Tuesday, July 21, 2009

भारतीय महिलाएं, साड़ी पहनकर छोटे-छोटे कदम लेती हैं

ताज गार्डन रिट्रीट कुमाराकॉम में मेरी मुलाकात कई लोगों से हुई। इस चिट्ठी में सिख और अंग्रेज दंपत्ति से मुलाकात और महिला सशक्तिकरण के एक दूसरे रुप की चर्चा है।


कुमाराकॉम में, हमारी मुलाकात एक सिख दंपत्ति से भी हुई। वे शिकागो में रहते हैं और अवकाश प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि वे दादा-दादी बन गये हैं और  भारत घूमने के लिए आये हुए हैं। सिख महिला ने बताया,
‘हम एल्लपी से आये हैं। यह सफर हमने कल रात नाव पर किया।  रात में नाव, झील के बीचो बीच रूक गयी थी। अगले दिन  मैं तो सुबह पांच बजे ही उठ गयी थी लेकिन नाव को चलाने वाले ६:३७ पर उठे। इसलिये चलने में देर हो गयी।'
मैंने उससे पूछा,  

‘उस समय कितने सेकेंड हुए थे।‘
पहले तो उस महिला को मज़ाक समझ में नहीं आया कि मैं यह क्यों पूछ रहा हूं। फिर वह समझ गयी कि उसने ६:३७ मिनट कहा था। इसलिए उससे सेकेंड के बारे में पूछा जा रहा है। वह मुस्कुरा कर बोली,

‘उस वक्त ४२ सेकण्ड हुये थे।‘
हमें लगा कि रात को नाव से चलना ज्यादा रोमांचकारी होता पर हम तो यात्रा शुरू कर चुके थे और अब उसमें बदलाव संभव नहीं था। 


यहां हमारी मुलाकात एक अंग्रेज दंपत्ति से भी हुई। अंग्रेज महिला ने सलवार, कुर्ता पहन रखा था। मैंने उस महिला से कहा कि वे सलवार, कुर्ता में बहुत ही सुन्दर लग रही है। उसने मुस्कुरा कर कहा,

‘मैं १९७२ से लगातार भारत आ रही हूं। यहां  इसी वेषभूषा को पहनना  सुविधाजनक है। आप दूसरे से अलग नहीं लगते और आप इसे पहनकर किसी भी मंदिर में आसानी से जा सकते हैं।‘
मैंने कहा कि क्या लोग आपको देखकर नहीं पहचान पाते हैं क्योंकि आप देखने में भारतीय  नहीं लगती हैं। उसने कहा,
‘ऐसी बात नहीं है। एक बार मैंने साड़ी पहनी थी। लोग मुझे कश्मीरी समझ गये थे। लेकिन जब मैं  चलने लगी तब वह समझ गये कि मैं भारतीय नहीं हूँ क्योंकि मुझे साड़ी पहनकर चलना नहीं आता है।  मैं लम्बे-लम्बे कदम रख रही थी जब कि भारतीय महिलाएं साड़ी पहनकर  छोटे-छोटे कदम लेती हैं।‘


उसके पति ने मुझे बताया कि वह एक एरिक्सन कम्पनी में इंजीनियर थे। अब वे अवकाश प्राप्त हो गये हैं। उन्हें भारत से प्रेम हैं इसलिए वे हर साल यहां आते है। मैं, उनसे   जीएसएम, सीडीएमए तकनीक और मोबाइल फोन के बारे में के बारे में बात करने लगा। थोड़ी देर बाद उनकी पत्नी ने अपने हाथों की हथेली को अजीब तरह से  खोलना और बंद करना शुरू कर दिया मेरी समझ में नही आया कि वह ऐसा क्यों कर रही हैं। लेकिन, उसे  देखकर उनके पति चुप हो गये। महिला ने बताया  कि,
‘हम लोग एक मस्ती के लिए भारत आये हैं इस समय कोई व्यापार या काम की बात नहीं की जा सकती है। जब मेरे पति व्यापार या काम सम्बन्धी बातें करना शुरू कर देते है तो मै उनको इस तरह से इशारा से मना करती हूं। जब इसके बाद भी वह नहीं मानते तब मैं उन्हें पैर से ठोकर देती हूं। तब उनके  समझ में आ जाता है कि इस तरह की बाते नहीं करनी है।‘
 उनके पति ने इसका प्रतिवाद किया,
‘मैं  कोई भी व्यापार या काम की बात नहीं कर रहा था हम तो केवल तकनीक के बारे में सूचना साझा कर रहे थे।‘
 लेकिन उन्होनें इस विषय पर बात करना बंद कर दिया। महिला सशक्तिकरण का एक रूप यह भी है। 

इस श्रंखला की अगली कड़ी में जब हम मिलेंगे तब बात करेंगे ऑस्ट्रेलिया से आयी दो महिलाओं की और महिला सशक्तिकरण के एक और रूप की।

कोचीन-कुमाराकॉम-त्रिवेन्दम यात्रा
क्या कहा, महिलायें वोट नहीं दे सकती थीं।। मैडम, दरवाजा जोर से नहीं बंद किया जाता।। हिन्दी चिट्ठकारों का तो खास ख्याल रखना होता है।। आप जितनी सुन्दर हैं उतनी ही सुन्दर आपके पैरों में लगी मेंहदी।। साइकलें, ठहरने वाले मेहमानो के लिये हैं।। पुरुष बच्चों को देखे - महिलाएं मौज मस्ती करें।। भारतीय महिलाएं, साड़ी पहनकर छोटे-छोटे कदम लेती हैं।।

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यात्रा विवरण और महिला अधिकार पर लेख चिट्ठे पर अन्य चिट्ठियां



About this post in Hindi-Roman and English

is chitthi mein, taj garden retreat hotel kumarakom mein sikh aur angrej dmpatti se mulaakaat aur  mahilasashktikarn ke doosare roop kee charcha hai. yeh hindi (devnaagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.


We met a Sikh and an English couple at  Taj Garden Retreat at Kumarakom. This post talks about them and different shade of women empowerment. This post talks about one of them. It is in Hindi (Devanagari script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.

सांकेतिक शब्द

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6 comments:

  1. सुंदर संस्मरण! कुछ सीखने को मिला।

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  2. देशाटन से कितनी सारी बातों का पता लग जाता है न उन्मुक्त जी जिन्हें हम अन्यथा न जान पाते !

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  3. बहुत अच्छा विवरण दिया आपने. परदेसियों से बात करने में मुझे भी बड़ा लुत्फ़ आता है.
    उन्मुक्त जी, चित्रों का आकार इतना छोटा क्यों रखते हैं ब्लौग पोस्ट में?

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  4. महिला सशक्तिकरण का एक रूप यह भी है।
    बहुत बढिया

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  5. इस रूप में तो भारतीय महिलाएं भी खूब सशक्त है :) :)

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