Friday, January 18, 2008

बिटिया रानी, जैसी दुनिया चाहो, वैसा स्वयं बनो

पापा
मैं कुछ दिन पहले आपके चिट्ठे पर गयी थी। वहां पहुंच कर अपनी ई-मेल और आपका जवाब पढ़ कर, सुखद आश्चर्य हुआ।

हम सब क्रिसमस की छुट्ठियां में मुन्ने के पास कैलीफोर्निया में थे - काफी धमा-चौकड़ी रही। हम लोग कई जगह घूमने भी गये। एक बार हमारी मुलाकात कुछ युवकों से हुई जो अफ्रीका में शिक्षा के लिये पैसा इक्ट्ठा कर थे। उनके साथ बैनर पर महात्मा गांधी का यह उद्धरण लिखा था,

'You must be the change, you want to see in the World.'
जो परिवर्तन दुनिया में चाहो, वैसा स्वयं बनो।

हमें यह पढ़ कर अच्छा लगा। हमने उनसे बात भी की और चन्दा भी दिया।

आपकी
परी
 बिटिया रानी
महात्मा गांधी उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है जितना महत्व हम भारतीय उन्हें देते हैं। उनकी सबसे अच्छी बात थी कि वे जो कहते थे, जो उपदेश देते थे - उस पर सबसे पहले स्वयं अमल करते थे। यदि वे अहिंसा, खादी पर विश्वास करते थे तो उसे पहले अपने जीवन में अपनाया।

जो परिवर्तन दुनिया में चाहो, वैसा स्वयं बनो। दूसरे शब्दों में - जैसा समाज चाहो, वैसा स्वयं बनो।
यदि यह चाहते हो कि दुनिया में लोग एक दूसरे की सहायत करें तो पहले स्वयं दूसरे की सहायता करना शुरू करो। कितने संक्षिप्त में, कितनी महत्वपूर्ण बात। जीवन के दर्शन का निचोड़। यह बहुत छोटी पर महत्वपूर्ण बात है। इसे हम अक्सर भूल जाते हैं। दूसरे को उपदेश तो देते हैं पर जब, अपने ऊपर, अपने जीवन पर अमल करने की बात होती है तो इसे भूल जाते हैं।
मैं मुक्त सोर्स, मुक्त मानक पर काम इसी लिये करता हूं क्योंकि मैं चाहता हूं कि दुनिया में इसी पर काम हो।

मैं मुक्त सोर्स, मुक्त मानक पर काम इसी लिये करता हूं क्योंकि मैं चाहता हूं कि दुनिया में इसी पर काम हो। इसी लिये, मुश्किलों के बावजूद भी, इसी पर काम करना पसन्द करता हूं।

अब यह मत कहना कि मैंने फिर से उपदेश देना शुरू कर दिया। आज तो इसकी शुरुवात तुमने की।

अच्छे काम में सहायता करना उचित है। ऐसे लोगों को बढ़ावा देना चाहिये। अच्छा किया कि उनसे बात की और चन्दा दिया।

तुम्हें मालुम होगा कि कार्गिल युद्ध के समय मुन्ना पढ़ाई कर रहा था। उस समय उसने कसबे में, युवक एवं युवतियों की पैदल यात्रा का आयोजन किया था। इसमें वे कार्गिल विजय यात्रा के बैनर लेकर चल रहे थे। युवक, युवतियों को अपनी पैदल यात्रा किसी के सौजन्य से करनी थी पर शर्त यह थी कि कोई भी किसी से २० रुपये से ज्यादा नहीं ले सकता था। यह नहीं के बराबर पैसा है पर अच्छा काम था। लोग आगे आये और उसने इस तरह से इक्यावन हज़ार रुपये इक्ट्ठा कर, भारत सरकार को भेजे।


यह न केवल यह बताता है कि अच्छे काम से सब सहयोग करते हैं पर यह भी कि बूंद, बूंद सागर भरता है।

सबका ख्याल रखना।
पापा


गांधी जी का प्रिय भजन, जो मुझे भी बेहद प्रिय है और जिसे में अक्सर सुनता हूं उसे आप यहां सुन सकते हैं।



ई-पाती
ओपेन सोर्स की पाती - बिटिया के नाम।। पापा, क्या आप उलझन में हैं।। बिटिया रानी, जैसी दुनिया चाहो, वैसा स्वयं बनो।।

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यह पोस्ट नयी पीढ़ी के साथ जीवन शैली को समझने के बारे में है। यह हिन्दी (देवनागरी लिपि) में है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

yah post nayee peedheer ke sath jeevan shailee samjhane ke baare men hai. yah {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post is part understanding life style with coming generation. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.


सांकेतिक शब्द
Mahatma Gandhi, महात्मा गांधी,
culture, Family, life, Life, जीवन शैली, समाज, कैसे जियें, जीवन दर्शन, जी भर कर जियो,

7 comments:

  1. पिता और पुत्री की बातें और गांधी जी का भजन दोनों ही अच्छे लगे।

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  2. बिटिया रानी की पाती पढ़कर तो हमें भी सुखद आश्चर्य हुआ. बहुत प्यारी लेकिन गहरे भाव की बात कह गई और आपने भी अर्थपूर्ण जवाब दिया. सच है... जो परिवर्तन दुनिया में चाहते हैं, वैसा पहले स्वयं बने.

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  3. पिता पुत्री की बातचीत बहुत अच्छी लगी ।
    घुघूती बासूती

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  4. बजा फरमाया आपने ,गांधी एक दंतकथा बन गए हैं .हम उनके पासंग बराबर भी हो जायें तो बहुत है !

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  5. रचना9:40 am

    ----आपके पत्राचार द्वारा आपके मुन्ने और बिटिया के बारे मे जानकार अच्छा लगा...मुन्ने द्वारा किया काम हालांकि पुराना है फिर भी उन तक हमारा अभिनन्दन पहुँचाएँ..* पिछली पोस्ट मे जिस "प्यारी लडकी लीसा" का जिक्र किया है, उससे भी मिलवाएँ :)

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  6. thanks for this nice post!

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  7. unmukt ji aacha post hai. mujhe apne papa ki yaad aa gai

    saral lekin arthpurna bante hai

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आपके विचारों का स्वागत है।