Thursday, January 22, 2026

मौज-मस्ती जरूरी है

सारांश: यह 'कानून के विद्यार्थियों को सलाह' श्रृंखला की आखिरी चिट्ठी है। इसमें उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण सलाह है।

बांये से: अनिल त्रिवेदी, नीरज कुमार और मैं - विश्वविद्यालय के दिनों की स्थायी दोस्ती - इलाहाबाद रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म १९७०

कानून के विद्यार्थियों को सलाह

भूमिका और सबसे मुख्य बात।। अपनी भाषा सुधारें।।  अच्छे संचार का मूलमंत्र - संक्षिप्त और मुद्दे पर बात करना।। संचार के लिये, विषय की स्पष्टता महत्वपूर्ण है।। फाइनमेन तकनीक क्या है।। पढ़ें, पढ़ें, और पढ़ते चलें।। इंटर्नशिप, संवाद, और नेटवर्किंग।। तकनीक, एआई, और आसिमोफ की कहानी से सबक।। मौज-मस्ती जरूरी है।। 

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आखिरी लेकिन महत्वपूर्ण बात—और शायद जीवन में सबसे महत्वपूर्ण सलाह है, आनंद लेना -बिना इसके जीवन बेकार है। जब आप कानूनी दुनिया में - या किसी अन्य पेशे में कदम रखते हैं - तब समय की ही, आपके पास हमेशा कमी रहेगी।

विद्यार्थी जीवन, अनमोल है। इसका उपयोग अच्छी आदतें विकसित करने, अपने व्यक्तित्व को आकार देने, मित्रता, संपर्क और नेटवर्क बनाने के लिए करें। ये जीवन भर आपकी मदद करेंगे।

वकालत के पेशे में सफलता को लेकर, चिंतित न हों। शायद वकालत ही एक ऐसा पेशा है जहां, यदि आप सफल होते हैं, तो आप मोतीलाल नेहरू बन जाते हैं; यदि आप असफल होते हैं, तो आप जवाहरलाल नेहरू बन जाते हैं; और यदि आप बीच में रह जाते हैं, तो आप मेरे जैसे एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश बन जाते हैं।

बायें से: नीरज मोहन लाल, प्रभु दयाल, अनुपम अग्रवाल और मैं - बचपन की स्थायी मित्रता - दिल्ली जिमखाना २०२०-२१ में कुछ समय

यदि मजाक को छोड़ दें और मैं अपना पेशेवर जीवन देखूं तो मैंने वकील के रूप में शुरुआत की, फिर जज बना और अब फिर वकील हूं। मेरे प्रारंभिक वर्ष आंतरिक आपातकाल के साथ मेल खाते थे, जिसके दौरान मैंने कई मामलों को नि:शुल्क किया। उस अवधि ने मुझे एक स्थायी सबक सिखाया: जीवन में पैसा ही सब कुछ नहीं है

आज मध्यस्थता में पैसे की कोई कमी नहीं है और मैं इलाहाबाद और छत्तीसगढ़ को छोड़कर सभी उच्च न्यायालयों में उपस्थित हो सकता हूं। फिर भी, मैं जानबूझकर कर इनमें नहीं पड़ता। शायद, अब कबीर के दोहों को बेहतर समझ पा रहा हूं:

गोधन, गजधन, बाजिधन और रत्न धन खान।
जब आवे संतोष धन, सब धन धूरि समान॥

मेरे पिता अक्सर कहा करते थे कि अगले जन्म में वह फिर से वकील ही बनना चुनेंगे। मैं एक समय वैज्ञानिक बनना चाहता था, लेकिन अब, मैं इतना निश्चित नहीं हूं।

आप सभी का जीवन खुशहाल रहे, सार्थक रहे ऐसा आप सबको आशिर्वाद। हम, जल्द ही, इस चिट्ठे पर किसी और यात्रा पर निकलेंगे।

बायें से: राज मांगलिक, राकेश बग्गा, प्रभु दयाल और मैं - बचपन की स्थायी दोस्ती - जनवरी २०१७ में दिल्ली के एक मॉल में
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