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यह सच है कि चश्मदीद गवाह, न चाहते हुए भी, गलत बयान दे देते हैं या गलत व्यक्ति की शिनाख़्त कर देते हैं। लेकिन यह कहना गलत होगा कि वे उस समय झूठ बोल रहे होते हैं। क्योंकि, उनके मुताबिक वही सच है। लेकिन ऐसा क्यों होता है?
सैमुएल, अक्सर चश्मदीद गवाह के द्वारा आरोपी की शिनाख़्त किये जाने पर सवाल उठाया करते थे। उन्हें लगता था कि चश्मदीद गवाह गलत शिनाख़्त कर रहा है। एक बार, वे वकीलों के बीच इस विषय पर बोल रहे थे। वकीलों ने उनके इस कथन पर प्रश्न लगाया। सैमुएल ने उस वक्त कुछ नहीं कहा पर कुछ समय बाद उन्होंने लोगों से पूछा,
'आप लोगों में से, कौन से लोग कैमल सिगरेट पीते हैं।'
कैमल सिगरेट, अमेरिका की लोकप्रिय सिगरेट में से एक है। यह उसी तरह की सिग्रेट है जैसे कि पहले पनामा हुआ करती थी या आजकल विलस् फिल्टर होती है। बहुत से लोगों ने हाथ उठाया। सैमुएल ने उनमें उन पांच लोगों को चुना जो पिछले २० सालों से दो पैकेट कैमल सिगरेट पी रहे थे। सैमुएल ने फिर पूछा,
'आपने ७०० पैकेट प्रतिवर्ष और आज तक २४,००० पैकेट अर्थात कैमल पैकेट को आपने करीब ५ लाख बार देखा है।'
उन्होंने हामी भरी। सैमुएल ने, उन पांचों को एक कागज़ दिया फिर कहा,
'आप लोग अलग-अलग लिख कर दें कि कैमल सिगरेट के पैकेट के ऊपर आदमी का चित्र कहा है ऊंट के आगे है, पीछे है, या ऊपर है।'
कागज वापस मिलने के बाद, उसने उसे खोल कर, जोर से पढ़ा। दो ने लिख कर दिया कि आदमी का चित्र ऊंठ के आगे है दो ने कहा कि उसके ऊपर है एक ने कहा कि कोई भी आदमी का चित्र नहीं है।
सैमुएल ने लोगों से पैकेट निकाल कर देखने को कहा। पैकेट के ऊपर कोई भी आदमी का चित्र नहीं था। यानि की चार लोगों के जवाब गलत थे। सैमुएल ने बताया,
'यह इसलिये हुआ कि मैंने आपको यह सुझाव दिया था कि पैकेट पर आदमी का चित्र है। चश्मदीद गवाहों को इस तरह का सुझाव दिया जाता है। इसीलिये आपसे यह गलती हुई और चश्मदीद गवाह भी अक्सर गलत शिनाख़्त कर देते हैं।'
यही कारण है कि न्यायालय में पृच्छा (examination in chief) के समय, सूचक प्रश्न (leading question) पूछना मना है हालांकि प्रति पृच्छा (cross examination) के समय इस तरह के सवाल पूछे जा सकते हैं।
इस श्रृंखला की अगली कड़ी में बात करेंगे स्कॉटस्बॉरो बायॉज़ (Scottsboro boys trial) मुकदमे की। यह मुकदमा, अमेरिका में, २०वीं शताब्दी के संविधान एवं नागरिक अधिकारों के क्षेत्र में, सबसे जाना माना मुकदमा है। इसमें सैमुएल वकील थे। यह वही मुकदमा है जिसने हारपर ली को 'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' लिखने के लिये प्रेरित किया। क्या हुआ था इसमें? क्यों यह मुकदमा इतना प्रसिद्ध है? यह सब अगली बार।
इस चिट्ठी में चर्चा है कि हम पर्यावरण को बचाने में क्या सहयोग कर सकते हैं।
