद्री ज्वार-भाटा के साथ यह हवा को भी उसी तरह से प्रभावित कर, उसमें भी ज्वार भाटा उत्पन करते हैं। ज्वार-भाटा में किसी और ग्रह का भी असर होता होगा, पर वह नगण्य के बराबर है। इसके अलावा यह बात अप्रसांगिक है कि हमारा जन्म जिस समय हुआ था, उस समय
  • सूरज किस राशि में था, या
  • चन्द्रमा किस राशि पर था, या
  • कोई अन्य ग्रह किस राशि पर था।
इसका कोई सबूत नहीं है कि पैदा होने का समय या तिथि महत्वपूर्ण है। यह केवल अज्ञानता ही है।

हमारे पूर्वजों ने इन राशियों को याद करने के लिये स्वरूप दिया। पुराने समय के ज्योतिषाचार्य बहुत अच्छे खगोलशास्त्री थे। पर समय के बदलते उन्होंने यह कहना शुरू कर दिया कि किसी व्यक्ति के पैदा होने के समय सूरज जिस राशि पर होगा, उस आकृति के गुण उस व्यक्ति के होंगे। इसी हिसाब से उन्होंने राशि फल निकालना शुरू कर दिया। हालांकि इसका वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं है। यदि आप ज्योतिष को उसी के तर्क पर परखें, तो भी ज्योतिष गलत बैठती है।

मैंने इस विषय की आठवीं पोस्ट (विषुव अयन: हेयर संगीत नाटक के शीर्ष गीत का अर्थ) पर बताया था कि पृथ्वी की धुरी घूम रही है और २५,७०० साल में एक बार चक्कर लगाती है। इसलिये विषुव (equinox) का समय बदल रहा है, जिसे विषुव अयन (precession of equinoxes) कहते हैं। ज्योतिष/ खगोलशास्त्र के शुरु होने के समय, विषुव अप्रैल के माह में आता था, इसीलिये राशि चक्र मेष से शुरु होता है। अब यह मार्च के महीने में आ गया है यानी कि मीन राशि में आ गया है। यदि ज्योतिष का ही तर्क लगायें तो जो गुण ज्योतिषों ने मेष राशि में पैदा होने वाले लोगों को दिये थे वह अब मीन राशि में पैदा होने वाले व्यक्ति को दिये जाने चाहिये। यानी कि, हम सबका राशि फल एक राशि पहले का हो जाना चाहिये पर ज्योतिषाचार्य तो अभी भी वही गुण उसी राशि वालों को दे रहे हैं।

सच में हम बहुत सी बातो को उसे तर्क या विज्ञान से न समझकर उस पर अंध विश्वास करने लगते हैं, जिसमें ज्योतिष भी एक है। ज्योतिष या टोने टोटके में कोई अन्तर नहीं। यह एक ही बात के, अलग अलग रूप हैं। यही बात अंक विद्या और हस्तरेखा विद्या के लिये लागू होती है। यह दोनो, टोने टोटके के ही दूसरे रूप हैं। इनके बारे में अगली पोस्टों पर।


अन्य चिट्ठों पर क्या नया है इसे आप दाहिने तरफ साईड बार में, या नीचे देख सकते हैं।

6 comments:

  1. विषय ऐसा है की विस्तार से लिखा जाना चाहिए, वहीं आप संक्षेप से निपटा देते है. यह एक शिकायत है, बकि लेख व विषय दोनो ही उम्मदा हैं.

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  2. "..यदि ज्योतिष का ही तर्क लगायें तो जो गुण ज्योतिषों ने मेष राशि में पैदा होने वाले लोगों को दिये थे वह अब मीन राशि में पैदा होने वाले व्यक्ति को दिये जाने चाहिये। यानी कि, हम सबका राशि फल एक राशि पहले का हो जाना चाहिये पर ज्योतिषाचार्य तो अभी भी वही गुण उसी राशि वालों को दे रहे हैं।.."

    यह आपने मुझे एक नई, महत्वपूर्ण बात बताई. ज्योतिष पर से पर्दा उठने का एक और ठोस कारण.

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    1. भारतीय और पश्चिमी ज्‍योतिष में एक मूलभत अंतर है रविजी। वह यह कि पाश्‍चात्‍य गणनाएं सूर्य आधारित हैं और भारतीय गणनाएं चंद्रमा आधारित।

      भारतीय ज्‍योतिष करीब 63 साल में सूर्य के कोण में हो रहे एक डिग्री के बदलाव को दर्ज करता रहा है। ऐसे में जब भारतीय ज्‍योतिषी कहता है कि वर्तमान में सूर्य सिंह राशि में है तो वह सिंह राशि (जो आसमान में सिंह राशि के नक्षत्रों से मिलकर बनी है) में ही घूम रहा होता है, वहीं पाश्‍चात्‍य उसी समय सूर्य को कन्‍या राशि में बता रहे होते हैं।

      आपने सायन और निरयण शब्‍द सुने होंगे। ये करेक्‍शन ही सूर्य को सही स्थिति पर लेकर आते हैं... :)

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  3. rachana10:26 pm

    इस विषय पर आपकी सारी पोस्ट पढी.महत्वपूर्ण जानकारियों को सरल और संक्षिप्त ढंग से समझाने का
    बहुत धन्यवाद.

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  4. Very True. But it is a real difficult task to make the older generation understand. For example, my mother (and now after her, my wife too) would never doubt the Panditji who says that there is a "Mangal Ki Dasha" over my life!!

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  5. जीवन परिभाषा : मनुष्य अपने कार्यत्यों को अच्छी तरह से पालन करें और एक दुसरे के प्रति भ्ज्ञेद भाव न रखे न किसी से विश्चाश घात करे

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