Thursday, October 01, 2026

बहस के पहले

बेंच में बदलाव

जस्टिस ऐएन रे 
यह 'हैबियस कॉर्पस केस के पच्चास साल: आपातकाल, सर्वोच्च न्याययालय और संविधान'श्रंखला की तीसरी चिट्ठी है। इसमें चर्चा है किसर्वोच्च न्यायालय में बेंच कैसे बदली गयी। 

हैबियस कॉर्पस केस के पच्चास साल:

आपातकाल, सर्वोच्च न्याययालय और संविधान

मैं इस केस में भागीदार कैसे हिस्सा बना।। न्यायालय के सामने क्या सवाल थे।। बहस के पहले - बेंच में बदलाव।। ।। ।। 

शुरुआत में, जस्टिस खन्ना बेंच का हिस्सा नहीं थे। पिछली बेंच में चीफ जस्टिस रे, जस्टिस बेग और तीन अन्य जूनियर जज शामिल थे। नज़रबंद लोगों के वकीलों को लगा कि अगर बेंच में सीनियर जज नहीं होंगे, तो वे केस हार सकते हैं।

जस्टिस एसआर दास 
सीनियर वकीलों के एक दल ने, जिसकी अगुवाई सीके दफ़्तरी कर रहे थे, चीफ जस्टिस रे से उनके चैंबर में मुलाकात की। उन्होंने मांग की कि इतने अहम और संवेदनशील मामले की सुनवाई के लिए बेंच में सीनियर जजों को शामिल किया जाए। इस अनुरोध से नाराज़ होकर, चीफ जस्टिस रे ने पूछा कि क्या वकीलों का ऐसा अनुरोध करना सही था। दफ़्तरी ने तुरंत जवाब दिया कि चीफ जस्टिस एसआर दास ने भी ऐसी मांग पर विचार किया था।

हितों के टकराव (conflict of interest) की वजह से जज खुद को मामलों से अलग करते रहे हैं; ऐसी मांगें भी उठती हैं, लेकिन यह पक्का नहीं है कि दफ़्तरी का बयान सही था या मौके पर दिखाई गई समझदारी थी। चीफ जस्टिस रे, जस्टिस दास के प्रशंसक थे। उन्होंने बेंच बदलकर अपने अलावा, चार सबसे सीनियर जज—जस्टिस एचआर खन्ना, जस्टिस एमएच बेग, जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़, जस्टिस पीएन भगवती—को बेंच में शामिल किया।

सीनियरिटी के हिसाब से जस्टिस खन्ना के बाद जस्टिस के.के. मैथ्यू का नंबर था, लेकिन उन्हें बेंच में शामिल नहीं किया गया क्योंकि वे जल्द ही रिटायर होने वाले थे।

 अगली पोस्ट में, हम सीके दफ़्तरी के घर पर हुई, कॉन्फ्रेंस के बारे में चर्चा करेंगे।

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