क्या आप कभी अपनी पत्नी का जन्मदिन और शादी की सालगिरह दोनो एक साथ भूलें है।यदि आपका जवाब हां में है तब शुभा का गुस्सा समझ सकते हैं।
मुझे पिछले साल काम के सिलसिले में बाहर रहना पड़ा - कुछ समय दिल्ली और कुछ समय भोपाल। न उसके जन्मदिन की याद रही, न ही शादी की सालगिरह की - यह दोनो आस-पास ही पड़ते हैं। जब याद आया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। लगा कि जब वापस कस्बे में पहुंचूंगा, तो खैर नहीं। सोचा, मनाने के लिये, भोपाल से कुछ ले चलूं।
'उन्मुक्त जी, हम तो समझे कि आप पर्यावरण के बारे में कुछ बता रहें हैं यहां तो कुछ और ही है - पत्नी को मनाया जा रहा है।'
भोपाल में सबसे अच्छा बजार नयी मार्केट है। वहां, मध्य प्रदेश सरकार निगम की दुकान मृगनयनी है। वहां पर, अच्छा समान वाजिब दामों में मिल जाता है। बस उसके लिये, कुछ लेने के लिये, वहीं पहुंच गया।
'लगता है कि उन्मुक्त जी, बढ़िया सा शीर्षक देकर, हम सब को झांसा दे रहे हैं। समझ गये, कुछ नहीं, बस टीआरपी का चक्कर है।'
मैंने मृगनयनी से, एक सूती चन्देरी की साड़ी, शादी की सालगिरह और सूती सलवार-कुर्ते का सेट उसके जन्मदिन के लिये लिया। सलवार-कुर्ते के सेट में तीन कपड़े थे। एक रंगीन सादा कपड़ा और दो वैजिटेबल रंग (vegetable dye) से चित्रकारी किये हुए कपड़े थे।
वहां पर एक प्यारी सी, युवती विक्रेता थी। मैंने उससे पूछा कि इसमें कौन सा कपड़ा क्या है। उसने एक को, दुपट्टा बताया फिर मुस्करा कर बोली,
'वैसे सादा रंगीन कपड़ा सलवार है। लेकिन आजकल फैशन के अनुसार आप जिसे चाहें सलवार बना ले, जिसे कुर्ता।'
यानि कि सादे रंगीन कपड़े को कुर्ता और चित्रकारी करे हुऐ कपड़े को सलवार। मैं कुछ उलझन में पड़ गया। इस पर उसने कहा,
'आप बिलकुल मत खबराइये आपकी पत्नी को सब मालूम होगा। वह सब समझ जाएगी।'
यह जानने के लिये कि क्या वह युवती सच कह रही थी या नहीं - मैंने अन्तरजाल में ढ़ूंढा। मुझे यहां से, फैशन पत्रिका का यह चित्र मिला। इसे देख कर तो लगता है कि सादे कपड़े का कुर्ता ज्यादा सुन्दर लगता है। हांलाकि शुभा के अनुसार यह इसलिये है कि मॉडल-युवती सुन्दर है।
'उंह हूं उन्मुक्त जी, इस चिट्ठी में पर्यावरण का जिक्र तो दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा है।'
वह युवती विक्रेता, जब इन कपड़ों को पैक करने लगी, तब मैं आश्चर्य से डूब गया। उसने समान को समाचार पत्रों के बने पैकेटों में पैक किया। उठाने के लिये, ऊपर सुतली लगी हुई थी। वह युवती समझदार थी समझ गयी कि मैं उन पैकेटों को देख कर आश्चर्य चकित हो रहा हूं। उसने बताया,
'अंकल, यह सब पर्यावरण को बचाने के लिये किया जा रहा है। हम प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करते हैं। इसलिये इस तरह के पैकेट प्रयोग करते हैं। इसके अलावा, इसके कई फायदे हैं।
