Wednesday, December 12, 2007

डबल हेलिक्स – जनन उत्पत्ति निर्देश रहस्य का पर्दाफाशः किताबी कोना

जेम्स वाटसन (James Dewey Watson) का जन्म १९२८ में शिकागो में हुआ था। उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय में प्राणिशास्त्र की पढ़ाई की और उसके बाद इंडियाना विश्वविद्यालय से पी.एच.डी. की डिग्री प्राप्त की। १९५० के दशक में, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (Cambridge University) में, फ्रांसिस क्रिक (Francis Crick) के साथ काम करते हुये, उन्होंने डी.एन.ए. {deoxyribonucleic acid (D.N.A.)} की बनावट का पता लगाया। इसके लिए वाटसन एवं क्रिक को १९६२ में नोबल पुरूस्कार मिला। नोबल कमेटी ने, पुरूस्कार देते समय, मॉरिस विल्किंस (Maurice Wilkins) के द्वारा, इस क्षेत्र में किये गये कार्य को सराहा और उन्हे भी, नोबल पुरूस्कार में, शामिल किया।

क्रिक का साक्षात्कार – सुनिये और देखिये:
उन्होंने और वाटसन ने, डी.एन.ए. बनावट का कैसे पता लगाया

D.N.A. की बनावट डबल हेलिक्स (Double helix) की तरह है। यह किस तरह से पता चला, इसी का वर्णन वाटसन ने 'द डबल हेलिक्स' (The Double helix) पुस्तक में लिखा है। यह पुस्तक, वाटसन के उस समय
की, आत्म जीवनी है। उन्होंने, इसमें तथ्य अपने हिसाब से लिखे हैं जिनकी वास्तविकता कुछ भिन्न हो सकती है पर इससे इस पुस्तक की रोचकता पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

खेल खेल में डी.एन.ऐ. के बारे में जानने के लिये यहां चटका लगायें

डी.एन.ए. की बनावट

वाटसन और क्रिक डी.एन.ए. के महत्व को जानते थे और यह भी जानते थे कि जो इसकी बनावट का पता लगायेगा उसे नोबल पुरस्कार मिलेगा। उस समय होड़ लगी थी कि कौन यह पहले कर लरगा। इस बात ने इस वर्णन को रोमांचकारी बना दिया था। इसका अपना प्रवाह है। इस पुस्तक को एक बार पढ़ना शुरू करने पर छोड़ने का मन नहीं करता है।

इस पुस्तक की सबसे अच्छी बात यह है कि इस पुस्तक को पढ़ने या समझने के लिये आपको प्राणिशास्त्र के ज्ञान की जरूरत नहीं है। यह इसके बिना भी आसानी से समझ में आती है।

वाटसन आजकल विवाद में फंस गये हैं। कुछ समय पहले, संडे टाइम्स के साथ साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि वे
'gloomy about prospect of Africa..............all over social policies are based on the fact that their intelligence is the same as ours .....where as all the testing says not really.'
अफ्रीका के भविष्य के बारे में चिन्तित हैं... सारी सामाजिक नीतियां इस पर आधारित हैं कि उनकी बुद्घि हमारे समान है... पर सारे टेस्ट इसके विपरीत हैं।

वाटसन और क्रिक कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में

वाटसन ने, इस कथन के लिये, माफी मांग ली लेकिन इस कथन के लिये,
  • उन्हें, कोल्ड स्प्रिंग हार्बर प्रयोगशाला (Cold Spring Harbour Laboratory, Long Island U.S.A.) से, कार्य-मुक्त कर दिया गया है।
  • उनका, साइंस म्यूज़ियम लंडन (Science Museum, London) में प्रस्तुतीकरण भी रद्द कर दिया गया है।
पर इसका यह अर्थ नहीं है कि यह पुस्तक पढ़ने योग्य नहीं। यह बेहद दिलचस्प पुस्तक है। इस पुस्तक ने विज्ञान की पुस्तकों का एक नया अध्याय खोला और लोगों में जीव रसायन के विषय पर दिलचस्पी पैदा की। यदि आपके मुन्ने या मुन्नी पढ़ रहे हैं तो उन्हें भेंट करे। आपने न पढ़ी हो तो पढ़ कर देखें।


सांकेतित शब्द
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पुस्तक के कवर के चित्र को छोड़ कर, सारे चित्र ग्नू स्वतंत्र अनुमति पत्र की शर्तों के अन्दर प्रकाशित हैं










यह पोस्ट जेम्स् वाटसन की लिखी पुस्तक डबल हेलिक्स की समीक्षा है। यह हिन्दी (देवनागरी लिपि) में है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

yah post james vatson ki likhee pustak double helix kee smeekshaa hai. yah hindee {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye dahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post is review of the book Double Helix by James Watson. It is in Hindi (Devnaagaree script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

3 comments:

  1. अच्छी है - 32-33 वर्ष पहले पढ़ी थी यह किताब।

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  2. आपने ठीक ही वाटसन की नस्लवादी टिप्पणी के उल्लेख के साथ इस पोस्ट को अद्यतन किया है ,किताब किसी थ्रिलर से कम नही है ,आपने उचित ही इसे पढ़ने की सिफारिश की है .मैंने तब् पढी थी जब मैं इलाहाबाद विस्वविद्यालय ....याद है कि इसमे वाटसन ने अपने जवानी के दिनों की मटरगस्तियों का भी जिक्र किया है ...जो यह बताता है कि महान व्यक्तिओं मे भी बहूत कुछ आम लोगों जैसा होता है ..पुस्तक की याद दिलाने के लिए धन्यवाद .

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  3. आपका पुस्तक परिचय हम सब के लिये उपयोगी सिद्ध हो रहा है

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आपके विचारों का स्वागत है।