Friday, August 07, 2026

आर य़ू अ नॉरमल जज - प्रकाशित हो गयी

यह चिट्ठी 'आर य़ू अ नॉरमल जज? – ऑन लॉ एण्ड अदर थिंगस' के बारे में है।

पुस्तक  'आर य़ू अ नॉरमल जज? – औन लॉ एण्ड अदर थिंगस''  (Are You a Normal Judge? – On Law and Other Things) प्रकाशित हो चुकी है।

यह अमेज़ॉन और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है। यहां एक वकील, जज, शिक्षक और सेवानिवृत्ति के बाद, पुनः वकील के तौर पर, पांच दशकों से ज़्यादा के अनुभव के आधार पर, न्यायालयों की कहानियां, ऐतिहासिक घटनाएं, न्यायपालिका पर विचार और इस सफ़र में सीखी गई बातें, साझा की गयी हैं। 

यह पुस्तक न केवल कानून के छात्रों, वकीलों और न्यायाधीशों के लिए है, बल्कि  कानून, न्याय और सार्वजनिक जीवन में रुचि रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए है।
इस पुस्तक में अनुभवों को, अगली पीढ़ी तक पहुचाने की कोशिश है।

इस पुस्तक का शीर्षक एक सवाल से प्रेरित है। यह सवाल कई साल पहले, एक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन में,  'ओपन सोर्स सॉफ़्टवेयर और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स' पर दिये गये व्यख्यान के बाद, चाय पीते समय, पूछा गया था।  

चाय पर, एक युवा महिला ने हिचकिचाते हुए पूछा: 

"सर, क्या आप एक समान्य जज हैं?"

स्पष्टीकरण पूछने पर, उसने घबराते हुए जवाब दिया कि वह जानना चाहती थी कि क्या जज आम तौर पर उस तरह के मामलों पर काम करते हैं जिनके बारे में मैंने उस दिन बात की थी, या फिर वे हथौड़ी (गैवल) पटकते हैं, "ऑर्डर! ऑर्डर!" चिल्लाते हैं और लोगों को मौत की सज़ा सुनाते हैं—जैसा कि अक्सर फ़िल्मों में दिखाया जाता है।

सालों बाद, वह सवाल पुस्तक का शीर्षक बना।

इस पु्स्तक से मिलने वाली रॉयल्टी, 'कृष्णा वीरेंद्र न्यास' को जाएगी। यह एक शैक्षिक परमार्थ का न्यास है।

आशा है यह पुस्तक, पाठकों को उपयोगी, कुछ सोचने पर मजबूर करने वाली और शायद, कभी-कभी, मुस्कुराने की वजह देने वाली लगेगी।

अगर आप यह पुस्तक पढ़ते हैं तो आपकी टिप्पणियों और फीडबैक की प्रतीक्षा रहेगी।

About this post in English and Hindi-Roman
This post is about a book 'Are You a Normal Judge? – On Law and Other Things'. 
is chhitthi mein 'Are You a Normal Judge? – On Law and Other Things' kI charcha hai.

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। Yatindra Singh,  Are You a Normal Judge? – On Law and Other Things
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