हमने रद्दी समाचार पत्रों का फिर से प्रयोग कर लिया; और
यह पैकेट लघु उद्योग के द्वारा बनाये जा रहे हैं। इस कारण बहुत से लोगों को काम मिल रहा है।'
यह छोटा सा, पर सराहनीय कदम है। यह छोटे-छोटे कदम ही हमारी पृथ्वी मां को बचा सकेंगे। यह हमारी जिम्मेवारी है कि यह काम सुचारु रूप से हो। क्योंकि किसी ने सच कहा है कि,
‘We have not inherited this planet from our parents. But have merely borrowed it from our children’ यह पृथ्वी हमें अपने पूर्वजों से नहीं मिली है यह हमारे पास वशंजों की धरोहर है
यह हमारी जिम्मेवारी है कि हम वशंजों की धरोहर, उन्हें ठीक प्रकार से उन्हें वापस दे सकें। क्या आप जानना चाहते हैं कि आप इसमें किस तरह से सहयोग कर सकते हैं। बहुत कुछ – देखिये आप क्या कर सकते हैं:
आप समान ऐसे पैकेटों में खरीदिये जो फिर से प्रयोग हो सकें और उन्हें बार बार प्रयोग करें।
शॉपिंग पर अपना बैग ले जायें।
पेपर को बेकार न करें। दोनों तरफ प्रयोग करें।
हो सके तो, लिफाफों को फाड़ कर, अन्दर की तरफ सादी जगह को, लिखने के लिये प्रयोग करें।
सारे बेकार कागजों को पुनर्चक्रण (recycling) के लिये इकट्ठा करें।
प्लास्टिक के पैकेटों का कम प्रयोग करें। सब्जी, फल या मांस को सुरक्षित रखने के लिये प्लास्टिक की जरूरत नहीं।
उन उत्पादनों को लें, जो हर बार पुनः फिर से भरने वाले पैकटों में मिलते हों। यदि आपकी प्रिय वस्तु ऐसे पैकेटों में न आती हो तो कम्पनी को इस तरह के पैकेटों में बेचने के लिये लिखें।
खाने की वस्तुओं को हवा-बन्द बर्तनों में रखें। उन्हें चिपकती हुई प्लास्टिक में रखने की जरूरत नहीं।
पेट्रोल बचायें, प्रदूषण कम करें।
अपने सहयोगियों और पड़ोसियों के साथ कार पूल कर प्रयोग करने का प्रयत्न करें।
बिना बात बिजली का प्रयोग न करें - बत्ती की जरूरत न हो तो बन्द कर दें।
पेड़ों, जंगलों के कटने को रोके। इनके कटने के खिलाफ लोगों को जागरूक करें।
पुनरावर्तित (recycled) वस्तुओं का प्रयोग करें।
ऐसे बिजली के उपकरण प्रयोग करें जो कम बिजली खर्च करते हों। इस समय इस तरह के नये तकनीक पर बने बल्ब आ रहें हैं। उनका प्रयोग करें।
पर्यावरण-मित्रवत उत्पादकों (environment friendly products) का प्रयोग करें।
आप इन पन्द्रह बिन्दुओं में से, कितने बिन्दुओं का पालन करते हैं। मैं इसमें सब तो नहीं, पर अधिकतर का पालन करता हूं। मेरे साइकिल चलाने के बारे में तो आप जानते ही हैं और शायद कोपेनहेगन व्हील (Copenhagen Wheel) बहुत कुछ बदल दे।
इसी के साथ, इस साल को अलविदा। नया साल आपके लिये शुभ हो, मंगलमय हो। नये साल में आप ऊपर-लिखित १५ बिन्दुओं में से, अधिक से अधिक बिन्दुओं का प्रयोग करें - आखिरकार हमें पृथ्वी मां को, अपने बच्चों के लिये बचा कर रखना है। हिन्दी चिट्ठाजगत भी नये साल में, नयी ऊंचाईयों पर पहुंचे - ऐसी कामना, ऐसा विश्वास।
