Wednesday, February 13, 2008

वेलेंटाइन दिवस, ओपेन सोर्स के साथ मनायें

कल वेलेंटाइन दिवस है। इसके लिये आज से ही तैयारी करें और इसे ओपेन सोर्स सॉफ्टवेयर के साथ मनायें।
'लगता है कि बुढ़ापे के साथ उन्मुक्त जी भी सटिया गये हैं। वेलेंटाइन डे बुढ्ढे लोगों के लिये नहीं है। यह दिन जवान दिलों के लिये है। यह तो, महिला या पुरुष मित्र के साथ बिताया जाता है। ओपेन सोर्स के साथ बिताने क्या मतलब - हुंः!'
अरे भाई मैं भी तो वही बात कर रहा हूं जो आप कह रहें हैं - दोनो में कोई अन्तर नहीं है। '
आप भी वही बात कर रहे हैं, अच्छा मज़ाक कर लेते हैं।'

मैं तो केवल इतना कहना चाहता हूं कि आप क्यों न, अपने प्रिय जन के पास, एक प्यारी सी कविता या गाना ऑडेसिटी पर रिकॉर्ड कर के भेजें या पॉडकास्ट करें।

अच्छा आप गा नहीं सकते हैं, कोई बात नहीं। क्यों नहीं ओपेन ऑफिस डाट ऑर्ग में उसके लिये प्यारी सी कविता लिखें। यह एम.एस. वर्ड के वर्ड प्रोसेसर से किसी तरह से कम नहीं है। यह doc फॉरमेट के कागज़ातों को न केवल खोल सकता है पर इसमें उन्हें सुरक्षित कर सकता है।

क्या कहा उसने एम.एस. वर्ड खरीद लिया है (भगवान ही आपका मालिक है - इसे व्यक्तिगत रूप से कोई नहीं खरीदता, केवल ... ही खरीदते हैं, सब ... का प्रयोग करते हैं)। बहुत अच्छी बात है हमेशा कानूनी काम करना चाहिये। उसके एम.एस. वर्ड में सन माइक्रोसिस्टम के द्वारा निकाला प्लग-इन डाल दीजिये ताकि वह ओपेन फॉरमैट के कागज़ातों को पढ़ सके। क्योंकि आने वाले समय पर यह सबसे महत्वपूर्ण फॉरमैट होगा।

आप कविता नहीं लिख सकते हैं तो उसके अगले प्रस्तुतिकरण को ओपेन ऑफिस डाट ऑर्ग के इम्प्रेस प्रोग्राम पर बना कर दें या इसी पर पिछली पिकनिक पर खींचे गये चित्रों का प्रस्तुतिकरण बना कर उसे दिखायें। इम्प्रेस प्रोग्राम किसी भी तरह से पॉवर पॉंइट से कम नहीं है। इसकी खास बात यह है कि यह प्रस्तुतिकरण को ppt फॉरमैट में भी सुरक्षित कर सकता है और इस फॉरमैट की फाइलों को दिखा सकता है।

क्या कहा प्रस्तुतिकरण बनाने में ज्यादा समय लगेगा और आप जल्दी में हैं। छोड़िये इसको - जिम्प पर उसके चित्र को संपादित करें। वह सबसे स्मार्ट और सुन्दर तो है ही (इस बात का खास ख्याल रखियेगा कि चित्र में उसका वजन दस किलो कम और कमर छः इंच पतली लगनी चाहिये)। यह चित्र बना कर उसे उपहार में दें।

अच्छा आप उसी के साथ रहना चाहते हैं और अलग से कुछ नहीं करना चाहते हैं। कोई बात नहीं, क्यों नहीं उसके साथ एमप्लेयर या फिर वी.एल.सी. मीडिया प्लेयर पर कोई बढ़िया सा गाना सुने या इसी पर कोई फिल्म देखें।

