Saturday, May 27, 2006

सृष्टि का अन्त: नारद जी की छड़ी और शतरंज का जादू

इस विषय की पहली पोस्ट पर हम लोगों ने इस पर चर्चा करने का क्रम तय किया था और दूसरी पोस्ट पर मार्टिन गार्डनर की पुस्तकों के अलावा पहेलियों कि अन्य अच्छी पुस्तकों के बारे मे बात की। तीसरी पोस्ट पर शतरंज के जादू के बारे मे बात चीत की और इस बार देखते हैं कि सृष्टि का अन्त कब होगा।

गुणाकर मुले अपनी किताब मे सृष्टि का अन्त की कथा का वर्णन कुछ इस तरह से करते हैं। यह उन्ही के शब्दों मे,


सृष्टि का अन्त
कथा बहुत प्राचीन है । उस समय काशी में एक विशाल मन्दिर था । कहा जाता है कि ब्रम्हा ने जब इस संसार की रचना की, उसने इस मंदिर में हीरे की बनी हुई तीन छड़ें रखी और फिर इनमें से एक में छेद वाली सोने की ६४ तश्तरियां रखीं सबसे बड़ी सबसे नीचे और सबसे बड़ी सबसे ऊपर। फिर ब्रह्मा ने वहां पर एक पुजारी को नियुक्त किया। उसका काम था कि वह एक छड की तश्तरियां दूसरी छड़ में डालता जाए। इस काम के लिए वह तीसरी छड़ का सहारा ले सकता था परन्तु दो नियमों का पालन जरूरी था,
  • पुजारी एक समय केवल एक ही तश्तरी उठा सकता था; और 
  • छोटी तश्तरी के उपर बडी तश्तरी नहीं रखी जा सकती थी। 
इस विधि से जब सभी ६४ तश्तरियां एक छड से दूसरी छड़ में पहुंच जाएंगी, सृष्टि का अन्त हो जाएगा।

'उन्मुक्त जी, आप भी अच्छा मजाक कर लेते हैं। तब तो सृष्टि का अन्त हो जाना चाहिए था। ६४ तश्तरियों को एक छड़ से दूसरी छड़ में स्थानान्तरित करने में समय ही कितना लगता है!'

नहीं, यह 'ब्रह्म-कार्य' इतनी शीघ्र समाप्त नहीं हो सकता। मान लीजिए कि एक तश्तरी के बदलने में एक सेकेंड का समय लगता है। इसके माने यह हुआ कि एक घंटे में आप ३६०० तश्तरियां बदल लेंगे। इसी प्रकार एक दिन में आप लगभग १००,००० तश्तरियों और १० दिन में लगभग १,०००,००० तश्तरियां बदल लेंगे।

आप तो सोचते होंगे, 

'इतने परिवर्तनो में तो ६४ तश्तरियां निश्चित रूप से एक छड़ से दूसरी छड़ में पहुंच जाएगीं' 
लेकिन आपका अनुमान गलत है। उपरोक्त 'ब्रह्म-नियम' के अनुसार ६४ तश्‍तरियों को बदलने में पुजारी महाशय को कम से कम ५००,०००,०००,००० वर्ष लगेंगे।

इस बात पर शायद यकायक आप विश्वास न करें । परन्तु गणित के हिसाब से कुल परिवर्तनों की संख्या होती है, (२^६४)-१ अर्थात १८,४४६,७४४,०७३,७०९,५५१,६१५

आपने गौर किया कि यह वही नम्बर है जितने गेहूं के दाने राजा को देने थे। इसका हल भी गुणाकर मुले कि किताब मे है पर उसमे मुझे मजा नहीं आया। मै चाहूंगा कि हमारे चिठ्ठेकारों मे कोई इसके जवाब को तर्कसंगत ढ़ंग से रखे। अगली बार चर्चा करेंगे नारद जी की छड़ी पहेली के अन्य रूप।


नारद जी की छड़ी और शतरंज का जादू 

1 comment:

  1. राजीव1:24 am

    श्री उन्मुक्त जी,

    इस प्रश्न का कोई विशिष्ट तर्कसंगत हल तो मैं नहीं बता सकता परंतु
    (क) यदि कोई 2, 3 , 4, 5 आदि तश्तरियों का हल निकालें तो यह निष्कर्ष निकालेगा कि उपरिवर्णित गणना 2^n (जहां n तश्तरियों की संख्या है निकलेगा)
    (ख) दूसरा तरीका recursion द्वारा निकाला जा सकता है। जहां इस समस्या को 1+(n-1) तश्तरियों के रूप में हल कर सकते हैं ।

    और हां इससे सम्बन्धित हालिया रोचक प्रसंग मैंने आप को ई-मेल द्वारा बताया ही था जिसमें मैने भूलवश तश्तरियों की ग़लत संख्या को पहेली के रूप में प्रस्तुत कर शर्त हारने का ख़मियाज़ा भुगता है।

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