हिन्दी में नवीनतम पॉडकास्ट Latest podcast in Hindi
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क्या चश्मदीद गवाह, न चाहते हुए भी, गलत बयान दे देते हैं: ►
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सैमुएल लाइबोविट्ज़, २०वीं शताब्दी के दूसरे चतुर्थांश में अमेरिका के सबसे प्रसिद्ध वकील थे। 'बुलबुल मारने पर दोष लगता है' श्रृंखला की इस चिट्ठी में, चर्चा है कि उन्हें पहला मुकदमा कैसे मिला और उसमें क्या हुआ।
इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें।
यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। सुनने के लिये, दाहिने तरफ का विज़िट, 'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने' देखें।
सैमुएल की पृष्ठभूमि ऐसी नहीं थी कि उन्हें मुकदमे मिल सकें। एक बार कॉर्नेल विश्वविद्यालय में, जब कानून के डीन ने, उनसे, इस बारे में बात की तब सैमुएल का कहना था
'मैं पहले प्रसिद्व वकील बनूंगा। तब, बड़ी-बड़ी कम्पनियां मेरे पास मुकदमा कराने आयेंगी और मैं पैसे कमा सकूंगा।'
सैमुएल लाइबोविट्ज़ का यह चित्र लाइफ पत्रिका के सौजन्य से।
लेकिन जब सैमुएल वकील बन गये तब सबसे मुश्किल, उन्हें अपना पहला मुकदमा मिलने में हुई।
न्यायालय में जब आरोपी वकील नहीं कर पाते है तब न्यायालय उनके लिए वकील नियुक्त करता है। सैमुएल को भी अपना पहला मुकदमा इसी तरह मिला।
इस मुकदमें के आरोपी के ऊपर आरोप था कि उसने शराबखाने का ताला खोलकर, पैसे और शराब की चोरी की। उसी दिन सुबह, उसे शराब के नशे में धुत्त, पकड़ लिया गया। उसकी जेब में वह चाभी भी मिली जिससे उसने ताले को खोला था। पुलिस के सामने उसने अपना गुनाह कबूल करा लिया। अमेरिका में पुलिस के सामने दिया बयान न्यायालय में देखा जा सकता है हालांकि भारत में नहीं।
सैमुएल ने अपने मित्रों, सहयोगियों से इस संबन्ध में सलाह ली। उनका कहना था कि,
आरोपी को अपना दोष मान लेना चाहिए। क्योंकि सारे सबूत आरोपी के खिलाफ हैं।
दोष मान लेने पर सजा कम हो जायगी।
लेकिन सैमुएल को लगा कि यदि उसने अपने मुवक्किल से आरोप स्वीकार करवा दिया तब वह न तो प्रसिद्घ हो सकेगा, न ही पैसा कमा सकेगा। वह इस मुकदमे के उस पक्ष को देखने लगा, जिसकी तरफ कोई सोच भी नहीं सकता था।
कई रात, बिस्तर में लेटे-लेटे, सोचते-सोचते, उसे एक युक्ति समझ में आयी। यदि वह चल गयी तो जीत उसकी, नहीं तो आरोपी को सजा तो होनी ही थी। मुकदमा शुरू होने पर, अभियोजन के अधिवक्ता एवं न्यायाधीश को आश्चर्य हुआ, जब आरोपी ने आरोप स्वीकार नहीं किया।
अभियोजन का पक्ष समाप्त हो जाने के बाद, आरोपी ने गवाही दी कि उसने, पुलिस अत्याचार के कारण, आरोप स्वीकार कर लिया था।
अभियोजन का कथन था कि आरोपी ने चाभी से ताला खोलकर चोरी की है। सैमुएल ने न्यायालय के समक्ष बहस की,
