Monday, December 03, 2007

बर्लिन में भाषा की मुश्किल

बर्लिन में मुझे होटल में ठहरना था। वहां होटलों में चेक-इन का समय ३ बजे का होता है। मैं वहां १० बजे सुबह पहुंच गया था। उन्होंने सामान रखने की अनुमति दे दी पर कहा कि कमरा तीन बजे के बाद ही मिलेगा। मैं सामान रख कर बर्लिन घूमने निकल गया।

बर्लिन में ट्रेन, ट्राम, और बसें तीनो चलती हैं पर बस का सबसे ज्यादा प्रयोग होता है। शहर घूमने के लिए, कई एजेंसियां अपनी बस सेवा चलाती हैं। यह हॉप ऑन, हॉप ऑफ (Hop on, Hop Off) कहलाती हैं। आपको केवल एक बार टिकट लेना होता है। यह पूरे दिन के लिए वैध है। यह घूमने की जगह के पास रूकती हैं। आप किसी भी जगह उतरें और कहीं पर बैठ सकते हैं। दस मिनट बाद, वहां पर दूसरी बस आयेगी। बसों में हेडफोन है, जिससे सात भाषाओं में जगहों का वर्णन आता रहता है। इसमें अंग्रेजी
तो शामिल है पर हिन्दी नहीं है। मैंने सोचा था कि एक चक्कर बिना उतरे लूंगा फिर दूसरी बार जो जगह अच्छी लगेगी उस पर उतर कर देखूंगा। बीच में ही मुझे भूख लगने लगी। एक जगह मुझे बहुत सारे ढ़ाबे दिखाई पड़े, मैं वहीं उतर गया।

बाज़ार

ढ़ाबों में मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या खाऊं। मैं शाकाहारी हूं पर दूध, अण्डा, और मछली ले लेता हूं। मैंने भारत छोड़ते समय निश्चय किया था कि खाने से परहेज नहीं करूंगा, पर यह समझ में नहीं आ रहा था कि क्या खाना लूं। एक ढ़ाबे में, मैंने महिला से
बात की। उसने जर्मन भाषा में कुछ जवाब दिया। मैंने कहा,
'डाउच नाइन (जर्मन भाषा नहीं), इंगलिश याह (अंग्रजी हां)।'
वह बोली,
'डाउच नाइन अला...ला...ला....।'
मुझे लगा भूख से मरा रा रा...।

बर्लिन नगरपालिका की ईमारत

बगल के ढ़ाबे में अश्वेत लोग थे। वे अंग्रेजी अच्छी बोलते थे। मैंने उनसे कुछ शाकाहारी खाने के लिए कहा। उन्होंने मुझे चावल के साथ राजमां और सब्जियां दी, साथ में चटनी भी। खाना गर्म था, मजा आया। खाना खा कर मैं फिर बस में चढ़ गया।

बस में घूमते हुए हम उस क्षेत्र से भी गुजरे जहां पर दूतावास हैं। यहां भारतीय दूतावास भी देखा। यह लाल रंग की इमारत है। जिसके पत्थर राजस्थान से आये हैं। एक चक्कर पूरा करने में ही शाम हो गयी, दूसरा चक्कर लेने का न तो समय था, न ही हिम्मत। मैं वापस पैदल ही होटल की तरफ चल दिया, जो कि लगभग एक किलोमीटर दूर था।

मैं वापसी में रास्ता भटक गया। मुझे दो छोटी लड़कियां मिलीं। मैंने उन्हें नक्शा दिखाकर पूंछा कि मैं यहां कैसे जाऊं। वे अंग्रेजी नहीं समझती थीं पर उन्होंने मुस्करा कर इशारे में बताया और मैं उधर ही चल दिया। काफी दूर जाने के बाद भी जब होटल नहीं मिला तो घबरा गया। वहीं पर एक वृद्घ दंपत्ति दिखाई पड़े। वे भी अंग्रेजी नहीं
समझते थे। मैंने उनसे पता पूछा तो वे मुस्करा कर बार बार कुछ इशारा करने लगे। कुछ देर बाद समझ में आया कि मेरा होटल दो इमारत के बाद था और वे उसके बोर्ड की तरफ इशारा कर रहे थे। मैंने उन्हे धन्यवाद दिया और कमरे में पहुंचा।

