Sunday, March 25, 2007

सुहाना सफर और यह मौसम हसीं

गोवा में दो नदियां हैं: मंडोवी और जुआरी। मंडोवी नदी पर शाम को बोट की सैर होती है। यह बोट हैं कि पूरे जहाज। लगभग २५० से ३०० व्यक्ति बैठ सकते हैं। इस पर रेस्तराँ बैन्ड सब कुछ रहता है। जो मन आये वह पीजिये, गाना सुनिये, नाच का मजा लीजये, खुद भी नाचिये, और सैर का आनन्द लीजये।

बोट पर हम लोगो ने, कुछ लोकगीत सुने और कुछ लोक नृत्य भी देखे। साथ के लोग भी नृत्य करने में उत्सुक थे। बैण्ड वाले भी बहुत चालाक थे अधिकतर नाच उसने सैर करने वालों से ही करवाये। इन नाचने वालों में राना दम्पत्ति भी थे। हमारी इनसे मुलाकात बोट पर हुई थी। पति इंडियन एयलाइंस में और पत्नी रिलाएंस रिटेल में काम करती हैं। यह बहुत अच्छा नाचते थे। बोट में कई डेक थे हम लोग बोट के सबसे
ऊपर के डेक पर चले गये। यहां कुछ ज्यादा पैसा देना पड़ता है। यहां पर कुछ कम लोग थे। थोडी देर राना दम्पत्ती भी वही आ गये। मैंने इनसे पूछा कि उन्होने नच बलिये प्रतियोगिता में भाग लिया है कि नहीं। उनके मना करने पर मेरी उनको सलाह थी कि वे भाग लें, उन्हें अवश्य पुरुस्कार मिलेगा। राना दम्पत्ति ने मेरे कहने पर कुछ खास पोस - टाईटैनिक स्टाईल में, और कुछ नाच में चित्र खींचने दिये।
'Hi, both of you dance well. Do participate in the next dance competition and I am sure that you will win a prize. Do let us know in advance, not only we but all Hindi bloggers will be there to cheer you.'

बोट से दृश्य बहुत सुन्दर था। दृश्य का आनन्द लेते हुऐ, जब नजर इधर उधर दौड़ायी तो देखा कि एक कोने एक दूसरा बहुत सुन्दर सा भारतीय जोड़ा खड़ा था। युवती के कपड़े एकदम नये युग के थे। वह पैरों से चिपकी हुई कप्री (capri) पैंट और स्पैगेटी टॉप (spagetti top)} पहने हुऐ थी। हम तो यही समझते हैं कि पैंट नाभी पर रहती थी, वहीं से पहनी जाती है। पर आजकल के लड़के लड़की इसे कमर के सबसे निचले भाग पर रखते हैं। इस युवती ने कप्री इसी तरह से पहन रखी थी। उसका स्पैगेटी टॉप, शायद उसे नूडल स्ट्रैप टॉप (noodle strap top) कहना ठीक होगा, काफी खुला हुआ था। वह नाक में नथनी, कान पर झुमके, माथे पर बिन्दिया, बहुत सारी चूड़ियां और पायल पहने हुऐ थी। चलने में छम-छम आवाज आती थी इसी लिये मैंने उसका नाम रखा छम्मक-छल्लो। मेरी और मुन्ने की मां से शर्त लगी। मेरा कहना था की यह छम-छम चूडियों से आ रही है इसका कहना था कि चूड़ियां और पायल दोनो से।

इस लड़की के चलने में भी एक स्टाईल था। वह कुछ अलग अलग पोस दे कर अपने साथी को रिझा रही थी। मैने उस युवती से पूछा,
'आप क्या बौलीवुड में मॉडल हैं?'
वह मुस्करायी और बोली
'यह आप क्यों कह रहें हैं?'
मैंने कहा,
'आप सुन्दर हैं, आप जिस तरह से चल रहीं हैं, जिस तरह से खड़ी हैं बस इसी के कारण लगा।'
वह फिर मुस्करायी और बोली,
'मैं तो मॉडल नहीं हूं पर मेरे माता पिता मॉडल थे।'
मैंने अपनी और मुन्ने की मां की शर्त के बारे में बताया। बताने की जरूरत नहीं कि वह मुन्ने की मां जीत गयी

युवती भारतीय मूल की इंगलैण्ड की नागरिक थी. उसका लालन पालन वहीं हुआ था। लड़का पंजाबी था और इंगलैंड पढ़ने गया था। जहां दोनो कि मुलाकात हुई और शादी कर ली। वह शादी के बाद पहली बार अपने ससुराल भारत आयी थी। इस समय लड़का डब्लिन, आयरलैन्ड में डॉमिनोस पीट्ज़ा कम्पनी में काम करता है। इसने बताया कि दुनिया में इसके पीट्ज़ा कम्पनी की सबसे ज्यादा ब्रांच हैं और वे पीट्ज़ा हट से अलग सिद्धान्त पर काम करते हैं। वे घर पर पीट्ज़ा आधे घन्टे में पहुचाने में विश्वास करते हैं यदि नहीं कर पाये तो कोई पैसे नहीं लेते हैं।
'Hi, smart ones. The next time, when I am at a place where I can order Domino's Pizza, I am going to have one.'