'क्या सरकारी वकील ने यह स्वयं देखा है कि आरोपी के जेब से मिली चाभी से शराबघर का ताला खुल सकता था या नहीं। यदि नहीं तो, न्यायालय एवं जूरी चल कर देखें कि क्या इस चाभी से उस ताले को खोला जा सकता है। यदि ताला नहीं खुलता है तो उसके मुवक्किल पर चोरी का आरोप नहीं बनता है।'
यह सच था कि सरकारी वकील स्वयं इस बात की जांच नहीं की थी कि उस चाभी से ताला खोला जा सकता था अथवा नहीं। अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता को लगा कि यदि,
इस समय न्यायधीश, जूरी के सदस्य जा कर देखते हैं तो न्यायालय और जूरी का समय बरबाद होगा। इस तरह के अनगिनत मुकदमे लम्बित थे, उनका भी फैसला होना था।
ताला न खुला, तो सरकारी वकील की भद्द उड़ जायेगी।
यह सोचकर सरकारी वकील ने कहा कि उसे बहस नहीं करनी है। सैमुएल ने भी अपनी बहस समाप्त कर दी। यह बताने की जरूरत नहीं है कि जूरी को आरोपी को छोड़ने में कुछ भी समय नहीं लगा। हालांकि न्यायालय से बाहर निकलने के बाद जब सैमुएल ने उस चाभी से ताला खोलने का प्रयत्न किया तो उसने न्यायालय के सारे ताले खुल गये।
इस मुकदमे के बारे में अगले दिन अखबार में कुछ नहीं निकाला पर जेल में अन्य कैदियों, अधिवक्ताओं के बीच, यह बातचीत चलने लगी कि यह वकील कुछ ख़ास है। यहीं से, सैमुएल का सितारा, चमकना शुरू हो गया।
सैमुएल ने अपना पहला मुकदमा, रात में ही, बिस्तर पर सोचते सोचते जीत लिया था। उसने यह आदत, जीवन भर डाली। वह मुकदमा के शुरू होने से पहले ही सारे पक्षों के बारे में सोच लेता था। यही एक अच्छे वकील की निशानी है। वकील का वास्तविक जीवन, अर्ल स्टैनली गार्डनर के कल्पित वकील, पैरी मेसन की तरह नहीं, जो मुकदमें के दौरान ही सोचा करता था। हर सफल वकील मुकदमा शुरू होने के पहले ही, उसके सारे पहलुओं के बारे में सोच लेते हैं।
इस मुकदमें से, सैमुएल ने एक दूसरी बात यह सीखी, कि जूरी, पुलिस-अत्याचार के बारे में आसानी से विश्वास कर लेते हैं। इस बात ने भी, उसे अन्य मुकदमों सफलता दिलवायी।
क्या चश्मदीद गवाह, न चाहते हुऐ भी, आरोपी की गलत शिनाख्त कर देते हैं। इस बारे में, सैमुएल के क्या विचार हैं, यह अगली बार।
यह चिट्ठी ई-पाती श्रंखला की कड़ी है। यह श्रंखला, नयी पीढ़ी की जीवन शैली समझने, उनके साथ दूरी कम करने, और उन्हें जीवन मूल्यों को समझाने का प्रयत्न है। यदि लगन है, काम करने का ज़स्बा है तो सफलता कदम चूमेगी।
सैमुएल लाइबोविट्ज़, २०वीं शताब्दी के दूसरे चतुर्थांश में अमेरिका के सबसे प्रसिद्ध वकील थे। 'बुलबुल मारने पर दोष लगता है' श्रृंखला की इस चिट्ठी में, उनके जीवन पर लिखी पुस्तक 'कोर्टरूम' के बारे में चर्चा है।
