Thursday, May 11, 2006

पहेली बाज ज़ज

मैने मार्टिन गार्डनर की पोस्ट पर पहेली बाज ज़ज के बारे मे बात की थी उनका किस्सा यह रहा है|

डैन ब्राउन ने 'द विन्सी कोड' (Da Vinci code) नाम की पुस्तक लिखी है तथा इसे रैन्डम हाउस ने छापी है| यह काल्पनिक कहानी है| लेखक के शब्दों में यह यहां है|

इसकी कहानी कुछ इस तरह की है कि यीशू मसीह ने शादी की थी तथा उनके वंशज भी हैं यह बात वेटिकन ने छिपा कर रखी है| एक संग्रहाध्यक्ष को यह मालुम था जिसका खून हो जाता है वह मरते समय लियोनार्दो द विन्सी के एक चित्र की आकृति बनाते हुये, फिबोनाकी सिरीस के नम्बरो के साथ संकेत के रूप में छोड़ जाता है| आगे क्या होता है यह जानने के लिये तो किताब पढ़नी पड़ेगी पर रैन्डम हाऊस के उपर इस किताब के पीछे एक मुकदमा दायर हो गया और हमें तो इसके फैसले से मतलब है|

कुछ साल एक और किताब 'द होली ब्लड ऐन्ड होली ग्रेल' तीन लेखकों ने छापी थी उसमें से दो ने रैन्डम हाउस के उपर एक मुकदमा यह कहते हुऐ दायर किया कि द विन्सी कोड की पुस्तक में उनकी किताब कि ने उनका सार ले लिया है इससे उनके बौधिक सम्पदा अधिकारों का हनन हुआ है| यह मुकदमा इंगलैंड मैं चला तथा न्यायमूर्ती पीटर स्मिथ ने इसे ७ अप्रैल २००६ को खारिज कर दिया| यह फैसला इस जगह पर है| इस मुकदमे मे कुछ शब्दों का एक अक्षर तिरछे (italics) में टाईप है| यह कुछ अजीब बात है| फैसले मे पूरे पूरे शब्द तो अकसर तिरछे में रहते हैं पर शब्दों का एक अक्षर तिरछे में - कभी नहीं| पहले तो लोगों ने यह समझा कि यह गलती है पर बाद मे यह लगा कि इसमे भी कोई रहस्य हो|

पहले नौ तिरछे अक्षरों को देखें तो वे smithcode हैं या इन्हे ठीक से रखें तो यह हो जाता है Smith code| जज़ साहब का नाम भी Smith है, इससे लगा कि कि वह भी 'द विन्सी कोड' (Da Vinci code) की तरह रहस्यमयी बात कहना चाहते हैं| लेकिन बाद के तिरछे अक्षरों का कोई मतलब नहीं निकल रहा था| जज़ साहब ने पहले तो अपने फैसले के बारे में कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया पर बाद में ईमेल से पुष्टि की कोई पहेली है फिर उन्होने किताब के उस पेज पर इशारा किया जहां पर फिबोनाकी सिरीस के नम्बर के नम्बर का जिक्र है और इन नम्बरों की सहायता से तिरछे अक्षरों का रहस्य खुला| वे सौ साल पहले नेवी के एडमिरल जैकी फिशर के बारे मे लोगों का ध्यान आर्कषित करना चाह रहे थे|

मैने अपने विश्वविद्यालय के सहपाठी ईकबाल, जो कि वकील है, से पूछा कि क्या कभी इतिहास मे पहले कभी किसी जज़ ने इस तरह से अपने फैसले मे पहेली बूझी है? उसका जवाब था कि शायद नहीं यह पहली बार हुआ है पर वह इस पर देख कर बतायेगा| उसने कहा कि वह इस समय अनूप के मुकदमे मे व्यस्त है|

अनूप भी मेरा विश्वविद्यालय का सहपाठी है और भारत सरकार की राजकीय सेवा में है| वह अपने समय का लड़कियों के बीच मे सबसे लोकप्रिय| हम सब उससे जलते थे क्योंकि विश्वविद्यालय मे सब लड़कियां उसी पर मरती थीं| वह किस मुकदमे मे फंस गया, यह अगली बार|

गूगल मे द विन्सी कोड क्वेस्ट जिस किताब के बारे में बात है तथा मिश्रा जी जिसकी बात यहां कर रहे हैं वह यही किताब है|

फिबोनाकी सिरीस १ नम्बर से शुरू होती है बाद के नम्बर पिछले दो नम्बर का जोड़ होते हैं| यानि कि सिरीस में नम्बर १, (०+१) =१, (१+१)=२, (१+२)=३, (२+३)=५, (३+५)=८, इत्यादि होते हैं| इनका प्रकृति से अपना सम्बन्ध है इसके बारे मे जानने के लिये यहां देखें|

यह सब आप कुछ विस्तारसे पढ़ना चाहें तो यह सब न्यू यौर्क टाईम्स के इस लेख में यहां है|

यदि आप इस पहेली का हल कुछ विस्तारसे पढ़ना चाहें तो न्यू यौर्क टाईम्स का यह लेख देखें|

डैन टेन्च वकील हैं तथा गार्जियन नाम के आखबार के लिये लिखते हैं उन्होने इसका हल निकाला और यदि आप उनही की भाषा में इसका हल पढ़ना चाहें तो वह यहां पर है|

यह क्या है?



इन्तज़ार करें इसके बारे मे पोस्ट का|

ऐसे यह तो है The Solution
क्या यह है Solutionकिसी पहेली का|
क्लिक कर के खुद ही देखे लीजये|

2 comments:

  1. राम चन्द्र मिश्र3:26 am

    धन्यवाद उन्मुक्त जी, लेकिन पता नही किसी ने प्रयास किया या नही, मुझे तो ये quest आसान बिल्कुल नही लगती, यदि आपने प्रयास किया हो तो अनुभव से अवगत करायें।

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  2. मैने गूगल क्वेस्ट को अभी सुल्झाने की कोशिश नहीं की, समय ही नहीं मिल पाया| मैं पहेलीबाज जज़ के लिये जब ईंटरनेट पर ढ़ूढ़ रहा था तब कुछ गूगल क्वेस्ट के बारे मे था मेरी टिप्पणी उसी पर आधारित थी| ईंटरनेट मे पढ़ने से यह भी लगा कि किताब पढ़ कर ही इसे कर पाना सम्भव होगा| कदाचित यह किताब का ही विज्ञापन है

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