मुझे अगले दिन पता चला कि यह युगल दम्पत्ती हमारे ही होटेल में ही ठहरे थे। वे नाशता करके बाहर जा रहे थे तो हम नाशता करने जा रहे थे। युवती ने हमें देख कर हाथ हिलाया। उसकी चूड़ियां कनखने लगी मुझे लगा कि वह बताना चाहती है छम-छम चूड़ियों से है और शर्त मैंने जीती है न कि मुन्ने की मां ने। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गोवा में एक बहुत अच्छा ईम्पोरियम है। इसमें भारतवर्ष के सब कोने से समान रहता है। मुन्ने की मां ने जीत कि खुशी में वहां से पहले ही अपने लिये पशमीने का एक शॉल खरीद लिया था। मेरी जेब खाली हो चुकी थी।

आर्यन जी, मुझसे कई बार मैक कंप्यूटर के बारे में पूछ चुके हैं और मैं बता ही नहीं पा रहा हूं। मुझे इस बात की चिन्ता रहती है कि कैसे मैं उनको इसके बारे में बताऊं। गोवा में भी इस बारे में सोचता था। तो अगली बार हम बात करेंगे डैनियल और मैक कंप्यूटर की। जी हां, मस्ती में भी चिट्ठेकारिता का नशा सवार था।

'सुहाना सफर और यह मौसम हसीं' गीत यहां सुनिये।


गोवा
प्यार किया तो डरना क्या।। परशुराम की शानती।। रात नशीले है।। सुहाना सफर और यह मौसम हसीं।। डैनियल और मैक कंप्यूटर।। चर्च में राधा कृष्ण।। मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती।। न मांगू सोना, चांदी।। यह तो बताना भूल ही गया।। अंकल तो बच्चे हैं

यदी आप मुन्ने की मां के साथ जापान के अनुभव लेना चाहें तो यहां पढ़ सकते हैं और एक नये प्रयोग में भाग लेना चाहें तो यहां सुन सकते हैं।

5 comments:

  1. बहुत अच्छा विवरण।

    आपने गोवा की याद दिलवा दी, फिर से यादें ताजा हो गयी। मै शायद सबसे ज्यादा बार (लगभग १० या १२ बार)गोवा गया हूँ। पहले पहल, गोवा की इवंनिंग क्रूज ट्रिप काफी अच्छी रहती थी। सिर गोवन सांग्स रहते थे, डांसर पकड़ पकड़ कर लोगों को नचाते थे, खूब मस्ती रहती थी। पिछली ट्रिप पर देखा तो मस्ती मजा नदारद था, गोवन लोकगीतों का स्थान फूहड़ बॉलीवुड के गानो ने ले लिया था। लेकिन फिर भी यह एक अच्छा अनुभव होता है।

    गोवा मे आपको सबसे अच्छा बीज कौन सा लगा और क्यों?

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  2. बहुत अच्छा विवरण।

    आपने गोवा की याद दिलवा दी, फिर से यादें ताजा हो गयी। मै शायद सबसे ज्यादा बार (लगभग १० या १२ बार)गोवा गया हूँ। पहले पहल, गोवा की इवंनिंग क्रूज ट्रिप काफी अच्छी रहती थी। सिर गोवन सांग्स रहते थे, डांसर पकड़ पकड़ कर लोगों को नचाते थे, खूब मस्ती रहती थी। पिछली ट्रिप पर देखा तो मस्ती मजा नदारद था, गोवन लोकगीतों का स्थान फूहड़ बॉलीवुड के गानो ने ले लिया था। लेकिन फिर भी यह एक अच्छा अनुभव होता है।

    गोवा मे आपको सबसे अच्छा बीच कौन सा लगा और क्यों?

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  3. rachana6:14 pm

    गोवा मे नाव पर शाम की सैर बढिया अनुभव होता है..तमाम लोगों की फोटो लगा देते हैं आप!!आपकी और् दीदी की?

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  4. Anupama2:40 pm

    ab to mera bhi man karne laga goa jaane ka....

    aapka parichay dijiye....maine aapke comments apne blog main dekhe hain :)

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  5. जीतेन्द्र जी मैं बहुत पहले विद्यार्थी जीवन में गोवा गया था। यह मेरी दूसरी और मेरी पत्नी की पहली ट्रिप थी। हम लोग बहुत समय के लिये गोवा में नहीं थे। इसलिये सब बीच नहीं जा पाये। अधिकतर समय होटेल के बीच पर ही गुजारे। हम सब आपके गोवा ट्रिप के वर्णन का इंतजार कर रहे हैं।
    अनुपमा जी, रचना जी, मेरा परिचय और फोटो तो बस या मेरे चिट्ठे पर है या जो मुन्ने की मां ने भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर की चिट्टी पर दिया। सबकी अलग अलग तरह की मजबूरी हैं।

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आपके विचारों का स्वागत है।