Thursday, April 30, 2026

इतनी भी क्या जल्दी थी

 मेरे एक मित्र ने, नीचे का विडियो मुझे भेजा। इसने मुझे दो दशक पहले की एक घटना याद दिला दी। इस चिट्ठी में, उसी घटना का  जिक्र है।


यह विडियो मेरा नहीं है। इसमें ZeeAiArt लिखा है लगता है यह उन्हीं का द्वारा बनाया गया लगता है। इसमें उर्दू के प्रसिद्ध व्यंग्यकार और हास्य लेखक मुश्ताक़ अहमद यूसुफ़ी के द्वारा कुछ कहा गया है। यह उन दोनों के सौजन्य से है।

दो दशक पहले, मैं हवाई जहाज से यात्रा कर रहा था। मेरी सीट आगे वाली थी। बगल में, मेरे मित्र की भी सीट थी। बहुत दिनो के बाद, हमें बात करने का मौका मिला। उसे मालुम था कि मैं पुस्तकें पढ़ने का शौकीन हूं। उसने  पूछा कि उस समय मैं कौन सी पुस्तक पढ़ रहा हूं।

उसी समय मैंने, रामानुजन और हार्डी के बारे में, डेविड लैविट (David Leavitt) के द्वारा लिखी पुस्तक 'द  इंडियन क्लार्क' (The Indian Clerk) पढ़ी थी। इसकी चर्चा मैंने यहां की है। मैंने उसे इस पुस्तक के बारे में बताया। 
हमारी यात्रा लम्बी नहीं थी। शीघ्र ही समाप्त होने लगी।  जब हवाई जहाज नीचे आता है तब परिचायिकायें भी अपनी सीट पर बैठ जाती हैं। हवाई जहाज छोटा था। मेरे सामने, एक सुन्दर सी परिचायिका बैठ गयी। उसने बैठते कहा,

"आप लोग किस पुस्तक की बात कर रहे थे, क्या मुझे इसका नाम बता सकते हैं। मेरे पति पुस्तकों के शौकीन हैं। मैं यह पुस्तक उन्हे भेंट करना चाहूंगी।" 

 मैंने उसे उसका नाम बताया। उसने मुस्करा कर धन्यवाद कहा और पुस्तक का नाम लिख लिया।

मेरा मित्र छैल-छबीला है। हम लोगों के बीच वह कैसेनोवा की तरह जाना जाता है।  बाद में, हम लोग, जब बस पर बैठ कर हवाई अड्डे पर जाने लगे तब मेरे मित्र ने कहा,
"तुम्हें तो सुंदर महिलाओं से बात करना नहीं आता। तुमको उससे कहना चाहिये था कि तुम्हे नाम नहीं याद आ रहा है। यह कह उसका फोन नंबर लेना चाहिये था। फिर फुरसत में फोन कर बताना था।"
मैंने कहा मेैंने तो अपने जीवन में इतनी सुंदर महिला से बात नहीं की। जब वह बात करने लगी तब मैं घबरा गया। बात ही नहीं कर पा रहा था। लगा कि कब वह बात करना बन्द करेगी। इसलिये तुरन्त पुस्तक का नाम बताया। ताकि बात समाप्त हो। लेकिन तुमने क्यों नहीं कहा कि तुम पुस्तक का नाम बता सकते हो और यह कह कर उसका फोन नंबर ले लेते।

वह बोला, "पुस्तक का नाम बताने की, इतनी भी क्या जल्दी थी।"

जीवन की शाम कुछ भूले-बिसरे, किसी बात पर याद आ जाते है, गुदगुदा ही जाते हैं।

शुक्र है कि शुभा ने चिट्ठा लिखना और पढ़ना दोनो छोड़ दिया। नहीं तो, किसी अन्य महिला को खूबसूरत कहने पर मेरी खैर नहीं रहती।

About this post in English and Hindi-Roman
The video in the post reminded me about an incident that happened two decades ago. This post talks about it.
is chhitthi ke video ne do dashak phle kI ghatana kee yaad dila dI. Hindi (Devnagri) kee is chhitthi kI charcha hai.

सांकेतिक शब्द  
The Indian Clerk, David Leavitt,

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