'डार्विन, विकासवाद, और मज़हबी रोड़े' श्रृंखला की कड़ी 'यदि विकासवाद जीतता है तो ईसाइयत बाहर हो जायेगी' में, मैंने वकील क्लेरेन्स डैरो (Clarence Darrow) की चर्चा की थी। उनका जन्म १८ अप्रैल, १८५७ को हुआ था। उन्न्नीसवी शताब्दी के अंत होते होते वे अमेरिका के सबसे जाने माने वकील के रूप में स्थापित हो गये थे। उनका सितारा उदय हो चुका था। उसी समय एक अन्य वकील, सैमुएल लेबो (Samuel Lebeau) का जन्म १४ अगस्त १८९३ में रोमानिया में हुआ।
१८९७ में सैमुएल के पिता अमेरिका आ गये। वहां लोगों की सलाह पर सैमुएल के पिता ने अपने नाम का अमेरिकीकरण कर लिया—लेबो की जगह वे लाइबोविट्ज़ (Leibowitz) हो गये।
सैमुएल को विद्यार्थी जीवन में, वक्तृत्व (elocution) और वाद विवाद प्रतियोगिताएं (debate) बेहद पसन्द थे। इसमें, वे हमेशा आगे रहते थे। पिता के सुझाव पर सैमुएल ने वकील बनने की ठानी और कानून की शिक्षा कॉर्नेल विश्वविद्यालय से पूरी की।
बीसवीं शताब्दी के पहले चतुर्थांश के अन्त होते होते सैमुएल ने अपना नाम अमेरिका के जाने माने फौजदारी के वकील के रूप में स्थापित कर लिया। दूसरे चतुर्थांश में वे अमेरिका में फौजदारी के सबसे प्रसिद्व वकील हो गये। १९४१ में उन्होंने न्यायाधीश बनना स्वीकार कर लिया। न्यायधीश के रूप में वे जल्दी गुस्सा हो जाते थे। इसलिये वे बाद में कुछ विवादास्पद हो गये थे। उनकी मृत्यु ११ फरवरी, १९७८ में हो गयी।
सैमुएल लाइबोविट्ज़ एवं उनकी पत्नी अपने पौत्र के साथ खेलते हुऐ - चित्र लाइफ पत्रिका के इस सौजन्य से।
१९५० में, क्वेंटिन रिनॉल्डस् (Quentin Reynolds) ने सैमुएल की जीवनी, कोर्टरूम (Courtroom) नामक पुस्तक में लिखी है। यह वकीलों के द्वारा लिखी गयी आत्मकथा या उनकी बारे में लिखी जीवनियों में सबसे अच्छी लिखी पुस्तक है। यह पुस्तक न केवल हर वकील को, पर प्रत्येक व्यक्ति के पढ़ने योग्य है। बहुत से लोग, वकीलों के बारे में अच्छे विचार नहीं रखते हैं। यह पुस्तक उनके नजरिये को बदलेगी।
अगली बार बात करेंगे सैमुएल को पहला मुकदमा कैसे मिला और उसमें क्या हुआ।
इस चिट्ठी को आप सुन भी सकते है। सुनने के लिये यहां चटका लगायें। यह ऑडियो फाइल ogg फॉरमैट में है। इन फाइलों को आप सारे ऑपरेटिंग सिस्टम में, फायरफॉक्स ३.५ या उसके आगे के संस्करण में सुन सकते हैं। इन फॉरमैट की फाइलों को आप,
Windows पर कम से कम Audacity, MPlayer, VLC media player, एवं Winamp में;
Mac-OX पर कम से कम Audacity, Mplayer एवं VLC में; और
Linux पर सभी प्रोग्रामो में,
भी सुन सकते हैं। ऑडियो फाइल पर चटका लगायें। यह आपको इस फाइल के पेज पर ले जायगा। उसके बाद जहां Download और उसके बाद फाइल का नाम लिखा है वहां चटका लगायें। इन्हें डाउनलोड कर ऊपर बताये प्रोग्राम में सुने या इन प्रोग्रामों में से किसी एक को अपने कंप्यूटर में डिफॉल्ट में कर ले। इन्हें डिफॉल्ट करने के तरीके या फायरफॉक्स में सुनने के लिये मैंने यहां विस्तार से बताया है।
