Saturday, August 30, 2008

तारों का अन्त कैसे होता है

बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां श्रंखला की पिछली चिट्ठी में चर्चा हुई थी कि तारों में, हाइड्रोजन के हील्यिम में बदल रही है। इस प्रक्रिया में कुछ पदार्थ ऊर्जा में बदल रहा है, जो गर्मी और प्रकाश दे रहा है। इस बार चर्चा का विषय है कि जब यह समाप्त होगा, तब क्या होगा?

तारों में, ऊर्जा का उत्पादन कई चरणों में हो रहा है। पहले चरण में ऊर्जा-उत्पादन होने पर जो कुछ बचता है, वह दूसरे चरण में होने वाले ऊर्जा-उत्पादन में काम आ जाता है। इस प्रकार यह चक्र चलता रहता है। अन्त में, एक समय ऎसा भी आता है जब तारे का सारा ईंधन समाप्त हो जाता है और तारे अन्त में श्वेत वामन तारे (White dwarf), न्यूट्रॉन तारे (Neutron star) अथवा ब्लैक होल (Black hole) के रूप में बदल जाते हैं। पर इसके पहले एक प्रक्रिया और होती है वह है कुछ समय के लिये तारों का बढ़ना और उनका तेजी से चमकना।

 न्यूट्रॉन तारा

कहा जाता है कि दीपक की लौ समाप्त होने के पहले एक बार जोर दिखाती है। कुछ यही बात तारों के साथ भी हो रही है। जब हाइड्रोजन समाप्त होने लगती है तो तारे ठण्डे होने लगते हैं और सिकुड़ने लगते हैं। सिकुड़ने के कारण पुनः ऊर्जा पैदा होती है और वे पुनः गर्म होते हैं, ज्यादा तेज चमकते हैं, और विस्तार करते हैं। यह विस्तार उस तारे की संहति (Mass) के अनुसार होता है। इसके कारण वे, अधिनव तारा (Super nova) (सुपरनोवा), या नोवा (Nova), या लाल दैत्याकार तारे (red giant) बनते हैं। ज्यादा संहति वाले सुपर नोवा (supernova) और कम संहति वाले तारे लाल दैत्याकार तारे बनते हैं।

 लाल दैत्याकार तारा

हमारा सूर्य बड़े तारों में नहीं है। इसका अन्त एक लाल दैत्याकार तारे के साथ होगा। उसके बाद सफेद बौना (White dwarf ) और फिर अंधकार। लाल दैत्याकार तारा बनते समय इसकी परिधि बढ़ जायेगी और मंगल ग्रह भी इसकी चपेट में आ जायेगा। हम सब तो जरूर ही मिट जायेंगे, लेकिन घबराने की कोई बात नहीं इसमें लगभग ५.५ अरब साल लगेंगे।


सबसे भारी तारे सुपर नोवा में तब्दील होंते हैं। वे सबसे ज्यादा चमकीले भी होते हैं। वे इतने चमकीले होते हैं कि दिन में भी दिखायी पड़ते हैं। इनकी परिधि इतनी होती है कि वे अपने सौर मंडल को, यदि उनके पास हो तो, समाप्त कर देंगे। इनके अन्दर का हिस्सा बाद में न्यूट्रान स्टार या ब्लैक होल में बदल जाता है।



क्रैब नेब्यूला

सबसे प्रसिद्घ सुपरनोवा, १०५४ ईसवी में देखा गया था। इसके बारे में चीन और अरब के खगोलशास्त्रियों ने लिखा है। यह दिन में भी, २३ दिन तक दिखायी पड़ा और ६५५ रातों में यानि लगभग दो साल तक दिखायी पड़ा। इसके बाहर का हिस्सा क्रैब नेब्यूला (Crab Nebula) के नाम से जाना जाता है। यह वृष (Taraus) राशि के अन्दर है। इसके अन्दर का हिस्सा एक न्यूट्रॉन स्टार (pulsating star) है। यह एक सेकेण्ड में ३० चक्कर लगा रहा है। यह हमारी आकाशगंगा में है और हम से ६,३०० प्रकाश वर्ष दूर है। एक प्रकाश वर्ष वह दूरी है जो प्रकाश एक साल में तय करता है।


