Tuesday, June 06, 2006

रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन-५

मैने इस विषय पर पहली पोस्ट पर चर्चा की थी कि मै कैसे फाइनमेन के संसार से आबरू हुआ| दूसरी पोस्ट पर फाइनमेन के बचपन के बारे मे चर्चा हुई थी| तीसरी पोस्ट पर युवा फाइनमेन के बारे मे जाना| चौथी पोस्ट पर उनके कौरनल और कैल-टेक मे बिताये समय के बारे मे चर्चा हुइ थी इस बार बात करेंगे उनके व्यक्तित्व और चैलेंजर दुर्घटना क्यों हुई के जांच कमीशन मे उनकी भूमिका के बारे मे|

फाइनमेन के लिये अंग्रेजी - बेकार, और दर्शन शास्त्र - तिरस्कृत विषय था| Religion से उनका कोई वास्ता नहीं था|चक्करों पर बात करना उनकी फिज़ा में नहीं था। वह हमेशा सीधी बात करते थे| उनका मतलब वही होता था जो वे कहते थे| वे इस बात से भ्रमित हो जाते थे यदि उनकी सीधी बात दूसरे को परेशान कर देती थी।

फाइनमेन को लोग अलग अलग तरह से याद रखते हैं - कुछ लोग

  • उस लडके की तरह जो केवल सोच कर रेडियो ठीक करता था;
  • उस वैज्ञानिक की तरह से जो भौतिक शास्त्र की गणना टौपलेस रेस्तराँ में करना पसन्द करता था;
  • उस चंचल युवा के रूप में याद रखते हैं जो लौस एलमौस की लेबोरेटरी के तिजोरियों को खोल कर अलग अलग तरह के नोट लिखे कागज को रख कर, सेना के अधिकारियों को तंग करता था;
  • कुछ उन्हें बोंगों बजाने वाले की तरह याद करते हैं।

पर शायद सबसे ज्यादा लोग उन्हें उस तरह से याद करते हैं जिसने टीवी के सामने सार्वजनिक रूप से बताया कि चैलेंजर-दुर्घटना क्यों हुई |

28 जनवरी 1986 में चैलेंजर स्पेसशिप का विस्फोट आकाश में हो गया था इसकी जांच करने के लिये एक कमीशन बैठा । फाइनमेन उसमें वैज्ञानिक की हैसियत से थे । यह विस्फोट, स्पेसशिप में कुछ घटिया किस्म का सामान लगाने के कारण हुआ था| नासा का प्रशासन (जिस पर सेना का जोर है) इसे दबाना चाहता था पर वैज्ञानिक इसे उजागर करना चाहते थे । कमीशन ने अपने निष्कर्ष को टीवी के सामने सीधे प्रसारण मे बताना शुरू किया (इसमें घटिया किस्म के सामान लगाने की बात स्पष्ट नहीं थी )| उस समय टीवी पर ही, सबके सामने फाइनमेन ने एकदम ठन्डे पानी के अन्दर घटिया सामान को डाल कर दिखाया कि वास्तव में विस्फोट क्यों हुआ था| यह सीधा प्रसारण था इसलिये फाइनमेन का प्रदर्शन रोका नहीं जा सका और यह दो मिनट की क्लिप कुछ घन्टो के अन्दर दुनिया की टीवी पर सबसे ज्यादा दिखायी जाने वाली न्यूस क्लिप बन गयी|

चैलेंजर दुर्घटना के बाद दिये गये उद्धरण का कार्टून – ज़ेन चिट्ठे से।

 
एक और किस्सा यह है|

फाइनमेन पैसाडीना में अक्सर वहीं के एक रेस्तराँ मे जाते थे, जहां पर टौपलेस परिवेषिकायें ( Waitress) रहती थीं| उस रेस्तराँ में वे उसके मालिक को भौतिक शास्त्र बताते थे और वह उन्हे चित्रकारी| एक बार पुलिस वालों को लगा कि उस रेस्तराँ में कुछ गड़बड़- सड़बड़ होता है और रेस्तराँ के मालिक पर अश्लीलता का मुकदमा चलाया। वास्तव में वहां पर इस तरह का कोई कार्य नहीं होता था। उस रेस्तराँ में कई प्रतिष्ठित व्यक्ति आते थे रेस्तराँ के मालिक ने उन सबसे गवाही देने की प्रार्थना की| सबने चुप्पे से कन्नी काट ली, पर फाइनमेन ने नहीं| उन्होंने रेस्तराँ मालिक के पक्ष में गवाही दी और अगले दिन अखबारों के पहले पन्ने पर सबसे मुख्य खबर के रूप में छपी ।

Caltech's Feyhman tells lewd case jury, he watched the girls while doing his equations

फाइनमेन की जीवन की घटनाओं के बारे में यदि कोई लिखने बैठे तो एक किताब भी पूरी न पड़े| शायद इसलिये फाइनमेन पर कई किताबें लिखी गयीं हैं|

  1. Surely You’re Joking, Mr. Feynman! by Richard Feynman & Ralph Leighton
  2. What Do You Care What Other People Think? by Richard Feynman & Ralph Leighton
  3. Richard Feynman-A life in Science’ by John Gribbin & Mary Gribbin;
  4. Tuva or Bust! by Ralph Leighton
  5. No Ordinary Genius: The Illustrated Richard Feynman; edited by Christopher Sykes
  6. Most of the Good stuff; edited by Laurie Brown & John Rigden
  7. Genius: Richard Feynman and Modern Physics by James Gleik
  8. The Beat of The Different Drum; by Jagdish Mehra
यह सब पढ़ने यो‍ग्य हैं पर इनमें से यदि आप एक किताब पढना चाहें तो यह वाली पढें
Richard Feynman-A life in Science’ by John Gribbin & Mary Gribbin

1यह किताबें भी वैसे ही खरीदी जा सकती हैं जैसे कि मैने मार्टिन गार्डनर की पुस्तकें की पोस्ट पर बताया है|

2 comments:

  1. नई नई बातों की जानकारी देने के लिए आपका धन्यवाद।

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  2. प्रथम दो पुस्तकें तो मैनें पढ़ी है और मेरी नज़र में तो वो बहुत ही अच्छी हैं। आपके लेखो की सारी जानकारी उनमें भी है तो मुझे लगता है कि बाकियों में रिपीटीशन होगा। पर ये मानना पड़ेगा कि फाईनमे थे बड़ी हस्ती और मेरा सारा आदर केवल नोबेल पुरस्कार पर ही नही टिका है (आखिर वो तो कईयों ने जीते हैं)!

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आपके विचारों का स्वागत है।