इस चिट्ठी में, महाबलिपुरम में हमारे गाइड लक्षमन की चर्चा है।
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| हमारे गाइड लक्षमन हमें समुद्र के किनारे स्थित मन्दिर घुमाते हुऐ |
पॉन्डिचेरी से लौटते समय हम लोग महाबलीपुरम देखने का कार्यक्रम बनाया। यहां पर ७ से ९वीं शताब्दि में पत्थरों पर बने हुऐ समारक चिन्ह हैं। इन्हें युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर का दर्जा दिया गया है। इन्हें दिखाने के लिये, हम लोगों ने गाइड लिया, जिसका नाम लक्ष्मण था। उसने हम लोगों से तीन जगहें दिखाने के लिए २५०/-रूपया लिये।
लक्षमन ने बताया,
'महाबलीपुरम में पत्थरों पर किया गया काम, पल्लव राजवंश के द्वारा किया गया है। पल्लवों की ईष्ट देवी काली हुआ करती थी। यह बली मांगती थी और इसीलिए इसका नाम महाबलीपुरम पड़ा।
यहां पर विदेशों से बहुत से पर्यटक आते हैं और सरकार को लगा कि महाबलीपुर शायद एक अच्छा नाम न हो। यहां पर पल्लव राजवंश के पहले राजा नरसिंह वर्मा थे। वे बहुत अच्छी कुश्ती करने वाले थे। इसीलिए इसका नाम मम्लापुरम कर दिया गया है।'
मैंने इस बारे में कुछ और जानने का प्रयत्न किया तो यह पता चला कि
- एक मिथक यह भी है कि इस जगह को महाबालि ने स्थापित किया इसलिये इसका नाम महाबालिपुरम पड़ा। हांलाकि, वहां पर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) के द्वारा मिली पुस्तक में, इस बात को नकार दिया गया है;
- पल्लव हिन्दू थे और समय की रस्म के अनुसार अश्वमेध (अथार्त अशवों की बलि) एवं अन्य वैदिक बलि, जैसा कि यजुरवेद में है, दिया करते थे।
लक्ष्मण ने बताया कि कुछ समय पहले, यहां एक व्यक्ति आया था जिसको कि उसने पांचो रथ दिखाये थे। उसके बाद उस व्यक्ति ने पूछा कि क्या आप मुझे पहचानते है। लक्ष्मण ने कहा,
'मैं तो नहीं पहचान पा रहा हूं पर आपका चेहरा कहीं देखा हुआ लगता है।'इस पर तब उसने कहा,
'मैं आमिर खांन हूं और यहां पर घूमने आया हूं'लक्ष्मण ने यह भी बताया कि उन्होंने उसको एक अंगूठी भी दी जिसके बीच में यानी आमिर खांन लिखा है। इस अंगूठी को उसने दिखाया।
लक्ष्मण ने बताया,
'फिल्म 'थ्री इडिऎट' के रिलीज़ होने पर, आमिर खान ने उन्हें और उनकी पत्नी को को बम्बई बुलाया था। आने जाने का टिकट का किराया भी दिया था और एक पांच स्टार होटल में ठहराया था। इसके बाद, सबके साथ, उन्होंने फिल्म भी देखी थी।'इस फिल्म के बारे में मैंने अपनी हिमाचल यात्रा में चायल पैलेस का जिक्र 'मेरे दिल में आज क्या है' नाम की कड़ी में चर्चा की थी, जहां इसका कुछ भाग फिल्माया गया था।
मैंने उनसे आमिर खांन के साथ चित्र दिखाने के बारे में बात की तो उनका कहना था चित्र नहीं है। इसलिए वह नहीं दिखा सकते हैं। लेकिन, यह बात सच लगती है क्योंकि जब मैंने इसके बारे में अन्तरजाल ढूंढ़ा तो कई जगह यह सूचना मिली कि आमिर खान थ्री इडिऎट का प्रचार करने के लिये कई जगह गये जिसमें एक जगह महाबलिपुरम भी थी जहां उनकी मुलाकात लक्षमन से हुई जो उन्हें नहीं पहचान पाये थे। आप भी इसे यहां पढ़ सकते हैं।
आज-तक का यह विडियो देखिये जिसमें यह खबर है।
अगली बार हम लोग, लक्षमन के साथ, पांच रथ मंदिर देखने चलेंगे।
मां की नगरी - पॉन्डेचेरी यात्रा
हो सकता है कि लैपटॉप के नीचे चाकू हो।। कोबरा मेरे हाथ पर लिपट गया।। घोड़ा डाक्टर, गायों और भैंसों की लात खाते थे।। पॉन्डेचेरी फ्रांसीसी कॉलोनी थी।। शाम सुहानी लग रही थी।। महिलाएं बेवकूफ़ बन रही हैं।। पैंतालिस मिनट में पांच हजार लोगों का खाना।। यह स्कूल अनूठा है।। शिव ने पार्वती को चूम लिया।। अरबिन्दो के संपर्क के आने से पहले, मां की शादी हो चुकी थी।। मातृमन्दिर, ऑरोविल की आत्मा है।। ऑरोविल की सबसे अच्छी बात - इसकी हरियाली।। हमें बहुत पैसा मिल रहा है।। मैं आमिर खान हूं।। यह गलत है कि हिन्दूओं ने मन्दिर नहीं तोड़े।। हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi
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