उसके कंप्यूटर पर कुछ करना चाहते हैं तो क्यों नहीं सनबर्ड ई-मैनेजर में उसके प्रिय जनों का जन्मदिन और शादी की सलागिरह डाल दें। ख्याल रहे उसमें आपका जन्मदिन अवश्य रहे ताकि वह उसे कभी न भूलने पाये। हां, आपके क्लास या ऑफिस में जो स्मार्टी है और देवानन्द लगता है उसका जन्मदिन तो आपको याद नहीं है। जाहिर है कि उसे आप कैसे डाल सकते हैं।

क्या कहा वह आपके पास नहीं है, बहुत दूर है। क्यों नही उसे थंडरबर्ड में एक प्यारी सी ई-मेल लिख भेजें।

ई-मेल तो हमेशा भेजते रहते हैं। इस दिन कुछ नया करना चाहते हैं। कोई मुश्किल नहीं - फायरफॉक्स पर अपना चिट्टा खोलिये और उसके लिये एक प्यारी सी चिट्ठी लिख डालिये।

मेरे लिये तो वह सबसे सुन्दर, सबसे प्यारी है

'उन्मुक्त जी, क्या लिखें?'
हूंहूंहूं ... यह तो मुश्किल सवाल है ... सोचता हूं। मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि क्या लिखना चाहिये। मेरे लिये तो वह सबसे सुन्दर, सबसे प्यारी है। हांलाकि कुछ नाटी है, कुछ मोटी है पर मैं कौन सा देवानन्द या फिर ग्रेगरी पेक हूं। मैं आपको यह क्यों बताऊं कि मैं मुकरी जैसा लगता हूं।

वेलेंटाइन दिवस पर महत्वपूर्ण सूचनायें
पहली सूचना: यह सारे प्रोग्राम विंडोज़ पर बहुत बढ़िया तरीके से चलते हैं और आपको इन्हें विंडोज़ में चलाने में कोई मुश्किल नहीं होगी।

दूसरी सूचना: आपको तो मालुम ही है न कि, 'लिनेक्स (ओपेन सोर्स) प्रेमी पुरुष ज्यादा कामुक और भावुक' होते हैं और महिलायें उन्हें पसन्द करती हैं। फिर भी, एहतियात बरतने में कोई हर्ज़ नहीं :-)


तीसरी सूचना: पुरुष अक्सर वैसा बर्ताव करते हैं जैसा कि नीचे दिखाये विडियो में मना किया गया है पर महिलायें बिलकुल चिन्ता न करें - ओपेन सोर्स प्रेमी तो ऐसा कर ही नहीं सकते।

यह लोग 'प्रकृति की गोद में तीन दिन' रहें या वहां 'उर्मिला की कहानी' पढ़ें पर बात 'ओपेन सोर्स सौफ्टवेर' या फिर 'लिनेक्स की कहानी' की ही करते हैं। ईसप की कहानियों में कुछ बदलाव कर उसे 'खरगोश, कछुवा और औपेन सोर्स' कर देते हैं। यह पागलपन तो यहां तक रहता है कि 'ओपेन सोर्स की पाती - बिटिया के नाम' लिख देते हैं। जब वह पूछती है कि 'पापा, क्या आप उलझन में हैं' तो यह बताने के बजाय उसे 'बिटिया रानी, जैसी दुनिया चाहो, वैसा स्वयं बनो' की सीख देने लग जाते हैं।

यदि इससे छुट्ठी मिली तो 'पहेलियां और मार्टिन गार्डनर' की बात कर पहेलियों की बेहतरीन पुस्तकों की चर्चा करने लगते हैं। उसी के साथ '२ की पॉवर के अंक, पहेलियां, और कमप्यूटर विज्ञान' में कमप्यूटर विज्ञान के मूलभूत सिद्धांतो को बताने लग जाते हैं। यह कहते तो हैं कि 'Oh Be A Fine Girl Kiss Me' पर इसका मतलब तो यह होता है कि 'ज्योतिष, अंक विद्या, हस्तरेखा विद्या, और टोने-टुटके' में कोई अन्तर नहीं, इनमें कोई तर्क नहीं है और यह तीनो केवल आपको ...।

