Saturday, September 30, 2006

भूमिका - ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके

कुछ समय पहले नितिन जी ने 'क्या हम सुधरेंगे?' नाम की एक चिट्ठी पोस्ट की। इस पर रतना बहन ने भविष्यवाणी की, कि
'बहुत जल्दी मंज़िल की ओर बड़ रहे हैं।'
मनीष जी ने भी टिप्पणी की। संजय जी ने टिप्पणी तो नहीं की पर इसका जवाब क्यों न पीए चमत्कारी पानी? चिट्ठी पोस्ट कर के दिया। प्रतीक जी ने भी टिप्पणी कर के कहा कि,
'आपके प्रश्न का उत्तर नारद खोलते ही मिल गया। जब यह नया हिन्दी चिट्ठा देखा।'
इस चिट्ठे का नाम था - टोने टुटके।

मेरा भी मन था कि कुछ टिप्पणी करूं पर यह सोच कर कि मैं स्वतंत्र चिट्ठी पोस्ट करूंगा कुछ नहीं लिखा। मुन्ने की मां ने भी इस बारे में कुछ इशारा भी यहां पर किया था। टोने टुटके चिट्ठे पर बहुतों को आपत्ति रही और अन्त में यह बन्द हो गया। इसकी आखरी चिट्ठी सारे चिठ्ठाकार लोग नाराज थी। इस चिट्ठी पर सबने अपनी बात टिप्पणी करके कही। मैंने अपनी बात इस पर टिप्पणी कर के यह कही थी कि,

'सबको अपने विचार रखने कि स्वतंत्रता है, आपको भी। आपको यदि इन पर विशवास हो तो जरूर लिखें। यदि कोई नराज होता है तो गलत होता है।
हम सब (मेरा मतलब सब से है) बहुत सी बातों पर विशवास करते हैं जो कि टोने-टोटके जैसी है। ज्योतिष या हस्त रेखांये सब उसी श्रेणी मे हैं पर कोई अखबार नहीं है या पत्रिका नहीं है जो उसके कालम नहीं रखती हो। टीवी मे कभी न कभी हर चैनल इनका प्रयोग करते हैं। सारे शुभ कार्य सब इसी पर होते हैं।
हां कुछ खिलाफ लेख लिखने वालों को तो झेलना पड़ेगा। उनमे से मै भी एक हूं। एक लेख ज्योतिष और टोने टोटके पर लिखूंगा।'


मैं इस चिट्ठी का लिखना टालता रहा। इसके कई कारण रहे,

  • मुझे ज्योतिष या हस्तरेखाओं की विद्या का अच्छा ज्ञान नहीं है;
  • मैं ज्योतिष या हस्तरेखा विद्या पर विश्वास तो नहीं करता, पर कोई मेरे भविष्य के बारे में अच्छी बात बताये तो बहुत प्रेम से सुनता हूं, आखबारों में लिखी भविष्यवाणी भी पढ़ लेता हूं;
  • विद्यार्थी जीवन में मैने कई खास लोगों कि हस्त रेखायें पढ़ने का प्रयत्न किया, पर उनसे पूछने की हिम्मत नहीं पड़ी :-)
  • कई लोगों को मेरा लेख बिलकुल पसंद नहीं आयेगा और शायद वे उसी तरह से मुझसे क्रोधित हो जायें जैसे कि वे टोने टुटके के लेखक से हो गये।
मैंने इन सब के बावजूद भी इस लेख को लिखने की सोची। इसका एक खास कारण भी है। मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर मिश्रा जी ने यहां यह बताया था कि टोने टुटके वाले का चिट्ठा इतना सुन्दर क्यों है। उन्होने इस तरह से मेरे चिट्ठे पर टोने टुटके का शब्द प्रयोग किया। मेरे उन्मुक्त चिट्ठे पर अधिकतर लोग सर्च करके ही आते हैं और वे अक्सर टोने टुटके शब्द को सर्च कर रहे होते हैं। समीर जी ने 'टोने टुटके: नया ब्लौग: बाप रे बाप' नाम के चिट्ठे पर एक चिट्ठी पोस्ट कर कहा था कि
'मैं चक्कर मे था कि टोने ऎसे मिलें जिससे मालूम चले कि कैसे कुछ भी लिखो उसे अच्छा ही माना जाये, कैसे खुब टिप्पणियाँ बटोरो। कुछ नही मिला।'
मुझे लगा कि यदि टोने टुटके पर लिखूं तो यह लोगों को चिट्ठे पर लाने का एक कारगार तरीका हो सकता है, इसलिये हिम्मत करके यह सीरिस शुरु की है। यह कुछ लम्बी भी है इस लिये इसे निम्न क्रम में करेंगे।

  1. भूमिका (यह चिट्ठी)
  2. तारे और ग्रह
  3. प्राचीन भारत में खगोल शास्त्र
  4. प्राचीन युरोप में खगोल शास्त्र
  5. Hair Musical हेर संगीत नाटक
  6. पृथ्वी की गतियां
  7. राशियां (Signs of Zodiac)
  8. विषुव और विषुव-अयन (Equinox and Precession of Equinoxes)
  9. ज्योतिष
  10. कुम्भ राशि का समय
  11. अंक विद्या (Numerology)
  12. हस्तरेखा विद्या (Palmistry)
तो अगली बार हम लोग बात करेंगे - तारे और ग्रहों के बारे में।

ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके
पहली पोस्ट: भूमिका
दूसरी पोस्ट: तारे और ग्रह
तीसरी पोस्ट: प्राचीन भारत में खगोल शास्त्र
चौथी पोस्ट: यूरोप में खगोल शास्त्र
पांचवीं पोस्ट: Hair Musical हेर संगीत नाटक
छटी पोस्ट: पृथ्वी की गतियां
सातवीं पोस्ट: राशियां Signs of Zodiac
आठवीं पोस्ट: विषुव अयन (precession of equinoxes): हेयर संगीत नाटक के शीर्ष गीत का अर्थ
नवीं पोस्ट: ज्योतिष या अन्धविश्वास
दसवीं पोस्ट: अंक विद्या, डैमियन - शैतान का बच्चा
ग्यारवीं पोस्ट: अंक लिखने का इतिहास
बारवीं तथा अन्तिम पोस्ट: हस्तरेखा विद्या

अन्य चिट्ठों पर क्या नया है इसे आप दाहिने तरफ साईड बार में, या नीचे देख सकते हैं।

6 comments:

  1. संजय बेंगाणी12:58 pm

    चलिए फिर हमे भी इंतजार रहेगा इस श्रृंखला के अगामी लेखे का.

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  2. आपकी सारी श्रृंखलायें ज्ञानवर्धक होती है..हम भी प्रतीक्षा करेंगे!

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  3. प्रतीक्षारत हैं!

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  4. प्रतीक्षारत हैं।

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  5. अरे ये इतने साल से यहां चस्‍पा था, आज ही दिखा। कमाल हो गया। मैं सोचता हूं कि नेट पर कम से कम चिठ्ठाजगत को तो पहचनाता हूं, लेकिन यह फिर आश्‍चर्यचकित कर गया... :)


    शृंखला अब पढूंगा, आश्‍चर्य व्‍यक्‍त करने से खुद को रोक नहीं पाया :)

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    1. सिद्धार्थ जी, यह श्रृंखला यहां संकलित कर पूरी प्रकाशित है। आप चाहें तो इसे यहां पढ़ सकते हैं।

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आपके विचारों का स्वागत है।