कानून के विद्यार्थियों को सलाह
भूमिका और सबसे मुख्य बात।। अपनी भाषा सुधारें।। अच्छे संचार का मूलमंत्र - संक्षिप्त और मुद्दे पर बात करना।। संचार के लिये, विषय की स्पष्टता महत्वपूर्ण है।। फाइनमेन तकनीक क्या है।। पढ़ें, पढ़ें, और पढ़ते चलें।। इंटर्नशिप, संवाद, और नेटवर्किंग।। तकनीक, एआई, और आसिमोफ की कहानी से सबक।। मौज-मस्ती जरूरी है।।
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वकालत में आने वाले युवक – खासकर पहली पीढ़ी के वकील – मुझसे अक्सर पूछते हैं कि उन्हें कहां से वकालत शुरू करनी चाहिए: क्या उन्हें सीधे ऊपरी अदालतों से शुरू करना चाहिए, या न्यायिक पदानुक्रम के सबसे निचले पायदान से?
मेरा जवाब एक ही है, चाहे कोई पहली पीढ़ी का वकील हों या दूसरी या तीसरी पीढ़ी के वकील – सबको जिला न्यायालय से वकालत शुरू करना चाहिए। वहां मिला अनुभव न सिर्फ़ काम का ही नहीं होता – पर बुनियादी भी। जिला न्यायालय में वकीलों से रिश्ते बनाना भी जरूरी है, क्योंकि, जब आप ऊपरी अदालतों में करने की सोचते हैं और वहां वकालत करना शुरू करते हैं तब यही वकील आपको मुकदमें भेजेंगे।
मैं तीसरी पीढ़ी का वकील था, फिर भी मैंने निचली अदालतों में दो साल बिताए – एक साल बांदा में और दूसरा कानपुर में। वे साल बहुत कीमती साबित हुए। इसने मुझे ज़मीनी स्तर पर न्यायालय के काम को समझने में मदद की। इससे भी ज़रूरी बात यह है कि उन्होंने मुझे अच्छी तमीज़ और दोस्ती दिलाई जो मेरे बाद के वकालत के दिनो में बनी रही।
यदि आप संवैधानिक अदालतों में बहस करने की इच्छा रखते हैं पर इसके लिये जरूरी है कि बुनियादी स्तर पर न्याय कैसे दिया जाता है। जिस प्रकार, एक इमारत की ताकत उसकी नींव में होती है, उसी तरह एक वकील की भी। #AdviceLawAspirants #AdviceLawStudents #Advice #SelfImprovement #HindiBlogging

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