अगली बार चर्चा करेंगे उस विज्ञान कहानी की, उस तारे की, जो सुपरनोवा के संदर्भ में लिखी गयी। यह एक प्रसिद्ध कहानी है जिस पर पुरस्कार भी मिल चुके हैं और उसका कुछ संबन्ध इस श्रंखला से भी है।

इस चिट्ठी के चित्र विकीपीडिया के सौजन्य और उसी की शर्तों के अन्दर

बाईबिल, खगोलशास्त्र, और विज्ञान कहानियां
भूमिका।। प्रभू ईसा का जन्म बेथलेहम में क्यों हुआ?।। क्रिस्मस को बड़ा दिन क्यों कहा जाता है।। क्या ईसा मसीह सिल्क रूट से भारत आये थे।। बेथलेहम का तारा क्या था।। बेथलेहम का तारा उल्कापिंड या ग्रहिका नहीं हो सकता।। पिंडों के पृथ्वी से टक्कर के कारण बने प्रसिद्ध गड्ढ़े।। विज्ञान कहानियां क्या होती हैं और उनका मूलभूत सिद्धान्त।। विज्ञान कहानियों पर पुरुस्कार।। उल्का, छुद्र ग्रह, पृथ्वी पर आधारित विज्ञान कहानियां और फिल्में।। धूमकेतु या पुच्छल तारा क्या होते हैं।। हैली धूमकेतु।। पुच्छल तारों पर लिखी विज्ञान कहानियां।। बेथलेहम का तारा - ग्रह पास आ गये थे।। ग्रहण पर आधारित कहानियां।। जब रात हुई।।  तारे, उनका वर्गीकरण, और वे क्यों चमकते हैं।। तारों का अन्त कैसे होता है।।

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is post mein charchaa hai ki taron ka ant kaise hota hai. yeh hindi (devnagree) mein hai. ise aap roman ya kisee aur bhaarateey lipi me padh sakate hain. isake liye daahine taraf, oopar ke widget ko dekhen.

This post explains how will stars die? It is in Hindi (Devnaagaree script). You can read it in Roman script or any other Indian regional script also – see the right hand widget for converting it in the other script.



सांकेतिक शब्द
star, तारे,
Astronomy, Astronomy, bible, Bible, culture, Family, fiction, life, Life, Religion, science fiction, Star of Bethlehem, बेथलेहम का तारा, जीवन शैली, धर्म, धर्म- अध्यात्म, विज्ञान, विज्ञान कहानी, समाज, ज्ञान विज्ञान,


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11 comments:

  1. आवश्यक जानकारी। अनगिनत बार भी पढ़ना चाहूँगा। कहीं कोई नई जानकारी जुड़ी हो?

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  2. यह समूचा ब्रह्माण्ड ही ज्ञान पिपासुओं के लिए आमंत्रण भरा है -नक्षत्रों से कौन निमंतरण देता मुझको मौन...पन्त जी से लेकर भारतीयमूल के नोबेल विजेता चंद्रशेखर सुब्रह्मण्यम इसी के मोहपाश में बंधे रहे.आप की यह श्रृंख्ला बहुत रोचक है -कभी चंद्रशेखर सुब्रह्मण्यम के श्वेत वामनो पर शोध का भी उल्लेख करें .

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  3. आज बड़े दिनों बाद पढ़ना हुआ है। सुपरनोवा के बारे मे जानकारी पसंद आई।

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  4. बहुत रोचक जानकारी दी है आपने ..पढ़ना अच्छा लगता है ऐसे विषय पर

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  5. पहली बार संतोष हुआ कि हमारी उम्र अनंत नहीं है - नहीं तो सूर्य का सफेद बौना हो जाना चिंतित करता।

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  6. Rachana2:37 pm

    I am loving to read all this! :)

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  7. रोचक जानकारी दी है आपने.


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    एक अपील - प्रकृति से छेड़छाड़ हर हालात में बुरी होती है.इसके दोहन की कीमत हमें चुकानी पड़ेगी,आज जरुरत है वापस उसकी ओर जाने की.

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  8. रोचक एक सारगर्भित जानकारी है। अगली पोस्‍ट की भी प्रतीक्षा रहेगी।

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आपके विचारों का स्वागत है।