इन लोगों को 'रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन' के अतिरिक्त कोई और वैज्ञानिक समझ में नहीं आता है। यदि आता है तो वे आपसे पूछते हैं कि, 'क्या आपके पास सोचने का समय नहीं है?' और उसी के साथ फाइनमेन के पत्रों की चर्चा करने बैठ जाते हैं।

जब कुछ नहीं मिलता है तो 'पेटेंट', 'पेटेंट और कंप्यूटर प्रोग्राम', और 'पेटेंट और पौधों की किस्में एवं जैविक भिन्नता' जैसे नीरस विषयों की व्याख्या करने लगते हैं। इन लोगों में देश-प्रेम भी है पर सारे विचारों को समन्वय कर बताते हैं कि 'वन्दे मातरम्' गाने का इतिहास क्या है और इसका गाना क्यों, अनिवार्य नहीं किया जा सकता है।

यह इतना भी नहीं जानते कि सही क्या है -'वीस्टा या विस्टा'? हांलाकि यह 'सर कटा देंगे पर झुकायेंगे नहीं'। इनके लिये 'Impossible is Nothing'.

यह लोग कभी कभी 'चार बराबर पांच, पांच बराबर चार, चार…' करने लग जाते हैं और इसका जवाब 'आईने, आईने, यह तो बता - दुनिया मे सबसे सुन्दर कौन' में देने लग जाते हैं। यह ‘यहां सेक्स पर बात करना वर्जित है' बताते हुऐ ' यौन शिक्षा जरूरी है' का भी नारा देते हैं। इन्हें नहीं मालुम की 'मां को दिल की बात कैसे बतायें' लेकिन बाद में 'मां को दिल की बात कैसे बतायी' भी समझाते हैं।

महिलाओं का वे आदर करते हैं उनके मुताबिक वे तो हैं 'आज की दुर्गा - महिला सशक्तिकरण' पर उनका खास जोर रहता है। मां की याद इन्हें रहती है चाहे वह बचपन की हों या फिर अन्तिम समय की

यह अपनी भावनाओं को उससे नहीं बताते जिसे इसका 'इन्तजार है'। इनके लिये तो 'प्यार को प्यार ही रहने दो, कोई नाम न दो' ही यथार्थ है। इनके न केवल 'बैठने की प्रिय जगह' अजीब होती हैं पर हरकतें भी। यह हरकतें न केवल 'अपने टौमी, अरे वही हमारा प्यारा डौगी' के लिये होती हैं पर सबके लिये।

ऐसे लोग अपनी मातृ भाषा से प्रेम करते हैं। 'अंतरजाल पर हिन्दी कैसे बढ़े' के लिये अलग, अलग तरह तरीके अपनाते हैं। हांलाकि कभी, कभी 'डकैती, चोरी या जोश या केवल नादानी' की बात कर, अपने प्रिय-जनो को दुखी कर देते हैं। यह बात दीगर है कि यह एहसास होते ही, माफी मांग लेते हैं चाहे बात 'पत्रकार बनाम चिट्ठाकार' की ही क्यों न हो। यह लोग सबको अपने जैसा ही समझते हैं पर जल्द ही समझ जाते हैं कि 'हमें आसान लगने वाली बात, अक्सर किसी और को मुश्किल लगती है'।

यह लोग फ्री या बीयर के बारे में कुछ इस तरह से बात करते हैं, 'Free as in free speech, not as in free beer.'

इनकी सबसे बड़ी मुश्किल है कि जब कोई इनसे इनके बारे में बात करना चाहता है तो यह कन्नी काट जाते हैं चाहे दूसरे को इसके लिये आपको 'भारतीय भाषाओं के चिट्ठे जगत की सैर' ही क्यों न करनी पड़े।

'उन्मुक्त जी, बन्द करिये अपनी बकबक - विडियो कहां है।'
लीजिये आप ही देख लीजिये कि वेलेंटाइन डे पर क्या नहीं करना चाहिये।



'
उन्मुक्त जी, क्या यह विडियो "खिड़की प्रेमी ठंडे और कठोर होते हैं?" वालों के लिये है?'
मुझे क्या मालुम कि यह विडियो किसके लिये। आप स्वयं इस विडियो बनाने वाली सुन्दर लड़की लीसा नोवा से ही क्यों नहीं पूछ लेते। मुझे क्यों तंग कर रहे हैं :-)