बर्लिन में एक चर्च जो द्वितीय विश्व युद्ध में बमबारी का शिकार रहा

कमरे के फ्रिज में, पानी या बीयर के दाम में कोई अंतर नहीं था। मैं शराब या बीयर नहीं पीता हूं पर पानी इतना मंहगा। बाथरूम से लेकर पानी नहीं पिया गया। ७ बज रहे थे। मैंने पिछली रात हवाई जहाज में काटी थी - थकान अलग लग रही थी, जल्द ही गहरी नींद में डूब गया।

मुझे बर्लिन में भाषा की मुश्किल पड़ी। अच्छा हुआ कि मैं कुछ जर्मन के शब्द सीख कर गया था नहीं तो और भी मुश्किल पड़ती।


बर्लिन-वियाना यात्रा
जर्मन भाषा।। ऑस्ट्रियन एयरलाइन।। बीएसएनएल अन्तरराष्ट्रीय सेवा - मुश्कलें।। बर्लिन में भाषा की मुश्किल

सांकेतिक शब्द
berlin, germany, german
Travel, Travel, travel and places,
travelogue, सैर सपाटा, सैर-सपाटा, यात्रा वृत्तांत, यात्रा-विवरण, यात्रा विवरण, यात्रा संस्मरण

9 comments:

  1. उन्मुक्त जी, वैसे जर्मन भाषा ज्यादा मुश्किल नहीं है। ज्यादा दिन रहना हो तो आप महीने- दो महीने में सीख सकते हैं। हालांकि जर्मनी के ही कोलोन शहर में दो साल रहने के बावजूद मुझे पूरी तरह सीखने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि जर्मन लोग अंग्रेजी में पूछने पर जवाब दे देते थे। हां, फ्रांस का अनुभव बहुत बुरा रहा था। फ्रासीसी अपने-आप को और अपनी भाषा को न जाने क्या समझते हैं?

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  2. Anonymous10:23 pm

    ye dekhiye, vaise to yahan blog par sab apni bhasha ko sthapit karne ki baat karte hain aur France ko english na janne ke liye gali de rahe hain.
    Vaise bhi kisi desh mein jaakar vahan ki bhasha seekhne a anand hi alag hai. Ye aapka apni bhasha ka gyan bhi bhdata hai aur aapki soch ko bhi.

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  3. पढ़ कर अच्छा लगा.

    और " वह बोली,
    'डाउच नाइन अला...ला...ला....।'
    मुझे लगा भूख से मरा रा रा...।
    :-)

    वैसे शाकाहारी का शब्द मालूम भी हो (शायद वेजीटारिश है) तो भी उनकी शाकाहारी की परिभाषा क्या है, इसमें भी फरक आ जाता है :-) हालांकि आप ने तो तय कर ही लिया था की परहेज़ नहीं करेंगे तो शायद ज्यादा फरक नहीं पड़ता, पर जो भी शाकाहारी पर ही रहना चाहते हैं, उनके लिए तो कोई indian restaurant ढून्ढ लेना ही उचित होगा, जो की ज्यादा मुश्किल नहीं - http://www.indiandinner.com kafi useful site hai shayad.

    i appreciate your article and your writing style very much.

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  4. मैं शाकाहारी हूं पर दूध, अण्डा, और मछली ले लेता हूं।
    कुछ समझ नही आया, जो माँसाहारी नहीं हैं और अण्डा तथा मछली नही खाते उन्हे क्या कहा जाता है, या कहना चाहिये :)

    सितम्बर मे एक सप्ताह के लिये जर्मनी मे था लीप्ज़िग और बर्लिन देखा,म्यूनिख मे हिन्दी चिट्ठाकार (ब्लॉगिया कहीं का) से भी मिले..अच्छा लगा था, समय मिला तो जल्दी ही लिखूँगा भी।

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  5. यात्रा वृतांत पढ़ कर मजा आया, आप भी सुनिल दीपकजी की राह पर है :)


    और शाकाहारी अण्डा, मछली खाता है? सही है. हम तो घास फूस ही खाते हैं. :)

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  6. विवरण रोचक लगा। लिखने का स्टाइल मस्त है।

    शाकाहारी की परिभाषा अच्छी लगी। :)

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  7. शुक्रिया बर्लिन के बारे में इस जानकारी का.. आश्चर्य हुआ कि ढाबे में आपको राजमा सब्जी मिल गए।

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  8. मछली कौन सी खाई ?यहाँ की रोहू तो मिली न होगी .

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  9. rachana5:21 pm

    मिश्रा जी की तरह मै भी चकित हूँ! शाकाहारी लोग मछली खा लेते हैं?

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आपके विचारों का स्वागत है।