बुलबुल मारने पर दोष लगता है
भूमिका।। वकीलों की सबसे बेहतरीन जीवनी - कोर्टरूम।।
हार्पर ली (Harper Lee) का लिखा उपन्यास, 'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' (To Kill A Mockingbird), २०वीं शताब्दी के उत्कृष्ट अमेरिकन साहित्य में गिना जाना जाता है। 'बुलबुल मारने पर दोष लगता है' मेरी नयी श्रंखला है। यह, इस उपन्यास और उससे जुड़ी घटनाओं और कहानियों के बारे में है। यह चिट्ठी इस श्रंखला की भूमिका है।
इस चिट्ठी को आप यहां चटका लगा कर सुन सकते हैं। यह पॉडकास्ट ogg फॉरमैट में है। यदि सुनने में मुश्किल हो तो दाहिने तरफ का विज़िट,
'मेरे पॉडकास्ट बकबक पर नयी प्रविष्टियां, इसकी फीड, और इसे कैसे सुने'
देखें।
कुछ समय पहले, मेरी तबियत खराब हो जाने के बाद, मेरी बिटिया रानी और बेटे राजा ने कुछ पुस्तकें भिजवायीं थी। इनमें एक पुस्तक 'हू द हेल इज़ ओ ॑-हारा' (Who the Hell is O'Hara) है। इस पुस्तक में, दुनिया के ५० बेहतरीन लिखे उपन्यासों के बारे में लिखा है कि वे किस प्रकार से लिखे गये हैं। इसमें अधिकतर उपन्यास मेरे पढ़े हुऐ हैं या मैंने उनके बारे में सुना है। मुझे यह पुस्तक ही सबसे अच्छी लगी इसलिये इसे ही सबसे पहले पढ़ना शुरू किया। यह मुझे बेहद पसन्द आयी।
हार्पर ली (Harper Lee) का लिखा उपन्यास 'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' (To Kill A Mockingbird) २०वीं शताब्दी के उत्कृष्ट अमेरिकन साहित्य में गिना जाता है।
इस पुस्तक में लिखे उपन्यासों की कहानियों में से एक लेख, उपन्यास 'टु किल अ मॉकिंगबर्ड' (To Kill A Mockingbird) के बारे में है। इसे हार्पर ली (Harper Lee) ने लिखा है। यह उपन्यास २०वीं शताब्दी के उत्कृष्ट अमेरिकन साहित्य में गिना जाता है। मेरी बिटिया रानी के मुताबिक यह ऐसा उपन्यास है जिसे अमेरिका के कॉलेज जाने वाले प्रत्येक विद्यार्थी ने कम से कम एक बार पढ़ा है।
इस उपन्यास की कहानी १९३० दशक की है जो एक बहन, उसके भाई, और उनके मित्र की, अपने वकील पिता के यहां बड़े होने की कहानी है। यह एक बेहतरीन उपन्यास है जिसे पुलिट्ज़र पुरूस्कार (Pulitzer Prize) भी मिल चुका है। यह ४० भाषाओं में प्रकाशित हो चुका है। इसकी अभी तक ३ करोड़ प्रतिलिपियां बिक चुकी हैं।
इस उपन्यास पर एक फिल्म भी इसी नाम से बनी है, जिसे तीन ऑस्कर पुरस्कार मिले। ग्रेगरी पेक का जिक्र मैंने अपनी श्रंखला हमने जानी जमाने में रमती खुशबू की इस कड़ी में किया है। उन्हें इस फिल्म में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिये ऑस्कर पुरस्कार मिला है।
