२०वीं शताब्दी के शुरु से, जून का तीसरा इतवार फादर्स् डे के रूप में मानाया जाता है। आज जून का तीसरा इतवार है। इस चिट्ठी में, कुछ बातें अपने पिता के बारे में।
Sunday, June 19, 2016
Tuesday, December 01, 2015
हम अकेले नहीं हैं
बीती बात को पीछे छोड़, जीवन को नयी परिस्थिति में पुनः ढालना ही जीना है। जीना इसी का नाम है। इसी की कुछ चर्चा इस चिट्ठी में।
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| खुशमय जीवन |
तुम्हारे बिना
।। 'चौधरी' ख़िताब - राजा अकबर ने दिया।। बलवन्त राजपूत विद्यालय आगरा के पहले प्रधानाचार्य।। मेरे बाबा - राजमाता की ज़बानी।। मेरे बाबा - विद्यार्थी जीवन और बांदा में वकालत।। बाबा, मेरे जहान में।। पुस्तकें पढ़ना औेर भेंट करना - सबसे उम्दा शौक़।। सबसे बड़े भगवान।। जब नेहरू जी और कलाम साहब ने टायर बदला।। मेरे नाना - राज बहादुर सिंह।। बसंत पंचमी - अम्मां, दद्दा की शादी।। अम्मां - मेरी यादों में।। दद्दा (मेरे पिता)।।My Father - Virendra Kumar Singh Chaudhary ।। नैनी सेन्ट्रल जेल और इमरजेन्सी की यादें।। RAJJU BHAIYA AS I KNEW HIM।। मां - हम अकेले नहीं हैं।। रक्षाबन्धन।। जीजी, शादी के पहले - बचपन की यादें ।। जीजी की बेटी श्वेता की आवाज में पिछली चिट्ठी का पॉडकास्ट।। चौधरी का चांद हो।। दिनेश कुमार सिंह उर्फ बावर्ची।। GOODBYE ARVIND।।Saturday, November 21, 2015
हीरा देने वालों का दिल भी हीरे जैसा
इस चिट्ठी में महारानी विक्टोरिया के एक प्रसंग और एक विज्ञापन से, तहज़ीब के बारे में चर्चा है।
| महारानी विक्टोरिया - चित्र विकिपीडिया से |
Friday, October 30, 2015
अलविदा फेसबुक
मैं अब फेसबुक पर नहीं हूं। अब केवल गूगल प्लस, ट्वीटर और चिट्ठों पर हूं। ऐसा क्यों है इसके बारे में, इस चिट्ठी चर्चा है।
Sunday, June 28, 2015
अब, मां को बताने पर शर्म कैसी।
इस चिट्टी में, अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के नवीनतम फैसले की चर्चा है जिससे समलैंगिक लोगों के बीच शादी को, कानूनी मान्यता दे दी गयी है।
Tuesday, January 20, 2015
‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ पुस्तक ने वकीलों का सम्मान बढ़ाया
मार्क गैलेन्टर ने अपनी पुस्तक 'लोवरिंग द बार - लॉयर जोकस् एन्ड लीगल कलचर' में ‘टु किल अ मॉकिंगबर्ड’ एवं इसके वकील हीरो एटिकस फिन्च के बारे में कुछ रोचक तथ्यों को लिखा है। इस चिट्ठी में उन्हीं तथ्यों की चर्चा है।
Saturday, November 29, 2014
यदि ब्रह्माण्ड जवाब है तो सवाल क्या था
इस श्रंखला की पहली कड़ी में, हिग्स बॉसौन की चर्चा थी। इसकी दूसरी कड़ी में चर्चा थी कि इसका नाम गॉड पार्टिकल क्यों पड़ा।
इस कड़ी में, १९८८ के
नोबल पुरस्कार विजेता लिऔन लेडरमैन एवं डिक टेरेसी की लिखी पुस्तक 'द गॉड
पार्टिकल – इफ यूनिवर्स इस द आन्सर, वॉट इस द क्वेस्चेन?' (The God
Particle: If the Universe Is the Answer, What Is the Question ?) की
समीक्षा है।
Saturday, November 22, 2014
हिग्स बॉसौन का नाम गॉड पार्टिकल क्यों पड़ा
| पीटर हिग्स - हिग्स बॉसौन की कल्पना करने वाले |
इस चिट्ठी में चर्चा है कि हिग्स बॉसौन को गॉड पार्टिकल क्यों कहा जाता है।
Sunday, November 16, 2014
मिल गया, मिल गया
इस श्रंखला में, हिग्स बॉसौन, इसका नाम गॉड पार्टिकल क्यों पड़ा और १९८८ के नोबल पुरस्कार विजेता लिऔन लेडरमैन एवं डिक टेरेसी की लिखी पुस्तक 'द गॉड पार्टिकल – इफ यूनिवर्स इस द आन्सर, वॉट इस द क्वेस्चेन?' (The God Particle: If the Universe Is the Answer, What Is the Question?) की चर्चा है।
इस चिट्ठी में चर्चा है कि हिग्स बॉसौन क्या है।
इस चिट्ठी में चर्चा है कि हिग्स बॉसौन क्या है।
| चित्र फोटोबकेट के सौजन्य से |
Monday, October 20, 2014
हम एक दूसरे के लिये प्रेरणादायक हैं
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