हां मुझे इंतज़ार रहेगा कि आप कैसे वैलेंटाइन दिवस मना रहे हैं या आपने इसे कैसे मनाया।

इस महीने मैं हिन्दी चिट्टाकारी में दो साल पूरा कर रहा हूं - मैंने सोचा वेलेंटाइन दिवस के जरिये आपको कुछ अपनी चिट्ठियों के बारे में बता दूं। इसी लिये इतना बोर किया :-)

इस चिट्ठी में प्रकाशित चित्र पर मेरा कॉपीराइट नहीं है। मैंने इसे यहां से लिया है और इन्हीं के सौजन्य से है। आप, इस चिट्ठे से बिना मुस्कराये वापस नहीं आ सकते।
The photograph published here is not mine. I have taken it from here and it is courtsey them. This website is funny and you can do nothing but smile.
Hi, I am using it for non profit purpose. Please do let me know if you have any objection. In that event, I will remove it.


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यह ऑडियो फइलें ogg फॉरमैट में है। इस फॉरमैट की फाईलों को आप -
  • Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
  • Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
  • Linux पर सभी प्रोग्रामो में - सुन सकते हैं।
बताये गये चिन्ह पर चटका लगायें या फिर डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों मे से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले।

इस चिट्ठी में विंडोज़ पर चलने वाले ओपेन सोर्स प्रोग्राम और मेरे द्वारा लिखे गये कुछ चिट्ठियों की चर्चा है। यह हिन्दी (देवनागरी लिपि) में है। इसे आप रोमन या किसी और भारतीय लिपि में पढ़ सकते हैं। इसके लिये दाहिने तरफ ऊपर के विज़िट को देखें।

is post men windows par chlane vale open source programme aur mere dvaraa likhee kuchh post kee charcha hai. yah {devanaagaree script (lipi)} me hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post talks about some popular open source programmes that run on Windows and some posts of mine. It is in Hindi (Devnagri script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.


5 comments:

  1. बाकी सब ठीक है वेलेंटाईन डे किसी के साथ भी मनाये चलेगा..पर पहले आप ये बताये कि आप फ़ुरसतिया जी से कब मिले और कितनी देर तक मुलाकात जारी रही ताकी हम पता लगा सके की ये छूत की बिमारी आपको (लंबे लेखन की) कब कैसे और कितनी देर लंबी मुलाकात मे लगी..ताकी बाकी ब्लोगरो को इससे सावधान किया जा सके..:)

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  2. बस मजा आ गया ,बड़े मन से लिखा है यह पोस्ट आपने - प्यारी स्टाईल मे,वैलेंटाइन दिवस की पूर्व संध्या पर पूरे मन से लिखा गया यह पोस्ट निश्चित ही अगले वैलेंटाइन तक याद रहेगा -
    लेकिन एक बात कहूं उन्मुक्त जी, उनके लिए जो हमेशा अपने को प्रेममे पाते हैं हर दिन वैलेंटाइन डे है बाकी लोगों को कोई भी जुगत शायद ही दिलासा दे सके .
    याद है शेक्सपियर ने क्या कहा था -चाहा हुआ प्यार अछा है पर अनचाहा मिल जाए तो फिर क्या बात है -मैं तो ऐसे ही किसी प्रेम की आस मे हूँ .और आप ??

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  3. मजा आ गया, एक ही पोस्ट में आपने सारी रचनाऐं समेट ली।

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  4. नया आइडिया मिला - पोस्ट लिखो और उसमें इन्द्रधनुष तानो पोस्टों का। बहुत अच्छा।

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  5. वाह उस्ताद मान गए आपको | बातों बातों में कुछ समझाना और अपना उल्लू सीधा करना तो कोई आपसे सीखे | :P
    ये चिट्ठा पढ़कर मज़ा आ गया |
    वैसे मेरे लिए तो हर रोज़ वैलेंटाइन दिवस है |

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आपके विचारों का स्वागत है।