यह उपन्यास १९६० में लिखा गया था। १९५० दशक में रीडर्स् डाइजेस्ट की संघनित पुस्तकें (Reader's Digest Condensed Books) आनी शुरू हुईं। मेरे पास शायद यह सारी हैं। हम भाई बहन ने अपना बचपन यही पढ़ते गुजारा। मैंने यह उपन्यास इसी में, १९६० दशक के अन्तिम सालों, में पढ़ा था और उसी समय इस फिल्म को भी देखा था। यह श्रंखला पुनः रीडर्स् डाइजेस्ट के चयनित संस्करण (Reader's Digest Select Editions) नाम से आना शुरू की गयी हैं।।
वास्तविक जीवन में भी ली का बड़ा भाई और मित्र था। उसके पिता भी वकील थे। शादी के पहले उनकी माँ का नाम फिंच था, जो कि उपन्यास में इनका सर-नाम है। लोगों का कहना है कि यह इनकी जीवनी है। लेकिन पर ली इस बात को तो नकारती है पर यह भी स्वीकारती हैं कि उन्होंने जो जीवन में देखा उसी को इस कहानी में उतारा गया है। ली इस उपन्यास के बारे में कहती हैं,
'I never expected any sort of success with Mockingbird. I was hoping for a quick and merciful death at the hands of the reviewers but, at the same time, I sort of hoped someone would like it enough to give me encouragement. Public encouragement. I hoped for a little, as I said, but I got rather a whole lot, and in some ways this was just about as frightening as the quick merciful death I'd expected.'
मैं इस उपन्यास में कोई आशा नहीं रखती थी। लेकिन यह भी सोचती थी इसे शायद कोई पसन्द करेगा और मुझे प्रोत्साहित करेगा। मैं थोड़ा बहुत चाहती थी पर यह तो बहुत अधिक था और यह उतना ही डरावना जितना इसका न लोकप्रिय होना।
When you're at the top, there's only one way to go.
ली ने इस उपन्यास के बाद, कोई अन्य पुस्तक या लेख नहीं लिखा। वे लोगों के बीच से गायब हो गयी। क्या कारण था इसका? उन्होंने, अपने चचेरे भाई को, इसका कारण इस तरह से बताया,
'When you're at the top, there's only one way to go.' जब आप सबसे ऊपर होते हैं तो जाने का केवल एक ही तरीका है।
यह श्रंखला इसी उपन्यास के बारे में है। इसकी कहानी की चर्चा करने से पहले हम अगली बार बात करेंगे २०वीं शताब्दी के दूसरे चतुर्थांश में अमेरिका के सबसे प्रसिद्ध वकील और उसकी जीवनी पर लिखी पुस्तक पर। मेरे विचार से वकीलों की लिखी आत्मकथा या उनकी जीवनी पर लिखी पुस्तकों में सबसे बेहतरीन पुस्तक है। उसके बाद अमेरिका के एक प्रसिद्ध मुकदमे की।
'उन्मुक्त जी, इन वकील साहब, या प्रसिद्ध मुकदमे का इस उपन्यास से क्या संबन्ध है। लगता है कि आप तो बस लोगों को चक्कर में डाल रहें हैं।'
इनका संबन्ध तो है। यह आपको इस श्रंखला के दौरान ही बता चलेगा। इंतज़ार कीजिए।
'लगता है उन्मुक्त जी की एक और श्रंखला झेलनी पड़ेगी।'
बुलबुल मारने पर दोष लगता है
इस श्रंखला की सारी कड़ियां नीचे चटका लगा कर पढ़ सकते हैं। यदि सुनना चाहें तो ► पर चटका लगा कर सुन सकते हैं। ख्याल रहे ऑडियो क्लिप ऑग मानक में है। इसे कैसे सुनते हैं यह तो मालुम हैं न। नहीं तो दाहिने तरफ का विज़िट ‘बकबक पर पॉडकास्ट कैसे सुने‘ देखें।