Wednesday, May 31, 2006

रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन-२

मैने पिछली बार चर्चा की थी कि मै कैसे फाइनमेन के संसार से आबरू हुआ| इस बार कुछ उनके बचपन के बारे मे
रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन, का जन्म ११ मई १९१८ में हुआ था और मृत्यु १९८८ में कैंसर से हो गयी। छुटपन में फाइनमेन अक्सर सोचा करते थे कि वह बडे होकर क्या बनें: विदूषक (Comedian), या वैज्ञानिक। बडे होकर उन्होंने इन दोनो रोलो को एक साथ बाखूबी निभाया| लोग कहते हैं कि वह इतने मशहूर क्यों हुये पर उनके बारे में वैज्ञानिक ठीक ही कहते हैं:
' फाइनमेन तो ऐतिहासिक व्यक्ति हैं उनको जितना सम्मान मिला वे उस सब के अधिकारी हैं ।'

फाइनमेन के पिता का बातों को बताने का अपना ही ढंग था| एक बार का किस्सा है कि पिता और पुत्र पार्क मे घूम रहे थे पिता ने एक चिड़िया की तरफ वह इशारा करके बताया कि यह चिड़िया दुनिया में अलग-अलग नामो से जानी जाती है। यह जरूरी नहीं है कि आप उन सब नामो को जाने, न ही महत्वपूर्ण है। पर महत्वपूर्ण यह है कि वह क्या और कैसे करती है। वे बच्चे के मन मे जिज्ञासा जगाने की कोशिश करते थे यह बताने की जरूरत नहीं है कि फाइनमेन बचपन से जिज्ञासु तथा कुतुहली थे।

फाइनमेन के पिता को आजकल के टीवी के क्विज प्रोग्रामो जैसे 'कौन बनेगा करोड़पति' से तुलना करें कितना अन्तर पायेंगे। इस तरह के क्विज प्रोग्राम तो केवल यह बताते हैं कि कौन कितना रट सकता है। आज के क्विज प्रोग्रामो से यह पता नहीं चलता कि कौन कितना अच्छा सोच सकता है, किसमे कितना बूता है और कौन विज्ञान की दुनिया को बदलने की ताकत रखता है|

फाइनमेन बचपन के दिनों में रेडियों ठीक किया करते थे| उस समय वाल्व रेडियो हुआ करते थे| उनके पड़ोसी का रेडियो में शुरू होने के थोड़ी देर बाद खरखराने लगता था| उसने फाइनमेन से रेडिये ठीक करने के लिये कहा| फाइनमेन रेडियो को छूने के बजाय वही बैठ कर सोचने लगे| उन्हे लगा कि गर्म होने पर बिजली का अवरोध बढ जाता है जिससे खरखराहट बढ जाती है और दो वाल्वों को एक दूसरे से बदलने में यह दूर हो सकती है| उसने ऐसे ही किया और खरखराहट बन्द हो गयी और तभी से कई लोग उन्हे उस लड़के की तरह से याद रखते हैं जो केवल सोच कर रेडियो ठीक किया करता था।

स्कूल में वह गणित में सबसे अच्छे और गणित टीम के हीरो थे| पर उन्होंने गणित को छोड़ दिया उन्हे लगा कि गणित मे उच्च शिक्षा प्राप्त करके वे दूसरों को गणित पढ़ाने के अलावा और कुछ नहीं कर सकते। वह कुछ व्यवहारिक करने का सोच कर, पहले इलेक्ट्रिकल इन्जीनियरिंग की तरफ गये पर बाद में भौतिक शास्त्र की पढ़ाई की| शायद यही ठीक था| यह बीसवीं शताब्दी थी: भौतिक शास्त्रियों की शताब्दी| इस शताब्दी मे यदि कोई विज्ञान की दुनिया को बदलने का दम रखता था तो भौतिक शास्त्र ही उसका विषय था| यह उसी तरह से जैसे इक्कीसवीं शताब्दी जीव शास्त्रियों की शताब्दी है। चलिये हम वापस फाइनमेन पर चलें और अगली बार कुछ युवा फाइनमेन के बारे मे बात करेंगे।

3 comments:

  1. शुक्रिया जी, बहुत अच्छी जानकारी दी है आपने।

    ReplyDelete
  2. Anonymous4:37 am

    श्री उन्मुक्त जी,

    Feynman जी के बारे में अच्छी जानकारी के लिये धन्यवाद।
    - वर्ष १९८८८ के स्थान पर सम्भवत: १९८८ होगा, कृपया स्पष्ट / सुधार करें ।

    - Comedian के लिये उपुक्त शब्द विदूषक है।


    अगले अंक की प्रतीक्षा में,

    सादर,

    राजीव

    ReplyDelete
  3. धन्यवाद, मैने ठीक कर लिया है|

    ReplyDelete

आपके विचारों का स्वागत है।