Friday, April 06, 2007

चर्च में राधा कृष्ण

गोवा के चर्च प्रसिद्ध हैं उनमे सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैंः बेसिलका ऑफ बॉम जीज़स और सर कैथ्रिडल। यह दोनो आमने सामने हैं बीच में सड़क है।

बेसिलका ऑफ बॉम जीज़स को बने हुऐ ५०० साल से ज्यादा हो गये हैं। इसमें फ्रांसिस ज़ेवियरस् का शव रखा हुआ है। इस चर्च में मोमबत्ती जलाने का रिवाज है। कहते हैं कि मन मुराद पुरी हो जाती। हम ने भी दस रुपये में पांच मोमबत्ती खरीदीं। चर्च के अन्दर का दृश्य बहुत भव्य था। चर्च के एक अलग बड़ा सा आंगन था मोमबत्ती वहीं एक जगह जलानी थी। मुन्ने की मां ने पूछा
'तुमने क्या मन्नत मांगी।'
मैंने कहा
'वही जो कि मैंने फतेहपुर सीकरी में मांगी थी।'
वह मेरे साथ फतेहपुर सीकरी नहीं गयी थी। उसने दूसरा सवाल पूछने से पहले, मेरे जवाब का अनुमान करते हुऐ कहा,
'यदि अब मैं तुमसे यह पूछूं कि तुमने फतेहपुर सीकरी में क्या मन्नत मांगी थी तो यह मत कहना कि जो तुमने यहां मांगी है।'
मुस्कराहट तो आ ही गयी।

कहा जाता है कि शाहंशाह अकबर को पुत्र नहीं था सूफी संत सलीम चिस्ती के आशिर्वाद से अकबर को तीन पुत्र रत्न प्राप्त हुऐ। उनके एक पुत्र का नाम, उन्हीं के नाम पर सलीम रखा गया। सलीम आगे चल कर जहांगीर के नाम से शाहंशाह बना। फतेहपुर सीकरी अकबर ने सूफी संत सलीम चिस्ती के सम्मान में बनवायी थी। यहां संत सलीम की कब्र भी है। इसी पर चादर चढ़ा कर, मन्नत मांगने की बात रहती है। अकबर ने अपने पुत्र पैदा होने के उपलक्ष में इसे बनवाया था। यहां तो अपने बच्चों के भले के अलावा कोई और क्या मांग सकता है। मैंने वही मांगा जो हम सब चाहते हैं।
'हे ईश्वर, हमारे बच्चों को संतोष, सुख, और शान्ति देना - हम दोनो से ज्यादा, चाहे वह थोड़ा ही ज्यादा क्यों न हो।'

हम लोग सड़क पार कर सर कैथ्रडल में भी गये। यह भी बहुत भव्य है। इसके बाहर का दृष्य हमारे गाईड के साथ यह रहा। गाईड ने बताया कि इस चर्च में कब्रिस्तान भी है। इसमें महत्वपूर्ण पुर्तगालियों की शव भी गड़े हैं। वहां एक चमत्कारी क्रौस भी है। किंवदन्तियों के अनुसार इसका आकार तब तक बढ़ता रहा जब तक ईसा मसीह स्वयं इसके ऊपर नहीं आ गये। इस क्रौस के ऊपर एक सफेद दुप्पटा पड़ा है जिसे ईसा मसीह का प्रतीक कहा जाता है।

क्रौस मुझे हमेशा त्याग का प्रतीक लगता है। मां तो त्याग का ही रूप होती है। क्रौस पर सफेद रंग का कपड़ा - जैसे किसी महिला ने सफेद साड़ी साड़ी का पल्लू ओढ़ रखा हो। अम्मां तो सधवा थीं पर मैंने हमेशा उन्हें सफेद सूती धोती में ही देखा। हम सब भाई बहन की शादी में भी। मेरे पिता यही चाहते थे। मुझे इसे देख कर बस अम्मां की याद आयी।

चर्च की इमारत से बाहर निकलते ही, उसी के आहाते में, दो छोटे सजे हुऐ बच्चे मिले। मैंने पूछा कि तुम क्या बने हो उन्होने कहा कि,
'हम राधा कृष्ण बने हैं।'
वहीं पर उन्होने मुझे एक भजन सुनाया और पोस देकर फोटो भी खिंचवायी। पर मुझे उनकी फीस देनी पड़ी - दोनो को आइसक्रीम खिलानी पड़ी।

चर्च के अन्दर मां मिली और बाहर राधा कृष्ण – यात्रा ही सफल हो गयी।

गोवा में आमदनी का मुख्य स्रोत पर्यटन है पर इसके अलावा भी वहां की मिट्ठी कुछ अलग गुल खिला रही है, यह अगली बार।

8 comments:

  1. गोवा की सैर कराने के किये , शुक्रिया, उनमुक्त जी।

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  2. सुन्दर वर्णन है, उन्मुक्त जी।

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  3. उन्मुक्त जी, गोवा दर्शन की रपट अच्छी लगी, लेकिन आपने जो ब्लागर प्रोफाइल में नई फोटो लगाई है वह पसंद नहीं आई।

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  4. संजय बेंगाणी9:29 am

    गोवा का वर्णन वगेरे सब सही है, यह बताएं यह चर्च के आगे चश्माधारी कौन है?

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  5. संजय जी
    चर्च के सामने वाला स्मार्ट सा दिखने वाला व्यक्ति हमारा गाईड है।

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  6. उनमुक्त जी बहुत शुक्रिया गोवा की लगातार सैर करवाने का।

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  7. दूर्गा, व्यक्ति और गोवा सबके बारे मे पढा...अच्छी जानकारी मिली..राधा कृष्ण बहुत प्यारे हैं!

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